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चित्तौड़गढ़ दुर्ग – राजस्थान का गौरव

चित्तौड़गढ़ दुर्ग:
इतिहास, वास्तुकला एवं वीरगाथा

चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittorgarh Fort) राजस्थान का सबसे बड़ा एवं दूसरा प्राचीनतम दुर्ग है। महाराणा कुंभा द्वारा जीर्णोद्धार, तीन ऐतिहासिक साके (1303, 1535, 1568), विजय स्तम्भ (122 फीट, 9 मंजिला), जैन कीर्ति स्तम्भ (75 फीट, 7 मंजिला), 7 प्रवेश द्वार, पद्मिनी महल एवं UNESCO विश्व धरोहर (2013) — यह दुर्ग राजपूत वीरता, बलिदान एवं स्थापत्य कला का अद्वितीय प्रतीक है।

प्रामाणिक जानकारी RAS/RPSC उपयोगी 3 ऐतिहासिक साके UNESCO 2013
सबसे बड़ा दुर्ग 🏰 राजस्थान

क्षेत्रफल

700 एकड़

ऊँचाई

609 मी.

मेसा का पठार | 8 किमी लंबाई | 2 किमी चौड़ाई

गहन अध्ययन

चित्तौड़गढ़ दुर्ग: पूर्ण विश्लेषण

इतिहास, वास्तुकला, तीन साके, महल, मंदिर, विजय स्तम्भ, जैन कीर्ति स्तम्भ एवं परीक्षा-उपयोगी तथ्यों का संग्रह।

1. परिचय (Introduction)

चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittorgarh Fort) राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। यह बेड़च एवं गंभीरी नदियों के संगम के समीप मेसा के पठार (609 मीटर ऊँचाई) पर बना है। यह दुर्ग राजस्थान का सबसे बड़ा एवं दूसरा प्राचीनतम दुर्ग है।

📌 प्रमुख तथ्य

  • स्थान: चित्तौड़गढ़ जिला, राजस्थान
  • निर्माण: चित्रांगद मौर्य (7वीं शताब्दी) — पौराणिक मान्यता
  • जीर्णोद्धार: महाराणा कुंभा (15वीं शताब्दी)
  • क्षेत्रफल: 700 एकड़ (305 हेक्टेयर)
  • लंबाई-चौड़ाई: 8 किमी × 2 किमी
  • ऊँचाई: 609 मीटर (मेसा का पठार)
  • UNESCO: 21 जून 2013 को विश्व धरोहर सूची में शामिल

🏷️ उपनाम (Nicknames)

  • राजस्थान का गौरव — Pride of Rajasthan
  • दुर्गों का सिरमौर — "गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया"
  • मालवा का प्रवेश द्वार — Gateway to Malwa
  • दक्षिण राजपूताने का प्रवेश द्वार
  • चित्रकूटगढ़ / चित्रकोट — Chitrakut
  • खिज्राबाद — अलाउद्दीन खिलजी द्वारा रखा गया नाम

प्रसिद्ध उक्ति: "गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया" — चित्तौड़गढ़ को दुर्गों का सिरमौर कहा जाता है।

📌 RPSC परीक्षा हेतु: चित्तौड़गढ़ राजस्थान का सबसे बड़ा (क्षेत्रफल की दृष्टि से) दुर्ग है। भारत में सबसे ऊँचा दुर्ग महाराष्ट्र में है, द्वितीय स्थान पर मध्यप्रदेश है।

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (History)

⏳ कालक्रम

  • 7वीं शताब्दी: चित्रांगद मौर्य द्वारा निर्माण (वीर विनोद के अनुसार)
  • 713 ई.: मानमोरी शिलालेख — मौर्य शासकों का प्रमाण (कर्नल टॉड द्वारा समुद्र में फेंका गया)
  • 734 ई.: बप्पा रावल ने मौर्यों से दुर्ग जीता (गुहिल वंश)
  • 1303 ई.: अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण — प्रथम साका
  • 1433–1468 ई.: महाराणा कुंभा द्वारा जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण
  • 1440–1448 ई.: विजय स्तम्भ का निर्माण (8 वर्ष)
  • 1535 ई.: बहादुर शाह (गुजरात) का आक्रमण — द्वितीय साका
  • 1567–1568 ई.: अकबर का आक्रमण — तृतीय साका
  • 2013 ई.: UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल

👑 प्रमुख शासक

  • चित्रांगद मौर्य — मूल निर्माता (मौर्य वंश)
  • मानमोरी — मौर्य शासक (713 ई. शिलालेख)
  • बप्पा रावल — गुहिल वंश, मौर्यों से दुर्ग जीता
  • राणा रतनसिंह — प्रथम साका (1303) के समय शासक
  • महाराणा कुंभा — आधुनिक निर्माता, जीर्णोद्धारकर्ता
  • राणा सांगा — मेवाड़ के प्रतापी शासक
  • महाराणा विक्रमादित्य — द्वितीय साका (1535) के समय शासक
  • महाराणा उदयसिंह — तृतीय साका (1568) के समय शासक

📌 महत्वपूर्ण: महाराणा कुंभा को "राजस्थान में स्थापत्य कला का जनक" कहा जाता है। उन्होंने 32 दुर्गों का जीर्णोद्धार एवं निर्माण करवाया।

3. वास्तुकला एवं विशेषताएँ (Architecture & Features)

🏗️ स्थापत्य विशेषताएँ

  • आकृति: बेल मछली (Fish-shaped) के समान
  • पठार: मेसा का पठार (609 मीटर)
  • परकोटा: सुदृढ़ एवं चौड़ी प्राचीर
  • प्रवेश द्वार: कुल 7 प्रमुख द्वार
  • क्षेत्रफल: 700 एकड़ (305 हेक्टेयर)
  • कृषि: भारत का एकमात्र दुर्ग जहाँ कृषि की जाती है
  • श्रेणी: धान्वन श्रेणी को छोड़कर सभी श्रेणियों में आता है
  • जल स्त्रोत: प्राचीन काल में 84 जल स्त्रोत थे (वर्तमान में 22–40 क्रियाशील)

📐 दुर्ग के आयाम

  • लंबाई: 8 किमी
  • चौड़ाई: 2 किमी
  • क्षेत्रफल: 305 हेक्टेयर
  • ऊँचाई: 609 मीटर (समुद्र तल से)
  • प्राचीर की ऊँचाई: 30–40 फीट
  • प्राचीर की चौड़ाई: 15–20 फीट
  • विशेष: राजस्थान का सबसे बड़ा आवासीय दुर्ग

💧 जल निकाय: दुर्ग में 84 जल स्त्रोत थे, जिससे वर्षों तक घेराबंदी के बावजूद दुर्ग में पानी की कमी नहीं होती थी।

✅ विशेष तथ्य: चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग है। भारत में सबसे ऊँचा दुर्ग महाराष्ट्र में है, द्वितीय स्थान पर मध्यप्रदेश है।

4. सात प्रवेश द्वार (Seven Gates – Pols)

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्रवेश हेतु 7 प्रमुख द्वार (Pols) हैं। इन सभी द्वारों का निर्माण महाराणा कुंभा ने 1433–1468 ई. के मध्य करवाया था। क्रमानुसार ये द्वार इस प्रकार हैं:

1
पाडनपोल

प्रथम प्रवेश द्वार — बाघ सिंह रावत का स्मारक (1535 ई. के युद्ध में वीरगति)

2
भैरव पोल

द्वितीय प्रवेश द्वार — देसूरी के भैरोदास सोलंकी के नाम पर (1535 ई. में वीरगति)

3
हनुमान पोल

तृतीय प्रवेश द्वार — भैरवपोल व हनुमानपोल के मध्य जयमल व कल्ला राठौड़ की छतरियाँ

4
गणेश पोल

चतुर्थ प्रवेश द्वार — गणेश जी को समर्पित

5
जोडला / लोकन पोल

पंचम प्रवेश द्वार — लोहला पोल भी कहा जाता है

6
लक्ष्मण पोल

षष्ठ प्रवेश द्वार — लक्ष्मण जी को समर्पित

7
राम पोल

मुख्य एवं अंतिम प्रवेश द्वार — इसके सामने पत्ता सिसोदिया का स्मारक है (1568 में वीरगति)

