राजस्थान के किसान आंदोलन:
बिजोलिया, बेगू, नीमूचणा व शेखावाटी का संपूर्ण इतिहास
राजस्थान के किसान आंदोलन (Peasant Movements in Rajasthan) – प्रथम असंतोष मातृकुंडिया (1880), विश्व का सबसे लंबा अहिंसक बिजोलिया आंदोलन (44 वर्ष), बेगू का गोविंदपुरा कांड (रूपाजी-कृपाजी), नीमूचणा की "दोहरी डायरशाही", बूंदी डाबी का अर्जी गीत (नानकजी भील), शेखावाटी का कटराथल महिला सम्मेलन (10,000 महिलाएँ), मारवाड़ की 'पोपा बाई री पोल' व डाबड़ा कांड — RAS/RPSC हेतु संपूर्ण प्रामाणिक तथ्य संग्रह।
बिजोलिया अवधि
44 वर्ष अहिंसक
कटराथल महिलाएँ
10,000 एकत्र
विजय सिंह पथिक | पंछीड़ा व अर्जी | पोपा बाई री पोल
राजस्थान इतिहास : प्रमुख अध्याय
सभी देखेंराजस्थान के किसान आंदोलन: विस्तृत प्रामाणिक नोट्स
आरएएस (RAS Pre & Mains), आरपीएससी (College Lecturer, Senior Teacher, REET, Patwar) परीक्षाओं हेतु अति-उपयोगी।
1. किसान आंदोलनों का परिचय, सामान्य कारण व प्रथम असंतोष
राजस्थान में सामंती व्यवस्था के अंतर्गत किसानों का शोषण चरम पर था। 1818 की ब्रिटिश सहायक संधियों के बाद राजाओं व ठिकानेदारों की निर्भरता जनता पर न रहकर अंग्रेजों पर हो गई। फलस्वरूप ठिकानेदारों ने किसानों पर मनमाने कर (लाग-बाग), बेगार तथा लगान बढ़ा दिए, जिससे कृषक असंतोष का जन्म हुआ।
🚩 ऐतिहासिक तथ्य: राजस्थान का पहला किसान असंतोष (मातृकुंडिया - 1880)
राजस्थान में किसानों का प्रथम संगठित असंतोष बिजोलिया से भी पहले 22 जून 1880 को मातृकुंडिया (राशमी परगना, चित्तौड़गढ़) में जाट किसानों द्वारा नई भू-राजस्व नीति (बंदोबस्त प्रणाली) के विरोध में हुआ था। इसे 'राजस्थान का हरिद्वार' भी कहा जाता है। (RPSC द्वारा बार-बार पूछा जाने वाला तथ्य)
📌 किसान असंतोष के मुख्य कारण
- अत्यधिक लाग-बाग (Taxes): रियासतों में किसानों से 84 से अधिक प्रकार की लागतें (जैसे- चँवरी कर, तलवार बंधाई, खांगड़ी कर) वसूली जाती थीं।
- अत्याचार व बेगार प्रथा (Forced Labor): बिना किसी पारिश्रमिक के किसानों तथा उनके पशुओं से ठिकानेदार द्वारा बलपूर्वक कार्य कराना।
- ऊँची लगान दरें: उपज का 1/2 से 2/3 भाग तक लगान के रूप में वसूलना (लौटा/कूँता प्रथा)।
- अकाल व बेदखली: अकाल के समय भी लगान में छूट न देना एवं लगान न देने पर भूमि से बेदखल कर देना।
🏷️ भू-राजस्व/लगान निर्धारण की पद्धतियाँ
- लाटा (Lata): फसल कटने व खलिहान में अनाज तैयार होने के बाद अनाज का बँटवारा करना।
- कूँता (Kunta): खड़ी फसल को देखकर ही अनुमान के आधार पर लगान का निर्धारण कर लेना।
- चँवरी कर (Chanwri Kar): पुत्री के विवाह पर ठिकानेदार को दिया जाने वाला कर (राव कृष्णसिंह द्वारा बिजोलिया में 1903 में लागू - ₹5)।
- तलवार बंधाई (Talwar Bandhai): नए उत्तराधिकारी के गद्दी पर बैठने पर वसूला जाने वाला उत्तराधिकार शुल्क (1906 में पृथ्वीसिंह द्वारा बिजोलिया में)।
2. बिजोलिया किसान आंदोलन (1897 - 1941)
यह राजस्थान का प्रथम, सबसे लंबा (44 वर्ष) एवं पूर्णतः अहिंसक किसान आंदोलन था। बिजोलिया मेवाड़ रियासत का प्रथम श्रेणी (प्रथम श्रेणी का उमराव) ठिकाना था। यहाँ मुख्य रूप से धाकड़ जाति के किसान निवास करते थे। बिजोलिया का संस्थापक अशोक परमार (राणा सांगा द्वारा जगनेर की जागीर स्वरूप प्रदत्त) था।
