1857 की क्रांति (राजस्थान):
कारण, छावनियाँ, युद्ध एवं जन-विद्रोह
1857 की क्रांति (1857 Revolt in Rajasthan) भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में राजस्थान का स्वर्णिम अध्याय है। 6 सैनिक छावनियाँ (नसीराबाद से 28 मई को प्रारंभ), आउवा के युद्ध (बिथोड़ा व चेलावास - सुगाली माता), कोटा व धौलपुर का विद्रोह, तात्या तोपे का 1858 राजस्थान अभियान एवं अमरचंद बांठिया व कवि बांकीदास का योगदान — RAS/RPSC परीक्षा हेतु संपूर्ण गहन विश्लेषण।
कुल छावनियाँ
6 सैनिक अखाड़े
प्रमुख ए.जी.जी.
जॉर्ज लॉरेंस
आउवा संग्राम | कोटा व धौलपुर जनविद्रोह | तात्या तोपे
राजस्थान इतिहास : प्रमुख अध्याय
सभी देखें1857 की क्रांति (राजस्थान): विस्तृत प्रामाणिक नोट्स
आरएएस (RAS Pre & Mains), आरपीएससी (RPSC College Lecturer, Senior Teacher, REET, Patwar) परीक्षाओं हेतु अति-उपयोगी।
1. क्रांति का परिचय एवं कारण (Introduction & Causes)
राजस्थान में 1857 की क्रांति अचानक हुई कोई घटना नहीं थी, बल्कि यह अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों, राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और सामंतों व आम जनता में पनप रहे तीव्र असंतोष की परिणति थी। 1817-18 ई. की सहायक संधियों (Subsidary Alliances) के माध्यम से ईस्ट इंडिया कंपनी ने राजस्थान की रियासतों पर नियंत्रण स्थापित किया था।
📌 क्रांति के प्रमुख राजनीतिक एवं आर्थिक कारण
- आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप: अंग्रेजों द्वारा राजाओं के उत्तराधिकार मामलों (जैसे- जोधपुर के मानसिंह, जयपुर के नाबालिक शासक) में सीधा हस्तक्षेप।
- खिराज (Chauth/Tribute) का बोझ: रियासतों से भारी खिराज की वसूली, जिससे रियासती अर्थव्यवस्था जर्जर हो गई।
- सामंतों के अधिकारों का हनन: ब्रिटिश रेजिडेंटों ने शासकों को उकसाकर सामंतों के पारंपरिक अधिकारों, सैनिक सेवाओं व चुंगी करों को समाप्त करवा दिया।
- व्यापारिक एकाधिकार: नमक उद्योग, अफीम व्यापार एवं व्यापारिक मार्गों पर ब्रिटिश एकाधिकार स्थापित होना।
- तात्कालिक कारण: बैरकपुर एवं मेरठ में एनफील्ड राइफल (Enfield Rifle) के चर्बीयुक्त कारतूसों की घटना की खबर राजस्थान पहुँचना।
🏷️ प्रशासनिक व्यवस्था (1857 के समय)
- भारत का गवर्नर जनरल (Viceroy): लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning)
- राजस्थान का AGG (Agent to Governor General): जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस (George Patrick Lawrence)
- राजस्थान के प्रथम AGG: मि. लोकेट (Mr. Locket - 1832 में पद सृजित)
- A.G.G. का मुख्यालय: अजमेर (शीतकालीन) एवं माउंट आबू (ग्रीष्मकालीन - 1845 से)
विशेष तथ्य: 1857 की क्रांति की सूचना लॉरेंस को 19 मई 1857 को माउंट आबू में मिली थी। उसने तुरंत रियासती राजाओं को पत्र लिखकर शांति बनाए रखने का निर्देश दिया।
2. पोलिटिकल एजेंट (P.A.) एवं रियासती शासक (1857)
1857 की क्रांति के समय राजस्थान की विभिन्न रियासतों में ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट (Political Agents) तैनात थे। RPSC परीक्षाओं में यह मिलान (Match the Column) वाले प्रश्नों का सबसे पसंदीदा क्षेत्र है:
| रियासत / क्षेत्र | तत्कालीन रियासती शासक | ब्रिटिश पोलिटिकल एजेंट (P.A.) | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| मेवाड़ (उदयपुर) | महाराणा स्वरूप सिंह | मेजर शॉवर्स (Major Showers) | स्वरूप सिंह ने नीमच से भागे अंग्रेजों को जगमंदिर में शरण दी। |