📌 अतिरिक्त: सूरज पोल दुर्ग के पूर्वी दिशा में स्थित है। त्रिपोलिया द्वार दुर्ग के आंतरिक भाग में स्थित है।

5. दुर्ग के प्रमुख महल (Palaces)

🏰 प्रमुख महल

  • कुंभा महल — महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित, यहीं सांगा का पुत्र उदयसिंह का जन्म हुआ। पन्नाधाय द्वारा उदयसिंह की रक्षा एवं चंदन के बलिदान की घटना यहीं हुई।
  • पद्मिनी महल (रानी पद्मिनी महल)दुर्ग का सबसे बड़ा आकर्षण, पद्मिनी तालाब के उत्तरी तट पर स्थित, 3 मंजिला महल, बीच में एक 3 मंजिला बर्मा (गज़ेबो) भी है।
  • गोरा-बादल महल — पद्मिनी महल के दक्षिण-पूर्व में, दो गुम्बदाकार इमारतें
  • फतेह प्रकाश महल — महाराणा फतेहसिंह द्वारा निर्मित, वर्तमान में संग्रहालय (Museum) संचालित

🏠 अन्य महल एवं हवेलियाँ

  • रानी पद्मिनी महल — पद्मिनी तालाब के उत्तरी तट पर
  • कंवरपदा के महल — सांगा ने मीरा के लिए बनवाये
  • सतसिंह पैलेस — महाराणा सतसिंह द्वितीय द्वारा
  • नौ कोठा मकान / नौलखा भंडार — बनवीर द्वारा निर्मित अधूरा लघुदुर्ग, "बनवीर की दीवार" भी कहते हैं
  • भामाशाह हवेली — तोपखाने के पास, अब खंडहर अवस्था में
  • विजयमल हवेली — उदयसिंह के काल में निर्मित
  • हिंगलू आहाड़ा के महल — हिंगलू डूँगरपुर का आहाड़ा सरदार
  • राव रणमल की हवेली — दुर्ग के अंदर
  • श्रृंगार चंदरी (श्रृंगार चौरी)निर्माण: कुंभा के कोषाध्यक्ष भंडारी वेल्का (1448–49 ई.), मूलतः जैन मंदिर, यहीं कुंभा की पुत्री रमाबाई (वागीश्वरी) का विवाह हुआ। RPSC हॉट

📌 RPSC हॉट-फेवरेट: पद्मिनी महल — अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी को "एक झलक" देखने के लिए आक्रमण किया था। श्रृंगार चंदरी — निर्माण भंडारी वेल्का ने 1448–49 ई. में कराया।

6. दुर्ग के प्रमुख मंदिर (Temples)

🛕 प्रमुख मंदिर

  • कालिका माता मंदिर — मूलतः सूर्य मंदिर था, 10वीं शताब्दी के अंत में मानभंग वामक राव द्वारा, प्रतिहारकालीन शैली
  • तुलना भवानी मंदिरबनवीर ने अपने तुलादान के धन से बनवाया
  • समिधेश्वर मंदिर / नृसिंहनारायण मंदिर / मोकलजी का मंदिरपरमार राजा भोज (1011–1055 ई.), महाराणा मोकल (1423 ई.) द्वारा पुनर्निर्माण, शिव की त्रिमुखी मूर्ति, 1150 ई. का कुमारपाल शिलालेख
  • कुंभ श्याम मंदिर — मूलतः शिव मंदिर, बाद में वैष्णव मंदिर, महाराणा कुंभा (1459 ई.) द्वारा जीर्णोद्धार, विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति स्थापित
  • मीरा बाई मंदिरराणा सांगा ने अपनी पुत्रवधू मीरा की भक्ति के लिए बनवाया, सामने रैदास की 4 फलकों की छतरी

