राजस्थान की जलवायु एवं कोपेन का वर्गीकरण :
थॉर्नथवेट, ट्रेवार्था, ऋतु चक्र, मावठ एवं नवीन 50 ज़िले
राजस्थान की जलवायु को मुख्य रूप से उष्ण-उपोषित कटिबंधीय जलवायु में गिना जाता है। इस अध्याय में डॉ. व्लादिमीर कोपेन के 4 जलवायु प्रदेशों (BWhw, BShw, Cwg, AW), थॉर्नथवेट व ट्रेवार्था के वैज्ञानिक वर्गीकरण, मानसूनी हवाओं (दक्षिण-पश्चिम व पुरवाईयाँ), मावठ (Western Disturbances) एवं 50 नवीन ज़िला पुनर्गठन (फलौदी, अनूपगढ़, डिडवाना, सलूंबर आदि) के अनुसार प्रामाणिक सामग्री का विस्तृत संकलन है।
राजस्थान का सबसे शुष्क स्थान फलौदी (नवीन ज़िला) एवं सबसे गर्म/ठंडा स्थान चूरू है।
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जलवायु के निर्धारक कारक, ऋतु चक्र, मावठ, स्थानीय पवनें, कोपेन, थॉर्नथवेट व ट्रेवार्था के वर्गीकरण तथा 50 नवीन ज़िलों अनुसार अद्यतन तथ्य।
जलवायु का सामान्य परिचय एवं निर्धारक कारक
राजस्थान राज्य भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में 23°03' उ.अ. से 30°12' उ.अ. के मध्य स्थित है। कर्क रेखा (23½° उ.अ.) बांसवाड़ा जिले के मध्य से तथा डूंगरपुर की दक्षिणी सीमा को छूती हुई गुजरती है। अतः बांसवाड़ा को छोड़कर राज्य का अधिकांश भाग उप-उष्ण कटिबंध (Sub-Tropical Zone) में आता है।
राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले 5 मुख्य कारक
- अक्षांशीय स्थिति: कर्क रेखा की अवस्थिति के कारण ग्रीष्म ऋतु में अत्यधिक तापमान।
- समुद्र से दूरी: अरब सागर से लगभग 225 किमी व कच्छ की खाड़ी से 400 किमी दूर होने के कारण महाद्वीपीय (Extreme/Continental) जलवायु।
- अरावली की स्थिति (दिशा): अरावली पर्वतमाला की दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व है, जो अरब सागरीय मानसून के समानांतर (Parallel) पड़ जाती है, जिससे मानसूनी पवनें बिना वर्षा किए सीधी निकल जाती हैं।
- धरातलीय उच्चावच: रेतीले धरातल के कारण तापांतर (Diurnal Range) अधिक होना।
- वनस्पति आवरण का अभाव: वाष्पोत्सर्जन कम होना व शुष्कता बढ़ना।
समदाब रेखाएँ (Isobars in Rajasthan)
- जुलाई माह की समदाब रेखाएँ (Summer Isobars): • 997 mb: जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, अनूपगढ़। • 998 mb: बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर, नागौर, चूरू। • 999 mb: जालोर, सांचौर, पाली, अजमेर, जयपुर, अलवर। • 1000 mb: सिरोही, उदयपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़।
- जनवरी माह की समदाब रेखाएँ (Winter Isobars): • 1018 mb: जैसलमेर, बीकानेर, झुंझुनूं। • 1019 mb: बाड़मेर, पाली, अजमेर, कोटा, झालावाड़।
RPSC रिपीट सवाल: राजस्थान में वर्षा की मात्रा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर घटती जाती है, जबकि ग्रीष्मकालीन तापांतर उत्तर-पश्चिम में सर्वाधिक पाया जाता है।
1. ऋतु चक्र, स्थानीय पवनें एवं मानसूनी घटनाएँ
अत्यधिक तापमान व निम्न वायुदाब
सूर्य के उत्तरायण होने से थार मरुस्थल में अत्यधिक निम्न वायुदाब (Low Pressure) बनता है, जो मानसून को आकर्षित करता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून
राजस्थान में 90% वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है। सर्वप्रथम अरब सागरीय शाखा (बांसवाड़ा) प्रवेश करती है, पर सर्वाधिक वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से होती है।
मानसून प्रत्यावर्तन व मावठ
अक्टूबर-नवंबर में 'मानसून लौटना' (Retreating Monsoon) कहलाता है। जनवरी में पश्चिमी विक्षोभों से मावठ होती है।
राजस्थान की स्थानीय जलवायु शब्दावली (Local Climate Vocabulary)
2. डॉ. व्लादिमीर कोपेन का जलवायु वर्गीकरण (Koeppen's Classification)
जर्मन वैज्ञानिक डॉ. व्लादिमीर कोपेन ने राजस्थान की जलवायु को वनस्पति (Vegetation) को मुख्य आधार मानते हुए (तापमान एवं वर्षा के सहयोग से) 4 जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया है। यह RPSC/RSSB की परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछा जाने वाला टॉपिक है:
उष्ण कटिबंधीय शुष्क मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश
- विशेषता: अत्यधिक तापमान, वाष्पीकरण की दर अधिक, वर्षा न्यूनतम (10-20 सेमी)।
- वनस्पति: मरुद्भिद / कैक्टस (Xerophytes) — काँटेदार झाड़ियाँ व सेवण घास।