| मारवाड़ (जोधपुर) | महाराजा तख्त सिंह | मैक मोसन (Monck Mason) | चेलावास युद्ध में सिर काटकर आउवा किले के दरवाजे पर लटकाया गया। |
| जयपुर | महाराजा रामसिंह द्वितीय | कैप्टन ईडन (Captain Eden) | रामसिंह द्वितीय ने अंग्रेजों की पूर्ण सहायता की ('सितार-ए-हिंद' उपाधि मिली)। |
| कोटा | महाराव रामसिंह द्वितीय | मेजर बर्टन (Major Burton) | क्रांतिकारियों द्वारा बर्टन एवं उसके पुत्रों का वध कर सिर शहर में घुमाया गया। |
| भरतपुर | महाराजा जसवंत सिंह (नाबालिग) | मॉरिसन (Morrison) | विद्रोह की भनक लगते ही मॉरिसन भरतपुर छोड़कर आगरा भाग गया। |
| सिरोही | महाराव शिवसिंह | जे. डी. हॉल (J.D. Hall) | आबू क्षेत्र में क्रांति का प्रभाव रोकने में सक्रिय रहा। |
| धौलपुर | महाराजा भगवंत सिंह | -- | बाहरी सेनाओं (ग्वालियर/इंदौर व पटियाला) का मुख्य केंद्र। |
RPSC याद रखने की ट्रिक: कोटा में बर्टन (बटन टूट गया), मारवाड़ में मोसन (मौसम खराब), मेवाड़ में शॉवर्स (शॉवर/झरना), जयपुर में ईडन (ईडन गार्डन)।
3. राजस्थान की 6 सैनिक छावनियाँ (6 Military Cantons)
1857 की क्रांति के समय राजस्थान में कुल 6 सैनिक छावनियाँ थीं, जिनमें लगभग 5,000 भारतीय सैनिक थे, किन्तु पूरी रियासत में एक भी यूरोपीय (अंग्रेज) सैनिक तैनात नहीं था!
1. नसीराबाद (अजमेर)
सैन्य रेजिमेंट: 15वीं व 30वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री
विद्रोह: 28 मई 1857 (प्रथम)2. नीमच (वर्तमान MP में)
सैन्य रेजिमेंट: मालवा मेवाड़ कैवेलरी (1st कैवेलरी)
विद्रोह: 3 जून 18573. एरिनपुरा (पाली)
सैन्य रेजिमेंट: जोधपुर लीजन (Jodhpur Legion)
विद्रोह: 21 अगस्त 18574. देवली (टोंक)
सैन्य रेजिमेंट: कोटा कंटिजेंट (Kota Contingent)
विद्रोह: 5 जून 18575. ब्यावर (अजमेर)
सैन्य रेजिमेंट: मेर (Mair) रेजिमेंट
विद्रोह में भाग नहीं लिया6. खैरवाड़ा (उदयपुर)
सैन्य रेजिमेंट: मेवाड़ भील कोर (Mewar Bhil Corps - MBC)
विद्रोह में भाग नहीं लियाRPSC मोस्ट इम्पोर्टेंट ट्रिक: "ए नानी ब्याव देखे" (ए = एरिनपुरा, ना = नसीराबाद, नी = नीमच, ब्या = ब्यावर, व = देवली, देखे = खैरवाड़ा)। ध्यान दें: ब्यावर एवं खैरवाड़ा छावनियों के सैनिकों ने क्रांति में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया था।
4. प्रमुख सैनिक एवं क्षेत्रीय विद्रोह (Major Cantonment & Regional Revolts)
(A) नसीराबाद का विद्रोह (28 मई 1857) – प्रथम विस्फोट
मेरठ विद्रोह की खबर सुनकर AGG लॉरेंस ने अजमेर शस्त्रागार की सुरक्षा में तैनात 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री पर अविश्वास जताया और उन्हें अजमेर से हटाकर नसीराबाद भेज दिया। साथ ही उन पर गश्त लगाने हेतु बॉम्बे कैवेलरी को लगा दिया। इस अविश्वास व अपमान से नाराज होकर सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।
- मुख्य नेतृत्वकर्ता: बख्तावर सिंह (Bakhtawar Singh)
- मृत अंग्रेज अधिकारी: मेजर स्पोटिस वुड (Spotiswood) एवं कर्नल न्यूबरी (Newbury) मारे गए।
- नसीराबाद के विद्रोही सैनिक छावनी को लूटकर सीधे "दिल्ली" की ओर प्रस्थान कर गए।
(B) नीमच का विद्रोह (3 जून 1857)
2 जून को अंग्रेज अधिकारी कर्नल एबॉट (Abbott) ने सैनिकों को वफादारी की शपथ दिलानी चाही, तो सैनिक मोहम्मद अली बेग ने कर्नल एबॉट को चुनौती दी और कहा- "क्या अंग्रेजों ने अपनी शपथ का पालन किया? क्या उन्होंने अवध का अधिग्रहण नहीं किया?"