🕉️ अन्य मंदिर

  • सतबीस देबरी — 11वीं शताब्दी, 27 देवरियाँ, जैन धर्म के तीर्थंकरों की मूर्तियाँ
  • नीलकंठ महादेव मंदिर — महाभारत काल, भीम द्वारा स्थापित मान्यता
  • बाण माता मंदिर — गुहिल वंश की कुल देवी
  • अन्नपूर्णा मातामहाराणा हमीर द्वारा निर्मित
  • तलनेश्वर महादेव मंदिर — सतसिंह पैलेस के बाहर
  • सोमदेव मंदिर — दुर्ग के अंदर

📌 विशेष: कुंभ श्याम मंदिर में विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित है। महाराणा कुंभा ने इसे अपने आराध्य देव के रूप में स्थापित किया।

7. विजय स्तम्भ (Vijay Stambh / विष्णु ध्वज)

विजय स्तम्भ (जय स्तम्भ) चित्तौड़गढ़ दुर्ग का सबसे प्रमुख स्मारक है। इसका निर्माण महाराणा कुंभा ने सारंगपुर विजय (1437 ई.) के उपलक्ष्य में करवाया था, जिसमें उन्होंने मालवा शासक महमूद खिलजी प्रथम को हराया था। विजय स्तम्भ को 'विष्णु ध्वज' भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित है।

🏛️ स्तम्भ की विशेषताएँ

  • निर्माण काल: 1440–1448 ई. (8 वर्ष, लगभग 30 लाख रुपये खर्च)
  • ऊँचाई: 122 फीट
  • मंजिलें: 9 मंजिला
  • सीढ़ियाँ: 157
  • वास्तुकार: जैता, नाथा, पोमा, पूंजा
  • तीसरी मंजिल: अरबी भाषा में 9 बार "अल्लाह-अल्लाह" लिखा है
  • 8वीं मंजिल: बिजली गिरने से नष्ट, महाराणा स्वरूपसिंह ने पुनः बनवाया

📜 प्रशस्ति एवं उपनाम

  • प्रशस्ति: 1460 ई. (3 दिसम्बर), कवि अत्रि एवं उसका पुत्र महेश (अत्रि-महेश प्रशस्ति), सबसे उपरी मंजिल पर स्थापित
  • "हिंदू देवी-देवताओं का म्यूजियम" — गोपीनाथ शर्मा
  • "भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश" — डॉ. गोटव
  • "विष्णुध्वज" — डॉ. उपेन्द्र नाथ (विष्णु को समर्पित)
  • "पौराणिक देवताओं का अमूल्य कोष" — गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
  • "रोम के टॉवर" से तुलना — फर्ग्यूसन
  • कर्नल टॉड: "दिल्ली की कुतुबमीनार भले ही ऊँची हो, लेकिन विजय स्तम्भ की कारीगरी सबसे बढ़कर है।"

📌 डाक टिकट: 15 अगस्त 1949 को 1 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया — राजस्थान का प्रथम स्मारक जिस पर डाक टिकट जारी हुआ।

📌 RPSC परीक्षा हेतु: विजय स्तम्भभगवान विष्णु को समर्पित, कवि अत्रि ने प्रशस्ति लिखी। राजस्थान पुलिस, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, वन विभाग के प्रतीक चिह्न में विजय स्तम्भ अंकित है।

8. जैन कीर्ति स्तम्भ (Jain Keerti Stambh)

जैन कीर्ति स्तम्भ चित्तौड़गढ़ दुर्ग का एक अन्य महत्वपूर्ण स्तम्भ है। विजय स्तम्भ से यह पूर्णतः भिन्न है। इसका निर्माण 1301 ई. में जैन व्यापारी बधेरवाल वीना एवं उसके पुत्र पुण्य सिंह ने भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित करवाया था।

🏛️ स्तम्भ की विशेषताएँ

  • निर्माण काल: 1301 ई.
  • ऊँचाई: 75 फीट
  • मंजिलें: 7 मंजिला
  • समर्पित: आदिनाथ / ऋषभदेव (जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर)
  • निर्माता: जैन व्यापारी बधेरवाल वीना एवं पुत्र पुण्य सिंह

