लोड हो रहा है...
बैराठ (Bairath) – विराटनगर

बैराठ:
प्राचीन विराटनगर का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन

बैराठ (विराटनगर) राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में स्थित प्राचीन मत्स्य जनपद की राजधानी है। यहाँ महाभारत काल में पांडुओं ने अपना अज्ञातवास बिताया था। अशोक के शिलालेख, गोल मंदिर (विश्व का प्राचीनतम संरचनात्मक मंदिर), बौद्ध मठ, 36 चाँदी की मुद्राएँ, स्वर्ण कलश (बुद्ध के अवशेष), एवं मौर्यकालीन सूती कपड़ा — यहाँ की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरें हैं।

प्रामाणिक जानकारी RAS/RPSC उपयोगी महाभारत काल
प्राचीन नगर 🏛️ मत्स्य जनपद

काल

महाभारत काल

स्थान

कोटपूतली-बहरोड़

मत्स्य जनपद की राजधानी | पांडुओं का अज्ञातवास

बैराठ सभ्‍यता : Complete Test
गहन अध्ययन

बैराठ: पूर्ण विश्लेषण

उत्खनन रिपोर्ट, पुरातात्विक अवशेष, एवं परीक्षा-उपयोगी तथ्यों का संग्रह।

1. परिचय (Introduction)

  • बैराठ (Bairath) राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में स्थित है, जो अलवर-जयपुर मार्ग पर जयपुर से लगभग 85 कि.मी. की दूरी पर है। नया जिला (2023)
  • प्राचीन ग्रंथों में इसे 'विराटनगर' या 'विराटपुर' के नाम से जाना जाता था।
  • यह मत्स्य जनपद (16 महाजनपदों में एक) की राजधानी थी, जिसका विस्तार जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर तक था।
  • महाभारत काल: पांडुओं ने अपने अज्ञातवास का अंतिम वर्ष यहीं राजा विराट की सेवा में बिताया था।
  • मौर्य काल: यहाँ अशोक के शिलालेख, स्तंभ के अवशेष, गोल मंदिर (विश्व का प्राचीनतम संरचनात्मक मंदिर) और बौद्ध मठ मिले हैं।
  • चीनी यात्री ह्वेनसांग (634 ई.) ने बैराठ को 'पारियात्र' (Poliye-tolo) नाम दिया।
  • 📌 महत्वपूर्ण: बैराठ से मौर्यकालीन सूती कपड़ा (Cotton Cloth) मिला है, जो राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, स्वर्ण कलश (Golden Casket) में बुद्ध के अस्थि अवशेष मिले हैं।

2. भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार (Geography)

📍 स्थान

  • राज्य: राजस्थान
  • ज़िला: कोटपूतली-बहरोड़ नया
  • दूरी: जयपुर से 85 कि.मी., अलवर-जयपुर मार्ग पर
  • क्षेत्रफल: लगभग 8 कि.मी. लंबाई, 5 कि.मी. चौड़ाई

🏔️ भौगोलिक विशेषताएँ

  • घाटी: 5 मील लंबी, 3-4 मील चौड़ी
  • पर्वत श्रेणियाँ: अरावली की तीन संकेंद्रित श्रेणियाँ
  • नदियाँ: बैराठ नाला (बनगंगा), बांडोल नाला
  • प्रमुख टीले: बीजक की पहाड़ी, भीमजी की दूंगरी, महादेव जी की दूंगरी, गणेश दूंगरी

3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

📜 प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख

  • महाभारत: मत्स्य जनपद की राजधानी, पांडुओं का अज्ञातवास
  • शतपथ ब्राह्मण: मत्स्य जनपद का उल्लेख
  • मनुस्मृति: मत्स्य जनपद को ब्रह्मर्षि देश का भाग
  • बौद्ध साहित्य: 16 महाजनपदों में मत्स्य
  • ह्वेनसांग (634 ई.): 'पारियात्र' (Poliye-tolo) नाम दिया

⏳ कालक्रम

  • महाभारत काल: पांडुओं का अज्ञातवास, राजा विराट
  • मौर्य काल (250 ई.पू.): अशोक द्वारा बौद्ध स्मारक
  • ई.पू. 50 ई. तक: यूनानी शासकों का प्रभाव
  • 510-540 ई.: मिहिरकुल (हूण) आक्रमण द्वारा विनाश
  • 634 ई.: ह्वेनसांग का दौरा
  • मुगल काल: अकबर की टकसाल एवं शिकारगाह

