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राजस्थान भूगोल – खनिजों का अजायबघर & खनन नीतियाँ

राजस्थान के खनिज संसाधन :
धात्विक, अधात्विक, 4 पेट्रोलियम बेसिन, रिफाइनरी व नवीन 50 ज़िले

विभिन्न प्रकार के खनिजों की प्रचुरता के कारण राजस्थान को 'खनिजों का अजायबघर' (Museum of Minerals) कहा जाता है। राज्य में लगभग 81 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनमें से 57 प्रकार के खनिजों का खनन किया जा रहा है। वोलस्टोनाइट, जास्पर एवं तामड़ा में राजस्थान का 100% एकाधिकार है। 4 प्रमुख पेट्रोलियम बेसिन, पचपदरा (बालोतरा) रिफाइनरी एवं 50 नवीन ज़िलों (नीम का थाना, डिडवाना, सलूंबर आदि) के अनुसार अद्यतन प्रामाणिक नोट्स।

Mines Dept & RSMML Standard RAS / RPSC / RSSB Pachpadra Balotra Refinery
खनिज सांख्यिकी महत्वपूर्ण आँकड़े
कुल पाए जाने वाले खनिज 81 प्रकार (57 का खनन)
100% एकाधिकार खनिज वोलस्टोनाइट, जास्पर, तामड़ा
देश में भंडार रैंक द्वितीय स्थान (झारखंड प्रथम)
प्रथम खनन नीति 1978 (भैरोंसिंह शेखावत)
रिफाइनरी: पचपदरा (बालोतरा) | हिस्सेदारी: HPCL 74% : राज. 26%
गहन अध्ययन नोट्स

राजस्थान के खनिज संसाधन: विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण

धात्विक व अधात्विक खनिज, एकाधिकार वाले खनिज, 4 पेट्रोलियम बेसिन, पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट एवं 50 नवीन ज़िलों अनुसार अद्यतन तथ्य।

1. खनिज संसाधन का सामान्य परिचय एवं खनन नीतियाँ

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की प्राचीन आद्य महाकल्पीय (Pre-Cambrian) आग्नेय व कायांतरित चट्टानों तथा पश्चिमी थार मरुस्थल की अवसादी (Sedimentary) चट्टानों में विभिन्न प्रकार के बहुमूल्य खनिज पाए जाते हैं। राज्य में 'राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड' (RSMML) खनिज विकास की शीर्ष संस्था है (मुख्यालय: उदयपुर, स्थापना: 1974)।

राजस्थान की प्रमुख खनन नीतियाँ (Mining Policies)

  • प्रथम खनन नीति: 1978 (मुख्यमंत्री श्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में)।
  • द्वितीय खनन नीति: 1994 | तृतीय खनन नीति: 2011
  • नवीनतम (4थी) खनन नीति: 4 जून 2015 को जारी की गई।
  • एम-सैंड नीति (M-Sand Policy): 25 जनवरी 2021 (बजरी विकल्प के रूप में मैन्युफैक्चर्ड सैंड को बढ़ावा)।

राजस्थान का राष्ट्रीय खनिज उत्पादन सूचकांक

  • भंडारण (Reserves): देश में दूसरा स्थान (झारखंड प्रथम)।
  • उत्पादन मूल्य (Value): देश में द्वितीय स्थान।
  • अधात्विक खनिजों में: उत्पादन एवं मूल्य की दृष्टि से प्रथम स्थान
  • कच्चा तेल (Crude Oil): बॉम्बे हाई के बाद देश में द्वितीय सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र।

DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट): खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास हेतु वर्ष 2015-16 से राजस्थान के सभी जिलों में गठन किया गया।

2. राजस्थान के प्रमुख धात्विक खनिज (Metallic Minerals)

(i) सीसा-जस्ता (Lead & Zinc) – अयस्क: गैलेना (Galena)