📌 विशेष

  • यह स्तम्भ जैन धर्म की धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है
  • इसके समीप 14वीं शताब्दी का एक जैन मंदिर भी स्थित है
  • भारतीय पुरातत्व विभाग के अनुसार यह स्तम्भ 1301 ई. में निर्मित है
  • इसे कीर्ति स्तम्भ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह यश (कीर्ति) का प्रतीक है

📌 महत्वपूर्ण: विजय स्तम्भ (122 फीट, 9 मंजिला, कुंभा) और जैन कीर्ति स्तम्भ (75 फीट, 7 मंजिला, 1301 ई.) — दोनों भिन्न हैं। RPSC में "कीर्ति स्तम्भ" से प्रश्न आने पर जैन कीर्ति स्तम्भ का उत्तर दें।

9. विजय स्तम्भ बनाम जैन कीर्ति स्तम्भ (Pillar Comparison)

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में दो स्तम्भ हैं — विजय स्तम्भ (जय स्तम्भ / विष्णु ध्वज) और जैन कीर्ति स्तम्भ। अक्सर छात्र इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं। नीचे दी गई तुलना इसे स्पष्ट करेगी:

विजय स्तम्भ (Vijay Stambh)

  • उपनाम: जय स्तम्भ, विष्णु ध्वज
  • निर्माता: महाराणा कुंभा
  • काल: 1440–1448 ई. (8 वर्ष)
  • ऊँचाई: 122 फीट
  • मंजिलें: 9
  • सीढ़ियाँ: 157
  • समर्पित: भगवान विष्णु
  • कारण: मालवा विजय (1437 ई.)
  • प्रशस्ति: कवि अत्रि एवं महेश (1460 ई.)

जैन कीर्ति स्तम्भ (Jain Keerti Stambh)

  • उपनाम: कीर्ति स्तम्भ
  • निर्माता: बधेरवाल वीना एवं पुण्य सिंह (जैन व्यापारी)
  • काल: 1301 ई.
  • ऊँचाई: 75 फीट
  • मंजिलें: 7
  • सीढ़ियाँ: ज्ञात नहीं
  • समर्पित: आदिनाथ (ऋषभदेव)
  • कारण: धार्मिक कीर्ति / यश
  • प्रशस्ति: पुरातत्व विभाग द्वारा प्रमाणित

📌 RPSC ट्रिक: "विजय स्तम्भ = कुंभा = 122 फीट = 9 मंजिल" और "जैन कीर्ति स्तम्भ = 1301 = 75 फीट = 7 मंजिल" — यह अंतर याद रखें

10. चित्तौड़गढ़ के तीन ऐतिहासिक साके (Three Sakas)

चित्तौड़गढ़ दुर्ग तीन ऐतिहासिक साकों (Jauhar) के लिए प्रसिद्ध है। ये वीरता, बलिदान एवं राजपूत रीति के प्रतीक हैं।

प्रथम साका — 1303 ई.

26 अगस्त 1303

आक्रमणकारी: अलाउद्दीन खिलजी
शासक: रावल रतनसिंह
कारण: रानी पद्मिनी को पाने की लालसा

सेनापति: गोरा-बादल (वीरगति)
जौहर: रानी पद्मिनी के नेतृत्व में
परिणाम: खिलजी ने दुर्ग पर अधिकार कर "खिज्राबाद" नाम रखा

स्रोत: तारीख-ए-अलाईअमीर खुसरो (दरबारी कवि) ने इस आक्रमण का वृत्तांत लिखा।

द्वितीय साका — 1535 ई.

8 मार्च 1535

आक्रमणकारी: बहादुरशाह (गुजरात)
शासक: महाराणा विक्रमादित्य
सेनापति: रावत बाघसिंह (वीरगति)

जौहर: रानी कर्मावती एवं विवाहर बाई के नेतृत्व में
राखी: कर्मावती ने हुमायूँ को राखी भेजी, सहायता नहीं मिली
स्रोत: वीर विनोद (श्यामलदास)

तृतीय साका — 1568 ई.