4. बैराठ के प्रमुख पुरातात्विक स्थल

4.1 बीजक की पहाड़ी (Bijak-ki-Pahari)

बीजक की पहाड़ी बैराठ का सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यह घाटी के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित है और लगभग 3/4 मील की परिधि में फैली हुई है।

🏗️ ऊपरी चबूतरा
  • बौद्ध मठ के अवशेष
  • 36 चाँदी की मुद्राएँ (8 पंचमार्क + 28 यूनानी)
  • मिट्टी की मूर्तियाँ (नृत्य करती यक्षिणी)
🏛️ निचला चबूतरा
  • गोल मंदिर (Circular Temple) – विश्व का प्राचीनतम संरचनात्मक मंदिर
  • अशोक स्तंभ के सैकड़ों पॉलिश किए गए टुकड़े
  • चौड़ी सीढ़ियाँ (अब नष्ट)
  • स्वर्ण कलश (Golden Casket) – बुद्ध के अस्थि अवशेष

📌 महत्वपूर्ण: बीजक की पहाड़ी से लगभग 250 ई.पू. से 50 ई.पू. के अवशेष प्राप्त हुए हैं। अलेक्जेंडर कनिंघम ने 1864-65 में पहला सर्वेक्षण किया था।

4.2 भीमजी की दूंगरी (Bhimji-ki-Dungri)

यह पहाड़ी बैराठ शहर से लगभग 1 मील उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है।

💧 भीमताल
  • बड़ा गड्ढा जो पानी से भरा रहता है
  • मान्यता: भीम ने कुंती की प्यास बुझाने के लिए गदा से पानी निकाला
📜 अशोक शिलालेख
  • इसी पहाड़ी के नीचे बड़ी चट्टान पर अशोक का शिलालेख उत्कीर्ण है
  • ए.सी.एल. कार्लाइल (1871-72) द्वारा खोजा गया

4.3 महादेव जी की दूंगरी

यह बीजक की पहाड़ी के ठीक पूर्व में स्थित है। यहाँ मुगल काल के अवशेष मिले हैं:

  • मुगल दरवाजा – फ्रेस्को पेंटिंग के साथ
  • रॉक-कट तालाब
  • छतरी – संवत 1733 (1676 ई.) का शिलालेख
  • बांध – पत्थर की चिनाई वाला बड़ा जलाशय

4.4 प्राचीन शैलचित्र (Pre-Historic Rock Paintings)

बैराठ की पहाड़ियों (बीजक, भीमजी और गणेश दूंगरी) में शैलचित्र (Rock Paintings) मिले हैं। इन चित्रों में शिकार के दृश्य, पशु-पक्षी और मानव आकृतियाँ बनाई गई हैं। इसी कारण बैराठ को "प्राचीन युग की चित्रशाला" भी कहा जाता है।

📌 RPSC परीक्षा हेतु: बैराठ के शैलचित्र प्रस्तर युगीन कला के दुर्लभ उदाहरण हैं।

5. अशोक स्तम्भ एवं शिलालेख (Asokan Edicts & Pillars)

📜 बैराठ-कलकत्ता अभिलेख (Bairat-Calcutta Edict)

✨ विशेषताएँ
  • यह एकमात्र शिलालेख है जो पत्थर की स्लैब (śila-phalaka) पर उत्कीर्ण है
  • अन्य सभी अशोक के शिलालेख स्तंभ (śila-thamba) पर हैं
  • ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण
  • कैप्टन ए. बर्ट ने 1837 ई. में खोजा सुधारित
  • 1840 ई. में कोलकाता के एशियाटिक सोसाइटी संग्रहालय में स्थानांतरित
📖 संदेश

अशोक ने भिक्षुओं, भिक्षुणियों, और आम जनता से बौद्ध ग्रंथों के 7 विशेष अंशों को सुनने और अध्ययन करने का आग्रह किया:

  • 1. मुनिसुत्त (सुत्त निपात)
  • 2. उपतिस्स-पञ्हो (सारिपुत्त का अस्सजि से प्रश्न)
  • 3. अनागतभयानि (भविष्य के संकट)
  • 4. राहुलोवाद सुत्त (राहुल को उपदेश)

RPSC तथ्य: द्वितीय शिलालेख 1871-72 में ए.सी.एल. कार्लाइल ने भीमजी की दूंगरी से खोजा।

