राजस्थान के प्रमुख संत एवं लोक देवता:
सम्पूर्ण परीक्षा नोट्स एवं संप्रदाय
राजस्थान की तपोभूमि पर जन-कल्याण, गोरक्षा और सामाजिक समरसता हेतु प्राणोत्सर्ग करने वाले पंचपीर (पाबूजी, रामदेवजी, गोगाजी, मेहाजी, हड़बूजी), तेजाजी, देवनारायणजी तथा निर्गुण-सगुण भक्ति मार्ग के महान संत (दादू दयाल, जाम्भोजी, जसनाथजी, मीराबाई, रामस्नेही पीठें) का सम्पूर्ण प्रामाणिक अध्ययन।
राजस्थान कला एवं संस्कृति: विषयवार नोट्स
सम्पूर्ण कला-संस्कृति देखेंराजस्थान के संत व लोक देवता: सम्पूर्ण विश्लेषण
पंचपीर, तेजाजी, देवनारायणजी, कल्लाजी, संत दादू दयाल, जाम्भोजी, जसनाथजी, मीराबाई एवं रामस्नेही संप्रदाय की चारों शाखाओं का बिंदुवार अध्ययन।
1. राजस्थान के पंचपीर (Panchpeer of Rajasthan)
राजस्थान में वे 5 लोक देवता जिन्हें हिन्दू और मुस्लिम (पीर मानकर) दोनों समान रूप से पूजते हैं, 'पंचपीर' कहलाते हैं।
प्रसिद्ध दोहा: "पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया मेहा। पांचू पीर पधारज्यौ, गोगाजी जेहा।।"
🚩 1. पाबूजी राठौड़ (Pabuji Rathore) ऊंटों के देवता / प्लेग रक्षक
• जन्म: कोळूमण्ड (फलौदी), राठौड़ वंश (पिता: धांधल जी राठौड़, माता: कमलादे)।
• पत्नी: सुप्यारदे / फूलमदे (अमरकोट के सूरजमल सोढ़ा की पुत्री)।
• घोड़ी: 'केसर कालमी' (चारण महिला देवल चारणी की घोड़ी)।
• उपनाम: ऊंटों के देवता, प्लेग रक्षक देवता, हाड़-फाड़ के देवता, लक्ष्मण का अवतार, गौ-रक्षक।
• वीरगति: देवल चारणी की गायों को जींदराव खींची (जायल, नागौर) से छुड़ाते हुए देचू (जोधपुर ग्रामीण) में 1276 ई. में शहीद हुए।
• फड़ वाचन: राजस्थान की सबसे लोकप्रिय फड़। 'रावणहत्था' वाद्ययंत्र के साथ नायक/भील भोपों द्वारा बांची जाती है।
• पाबूजी के पवाड़े: 'माठ' वाद्ययंत्र के साथ गाए जाते हैं।
• ग्रंथ: 'पाबू प्रकाश' (आशिया मोड़जी द्वारा रचित)।
🚩 2. रामदेवजी तंवर (Baba Ramdevji) रुणेचा रा धणी / पीरों के पीर
• जन्म: उण्डूकाश्मीर (शिव तहसील, बाड़मेर), तंवर वंशीय राजपूत (पिता: अजमाल जी, माता: मैणादे)।
• पत्नी: नेतलदे (अमरकोट के दलैसिंह सोढ़ा की पुत्री)। भाई: वीरमदेव (बलराम के अवतार)।
• घोड़ा: लीला घोड़ा (रेवंत)। ध्वजा: नेजा (पचरंगी ध्वजा)।
• अवतार: श्रीकृष्ण का अवतार। मक्का से आए 5 पीरों ने इन्हें "पीरों का पीर" कहा।
• पंथ: कामड़िया पंथ की स्थापना की (जिसमें 'तेरहताली नृत्य' किया जाता है)।
• एकमात्र लोक देवता जो कवि भी थे: इन्होंने 'चौबीस बाणियां' ग्रंथ लिखा।
• प्रमुख शब्दावली: जम्मा (रात्रि जागरण), रिखिया (मेघवाल भक्त), परचा (चमत्कार), पगल्या (प्रतीक चरण चिह्न)।
• समाधि: भाद्रपद शुक्ल एकादशी (1458 ई.) को रुणेचा (रामदेवरा, जैसलमेर) में। इनकी धर्मबहन डालीबाई ने एक दिन पूर्व समाधि ली थी।
• मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) से एकादशी तक (सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला)।
🚩 3. गोगाजी चौहान (Gogaji Chauhan) जाहरपीर / सांपों के देवता
• जन्म: ददरेवा (चूरू), चौहान वंश (पिता: जेवर जी, माता: बाछल दे)। गुरु: गोरखनाथ।
• घोड़ी: नीली घोड़ी (गोगा बापा)। उपनाम: जाहरपीर (महमूद गजनवी द्वारा दिया गया नाम), नागराज का अवतार।
• शीर्षमेड़ी: ददरेवा (चूरू) - जहाँ मौसेरे भाइयों (अर्जुन-सर्जन) से गायों की रक्षा में सिर गिरा।
• धुरमेड़ी (गोगामेड़ी): नोहर (हनुमानगढ़) - जहाँ धड़ गिरा। मंदिर मकबरेनुमा है जिस पर 'बिस्मिल्लाह' अंकित है (निर्माता: फिरोजशाह तुगलक, आधुनिक स्वरूप: महाराजा गंगासिंह)।
• गोगाजी की ओल्डी: सांचौर (जालौर/सांचौर जिला) में स्थित कच्ची झोपड़ीनुमा मंदिर।
• गोगा नवमी: भाद्रपद कृष्ण नवमी को मेला भरता है। किसान हल जोतने से पूर्व 'गोगा राखड़ी' (9 गांठों वाली) बांधते हैं।
🚩 4. हड़बूजी सांखला (Harbhuji)
• जन्म: भुंडोल (नागौर)। रामदेवजी के मौसेरे भाई (गुरु: बालीनाथ)।
• वाहन: सियार। शकुन शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता।
• राव जोधा को मंडोर विजय का आशीर्वाद व कटार भेंट की थी।
• मंदिर: बैंगटी (फलौदी) - यहाँ इनकी बैलगाड़ी (छकड़ा गाड़ी) की पूजा होती है जिससे वे पंगु (अपंग) गायों के लिए घास लाते थे।
🚩 5. मेहाजी मांगलिया (Mehaji Mangaliya)
• जन्म: तापू (जोधपुर), पंवार कुल में जन्मे, ननिहाल (मांगलिया) में पले।
• घोड़ा: 'किरड़ काबरा'। राव चूंडा के समकालीन।
• वीरगति: जैसलमेर के राव राणंगदेव भाटी के विरुद्ध गायों की रक्षार्थ शहीद।
• मंदिर: बापिणी (जोधपुर ग्रामीण/फलौदी)। मेला: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (कृष्ण जन्माष्टमी) को। इनके भोपों की वंश वृद्धि नहीं होती (गोद लेकर वंश चलाते हैं)।
2. अन्य प्रमुख लोक देवता (Other Major Folk Deities)
⚡ वीर तेजाजी महाराज (Veer Tejaji) काला-बाला के देवता / कृषि उपकारक
• जन्म: 1074 ई., खरनाल (नागौर), धौलिया जाट वंश (पिता: ताहड़ जी, माता: रामकुंवरी)।
• पत्नी: पेमलदे (पनेर, अजमेर के रामचंद्र जी की पुत्री)।
• घोड़ी: लीलण (शिंगारी)।
• उपनाम: काला-बाला के देवता, कृषि कार्यों के उपकारक देवता, गायों के मुक्तिदाता, धौलिया वीर।
• सर्पदंश स्थान: सेंदड़िया (ब्यावर/अजमेर) में नागदेव (बासुकी) ने जीभ पर डसा।
• वीरगति/मृत्यु: सुरसुरा (किशनगढ़, अजमेर) में लाछां गूजरी की गायों को मेर के मीणों से बचाते हुए भाद्रपद शुक्ल दशमी को।
• मुख्य मेला: परबतसर (डीडवाना-कुचामन) में 'वीर तेजाजी पशु मेला' (भाद्रपद शुक्ल दशमी - तेजा दशमी)।
• तेजाजी के गीत: 'तेजा टेर' (किसान अच्छी फसल की कामना हेतु हल जोतते समय गाते हैं)।
🌿 श्री देवनारायण जी (Shri Devnarayan Ji) आयुर्वेद के ज्ञाता / विष्णु के अवतार
