राजस्थान के वन्य जीव एवं वन :
ISFR वन रिपोर्ट, 5 बाघ परियोजनाएँ, अभयारण्य व कंजर्वेशन रिजर्व
राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 9.60% भाग (32,864.62 वर्ग किमी) वन आवरण के अंतर्गत आता है। राज्य में 3 राष्ट्रीय उद्यान, 5 बाघ परियोजनाएँ (रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा, रामगढ़ विषधारी, धौलपुर-करौली), 26 अभयारण्य, 2 रामसर साइट्स एवं 36+ कंजर्वेशन रिजर्व स्थित हैं। 50 नवीन ज़िलों एवं ISFR वन रिपोर्ट पर आधारित प्रामाणिक अध्ययन सामग्री।
राजस्थान में सर्वाधिक विस्तृत प्रशासनिक वन सुरक्षित / रक्षित वन (56.49%) हैं।
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प्रशासनिक व भौगोलिक वन वर्गीकरण, 3 राष्ट्रीय उद्यान, 5 बाघ परियोजनाएँ, प्रमुख अभयारण्य, रामसर साइट्स एवं 50 नवीन ज़िलों अनुसार अद्यतन तथ्य।
1. वन सांख्यिकी (ISFR Report) एवं प्रशासनिक वर्गीकरण
राजस्थान राज्य की प्रथम राज्य वन नीति 18 फरवरी 2010 को जारी की गई थी (ऐसा करने वाला राजस्थान भारत का पहला राज्य बना)। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) के अनुसार राजस्थान का कुल अभिलेखित वन क्षेत्र (Recorded Forest Area) 32,864.62 वर्ग किमी (राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का 9.60%) है।
(A) प्रशासनिक वर्गीकरण (Administrative Forest Classification)
• पूर्णतः सरकारी नियंत्रण में।
• लकड़ी कटाई एवं पशुचारण पूर्णतः प्रतिबंधित।
• सर्वाधिक आरक्षित वन: उदयपुर जिला।
• राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल (56.49%)।
• विशेष अनुमति पर सीमित पशुचारण व सूखी लकड़ी कटाई की छूट।
• सर्वाधिक सुरक्षित वन: बाराँ जिला।
• बिना किसी विशेष प्रतिबंध के पशुचारण व लकड़ी कटाई हेतु खुले। (मामूली शुल्क देय)।
• सर्वाधिक अवर्गीकृत वन: बीकानेर जिला।
2. राजस्थान के वनों का भौगोलिक वर्गीकरण
• राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्रफल (~58%) पर विस्तृत वन।
• अरावली के मैदानी व मध्य ढालों (जयपुर, अलवर, करौली, सवाई माधोपुर) में पाए जाते हैं।
• कुल वनों का लगभग 6.86% भाग।
• दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर) में 75-110 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में।
• पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश (6-7% भाग)।
• मुख्य वृक्ष: खेजड़ी (राजस्थान का कल्पवृक्ष - प्रोसोपिस सिनेरेरिया), रोहिड़ा (राज्य पुष्प), कैर, बबूल।
• कुल वनों का ~28% भाग। उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सिरोही।
• मुख्य वृक्ष: सालर, धाक/पलाश ('जंगल की ज्वाला' - Flame of Forest), खैर।
• केवल माउंट आबू (सिरोही) क्षेत्र (कुल वनों का 0.39% से कम भाग) में 150 सेमी+ वर्षा वाले स्थान पर।
• यहाँ 'डिकिलिप्टेरा आबूएनसिस' (Amberdvat) नामक दुर्लभ जड़ी-बूटी पाई जाती है।
3. राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