प्रथम चरण (1897 - 1915 ई.) – प्रारंभिक स्थानीय नेतृत्व
साधु सीताराम दास- प्रारंभ: 1897 में गिरधारीपुरा गाँव में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्यु भोज के अवसर पर किसान एकत्र हुए।
- नेतृत्वकर्ता: साधु सीताराम दास, फतेहकरण चारण व ब्रह्मदेव।
- मेवाड़ महाराणा से शिकायत: नानजी पटेल व ठाकरी पटेल को महाराणा फतेहसिंह के पास उदयपुर भेजा गया। महाराणा ने जाँच हेतु हामिद हुसैन को भेजा, पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
- चँवरी कर (1903): राव कृष्णसिंह ने ₹5 चँवरी कर लगाया। किसानों ने अपनी पुत्रियों का विवाह न कर विरोध किया।
- तलवार बंधाई कर (1906): नए राव पृथ्वीसिंह ने जनता पर यह कर थोपा।
द्वितीय चरण (1916 - 1923 ई.) – विजय सिंह पथिक एवं राष्ट्रीय पहचान
विजय सिंह पथिक- पथिकजी का प्रवेश: 1916 में साधु सीताराम दास के आग्रह पर विजय सिंह पथिक (मूल नाम: भूपसिंह) ने आंदोलन की बागडोर संभाली।
- ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917): हरियाली अमावस के दिन हरियापुरा गाँव में स्थापना। प्रथम सरपंच मन्नाजी पटेल बनाए गए। 'ऊपरमाल डंका' नामक हस्तलिखित पत्र निकाला।
- प्रचार व पत्र-पत्रिकाएँ: कानपुर से गणेशशंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' समाचार पत्र ने आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दी। विजय सिंह पथिक ने गणेशशंकर विद्यार्थी को किसानों की ओर से 'चाँदी की राखी' भेजी थी, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने 'प्रताप' में बिजोलिया की खबरों को प्रमुखता से छापा। इसके अलावा वर्धा से 'राजस्थान केसरी' तथा अजमेर से 'नवीन राजस्थान' / 'तरुण राजस्थान' का योगदान रहा।
- प्रेरक गीत: माणिक्य लाल वर्मा द्वारा रचित 'पंछीड़ा' गीत ने किसानों में उत्साह भरा।
- बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोग (1919): मेवाड़ सरकार द्वारा गठित प्रथम जाँच आयोग।
- हॉलैंड समझौता (4 फरवरी 1922): AGG रॉबर्ट हॉलैंड की उपस्थिति में किसानों व ठिकाने के मध्य समझौता, जिसमें 35 लाग-बाग माफ कर दी गईं।
तृतीय चरण (1923 - 1941 ई.) – अंतिम संघर्ष एवं समझौता
जमुनालाल बजाज व वर्माजी- 1927 में जमीनों के इस्तीफे के मुद्दे पर मतभेद के बाद पथिकजी आंदोलन से अलग हो गए।
- आंदोलन का नेतृत्व जमुनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय एवं माणिक्य लाल वर्मा ने संभाला।
- समापन (1941): मेवाड़ के प्रधानमंत्री सर टी. विजयाराघवाचार्य एवं राजस्व मंत्री डॉ. मोहन सिंह मेहता की मध्यस्थता में किसानों की सभी माँगें मान ली गईं और उनकी बेदखल जमीनें वापस लौटा दी गईं।
3. बेगू किसान आंदोलन (1921 - 1923)
बेगू भी मेवाड़ रियासत का श्रेणी-A का ठिकाना (वर्तमान चित्तौड़गढ़ जिला) था। यहाँ के किसान बिजोलिया आंदोलन से प्रेरित होकर 53 प्रकार की लाग-बाग व अत्यधिक लगान के विरुद्ध संगठित हुए।
📌 प्रारंभ व बोल्शेविक समझौता
- प्रारंभ (1921): मेनाल के पास 'भैरवकुंड' नामक स्थान से।
- नेतृत्वकर्ता: विजय सिंह पथिक के कहने पर राम नारायण चौधरी ने नेतृत्व किया।