🪨 अशोक स्तंभ के अवशेष

  • चुनार पत्थर के हजारों पॉलिश किए गए टुकड़े
  • दो स्तंभों के अवशेष – विद्वानों (डॉ. सत्यप्रकाश) के अनुसार
  • एक टुकड़े पर शेर की आकृति के अंश
  • तांबे की बोल्ट के लिए छेद वाला शीर्ष भाग
  • एक टुकड़े पर 'na' अक्षर उत्कीर्ण
📌 विनाश का कारण
  • मिहिरकुल (श्वेत हूण) के आक्रमण (510-540 ई.)
  • विद्वानों के अनुसार धर्मांधता के कारण ध्वस्त किए गए
  • बौद्ध स्मारकों के साथ-साथ मंदिर और मठ भी नष्ट किए गए

📌 उत्खननकर्ता: 1936-37दयाराम साहनी; 1962-63नीलरत्न बनर्जी और कैलाशनाथ पूरी (K.N. Puri)

6. गोल मंदिर (Circular Temple)

🏛️ वास्तुकला की विशेषताएँ

  • आकार: गोलाकार कक्ष
  • व्यास: 27 फीट 2 इंच (आंतरिक)
  • परिक्रमा पथ: 7 फीट 3 इंच चौड़ा
  • दरवाज़ा: पूर्व दिशा में, 6 फीट चौड़ा
  • स्तंभ: 26 अष्टकोणीय लकड़ी के स्तंभ

🧱 ईंटों का विशेष अनुपात

  • पच्चर के आकार (Wedge-shaped) की ईंटें
  • 20 इंच लंबाई
  • 12 इंच और 9 इंच चौड़ाई (सिरों पर)
  • 3 इंच मोटाई

🏛️ ऐतिहासिक महत्व: यह विश्व का सबसे पुराना संरचनात्मक (structural) मंदिर है, जिसने जून्नर (Junnar) की चैत्य गुफा और अन्य रॉक-कट मंदिरों के लिए मॉडल का काम किया।

🔍 विशेष विशेषताएँ
  • लकड़ी के दरवाज़े – बड़े लोहे की कीलों से मजबूत
  • मिट्टी के प्लास्टर – चूने का प्लास्टर
  • पकी हुई मिट्टी की टाइलें – छत पर नालीदार टाइलें
  • पूजा सामग्री – धूपदानी, थालियाँ, घड़े, खप्पर
📌 महत्वपूर्ण
  • निर्माता: सम्राट अशोक
  • आयु: लगभग 250 ई.पू.
  • पूजा वस्तु: स्तूप (बुद्ध के अवशेष)
  • मंदिर की दीवारों पर ब्राह्मी लिपि में बौद्ध ग्रंथ उत्कीर्ण

7. बौद्ध मठ (Buddhist Monastery)

🧱 मठ की विशेषताएँ

  • स्थान: बीजक की पहाड़ी का ऊपरी चबूतरा
  • कोठरियाँ (Cells): दो पंक्तियों में 6-7 कोठरियाँ
  • आकार: बड़ी और छोटी कोठरियाँ बारी-बारी से
  • प्रत्येक कोठरी: एक भिक्षु के रहने योग्य
  • ईंटों का आकार: 20 × 10.5 × 2.75 इंच
  • अनुपात: 4:2:1 (लंबाई : चौड़ाई : मोटाई)
  • निर्माण: मिट्टी के गारे का उपयोग, चूने का प्लास्टर

📦 प्राप्त वस्तुएँ

  • मिट्टी की मूर्तियाँ – नृत्य करती यक्षिणी
  • लोहे की कीलें – विभिन्न आकार की
  • शिस्ट (Schist) की तख्तियाँ – तावीज़
  • तांबे की सूई – भिक्षुओं की आवश्यक वस्तु
  • लोहे का दरांती – घास काटने के लिए
  • स्वर्ण कलश (Golden Casket) – बुद्ध के अस्थि अवशेष

📌 महत्वपूर्ण: मठ से कपड़े में बंद 8 पंचमार्क मुद्राएँ और 28 यूनानी/इंडो-ग्रीक सिक्के मिले हैं।

📌 विशेष: मठ हीनयान संप्रदाय से संबंधित है, क्योंकि यहाँ बुद्ध की मानव-आकृति नहीं मिली है। महायान संप्रदाय का विकास बाद में (लगभग 2 शताब्दी ई.) हुआ।

8. मुद्राएँ एवं सिक्के (Coins)