• जन्म: आसींद (भीलवाड़ा), बगड़ावत नागवंशीय गुर्जर कुल (पिता: सवाई भोज, माता: साढू खटाणी)।
• घोड़ा: लीलागर। पत्नी: पीपलदे (धार के राजा जयसिंह की पुत्री)।
• पूजा: मंदिरों में मूर्ति के स्थान पर 'ईंटों की पूजा नीम की पत्तियों' से की जाती है (आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग हेतु प्रसिद्ध)।
• देवनारायण जी की फड़: राजस्थान की सबसे लंबी, सबसे छोटी और सबसे प्राचीन फड़। 'जंतर' वाद्ययंत्र के साथ गुर्जर भोपों द्वारा बांची जाती है। (1992 में इस पर 5 रु. का डाक टिकट जारी हुआ)।
• प्रमुख धाम: सवाई भोज मंदिर (आसींद, भीलवाड़ा), देवमाली (ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया (टोंक), देव डूंगरी (चित्तौड़गढ़ - राणा सांगा द्वारा निर्मित)।
⚔️ वीर कल्लाजी राठौड़
• उपनाम: चार हाथों व दो सिर वाले देवता, शेषनाग के अवतार, कमधज।
• 1568 ई. में चित्तौड़गढ़ के तीसरे साके में अकबर से लड़ते हुए वीरगति पाई।
• प्रधान पीठ: रनेला/रूँडेला (उदयपुर/सलूंबर)।
🐎 मल्लीनाथ जी
• बाड़मेर का 'मालानी क्षेत्र' इन्हीं के नाम पर पड़ा।
• गुरु: उगमसी भाटी। 1399 में 'कुंडा पंथ' की स्थापना की।
• मेला: तिलवाड़ा (बालोतरा) में लूनी नदी तट पर 'मल्लीनाथ पशु मेला'।
🌲 तल्लीनाथ जी
• वास्तविक नाम: गांगदेव राठौड़ (शेरगढ़ ठिकाना)।
• प्रकृति प्रेमी लोक देवता ('ओरण' के जनक)।
• मुख्य स्थल: पांचोटा (जालौर) में पंचमुखी पहाड़ी पर।
3. राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाँ (Major Folk Goddesses)
| लोक देवी का नाम | मुख्य मंदिर (स्थान) | कुलदेवी / आराध्य देवी | प्रमुख विशेषताएं एवं परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|---|
| करणी माता | देशनोक (बीकानेर) | बीकानेर के राठौड़ों व चारणों की कुलदेवी | 'चूहों वाली देवी', सफेद चूहे 'काबा' कहलाते हैं। दाढ़ी वाली डोकरी। |
| जीण माता | रैवासा (सीकर) | चौहान वंश की आराध्य देवी | मधुमक्खियों की देवी (औरंगजेब ने छत्र चढ़ाया)। लोकगीत सबसे लंबा (चिरजा) है। |
| शीतला माता | चाकसू (जयपुर ग्रामीण) | चेचक व बच्चों की संरक्षिका | 'बास्योड़ा' (ठंडा भोजन), वाहन: गधा, पुजारी: कुम्हार। खंडित प्रतिमा की पूजा होती है। |
| शीला देवी | आमेर दुर्ग (जयपुर) | कछवाहा राजवंश की आराध्य देवी | मूर्ति राजा मानसिंह प्रथम द्वारा बंगाल के जसोर से लाई गई थी। ढाई प्याला मदिरा भोग। |
| आई माता | बिलाड़ा (जोधपुर ग्रामीण) | सीरवी जाति की कुलदेवी | रामदेवजी की शिष्या। मंदिर 'दरगाह' व थान 'बडेर'। दीपक की लौ से केसर टपकती है। |
| कैला देवी | त्रिकूट पर्वत (करौली) | करौली के यादव (जादौन) वंश की कुलदेवी | इनकी आराधना में प्रसिद्ध 'लांगुरिया गीत' गाया जाता है। सामने बोहरा भगत की छतरी। |
4. प्रमुख निर्गुण भक्ति संत एवं संप्रदाय