- बोल्शेविक समझौता (Bolshevik Agreement): बेगू के रावत अनूप सिंह एवं किसानों के बीच समझौता हुआ, जिसमें माँगें मान ली गईं। परंतु मेवाड़ सरकार व रेजीडेंट ने इसे 'बोल्शेविक समझौते' की संज्ञा देकर रद्द कर दिया और अनूप सिंह को उदयपुर में नजरबंद कर दिया।
🔥 गोविंदपुरा हत्याकांड (13 जुलाई 1923)
- ट्रेंच आयोग (Trench Commission): मामले की जाँच हेतु मेजर ट्रेंच को भेजा गया, जिसने एकपक्षीय रिपोर्ट दी।
- गोविंदपुरा कांड: 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा गाँव में एकत्र किसानों पर ट्रेंच ने गोलियाँ चलवा दीं।
- अमर शहीद: धाकड़ जाति के दो वीर किसान रूपाजी धाकड़ एवं कृपाजी धाकड़ मौके पर ही शहीद हो गए।
- बाद में पथिकजी ने कमान संभाली, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 1925 में किसानों की माँगें स्वीकार की गईं।
4. बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन (1922 - 1925)
बूंदी राज्य के पथरीले क्षेत्र 'बरड़' के किसानों ने 25 प्रकार की लाग-बाग, बेगार व चुंगी कर के खिलाफ आंदोलन किया। इस आंदोलन में गुर्जर एवं धाकड़ किसानों की मुख्य भूमिका थी तथा महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
📌 नेतृत्व व डाबी हत्याकांड
- मुख्य नेता: पंडित नयनूराम शर्मा, स्वामी नित्यानंद, रामनारायण चौधरी।
- डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923): डाबी गाँव में किसानों की सभा पर बूंदी के पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं।
- अमर शहीद: नानक जी भील एवं देवीलाल गुर्जर शहीद हुए। नानकजी भील झंडा गीत गाते हुए शहीद हुए थे।
📜 अर्जी गीत (Arzi Song)
स्मृति गीत: नानकजी भील की शहादत पर माणिक्य लाल वर्मा ने 'अर्जी' नामक प्रेरक गीत लिखा था। (RPSC में अनेक बार पूछा गया)
1925 में सरकार द्वारा कुछ रियायतें देने पर यह आंदोलन शांत हो गया।
5. अलवर व नीमूचणा किसान आंदोलन (1921 - 1925)
अलवर रियासत में महाराजा जयसिंह के समय दो मुख्य कारण थे- (1) सूअरों द्वारा फसल नष्ट करना (सूअर पालने व मारने पर रोक) तथा (2) 1923-24 में लागू राजपूत/ब्राह्मण किसानों पर बढ़ा हुआ नया भू-राजस्व दर।
💥 नीमूचणा हत्याकांड (14 मई 1925)
बांसूर तहसील, अलवर- 14 मई 1925 को नीमूचणा गाँव में लगभग 800-1000 किसान सभा कर रहे थे।
- कमांडेंट छज्जू सिंह (Chhajju Singh) के नेतृत्व में सेना ने गाँव को घेरकर अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं व घरों को आग लगा दी। इसमें 156 से अधिक किसान मारे गए।
- छज्जू सिंह का उपनाम: इसे 'राजस्थान का जनरल डायर' कहा जाता है।
महात्मा गांधी का कथन: गांधीजी ने अपने समाचार पत्र 'यंग इंडिया' में इसे जलियाँवाला बाग हत्याकांड से भी वीभत्स बताते हुए 'दोहरी डायरशाही' (Dyerism Double Distilled) की संज्ञा दी।
'रियासत' समाचार पत्र: दिल्ली से प्रकाशित 'रियासत' पत्र ने नीमूचणा कांड की तुलना जलियाँवाला बाग हत्याकांड से की थी।
6. सीकर एवं शेखावाटी किसान आंदोलन (1922 - 1947)
सीकर के नए राव राजा कल्याण सिंह द्वारा 25% से 50% तक कर बढ़ा देने व जकात (चुंगी) कर के खिलाफ जाट किसानों ने आंदोलन छेड़ा। इसमें राजस्थान सेवा संघ (राम नारायण चौधरी) का विशेष योगदान रहा।
👑 कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल 1934)
सिहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोटिया का बास में महिलाओं से किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में कटराथल नामक स्थान पर ऐतिहासिक महिला सम्मेलन आयोजित हुआ।
- अध्यक्षता: श्रीमती किशोरी देवी (हरलाल सिंह चौधरी की पत्नी)।
- मुख्य वक्ता: उत्तमा देवी (भरतपुर के देशराज की पत्नी)।
- विशेषता: इसमें 10,000 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया (अति-महत्वपूर्ण)।
⚡ कूदण गाँव हत्याकांड (25 अप्रैल 1935)
कूदण गाँव में धापी दादी के उकसाने पर किसानों ने कर देने से मना कर दिया। अंग्रेज अधिकारी कैप्टन वेब (Captain Webb) ने गोलियाँ चलवाईं, जिसमें चेतराम, टिकूराम, तुलसाराम व असाराम शहीद हो गए।
⚖️ जयसिंहपुरा हत्याकांड (20 जुलाई 1934)
ढूँढलोद के ठाकुर के भाई ईश्वर सिंह ने खेत जोत रहे किसानों पर गोलियाँ चलाईं। यह राजस्थान के इतिहास का पहला मामला था जिसमें अदालत ने दोषी जागीरदार को सजा सुनाई थी।
7. मारवाड़ किसान आंदोलन व डाबड़ा कांड
मारवाड़ में मारवाड़ सेवा संघ (1920), मारवाड़ यूथ लीग एवं मारवाड़ लोक परिषद (1938) के तत्वावधान में जयनारायण व्यास, मथुरादास माथुर, आनंदराज सुराणा व भंवरलाल सर्राफ ने किसानों की आवाज उठाई।
📜 RPSC फेवरेट: जयनारायण व्यास की प्रसिद्ध पुस्तिकाओं का प्रकाशन
मारवाड़ किसान आंदोलन के दौरान जयनारायण व्यास ने जागीरदारी शोषण व सामंती कुशासन को उजागर करने हेतु दो अत्यंत प्रसिद्ध पुस्तिकाएँ प्रकाशित की थीं:
1. 'पोपा बाई री पोल' (Popa Bai Ri Pol)
2. 'मारवाड़ री अवस्था' (Marwar Ri Awastha)
📍 चंडावल घटना (28 मार्च 1942)
सोजत (पाली) के चंडावल गाँव में मारवाड़ लोक परिषद के कार्यकर्ताओं पर जागीरदारों ने हमला किया, जिसमें अनेक कार्यकर्ता घायल हुए।
💥 डाबड़ा कांड (13 मार्च 1947)
डीडवाना (नागौर) के डाबड़ा गाँव में किसान सम्मेलन पर जागीरदारों ने हमला कर दिया। इसमें चुनीलाल शर्मा, रूघाराम, पन्नालाल व रामूराम शहीद हुए तथा मथुरादास माथुर गंभीर रूप से घायल हुए।
8. बीकानेर रियासत (दूधवा खारा, रायसिंहनगर व गंगानहर आंदोलन)
🌊 गंगानहर (गंगानगर) किसान आंदोलन एवं जमींदार लीग (1937)
महाराजा गंगासिंह द्वारा 1927 में गंगानहर लाने के बाद बीकानेर सरकार ने नहर क्षेत्र के किसानों पर अत्यधिक 'आबियाना' (सिंचाई कर) बढ़ा दिया था।
- जमींदार लीग की स्थापना (1937): बढ़े हुए आबियाना कर के विरोध में किसानों ने 'जमींदार लीग' का गठन किया।
- प्रमुख नेतृत्वकर्ता: दरबारा सिंह (Darbara Singh) के कुशल नेतृत्व में किसानों ने करबंदी आंदोलन चलाया और अंततः सरकार को आबियाना दरें घटानी पड़ीं।
🐄 दूधवा खारा व कांगड़ कांड
- दूधवा खारा आंदोलन (चूरू): जागीरदार सूरजमल के अत्याचारों के खिलाफ हनुमान सिंह बुडानिया एवं वैद्य मघाराम के नेतृत्व में संघर्ष हुआ। हनुमान सिंह ने 65 दिन भूख हड़ताल की।
- कांगड़ कांड (1946): अकाल के बावजूद ठिकानेदार द्वारा किसानों से जबरन लगान वसूली पर हुआ हिंसक अत्याचार।
⭐ रायसिंहनगर कांड व बीरबल दिवस
- रायसिंहनगर कांड (1 जुलाई 1946): प्रजा परिषद के जुलूस पर पुलिस फायरिंग में तिरंगा झंडा थामे बीरबल सिंह प्रजापत शहीद हो गए।
- बीरबल दिवस: बीकानेर प्रजा परिषद द्वारा 17 जुलाई 1946 को 'बीरबल दिवस' मनाया गया। (इन्दिरा गांधी नहर की एक शाखा का नाम 'बीरबल शाखा' है)।