राजस्थान का लगभग एकाधिकार
  • जावर खान (सलूंबर ज़िला - नवीन): भारत की सबसे प्राचीन सीसा-जस्ता व चाँदी की खान (राणा लखा के शासनकाल में खोज)।
  • रामपुरा-आगुचा (भीलवाड़ा / शाहपुरा ज़िला): देश का सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाला सीसा-जस्ता भंडार।
  • राजपुरा-दरीबा: राजसमंद जिला।
  • चौथ का बरवाड़ा: सवाई माधोपुर।
  • गुढ़ा किशोरीदास: अलवर जिला।
  • संयंत्र: 'चंदेरिया जिंक स्मेल्टर' (चित्तौड़गढ़ - एशिया का सबसे बड़ा सुपर जिंक स्मेल्टर) व देवारी (उदयपुर)।

(ii) तांबा (Copper) – अयस्क: चालकोपायराइट (Chalcopyrite)

देश में द्वितीय स्थान (झारखंड प्रथम)
  • खेतड़ी-सिंघाना (नीम का थाना ज़िला - नवीन): भारत की प्रसिद्ध 'ताम्र नगरी' (Copper Belt)।
  • खो-दरीबा: अलवर जिला।
  • अंजनी-सलूंबर: सलूंबर व उदयपुर।
  • भगोनी व प्रतापगढ़: अलवर।
  • बीदासर: चूरू जिला।
  • संयंत्र: 'हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड' (HCL - खेतड़ी, स्थापना 1967 USA के सहयोग से)।
लोहा (Iron Ore - हेमेटाइट)

मोरीजा-बनोला: जयपुर ग्रामीण (सर्वश्रेष्ठ)।
डाबला-सिंघाना: नीम का थाना।
नीमला-रायसेला: दौसा।
थूर-हुंडेर व नाथरा की पाल: उदयपुर।

टंगस्टन (Tungsten - वोल्फ्रामाइट)

डेगाना (डेगाना की भाकरी - डिडवाना-कुचामन ज़िला): देश की सबसे बड़ी टंगस्टन खान।
नाना कराब: वालदा व अबु रोड (सिरोही)।

सोना (Gold) & मैंगनीज

आनंदपुर-भूकिया व जगपुरा-भूकिया (बांसवाड़ा): स्वर्ण भंडार।
देवतलाई: भीलवाड़ा।
मैंगनीज: लीलवाना, तलवाड़ा, कांसला (बांसवाड़ा)।

3. राजस्थान के प्रमुख अधात्विक खनिज (Non-Metallic Minerals)

1. रॉक फास्फेट (Rock Phosphate)

• रासायनिक उर्वरक (DAP) उद्योग एवं अम्लीय मृदा सुधार हेतु प्रयुक्त।
झामरकोटड़ा (उदयपुर/सलूंबर): देश की सबसे बड़ी रॉक फास्फेट खान (1999 का सर्वश्रेष्ठ खान पुरस्कार)।
• अन्य खानें: बिरमानिया व लाठी सीरीज़ (जैसलमेर), कानपुरा (उदयपुर)।

2. जिप्सम (Gypsum / हरसोट / खड़िया/ सेलखड़ी)

• प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) व क्षारीय भूमि सुधार हेतु।
जामसर (बीकानेर): भारत की सबसे बड़ी जिप्सम खान।
• अन्य खानें: गोठ-मांगलोद व भादवासी (डिडवाना-कुचामन/नागौर), मोहनगढ़ (जैसलमेर)।

3. संगमरमर / मार्बल (Marble)

सफेद मार्बल (कैल्साइट): मकराना (डिडवाना-कुचामन ज़िला) — ताज महल व विक्टोरिया मेमोरियल में प्रयुक्त।
हरा मार्बल: ऋषभदेव (उदयपुर) | काला मार्बल: भैंसलाना (जयपुर)।
पीला मार्बल: जैसलमेर | गुलाबी मार्बल: बाबरमल (उदयपुर)।

4. पन्ना (Emerald / हरी अग्नि) & तामड़ा (Garnet)

पन्ना (हरी अग्नि): देवगढ़ (राजसमंद) से कालागुमान तक 'पन्ना पेटी' (Green Fire Belt)।
तामड़ा / गारनेट (रक्तमणि): राजमहल (टोंक) व सरवाड़ (केकड़ी ज़िला - नवीन) — एकाधिकार।