बैराठ से कुल 36 चाँदी की मुद्राएँ मिली हैं, जो एक मिट्टी के घड़े में बौद्ध मठ की एक कोठरी में छिपी हुई थीं।

🏷️ मुद्राओं का वर्गीकरण

प्रकार संख्या विशेषताएँ
पंचमार्क मुद्राएँ 8 चाँदी की, सूती कपड़े में बंधी
यूनानी/इंडो-ग्रीक 28 चाँदी की, मुख्यतः मिनेंडर (16)

👑 प्रमुख सिक्के

  • मिनेंडर (Menander): 16 सिक्के (लगभग 150-130 ई.पू.)
  • एंटियाल्किडास (Antialkidas): 1 सिक्का
  • हेलियोक्लीज़ (Heliokles): 1 सिक्का (लगभग 140 ई.पू.)
  • अपोलोडोटस (Apollodotos): 1 सिक्का
  • स्ट्रेटो (Strato): 2 सिक्के
  • हेर्मायोस (Hermaios): 6 सिक्के (20-45 ई.पू.)

📌 महत्व: ये सिक्के 50 ई.पू. तक बौद्ध मठ के उपयोग में रहने का प्रमाण देते हैं। यूनानी शासकों (मिनेंडर) का यहाँ प्रभाव दर्शाते हैं।

9. मौर्यकालीन सूती कपड़ा (Mauryan Textile)

बैराठ से मौर्यकालीन सूती कपड़ा (Cotton Cloth) मिला है, जो राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण है। 8 पंचमार्क मुद्राएँ इसी कपड़े में बंधी हुई थीं।

🔬 कपड़े का विश्लेषण

  • तंतु (Fibre): कपास (Cotton) – सूक्ष्मदर्शी परीक्षण में कंवल्यूशन (Convolution) पाए गए
  • वज़न: 1 वर्ग गज = 3.3 औंस
  • धागों की संख्या: 50 (लंबाई), 34 (चौड़ाई) प्रति इंच
  • धागों की मोटाई: 20 और 16 यार्न

📌 ऐतिहासिक महत्व

  • राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण
  • मौर्यकालीन बुने हुए वस्त्र का दुर्लभ साक्ष्य
  • मुद्राओं/सिक्कों को लपेटने के काम आया था
  • हरे रंग का दाग: तांबे के सिक्कों के जंग के कारण
  • परीक्षण: ए.एन. गुलाटी और ए.जे. टर्नर (Indian Central Cotton Committee)

✅ सही तथ्य (सुधारित): बैराठ का सूती कपड़ा "विश्व का सबसे पुराना" नहीं है (मोहनजोदड़ो 3000 ई.पू. का कपड़ा पुराना है)। यह राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम एवं मौर्यकालीन बुने हुए वस्त्र का दुर्लभ साक्ष्य है।

10. स्वर्ण कलश (Golden Casket) – बुद्ध के अस्थि अवशेष

📜 ऐतिहासिक तथ्य

  • जयपुर महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय के शासनकाल में उत्खनन के दौरान बीजक की पहाड़ी से स्वर्ण कलश (Gold Casket) मिला था
  • इस कलश में भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष (भस्म) संरक्षित थे
  • यह बौद्ध धर्म के प्रति बैराठ के महत्व को दर्शाता है
  • यह RPSC/RAS परीक्षाओं में बार-बार पूछा गया महत्वपूर्ण तथ्य है

📌 महत्व

  • यह अशोक द्वारा बनाए गए बौद्ध स्तूप की पुष्टि करता है
  • बुद्ध के अस्थि अवशेषों की उपस्थिति से बैराठ बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में महत्वपूर्ण है
  • इस खोज ने बैराठ के मौर्य कालीन बौद्ध केंद्र होने को प्रमाणित किया
  • 📌 RPSC हॉट-फेवरेट: यह प्रश्न RAS 2018, 2021 और RPSC स्कूल व्याख्याता परीक्षाओं में पूछा जा चुका है।

🏆 अतिमहत्वपूर्ण: सवाई रामसिंह द्वितीय के समय मिला स्वर्ण कलश बैराठ के बौद्ध धर्म से संबंध का सबसे प्रबल प्रमाण है।

11. महाभारत काल से संबंध (Mahabharata Connection)

📖 पांडुओं के छद्म नाम

पांडव छद्म नाम कार्य
युधिष्ठिर कंक जुआरी
भीम वल्लभ रसोइया
अर्जुन बृहन्नला नृत्य-शिक्षक
नकुल ग्रंथिक अश्व-रक्षक
सहदेव तन्त्रिपाल गो-रक्षक
द्रौपदी सैरन्ध्री रानी की सेविका