9. मेव एवं अन्य क्षेत्रीय किसान आंदोलन
🕌 मेव किसान आंदोलन (1932 - 1933)
अलवर-भरतपुर मेवात क्षेत्र में। नेतृत्व: गुड़गाँव के यासीन खाँ, डॉ. मोहम्मद अली व चौधरी अख्तर हुसैन। अंजुमन-ए-खादिम-उल-इस्लाम संस्था द्वारा संचालित।
🌱 मारवाड़ का तोल आंदोलन (1920-21)
मारवाड़ में 100 तोले के सेर को घटाकर 80 तोले का सेर करने के सरकारी आदेश के खिलाफ चांदमल सुराणा ने आंदोलन चलाया था।
10. आरएएस / आरपीएससी मास्टर रिवीजन टेबल (Master Facts)
| किसान आंदोलन | प्रमुख नेतृत्वकर्ता | प्रमुख हत्याकांड / घटना | अमर शहीद / विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| मातृकुंडिया (1880) | जाट किसान समाज | राजस्थान का प्रथम किसान असंतोष | 22 जून 1880, नई भू-राजस्व दर विरोध |
| बिजोलिया | साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, वर्माजी | मानव इतिहास का सबसे लंबा अहिंसक (44 वर्ष) | 'पंछीड़ा' गीत, गणेशशंकर को 'चाँदी की राखी', ऊपरमाल पंच बोर्ड |
| बेगू | राम नारायण चौधरी, विजय सिंह पथिक | गोविंदपुरा हत्याकांड (13 जुलाई 1923) | रूपाजी व कृपाजी धाकड़ शहीद, बोल्शेविक समझौता |
| बूंदी (बरड़) | पंडित नयनूराम शर्मा | डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923) | नानकजी भील व देवीलाल गुर्जर शहीद, 'अर्जी' गीत |
| नीमूचणा (अलवर) | माधोसिंह, गोविंदसिंह | नीमूचणा हत्याकांड (14 मई 1925) | छज्जू सिंह (राजस्थान का जनरल डायर), 'दोहरी डायरशाही' |
| सीकर/शेखावाटी | राम नारायण चौधरी, हरलाल सिंह | कटराथल महिला सम्मेलन, कूदण कांड | श्रीमती किशोरी देवी (10,000 महिलाएँ), ब्रिटिश संसद में गूँज |
| मारवाड़ | जयनारायण व्यास, मथुरादास माथुर | डाबड़ा कांड (13 मार्च 1947) | 'पोपा बाई री पोल', चुनीलाल शर्मा व रूघाराम शहीद |
| बीकानेर व गंगानहर | दरबारा सिंह, हनुमान सिंह, मघाराम | रायसिंहनगर कांड (1 जुलाई 1946) | 'जमींदार लीग' (1937), बीरबल सिंह शहीद (बीरबल दिवस) |
RAS Hot Favorite: RPSC सुमेलित कीजिए (Match Column) में आंदोलन व संबंधित शहीदों व पत्र-पुस्तिकाओं (जैसे- बेगू: रूपाजी-कृपाजी, मारवाड़: पोपा बाई री पोल, बीकानेर: बीरबल सिंह व जमींदार लीग) का मिलान प्रश्न बार-बार दोहराती है।
यह टॉपिक परीक्षा हेतु क्यों आवश्यक है?
RPSC द्वारा आयोजित आरएएस (RAS Pre & Mains), सेकंड ग्रेड, फर्स्ट ग्रेड, रीट (REET), पटवार एवं वीडीओ परीक्षाओं के इतिहास पाठ्यक्रम में 'राजस्थान के किसान एवं जनजाति आंदोलन' सबसे अधिक अंक-दायी खंड माना जाता है।
- 1 अनिवार्य प्रश्न: प्रत्येक प्रशासनिक परीक्षा में कम से कम 2 से 3 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।
- 2 कथन व कारण: बिजोलिया के तीनों चरणों, मातृकुंडिया, पोपा बाई री पोल व नीमूचणा कांड पर गहराई से प्रश्न बनते हैं।
- 3 व्यक्तित्व व साहित्य: पथिकजी, जयनारायण व्यास, जमींदार लीग, पंछीड़ा व अर्जी गीत जैसे तथ्यात्मक प्रश्न।
बिजोलिया
44 वर्ष अहिंसक
बेगू आंदोलन
गोविंदपुरा कांड
कटराथल सम्मेलन
10,000 महिलाएँ
नीमूचणा कांड
दोहरी डायरशाही
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
राजस्थान के किसान आंदोलनों से संबंधित मुख्य सवाल एवं उनके उत्तर।
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