• स्थान: सवाई माधोपुर।
• राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान (1980)।
• इसे 'भारतीय बाघों की क्रीड़ास्थली' कहा जाता है।
• उद्यान परिसर में प्रसिद्ध 'त्रिनेत्र गणेश मंदिर' एवं 'पदम ताला' स्थित है।
• स्थान: भरतपुर (क्षेत्रफल: 28.73 वर्ग किमी - सबसे छोटा)।
• यूनेस्को (UNESCO) विश्व प्राकृतिक धरोहर (1985) सूची में शामिल।
• साइबेरियन सारस (Siberian Crane) का प्रसिद्ध शीतकालीन पड़ाव। डॉक्टर सलीम अली की कर्मस्थली।
• स्थान: कोटा, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बूंदी।
• पूर्व नाम: राजीव गांधी नेशनल पार्क / दराह अभयारण्य।
• यहाँ 'गागरोनी तोता' (हीरामण तोता - मानव की भांति बोलने वाला) एवं 'अबली मीणी का महल' स्थित है।
3. राजस्थान की 5 बाघ परियोजनाएँ (5 Tiger Reserves of Rajasthan)
राजस्थान में अब कुल 5 बाघ परियोजनाएँ (Tiger Reserves) कार्यरत हैं। भारत के 'टाइगर मैन' के नाम से प्रसिद्ध कैलाश सांखला (जोधपुर) ने 'प्रोजेक्ट टाइगर' (1973) के शुभारंभ में अग्रणी भूमिका निभाई थी:
रणथंभौर बाघ परियोजना
• ज़िला: सवाई माधोपुर, करौली, बूंदी।
• राज्य की पहली एवं सबसे प्रसिद्ध बाघ परियोजना।
सरिस्का बाघ परियोजना
• ज़िला: अलवर।
• हरे कबूतरों (Green Pigeons) एवं भर्त्तहरि मंदिर हेतु प्रसिद्ध।
मुकुंदरा हिल्स बाघ परियोजना
• ज़िला: कोटा, झालावाड़, बूंदी, चित्तौड़गढ़।
• 9 अप्रैल 2013 को बाघ परियोजना घोषित।
रामगढ़ विषधारी बाघ परियोजना
• ज़िला: बूंदी (भारत का 52वाँ टाइगर रिजर्व)।
• इसे 'रणथंभौर के बाघों का जच्चा-बच्चा गृह' कहा जाता है।
धौलपुर-करौली बाघ परियोजना
• ज़िला: धौलपुर व करौली (भारत की 54वीं एवं राजस्थान की 5वीं बाघ परियोजना)।
• NTCA द्वारा अगस्त 2023 में आधिकारिक स्वीकृति दी गई।
राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व: स्थापना टाइमलाइन (SVG Diagram)
4. राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य (Key Wildlife Sanctuaries)
• ज़िला: जैसलमेर एवं बाड़मेर। (क्षेत्रफल: 3,162 वर्ग किमी - राजस्थान का सबसे बड़ा अभयारण्य)।
• राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) की मुख्य शरणस्थली।
• इसके अंतर्गत 'आकल वुड फॉसिल पार्क' स्थित है जहाँ 18 करोड़ वर्ष पुराने काष्ठ जीवाश्म मिले हैं। पीवणा सांप भी यहाँ पाया जाता है।
• ज़िला: प्रतापगढ़ एवं चित्तौड़गढ़।
• 'उड़न गिलहरी' (Flying Squirrel - मसोवा) एवं 'चोसिंगा' (घोटारू - चार सींगों वाला एंटीलोप) हेतु प्रसिद्ध।
• यहाँ लव-कुश दो प्राकृतिक जलस्रोत तथा हिमालय के बाद सर्वाधिक 'औषधीय पौधे' पाए जाते हैं।
• ज़िला: चूरू।
• 'कृष्णमृग' (Black Buck) एवं प्रवासी पक्षी 'कुरंजा' (Demoiselle Crane) की शरणस्थली।
• यहाँ काले हिरणों की पसंदीदा नरम 'मोचिया साइप्रस रोटेंडस' घास उगती है।
• ज़िला: सिरोही।
• 'जंगली मुर्गों' (Wild Cocks) व दुर्लभ 'ग्रीन मुनिया' (आबूडेंस) चिड़िया हेतु प्रसिद्ध।