- नेतृत्वकर्ता: मोहम्मद अली बेग एवं हीरा सिंह।
- डूंगला गाँव की घटना: नीमच से भागे 40 अंग्रेज अधिकारियों व उनके परिवारों को क्रांतिकारियों ने डूंगला गाँव (चित्तौड़गढ़) में रुगाराम चौधरी के घर बंदी बनाया।
- मेवाड़ के P.A. मेजर शॉवर्स ने महाराणा स्वरूप सिंह की सहायता से उन्हें छुड़ाया तथा उदयपुर के जगमंदिर महल (Pichola Lake) में शरण दी (गोकुलचंद मेहता की देखरेख में)।
(C) एरिनपुरा विद्रोह (21 अगस्त 1857)
आबू में तैनात जोधपुर लीजन के सैनिकों (पूर्बिया सैनिकों) ने विद्रोह किया। माउंट आबू में ए.जी.जी. के पुत्र अलेक्जेंडर को घायल कर दिया और एरिनपुरा पहुँचकर छावनी को लूट लिया।
- मुख्य नेतृत्वकर्ता: मोती खाँ, सूबेदार शीतल प्रसाद एवं तिलकराम।
- प्रसिद्ध नारा: "चलो दिल्ली, मारो फिरंगी" का नारा शिवनाथ सिंह के नेतृत्व में खेरवा नामक स्थान पर दिया गया।
(D) भरतपुर का जन-विद्रोह (31 मई 1857)
भरतपुर रियासत में गुर्जर एवं मेवाती जनता तथा सेना ने विद्रोह कर दिया। तत्कालीन महाराजा जसवंत सिंह नाबालिग थे।
- विद्रोह की उग्र स्थिति को देखकर पोलिटिकल एजेंट मॉरिसन (Morrison) भरतपुर छोड़कर आगरा भाग गया।
- भरतपुर रियासत का शासन प्रबंध सीधे पॉलिटिकल एजेंट की सलाह पर मंत्रिपरिषद को सौंपा गया।
(E) धौलपुर का विद्रोह (अक्टूबर 1857) – सबसे अनोखा विद्रोह
धौलपुर का विद्रोह राजस्थान की 1857 की क्रांति का सबसे अनोखा अध्याय है (शासक: महाराजा भगवंत सिंह)।
- मुख्य नेतृत्वकर्ता: रामचंद्र एवं हीरालाल।
- RPSC स्पेशल फैक्ट: धौलपुर एकमात्र ऐसी रियासत थी जहाँ विद्रोह करने वाले सैनिक बाहर के (ग्वालियर व इंदौर के) थे तथा इस विद्रोह का दमन करने वाली सेना भी राज्य के बाहर की (पटियाला, पंजाब से) आई थी!
- क्रांतिकारियों ने धौलपुर के राजकोष व तोपखाने पर लगभग 2 माह तक अधिकार रखा।
5. आउवा का ऐतिहासिक संग्राम (Auwa Revolt & Battles)
एरिनपुरा के विद्रोही सैनिक जब दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, तो पाली में आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह चंपावत (Kushal Singh Champawat) ने उनका नेतृत्व स्वीकार किया। कुशाल सिंह मारवाड़ के राजा तख्तसिंह व अंग्रेजों की संयुक्त नीतियों के विरोधी थे।
1. बिथोड़ा का युद्ध (Battle of Bithoda)
8 सितंबर 1857
पक्ष: ठाकुर कुशाल सिंह (विद्रोही) Vs कैप्टन हितकोट + जोधपुर रियासती सेना (सेनापति ओनाड़ सिंह पँवार)।
परिणाम: कुशाल सिंह की शानदार विजय। जोधपुर का सेनापति ओनाड़ सिंह मारा गया तथा हितकोट भाग निकला।
2. चेलावास का युद्ध / "काले-गोरे का युद्ध" (Battle of Chelawas)
18 सितंबर 1857
पक्ष: ठाकुर कुशाल सिंह Vs A.G.G. जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस + P.A. मैक मोसन।
परिणाम: क्रांतिकारियों की ऐतिहासिक विजय। जोधपुर के पोलिटिकल एजेंट मैक मोसन (Monck Mason) का सिर काटकर आउवा के किले के मुख्य द्वार पर लटका दिया गया!