🏛️ महाभारत से संबंधित स्थल

  • भीमताल: भीम द्वारा पानी निकालना
  • भीमजी की दूंगरी: भीम का निवास स्थान
  • राजा विराट: मत्स्य देश के राजा
  • उत्तरा: राजा विराट की पुत्री, अभिमन्यु की पत्नी

📌 सावधान: बैराठ के महाभारत से संबंध को पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन स्थानीय परंपरा और साहित्यिक स्रोत इसे प्रमाणित करते हैं।

12. मुगल काल से संबंध (Mughal Period)

🏛️ मुगल काल के अवशेष

  • टकसाल (Mint): अकबर ने यहाँ टकसाल स्थापित की। अकबर, जहाँगीर, और शाहजहाँ के तांबे के सिक्के यहाँ ढाले गए।
  • शिकारगाह: अकबर, जहाँगीर, और औरंगज़ेब यहाँ शिकार करने आते थे।
  • अकबर की छतरी (अकबर की मंजिल)
  • मुगल उद्यान: पत्थर के स्तंभ और संगमरमर का उपयोग

🕌 अन्य महत्वपूर्ण स्मारक

  • ईदगाह: पापड़ी गाँव में स्थित, नूर-उद-दीन जहाँगीर के शासनकाल (1613 ई.) में निर्मित
  • मस्जिद: हिजरी 895 (लगभग 1489 ई.) की मस्जिद, सैय्यद वंश के आलाउद्दीन आलमशाह का शिलालेख
  • जैन मंदिर: अकबर के शासनकाल में निर्मित, श्री हिरविजय सूरि द्वारा प्रतिष्ठित

📌 अकबर का फरमान: श्री हिरविजय सूरि के आग्रह पर अकबर ने 106 दिनों के लिए जीव-हिंसा पर प्रतिबंध लगाया।

13. पतन के कारण (Decline)

  • हूण आक्रमण (510-540 ई.): मिहिरकुल (श्वेत हूण) के आक्रमण – अशोक स्तंभ ध्वस्त किए गए, बौद्ध मठ और स्तूप नष्ट कर दिए गए।
  • अर्थव्यवस्था का पतन: व्यापार मार्गों में बदलाव, व्यापारिक गतिविधियों में कमी।
  • प्राकृतिक कारण: जलवायु परिवर्तन, जल स्रोतों का सूखना, सरस्वती नदी का सूखना।
  • राजनीतिक कारण: मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद स्थानीय शासकों का कमजोर होना।

📌 महत्वपूर्ण: ह्वेनसांग (634 ई.) ने बैराठ का दौरा किया, लेकिन तब तक यह अपनी प्राचीन समृद्धि खो चुका था।

14. परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Important Facts for Exams)

✅ मुख्य तथ्य

  • प्राचीन नाम: विराटनगर, विराटपुर
  • जनपद: मत्स्य जनपद (16 महाजनपदों में एक)
  • वर्तमान जिला: कोटपूतली-बहरोड़ (2023-24)
  • महाभारत संबंध: पांडुओं का अज्ञातवास
  • अशोक शिलालेख: ब्राह्मी लिपि, 7 बौद्ध ग्रंथों का उल्लेख
  • अशोक स्तंभ: चुनार पत्थर, 2 स्तंभों के अवशेष
  • गोल मंदिर: विश्व का प्राचीनतम संरचनात्मक मंदिर
  • बौद्ध मठ: हीनयान संप्रदाय

📝 परीक्षा-उपयोगी बिंदु

  • 💰 मुद्राएँ: 36 चाँदी की मुद्राएँ (8 पंचमार्क + 28 यूनानी)
  • 👑 मिनेंडर: 16 सिक्के – सबसे अधिक संख्या
  • 👕 सूती कपड़ा: राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण (मौर्य काल)
  • 🏆 स्वर्ण कलश: सवाई रामसिंह द्वितीय के समय मिला, बुद्ध के अवशेष
  • 🧱 ईंटों का अनुपात: 4:2:1 (लंबाई : चौड़ाई : मोटाई)
  • 🏛️ गोल मंदिर: अशोक द्वारा निर्मित, 26 लकड़ी के स्तंभ
  • 🪦 पतन: मिहिरकुल (हूण) आक्रमण 510-540 ई.
  • ⛏️ उत्खनन: 1936-37 (दयाराम साहनी), 1962-63 (नीलरत्न बनर्जी + कैलाशनाथ पूरी)
  • 🏔️ प्रमुख पहाड़ियाँ: बीजक की पहाड़ी, भीमजी की दूंगरी, गणेश दूंगरी
  • 📜 ह्वेनसांग: 634 ई. में बैराठ को 'पारियात्र' (Poliye-tolo) कहा
परीक्षा में महत्व

बैराठ क्यों महत्वपूर्ण है?