25 फरवरी 1568

आक्रमणकारी: अकबर (मुगल)
शासक: महाराणा उदयसिंह (पहाड़ों में चले गए)
सेनापति: जयमल राठौड़ & पत्ता सिसोदिया (वीरगति)

जौहर: रानी फूलकँवर (पत्ता की रानी) के नेतृत्व में
कुल्ल-ए-आम: अकबर ने 30,000 लोगों के वध का आदेश दिया
स्रोत: अकबरनामा (अबुल फजल)

📌 विशेष: जयमल — पैर में गोली लगी, कल्ला राठौड़ (उनके काका) ने अपने कंधों पर बैठाकर युद्ध लड़ाया। कल्ला को "चार हाथों वाले देवता" कहा जाता है।

11. तीनों साकों की तुलनात्मक तालिका (Quick Comparison Table)

एक नज़र में तीनों साकों का त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision) — RAS/RPSC परीक्षा हेतु अत्यंत उपयोगी

साका वर्ष शासक आक्रमणकारी केसरिया (सेनापति) जौहर (रानी)
प्रथम 1303 रावल रतनसिंह अलाउद्दीन खिलजी गोरा व बादल रानी पद्मिनी
द्वितीय 1535 महाराणा विक्रमादित्य बहादुरशाह (गुजरात) रावत बाघसिंह रानी कर्मावती
तृतीय 1568 महाराणा उदयसिंह अकबर जयमल राठौड़ व पत्ता सिसोदिया रानी फूलकँवर

📌 RPSC ट्रिक: "3-ख-गो-प"3 साके, िलजी (1303), गोरा-बादल, द्मिनी। "1535-ब-रा"हादुरशाह, रावत बाघसिंह, कार्मावती। "1568-अ-ज-फ"कबर, यमल-पत्ता, ूलकँवर।

12. प्रमुख जलाशय (Water Bodies)

दुर्ग में 84 जल स्त्रोत थे (वर्तमान में लगभग 22–40 क्रियाशील हैं)। प्रमुख जलाशय इस प्रकार हैं:

💧 कुण्ड एवं तालाब

  • कुकड़ेश्वर का कुण्ड — महाभारत काल, भीम से संबंधित (किंवदंती)
  • भीमलत कुण्ड — पांडव भीम द्वारा निर्मित मान्यता
  • चित्रांग मोरी तालाबचित्रांगद मौर्य द्वारा निर्मित
  • गोमुख कुण्ड — समिधेश्वर मंदिर के पास, पवित्र कुण्ड
  • पद्मिनी तालाब — पद्मिनी महल के पास
  • सतनेश्वर तालाबमहाराणा सतसिंह द्वारा निर्मित
  • कुंभ सागर तालाब — महाराणा कुंभा द्वारा

🏊 अन्य जलाशय

  • सूर्यकुण्ड — कालिका माता मंदिर के पास
  • राम कुण्ड — महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित
  • घोसुण्डी बावड़ी — दुर्ग के अंदर
  • रत्नेश्वर तालाब — दुर्ग के उत्तरी भाग में

📌 महत्वपूर्ण: गोमुख कुण्ड — यहाँ से पानी की निकासी की व्यवस्था थी, जो दुर्ग के विभिन्न भागों तक पानी पहुँचाती थी। 84 जल स्त्रोत दुर्ग को जल-संपन्न बनाते थे।

13. अन्य महत्वपूर्ण स्थल एवं घटनाएँ

🏛️ प्रमुख स्मारक

  • श्रृंगार चंदरी1448–49 ई. में भंडारी वेल्का (कुंभा के कोषाध्यक्ष) द्वारा निर्मित, जैन मंदिर, रमाबाई (वागीश्वरी) का विवाह यहीं हुआ
  • सातवींश देबरी — 11वीं शताब्दी का जैन मंदिर
  • महासती स्थान — जौहर स्थल, जहाँ वीरांगनाओं ने अग्नि में प्राणों की आहुति दी
  • जयमल व पत्ता की गजारूढ़ मूर्तियाँअकबर ने जयमल-पत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरा किले के द्वार पर हाथी पर सवार मूर्तियाँ लगवाईं (औरंगजेब ने तोड़ दिया)