3. आउवा का पतन एवं कर्नल होम्स का आक्रमण
20 जनवरी 1858कर्नल होम्स (Brigadier Holmes) ने विशाल सेना के साथ आउवा पर घेरा डाला। कुशाल सिंह किले का भार अपने छोटे भाई पृथ्वीसिंह (लांबिया के ठाकुर) को सौंपकर सलूंबर व कोठारिया चले गए।
सुगाली माता (Sugali Mata)
आउवा के चंपावत ठाकुरों की कुलदेवी। इन्हें "1857 की क्रांति की देवी" माना जाता है। मूर्ति में 10 सिर एवं 54 हाथ हैं। अंग्रेज कर्नल होम्स इस मूर्ति को अजमेर (पालिया म्यूजियम) ले गया (वर्तमान में यह बांगड़ म्यूजियम, पाली में है)।
मेजर टेलर आयोग (Major Taylor Commission)
ठाकुर कुशाल सिंह ने 8 अगस्त 1860 को नीमच में आत्मसमर्पण किया। उनकी जाँच हेतु मेजर टेलर आयोग गठित किया गया। आयोग ने कुशाल सिंह को निर्दोष मानते हुए बिना शर्त रिहा कर दिया। 1864 में उदयपुर में इनका निधन हुआ।
6. कोटा का सुसंगठित जन-विद्रोह (Kota Mass Revolt)
राजस्थान में कोटा का विद्रोह किसी सैनिक छावनी का विद्रोह नहीं था, बल्कि यह आम जनता और राज्य की सेना का सबसे भयानक, सुसंगठित एवं हिंसक जन-विद्रोह (Mass Uprising) था।
📌 घटनाक्रम व विशेषताएँ
- प्रारंभ तिथि: 15 अक्टूबर 1857
- मुख्य नेता: रिसालदार मेहराब खाँ (करौली) एवं लाला जयदयाल (कामा, भरतपुर)।
- P.A. का वध: क्रांतिकारियों ने पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन (Major Burton), उसके दो पुत्रों एवं डॉक्टर सैडलर की हत्या कर दी।
- बर्टन का सिर: बर्टन का कटा हुआ सिर पूरे कोटा शहर में घुमाया गया।
- शासक की कैद: कोटा के महाराव रामसिंह द्वितीय को उन्हीं के महल में बंदी बना लिया गया और जबरन 9 सूत्री परवाने पर हस्ताक्षर करवाए गए।
⚖️ दमन एवं परिणाम
- कोटा पर क्रांतिकारियों का लगभग 6 माह (मार्च 1858 तक) तक पूर्ण प्रशासनिक नियंत्रण रहा।
- करौली के शासक मदनपाल ने अपनी सेना भेजकर महाराव को मुक्त कराया।
- जनरल रॉबर्ट्स (General Roberts) ने मार्च 1858 में भारी ब्रिटिश सेना के साथ कोटा को क्रांतिकारियों से मुक्त कराया।
- जयदयाल एवं मेहराब खाँ को बाद में कोटा एजेंसी के पास फाँसी दे दी गई।
- अंग्रेजों ने कोटा महाराव की तोपों की सलामी 17 से घटाकर 13 कर दी, जबकि करौली के मदनपाल की सलामी बढ़ाकर 17 तोपें कर दी।
7. तात्या तोपे का राजस्थान में अभियान (Tantia Tope in Rajasthan)
1857 की क्रांति के महान नायक तात्या तोपे (मूल नाम: रामचंद्र पांडुरंग) राजस्थान की रियासतों से सहायता प्राप्त करने हेतु दो बार राजस्थान आए थे।
🐎 प्रथम व द्वितीय आगमन (1858)
- प्रथम आगमन (8/9 अगस्त 1858): तात्या तोपे ने भीलवाड़ा (मांडलगढ़) के रास्ते पहली बार प्रवेश किया। कुवाड़ा के युद्ध (भीलवाड़ा - 9 अगस्त 1858) में वे जनरल रॉबर्ट्स से पराजित हुए।
- झालावाड़ विजय: तात्या तोपे ने झालावाड़ के शासक पृथ्वीसिंह को हराकर झालावाड़ (राताप्रा) पर अधिकार कर लिया तथा 5 लाख रुपये वसूल किए।
- द्वितीय आगमन (दिसंबर 1858): बांसवाड़ा के रास्ते। बांसवाड़ा रियासत पर पूर्ण अधिकार कर लिया (शासक लक्ष्मण सिंह जंगलों में भाग गए)।