- ज़िले (नवीन 50 अनुसार): जैसलमेर, पश्चिमी बाड़मेर, फलौदी, बीकानेर, अनूपगढ़, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, पश्चिमी चूरू।
अर्द्ध-शुष्क / स्टेपी जलवायु प्रदेश
- विशेषता: शुष्क व आर्द्र के मध्य का भाग, वर्षा (20-40 सेमी)।
- वनस्पति: स्टेपी तुल्य वनस्पति (छोटी घास व कँटीली झाड़ियाँ)।
- ज़िले (नवीन अनुसार): नागौर, डिडवाना-कुचामन, सीकर, नीम का थाना, झुंझुनूं, चूरू, पाली, ब्यावर, जालोर, सांचौर, बालोतरा, बाड़मेर (पूर्वी)।
उप-आर्द्र / मानसूनी तुल्य जलवायु प्रदेश
- विशेषता: अरावली के पूर्व का मैदान, शीत ऋतु शुष्क, वर्षा (60-80 सेमी)। राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश (क्षेत्रफल व जनसंख्या अनुसार)।
- वनस्पति: मानसूनी पतझड़ी वन (धोकड़ा, सालर, आम, शीशम)।
- ज़िले (नवीन अनुसार): जयपुर (शहर व ग्रामीण), दौसा, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, शाहपुरा, केकड़ी, राजसमंद।
उष्ण कटिबंधीय अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश
- विशेषता: ग्रीष्म ऋतु में भारी वर्षा (80-100+ सेमी), शीत ऋतु सूखी व सुहावनी।
- वनस्पति: सवाना तुल्य वनस्पति एवं सघन सागवान वन (सागौन)।
- ज़िले (नवीन अनुसार): बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, झालावाड़, बाराँ, दक्षिणी कोटा, माउंट आबू (सिरोही)।
कोपेन के जलवायु प्रदेशों का आरेखीय मानचित्र (Schematic Diagram)
3. थॉर्नथवेट एवं ट्रेवार्था का जलवायु वर्गीकरण
🧪 (A) सी. डब्ल्यू. थॉर्नथवेट का वर्गीकरण (Thornthwaite's Classification)
आधार: वाष्पीकरण, वर्षा की प्रभाविता एवं तापमानथॉर्नथवेट का वर्गीकरण अधिक सर्वमान्य एवं वैज्ञानिक माना जाता है। इन्होंने राजस्थान को 4 प्रदेशों में बाँटा है:
• प्रतिनिधि ज़िला: डूंगरपुर / बांसवाड़ा
• क्षेत्र: दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, सलूंबर)।
• प्रतिनिधि ज़िला: अजमेर
• क्षेत्रफल में सबसे बड़ा भाग। (मध्य व पूर्वी राजस्थान: जयपुर, अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर)।
• प्रतिनिधि ज़िला: बीकानेर
• क्षेत्र: उत्तरी राजस्थान (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अनूपगढ़, उत्तरी बीकानेर, चूरू)।
• प्रतिनिधि ज़िला: जैसलमेर
• क्षेत्र: सुदूर पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर, पश्चिमी बीकानेर)।
🌡️ (B) ट्रेवार्था का जलवायु वर्गीकरण (Trewartha's Classification)
आधार: वर्षा की मात्रा एवं वनस्पति (कोपेन का सरलीकृत रूप)4. राजस्थान के 5 सामान्य जलवायु प्रदेश (General Classification)
मौसम विभाग द्वारा वर्षा की मात्रा, तापमान एवं आर्द्रता के आधार पर राजस्थान को सामान्यतः 5 प्रमुख जलवायु कटिबंधों में बाँटा जाता है:
5. जलवायु वर्गीकरणों की तुलनात्मक सारणी
| क्षेत्र / क्षेत्र प्रकार | कोपेन का संकेत | थॉर्नथवेट का संकेत | ट्रेवार्था का संकेत | प्रतिनिधि ज़िला / क्षेत्र | औसत वर्षा |
|---|---|---|---|---|---|
| शुष्क मरुस्थलीय | BWhw | EA'd | BWh | जैसलमेर / बीकानेर / फलौदी | 10 – 20 सेमी |
| अर्द्ध-शुष्क स्टेपी | BShw | DA'w / DB'w | BSh | नागौर / डिडवाना / सांचौर | 20 – 40 सेमी |
| उप-आर्द्र / मानसूनी | Cwg | DA'w | Caw | टोंक / जयपुर / अजमेर | 60 – 80 सेमी |
| अति-आर्द्र (Humid) | AW | CA'w | AW | बांसवाड़ा / झालावाड़ / सलूंबर | 80 – 100+ सेमी |
परीक्षा-उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick One-Liners)
- कोपेन ने अपने वर्गीकरण का मुख्य आधार 'वनस्पति' (Vegetation) को माना था।
- थॉर्नथवेट ने अपने वर्गीकरण का मुख्य आधार 'वाष्पीकरण' (Evapotranspiration) को माना था।
- राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा मानसूनी शाखा 'बंगाल की खाड़ी' से होती है।
- राजस्थान में मानसून का प्रवेश द्वार बांसवाड़ा जिला कहलाता है।
- शीतकालीन वर्षा (मावठ) का कारण पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances / जेट स्ट्रीम) है।
- राजस्थान का सबसे आर्द्र स्थान माउंट आबू (150 सेमी वर्षा) है।
- राजस्थान का सबसे शुष्क स्थान फलौदी (नवीन ज़िला) है।
- राज्य में वर्षा के दिनों की सर्वाधिक संख्या झालावाड़ (40 दिन) में तथा न्यूनतम जैसलमेर (5 दिन) में है।
- कोपेन के अनुसार राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश Cwg प्रदेश है।