• जयसमंद अभयारण्य (सलूंबर ज़िला - नवीन): 'जलचरों की बस्ती' कहलाता है।
• भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य (चित्तौड़गढ़): घड़ियालों हेतु प्रसिद्ध।
• कुंभलगढ़ अभयारण्य (राजसमंद, उदयपुर, पाली): 'भेड़ियों की प्रजनन स्थली'।
• सज्जनगढ़ अभयारण्य (उदयपुर): राजस्थान का दूसरा सबसे छोटा अभयारण्य (5.19 वर्ग किमी)।
5. रामसर साइट्स, कंजर्वेशन रिजर्व एवं खींचन (फलौदी)
• खींचन गाँव (अब नवीन ज़िला फलौदी): साइबेरिया से आने वाले प्रवासी पक्षी 'कुरंजा' (Demoiselle Crane) की प्रसिद्ध शरणस्थली है। इसे देश का पहला कुरंजा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।
• राजस्थान का प्रथम कंजर्वेशन रिजर्व: बीसलपुर (टोंक)।
• क्षेत्रफल में सबसे बड़ा: शाहबाद के जंगल (बाराँ)।
• क्षेत्रफल में सबसे छोटा: रोटू (नागौर)।
• सर्वाधिक कंजर्वेशन रिजर्व: झुंझुनूं जिले में (बीड़, मनसा माता, शाकंभरी, बांसियाल आदि) स्थित हैं।
6. प्रमुख बाघ परियोजनाओं व अभयारण्यों की तुलनात्मक सारणी
| संरक्षित क्षेत्र का नाम | प्रकार / दर्जा | स्थापना / घोषणा वर्ष | ज़िला (नवीन 50 अनुसार) | मुख्य प्रसिद्ध जीव / पहचान |
|---|---|---|---|---|
| रणथंभौर | राष्ट्रीय उद्यान + TR 1 | 1980 (NP) / 1973 (TR) | सवाई माधोपुर | भारतीय बाघ (Tiger), त्रिनेत्र गणेश मंदिर |
| केवलादेव घना | राष्ट्रीय उद्यान + Ramsar | 1981 (NP) / 1985 (UNESCO) | भरतपुर | साइबेरियन सारस, पक्षियों का स्वर्ग |
| सरिस्का | अभयारण्य + TR 2 | 1978-79 (TR) | अलवर | हरे कबूतर, मोर, भर्त्तहरि मंदिर |
| रामगढ़ विषधारी | अभयारण्य + TR 4 | 2021-22 (52nd India TR) | बूंदी | बाघों का जच्चा-बच्चा गृह, विषधारी सर्प |
| धौलपुर-करौली | TR 5 (नवीन) | अगस्त 2023 (54th India TR) | धौलपुर एवं करौली | बाघ संरक्षण कॉरिडोर (नवीनतम) |
| राष्ट्रीय मरु उद्यान | वन्यजीव अभयारण्य | 1981 (सबसे बड़ा 3162km²) | जैसलमेर एवं बाड़मेर | गोडावण (GIB), आकल वुड फॉसिल पार्क |
परीक्षा-उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick One-Liners)
- भारत के 'टाइगर मैन' कैलाश सांखला (जोधपुर) माने जाते हैं।
- राजस्थान में सर्वाधिक वन क्षेत्रफल उदयपुर जिले में तथा न्यूनतम चूरू जिले में है।
- राजस्थान का राज्य कल्पवृक्ष 'खेजड़ी' (प्रोसोपिस सिनेरेरिया) एवं राज्य पुष्प 'रोहिड़ा' (टेकोमेला एण्डुलेटा) है।
- उड़न गिलहरी के लिए प्रसिद्ध अभयारण्य सीतामाता अभयारण्य (प्रतापगढ़) है।
- 'जंगल की ज्वाला' (Flame of the Forest) पलाश / ढाक (Butea monosperma) को कहा जाता है।
- राजस्थान की 5वीं बाघ परियोजना धौलपुर-करौली (अगस्त 2023) है।
- जयसमंद अभयारण्य अब नवीन सलूंबर जिले के अंतर्गत आता है।
- खींचन गाँव (कुरंजा पक्षी पड़ाव) अब नवीन फलौदी जिले में स्थित है।
- राजस्थान में सर्वाधिक सुरक्षित / रक्षित वन (56.49%) पाए जाते हैं।
- राजस्थान का राज्य वन्यजीव पशु 'चिंकारा' (गजेला-गजेला - 1981) तथा राज्य पशु (पशुधन श्रेणी) 'ऊंट' (2014) है।