- राजस्थान की एकमात्र जैसलमेर रियासत को छोड़कर तात्या तोपे लगभग सभी रियासतों में गए।
⚔️ सहायता एवं विश्वासघात
- सलूंंबर के रावत केसरी सिंह व कोठारिया के रावत जोधसिंह ने तात्या तोपे को रसद व सैनिक सहायता दी।
- नरवर के जागीरदार मानसिंह नरूका ने विश्वासघात कर अंग्रेजों को तात्या तोपे का पता बता दिया।
- अंग्रेजों ने तात्या तोपे को गिरफ्तार कर 18 अप्रैल 1859 को सिपरी (शिवपुरी, MP) में फाँसी दे दी।
- कैप्टन शॉवर्स का कथन: "तात्या तोपे को फाँसी देना ब्रिटिश सरकार का अपराध समझा जाएगा और आने वाली पीढ़ी पूछेगी कि इस सजा की स्वीकृति किसने दी?"
8. प्रमुख अमर शहीद, देशभक्त जागीरदार एवं साहित्यकार
⭐ अमरचंद बांठिया (Amar Chand Batthia)
- मूल निवासी: बीकानेर (ग्वालियर में राजकोष के सेठ)।
- उपनाम: "राजस्थान का मंगल पांडे" एवं "1857 क्रांति के भामाशाह"।
- उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई एवं तात्या तोपे की सेना को आर्थिक मदद देने हेतु ग्वालियर का खजाना खोल दिया था।
- अंग्रेजों ने 22 जून 1858 को ग्वालियर में नीम के पेड़ पर फाँसी दे दी। (राजस्थान के प्रथम शहीद)
⭐ कोठारिया व सलूंबर के जागीरदार
- कोठारिया के रावत जोधसिंह: इन्होंने आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह और तात्या तोपे दोनों को अपने यहाँ आश्रय, भोजन एवं रसद सामग्री दी।
- सलूंंबर के रावत केसरी सिंह: इन्होंने मेवाड़ महाराणा स्वरूप सिंह को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि उन्होंने अंग्रेजों की सहायता बंद न की तो वे किसी अन्य को सिंहासन पर बैठा देंगे।
⭐ सूर्यमल्ल मिश्रण व क्रांतिकारी कवि
- सूर्यमल्ल मिश्रण (बूंदी): 'वीर सतसई' एवं 'वंश भास्कर' के माध्यम से रजवाड़ों में राष्ट्रीय चेतना जगाई।
- कवि बांकीदास (मारवाड़): जोधपुरी कवि जिन्होंने प्रसिद्ध चेतावनियों भरा गीत लिखा — "आयो अंग्रेज मुलुक रे ऊपर, आहंस लीधा खींच उरा।"
- अन्य कवि: राघवदास एवं शंकरदान देठू ने अपनी रचनाओं से देशभक्ति का अलख जगाया।
⭐ बीकानेर के महाराजा सरदार सिंह
- राजस्थान के एकमात्र ऐसे शासक जिन्होंने अंग्रेजों की सहायता हेतु अपनी सेना लेकर अपनी रियासत से बाहर (पंजाब/हरियाणा के बाड़लू क्षेत्र) तक गए।
- अंग्रेजों ने खुश होकर सरदार सिंह को टिब्बी परगने के 41 गाँव उपहार में दिए।
- टोंक रियासत: यहाँ नवाब अंग्रेजों के साथ था, किन्तु मामा मीर आलम खाँ व महिलाओं ने क्रांति में सक्रिय भाग लिया।
9. क्रांति की असफलता के कारण एवं दूरगामी परिणाम
❌ असफलता के कारण
- शासकों का असहयोग: देशी राजाओं ने अपनी गद्दी सुरक्षित रखने हेतु अंग्रेजों का तन-मन-धन से साथ दिया। (लॉर्ड कैनिंग ने कहा था- "इन्होंने तूफान में तरंगरोधक (Breakwater) का कार्य किया, वर्ना हम बह जाते")।
- कुशल नेतृत्व व समन्वय का अभाव: क्रांति अलग-अलग तिथियों पर हुई, जिससे अंग्रेजों को दमन का समय मिल गया।