📜 संत दादू दयाल (Dadu Dayal) – राजस्थान के कबीर दादू पंथ / परब्रह्म संप्रदाय
• जन्म: 1544 ई., अहमदाबाद। गुरु: वृद्धानंद (बुड्ढन जी)।
• प्रधान पीठ: नरेना / नारायणा (जयपुर) (भैराणा पहाड़ी/दादू खोल में पार्थिव देह रखी गई)।
• भाषा व ग्रंथ: सधुक्कड़ी / ढूंढाड़ी भाषा। प्रमुख ग्रंथ: 'दादू वाणी' एवं 'दादू रा दूहा'।
• सत्संग स्थल: 'अलख दरीबा'। अभिवादन शब्द: "सत्यराम"।
• अकबर से भेंट: 1585 ई. में फतेहपुर सीकरी के इबादतखाने में धार्मिक चर्चा की।
• प्रमुख शिष्य: रज्जब जी (आजीवन दूल्हे के वेश में रहे), संत सुंदरदास जी (नागा शाखा प्रवर्तक)।
🌿 संत जाम्भोजी (विश्नोई संप्रदाय - 29 नियम)
• जन्म: 1451 ई., पीपासर (नागौर)। पर्यावरण वैज्ञानिक संत।
• 1485 ई. में समराथल धोरा में 29 नियम दिए।
• प्रधान पीठ: मुकाम (नोखा, बीकानेर) में समाधि।
• ग्रंथ: जम्भसागर, शब्दवाणी (पांचवां वेद व 19वां पुराण)।
🔥 संत जसनाथ जी (जसनाथी संप्रदाय - 36 नियम)
• जन्म: 1482 ई., कतरियासर (बीकानेर)। गुरु: गोरखनाथ।
• 24 वर्ष की अल्पायु में कतरियासर में जीवित समाधि ली। कुल 36 नियम।
• अग्नि नृत्य: धधकते अंगारों पर "फतेह-फतेह" कहते हुए नृत्य।
• पवित्र प्रतीक: जाल वृक्ष, मोरपंख, गले में काली ऊन का धागा।
5. सगुण एवं मिश्रित भक्ति परंपरा के प्रमुख संत
🦚 भक्त शिरोमणि मीराबाई (Meerabai) – राजस्थान की राधा माधुर्य भाव भक्ति
• जन्म: 1498 ई., कुड़की (ब्यावर/पाली)। बचपन का नाम: पेमल।
• विवाह: महाराणा सांगा के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज के साथ।
• गुरु: संत रैदास (रविदास) (छतरी: चित्तौड़गढ़ दुर्ग में)।
• भक्ति भाव: माधुर्य भाव (कांता भाव) - श्रीकृष्ण को पति रूप में पूजा।
• रचनाएं: 'पदावलियां', नरसीजी रो मायरो, गीत गोविंद की टीका, राग गोविंद।
• अंतिम समय: द्वारिका के रणछोड़ राय मंदिर में मूर्ति में विलीन हुईं।
6. रामस्नेही संप्रदाय की चार प्रमुख शाखाएं (Ramsnehi Branches)
| शाखा (पीठ) का नाम | संस्थापक संत | गुरु का नाम | प्रमुख उत्सव एवं विशिष्ट तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1. शाहपुरा शाखा (प्रधान पीठ) (भीलवाड़ा) |
संत रामचरण जी | कृपाराम जी | • प्रसिद्ध 'फूलडोल महोत्सव' (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी)। ग्रंथ: 'अणभैवाणी'। |
| 2. रेण शाखा (नागौर) |
संत दरियाव जी | बालकदास जी | • 'रा' = राम, 'म' = मोहम्मद मानकर हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश। |
| 3. सींथल शाखा (बीकानेर) |
संत हरिरामदास जी | संत जयमलदास जी | • प्रमुख ग्रंथ: 'निशानी' (प्राणायाम व योग साधना का उल्लेख)। |
| 4. खेड़ापा शाखा (जोधपुर) |
संत रामदास जी | संत जयमलदास जी | • सींथल शाखा के संस्थापक के गुरु जयमलदास जी को गुरु बनाया। |