बैराठ (विराटनगर) राजस्थान के इतिहास, महाभारत काल, बौद्ध धर्म और मौर्य साम्राज्य के अध्ययन का केंद्रबिंदु है। RAS, RPSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस स्थल से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

  • 1 मत्स्य जनपद की राजधानी: 16 महाजनपदों में एक, महाभारत काल का महत्वपूर्ण नगर।
  • 2 पांडुओं का अज्ञातवास: यहाँ उन्होंने राजा विराट की सेवा में एक वर्ष बिताया।
  • 3 मौर्यकालीन सूती कपड़ा: राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण।
  • 4 विश्व का प्राचीनतम संरचनात्मक मंदिर: अशोक द्वारा निर्मित गोल मंदिर।
  • 5 स्वर्ण कलश: बुद्ध के अस्थि अवशेष — RPSC का हॉट-फेवरेट प्रश्न।
  • 6 यूनानी-भारतीय संबंध: मिनेंडर के 16 सिक्के।
सभी विषय पढ़ें

महाभारत काल

पांडुओं का अज्ञातवास

अशोक शिलालेख

ब्राह्मी लिपि, 7 ग्रंथ

गोल मंदिर

विश्व का प्राचीनतम

स्वर्ण कलश

बुद्ध के अवशेष

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

बैराठ (विराटनगर) से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर।

बैराठ का प्राचीन नाम 'विराटनगर' या 'विराटपुर' था। यह मत्स्य जनपद की राजधानी थी, जो 16 महाजनपदों में से एक था। वर्तमान में यह कोटपूतली-बहरोड़ जिले में स्थित है।
पांडुओं ने अपने अज्ञातवास का अंतिम वर्ष यहाँ राजा विराट की सेवा में बिताया था। इस अवधि में उन्होंने छद्म नाम धारण किए — युधिष्ठिर (कंक), भीम (वल्लभ), अर्जुन (बृहन्नला), नकुल (ग्रंथिक), सहदेव (तन्त्रिपाल), और द्रौपदी (सैरन्ध्री)।
बैराठ में सम्राट अशोक के शिलालेख ब्राह्मी लिपि में मिले हैं। कैप्टन ए. बर्ट ने 1837 ई. में पहला शिलालेख खोजा (1840 में कोलकाता स्थानांतरित)। ए.सी.एल. कार्लाइल ने 1871-72 में भीमजी की दूंगरी से दूसरा शिलालेख खोजा।
बैराठ का गोल मंदिर विश्व का सबसे पुराना संरचनात्मक (structural) मंदिर है। इसे सम्राट अशोक ने लगभग 250 ई.पू. में बनवाया था। इसकी विशेषता 26 अष्टकोणीय लकड़ी के स्तंभ, पच्चर के आकार की ईंटें, और गोलाकार संरचना है।
RPSC में बार-बार पूछी गई खोजें: (1) स्वर्ण कलश — जयपुर महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय के समय मिला, इसमें बुद्ध के अस्थि अवशेष थे। (2) 36 चाँदी की मुद्राएँ — 8 पंचमार्क + 28 यूनानी (मिनेंडर सर्वाधिक 16)। (3) सूती कपड़ा — राजस्थान में सूती वस्त्र का प्राचीनतम प्रमाण (मौर्य काल)। (4) शैलचित्र — बीजक, भीमजी व गणेश दूंगरी में प्रस्तर युगीन चित्र।
पतन: मिहिरकुल (श्वेत हूण) के आक्रमण (510-540 ई.) से। उत्खनन: अलेक्जेंडर कनिंघम (1864-65 पहला सर्वेक्षण), दयाराम साहनी (1936-37), नीलरत्न बनर्जीकैलाशनाथ पूरी (K.N. Puri) (1962-63)।

अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जाएँ

राजस्थान के इतिहास और प्राचीन सभ्यताओं से जुड़े अन्य अध्ययन सामग्री