- आधुनिक शस्त्रों की कमी: क्रांतिकारियों के पास पारंपरिक हथियार थे, जबकि अंग्रेजों के पास आधुनिक बंदूकें व तोपें थीं।
📈 क्रांति के दूरगामी परिणाम
- कंपनी शासन का अंत: 1 नवंबर 1858 को महारानी विक्टोरिया की घोषणा के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर सीधा ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया।
- सामंतशाही का पतन: क्रांति के पश्चात् अंग्रेजों ने राजाओं को पूरी सुरक्षा दी, जिससे राजाओं की सामंतों पर निर्भरता समाप्त हो गई।
- राष्ट्रीय चेतना का बीजारोपण: 1857 की क्रांति ने राजस्थान में भावी प्रजामंडल एवं स्वतंत्रता आंदोलनों की पृष्ठभूमि तैयार की।
10. आरएएस / आरपीएससी विशेष बुलेट फैक्ट्स (High-Yield Facts)
🎯 Quick Revision Points
- सर्वप्रथम क्रांति: नसीराबाद (28 मई 1857)।
- सबसे हिंसक जन-विद्रोह: कोटा (15 अक्टूबर 1857)।
- धौलपुर का अनोखा विद्रोह: विद्रोही सैनिक बाहर के (ग्वालियर/इंदौर) व दमनकर्ता सेना भी बाहर की (पटियाला)।
- राजस्थान का प्रथम शहीद: अमरचंद बांठिया (22 जून 1858, ग्वालियर)।
- 1857 क्रांति की देवी: सुगाली माता (10 सिर, 54 हाथ - आउवा)।
- बिथोड़ा व चेलावास युद्ध: 8 सितंबर 1857 व 18 सितंबर 1857 (काले-गोरे का युद्ध)।
🔥 RPSC Repeater Questions
- तात्या तोपे का राजस्थान प्रवेश: 8/9 अगस्त 1858 (कुवाड़ा का युद्ध - भीलवाड़ा)।
- रियासत से बाहर सेना ले जाने वाला शासक: सरदार सिंह (बीकानेर)।
- महिलाओं द्वारा भाग लिया गया केंद्र: टोंक रियासत।
- बिना भाग लेने वाली छावनियाँ: ब्यावर एवं खैरवाड़ा।
- "आयो अंग्रेज मुलुक रे ऊपर": कवि बांकीदास (जोधपुर)।
- क्रांतिकारियों को आश्रय देने वाले जागीरदार: रावत जोधसिंह (कोठारिया) व रावत केसरी सिंह (सलूंंबर)।
RAS Pre Tip: 1857 क्रांति के समय शासकों के नाम, पोलिटिकल एजेंट, तात्या तोपे का 1858 का भीलवाड़ा आगमन, धौलपुर का बाहरी विद्रोह तथा सुगाली माता/मेजर टेलर आयोग से संबंधित प्रश्न बार-बार दोहराए जाते हैं।
यह टॉपिक परीक्षा हेतु क्यों आवश्यक है?
RPSC द्वारा आयोजित आरएएस (RAS Pre & Mains), सेकंड ग्रेड, फर्स्ट ग्रेड (स्कूल व्याख्याता), रीट (REET), पटवार एवं पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षाओं के सिलेबस में 'राजस्थान में 1857 का स्वतंत्रता संग्राम' एक अनिवार्य एवं उच्च-अंकदायी टॉपिक है।
- 1 नियमित प्रश्न: प्रत्येक RPSC परीक्षा में 2 से 4 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
- 2 सुस्पष्ट तिथि व फैक्ट्स: युद्धों की तिथियाँ (बिथोड़ा, चेलावास, कुवाड़ा) डायरेक्ट पूछी जाती हैं।
- 3 आरएएस मुख्य परीक्षा: 1857 क्रांति के कारण, स्वरूप एवं परिणामों पर 2/5/10 अंक के प्रश्न बनते हैं।
6 छावनियाँ
सैन्य संगठन
आउवा संग्राम
2 ऐतिहासिक युद्ध
कोटा व धौलपुर
विशिष्ट जनविद्रोह
तात्या तोपे
1858 का अभियान
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1857 की क्रांति (राजस्थान) से संबंधित RPSC में पूछे जाने वाले मुख्य सवाल।
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