7. प्रमुख संप्रदाय, संस्थापक एवं नियमों का तुलनात्मक चार्ट
| संप्रदाय | संस्थापक | प्रधान पीठ | नियमों की संख्या | प्रमुख ग्रंथ / पहचान |
|---|---|---|---|---|
| विश्नोई संप्रदाय | संत जाम्भोजी | मुकाम (बीकानेर) | 29 नियम | जम्भसागर, शब्दवाणी, पाहुल जल |
| जसनाथी संप्रदाय | संत जसनाथ जी | कतरियासर (बीकानेर) | 36 नियम | सिंभूदड़ा, कोड़ा, अग्नि नृत्य (फतेह-फतेह) |
| चरणदासी संप्रदाय | संत चरणदास जी | दिल्ली (डेहरा, अलवर) | 42 नियम | पीले वस्त्र, नादिरशाह आक्रमण भविष्यवाणी |
| दादू पंथ | संत दादू दयाल | नरेना (जयपुर) | - | अलख दरीबा (सत्संग), दादू वाणी, 52 स्तम्भ |
8. स्मरण सूत्र एवं याद रखने की आसान ट्रिक्स (Mnemonics)
🎯 ट्रिक 1: राजस्थान के पंचपीर
"गोपा मेरा है"
गो = गोगाजी | पा = पाबूजी | मे = मेहाजी मांगलिया | रा = रामदेवजी | ह = हड़बूजी सांखला।
🎯 ट्रिक 2: रामस्नेही संप्रदाय की 4 शाखाएं व संस्थापक
"शाह-राम, रेण-दरिया, सींथ-हरि, खेड़-राम"
• शाहपुरा = संत रामचरण जी | • रेण = संत दरियाव जी | • सींथल = संत हरिरामदास जी | • खेड़ापा = संत रामदास जी
9. RPSC / RSSB विगत परीक्षाओं के अति-महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)
📌 लोक देवता परीक्षा तथ्य
- 'चौबीस बाणियां': बाबा रामदेवजी द्वारा रचित (एकमात्र लोक देवता जो कवि थे)।
- माठ वाद्ययंत्र: पाबूजी के पवाड़े गाते समय प्रयुक्त होता है।
- जंतर वाद्ययंत्र: देवनारायण जी की फड़ वाचन में गुर्जर भोपों द्वारा बजाया जाता है।
- हड़बूजी की बैलगाड़ी: बैंगटी (फलौदी) मंदिर में पूजी जाती है।
📌 संत व संप्रदाय परीक्षा तथ्य
- अलख दरीबा: दादू पंथ का सत्संग स्थल कहलाता है।
- अग्नि नृत्य: कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सिद्धों द्वारा "फतेह-फतेह" घोष के साथ।
- फूलडोल महोत्सव: शाहपुरा (भीलवाड़ा) में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक।
- संत पीपा की गुफा: टोडा (टोंक), छतरी: गागरोन (झालावाड़), मंदिर: समदड़ी (बालोतरा)।
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राजस्थान कला एवं संस्कृति
- प्रमुख संत एवं लोक देवता वर्तमान
- घूमर नृत्य (राज्य नृत्य) नृत्य
- कालबेलिया नृत्य (UNESCO) नृत्य
- अग्नि नृत्य (कतरियासर) नृत्य
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग (3 साके) दुर्ग
- कुंभलगढ़ दुर्ग (कटारगढ़) दुर्ग
- जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला) दुर्ग
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2. रेण (नागौर): संत दरियाव जी।
3. सींथल (बीकानेर): संत हरिरामदास जी (ग्रंथ: निशानी)।
4. खेड़ापा (जोधपुर): संत रामदास जी।
• जसनाथी संप्रदाय (संत जसनाथ जी): 36 नियम।
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