📌 अन्य विशेषताएँ

  • चित्तौड़ी बुर्ज — दुर्ग का अंतिम दक्षिणी भाग
  • मोहर मगरी1567 ई. में अकबर ने प्रत्येक मजदूर को एक मोहर देकर यह टीला बनवाया, ताकि तोपें रखी जा सकें
  • साउंड एंड लाइट शो — प्रतिदिन शाम 7:00 बजे, पयटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
  • जौहर मेला — चैत्र कृष्ण एकादशी को आयोजित
  • फोटो फेस्टिवल — फरवरी 2019 में पहला आयोजन
  • मानमोरी शिलालेख (713 ई.)कर्नल जेम्स टॉड इसे इंग्लैंड ले जा रहे थे, किन्तु वज्रपात के कारण समुद्र में फेंक दिया

📌 डाक टिकट: 2018 में 12 रुपये का डाक टिकट जारी किया गया। 1949 में 1 रुपये का पहला टिकट जारी हुआ था।

14. UNESCO विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage)

21 जून 2013 को कम्बोडिया की राजधानी नामपेन्ह में आयोजित विश्व धरोहर समिति की बैठक में चित्तौड़गढ़ दुर्ग को UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

🏰 राजस्थान के 6 UNESCO दुर्ग

  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़)
  • कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद)
  • रणथंभोर दुर्ग (सवाई माधोपुर)
  • गागरोन दुर्ग (झालावाड़)
  • जैसलमेर दुर्ग (जैसलमेर)
  • आमेर दुर्ग (जयपुर)

📜 प्रमुख विशेषताएँ

  • अपनी विशालता एवं स्थापत्य के लिए विश्व प्रसिद्ध
  • राजपूत वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण
  • तीन ऐतिहासिक साकों का गवाह
  • धार्मिक सहिष्णुता — हिंदू एवं जैन मंदिर एक साथ

15. परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Important Facts for Exams)

✅ मुख्य तथ्य

  • स्थान: चित्तौड़गढ़ जिला, राजस्थान
  • निर्माता: चित्रांगद मौर्य (पौराणिक), महाराणा कुंभा (आधुनिक)
  • क्षेत्रफल: 700 एकड़ (305 हेक्टेयर) — राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग
  • ऊँचाई: 609 मीटर (मेसा का पठार)
  • लंबाई-चौड़ाई: 8 किमी × 2 किमी
  • प्रवेश द्वार: 7 (पाडन, भैरव, हनुमान, गणेश, जोडला, लक्ष्मण, राम)
  • विजय स्तम्भ: 122 फीट, 9 मंजिला, 157 सीढ़ियाँ, 1440–1448 ई.
  • जैन कीर्ति स्तम्भ: 75 फीट, 7 मंजिला, 1301 ई.
  • तीन साके: 1303 (खिलजी), 1535 (बहादुरशाह), 1568 (अकबर)
  • UNESCO: 21 जून 2013
  • जल स्त्रोत: 84 (प्राचीन), 22–40 (वर्तमान)

📝 RPSC हॉट-फेवरेट

  • "गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया" — दुर्गों का सिरमौर
  • विजय स्तम्भभगवान विष्णु को समर्पित, कवि अत्रि प्रशस्ति
  • जैन कीर्ति स्तम्भ1301 ई., आदिनाथ को समर्पित
  • विजय स्तम्भ का पहला डाक टिकट15 अगस्त 1949, 1 रुपये
  • दूसरा डाक टिकट — 2018, 12 रुपये
  • भारत का एकमात्र दुर्ग जहाँ कृषि की जाती है
  • राजस्थान का दूसरा प्राचीनतम दुर्ग — (प्रथम: भटनेर)
  • महाराणा कुंभा32 दुर्गों का जीर्णोद्धार एवं निर्माण
  • श्रृंगार चंदरीभंडारी वेल्का (1448–49), कुंभा की पुत्री रमाबाई का विवाह
  • कल्ला राठौड़"चार हाथों वाले देवता"
  • मानमोरी शिलालेख — 713 ई., कर्नल टॉड ने समुद्र में फेंका

🏆 RAS/RPSC हॉट-फेवरेट: विजय स्तम्भ — विशेषताएँ, ऊँचाई, मंजिलें, निर्माता, प्रशस्ति (कवि अत्रि), उपनाम। तीन साके — तिथि, आक्रमणकारी, शासक, सेनापति, जौहर का नेतृत्व (पद्मिनी, कर्मावती, फूलकँवर)। जैन कीर्ति स्तम्भ — 1301, 75 फीट, 7 मंजिल, आदिनाथ। श्रृंगार चंदरी — भंडारी वेल्का (1448–49), रमाबाई विवाह।

परीक्षा में महत्व

चित्तौड़गढ़ दुर्ग क्यों महत्वपूर्ण है?

चित्तौड़गढ़ दुर्ग राजस्थान के इतिहास, राजपूत वीरता, स्थापत्य कला और महाभारत से आधुनिक काल तक के अध्ययन का केंद्रबिंदु है। RAS, RPSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस दुर्ग से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

  • 1 राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग: क्षेत्रफल (700 एकड़) की दृष्टि से सर्वोच्च स्थान।
  • 2 तीन ऐतिहासिक साके: 1303 (खिलजी), 1535 (बहादुरशाह), 1568 (अकबर) — वीरता एवं बलिदान के प्रतीक।
  • 3 विजय स्तम्भ: 122 फीट, 9 मंजिला, 157 सीढ़ियाँ — भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश।
  • 4 जैन कीर्ति स्तम्भ: 1301 ई., 75 फीट, 7 मंजिल — आदिनाथ को समर्पित।
  • 5 UNESCO विश्व धरोहर: 2013 में राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्गों में शामिल।
  • 6 भारत का एकमात्र दुर्ग: जहाँ कृषि की जाती है।
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सबसे बड़ा दुर्ग

700 एकड़, राजस्थान

तीन साके

1303, 1535, 1568

विजय स्तम्भ

122 फीट, 9 मंजिला

जैन कीर्ति स्तम्भ

75 फीट, 7 मंजिला

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

चित्तौड़गढ़ दुर्ग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर।

विजय स्तम्भ — 122 फीट, 9 मंजिला, 1440–1448 ई., महाराणा कुंभा द्वारा, भगवान विष्णु को समर्पित, "विष्णु ध्वज" कहलाता है। जैन कीर्ति स्तम्भ — 75 फीट, 7 मंजिला, 1301 ई., जैन व्यापारी बधेरवाल वीना एवं पुण्य सिंह द्वारा, भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित। दोनों पूर्णतः भिन्न हैं।
कवि अत्रि एवं उनके पुत्र महेश ने 1460 ई. (3 दिसम्बर) में अत्रि-महेश प्रशस्ति लिखी। यह विजय स्तम्भ की सबसे उपरी मंजिल पर स्थापित है। (नोट: कवि "अत्रि" है, "अति" नहीं)
प्रथम साका (1303): रानी पद्मिनी
द्वितीय साका (1535): रानी कर्मावती एवं विवाहर बाई
तृतीय साका (1568): रानी फूलकँवर (पत्ता की रानी)
श्रृंगार चंदरी चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित एक जैन मंदिर है। इसका निर्माण 1448–49 ई. में कुंभा के कोषाध्यक्ष भंडारी वेल्का ने करवाया था। यहाँ कुंभा की पुत्री रमाबाई (वागीश्वरी) का विवाह हुआ था। RPSC में 5+ बार पूछा गया
21 जून 2013 को UNESCO ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। राजस्थान के 6 पहाड़ी दुर्गों (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभोर, गागरोन, जैसलमेर, आमेर) को शामिल किया गया।
मानमोरी शिलालेख (713 ई.) चित्तौड़गढ़ के मौर्य शासकों (चित्रांगद, मानमोरी) का प्रमाण है। कर्नल जेम्स टॉड इसे इंग्लैंड ले जा रहे थे, किन्तु वज्रपात/संतुलन बिगड़ने के कारण समुद्र में फेंक दिया। इसके कारण मौर्य शासकों की जानकारी सीमित है।

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