5. चूना पत्थर (Limestone) के प्रमुख प्रकार

सीमेंट ग्रेड लाइमस्टोन: चित्तौड़गढ़, नागौर, कोटा, सिरोही।
केमिकल ग्रेड लाइमस्टोन: जोधपुर ग्रामीण व नागौर।
स्टील ग्रेड (सोनू क्षेत्र): सानू/सोनू गाँव (जैसलमेर - स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया SAIL द्वारा प्रयुक्त)।

4. राजस्थान के 4 पेट्रोलियम बेसिन आरेख (Schematic Diagram)

1. बाड़मेर-सांचौर बेसिन सर्वाधिक तेल उत्पादक क्षेत्र: बाड़मेर, बालोतरा, सांचौर कुएँ: मंगला (प्रथम कुआँ) भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती केयर्न एनर्जी (Cairn Vedant) 2. जैसलमेर बेसिन प्राकृतिक गैस प्रचुर क्षेत्र: संपूर्ण जैसलमेर जिला गैस क्षेत्र: मणियारी टिब्बा तनोट, डांडेवाला, घोटारू OIL (Oil India Ltd) & FOCUS 3. बीकानेर-नागौर बेसिन भारी तेल व पूनम क्षेत्र बीकानेर, अनूपगढ़, गंगानगर नागौर, डिडवाना, चूरू तेल क्षेत्र: 'पूनम' क्षेत्र ONGC 4. विंध्यन बेसिन दक्षिण-पूर्व राजस्थान कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़ करौली, धौलपुर, स.माधोपुर प्राकृतिक गैस हेतु संभावित संभावित खोज क्षेत्र

5. ऊर्जा एवं ईंधन खनिज – 4 पेट्रोलियम बेसिन, रिफाइनरी व कोयला

🛢️ राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट – पचपदरा (बालोतरा ज़िला - नवीन)

HPCL (74%) : Rajasthan Govt (26%)
  • स्थान: पचपदरा (अब नवीन ज़िला बालोतरा, पूर्व में बाड़मेर)।
  • क्षमता: 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष (9 MMTPA)।
  • विशेषता: देश की पहली ऐसी रिफाइनरी जो पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (Petrochemical Complex) के साथ एकीकृत है तथा BS-VI मानक ईंधन का उत्पादन करेगी।
  • बाड़मेर बेसिन के प्रमुख तेल कुएँ: मंगला (29 अगस्त 2009 से प्रथम व्यावसायिक उत्पादन), भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी, विजया व वंदना।
  • प्राकृतिक गैस कुएँ (जैसलमेर): मणियारी टिब्बा, तनोट, डांडेवाला, रामगढ़, घोटारू (हीलियम गैस के भंडार)।

⛏️ लिग्नाइट कोयला (Lignite Coal - भूरा कोयला)

राजस्थान में टर्शियरी (Tertiary) काल का लिग्नाइट किस्म का कोयला पाया जाता है (तमिलनाडु के बाद राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है):

बीकानेर ज़िला: पलाना (सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता), बरसिंगसर, गुड़ा, बीठनोक।
बाड़मेर/बालोतरा ज़िला: कपूरड़ी, जालीपा, गिरल, भादरेश।
नागौर/डिडवाना ज़िला: मेड़ता रोड, कसनाऊ, इग्यार, गोगलाव।

6. राजस्थान का एकाधिकार (100% Monopoly) वाले खनिज

निम्नलिखित खनिजों के उत्पादन में राजस्थान का सम्पूर्ण भारत में 100% एकाधिकार (Monopoly) है:

1. वोलस्टोनाइट (Wollastonite)
सिरोही व अजमेर

प्लास्टिक व सिरेमिक उद्योग में प्रयुक्त (100% उत्पादन)।

2. जास्पर (Jasper)
जोधपुर ग्रामीण

सजावटी पत्थर (केवल राजस्थान में पाया जाता है)।

3. गारनेट / तामड़ा (Garnet)
टोंक व केकड़ी ज़िला

राजमहल (टोंक) व सरवाड़ (केकड़ी - नवीन) में लाल बहुमूल्य रत्न।

7. प्रमुख खनिजों, खानों व ज़िलों की तुलनात्मक सारणी

खनिज का नाम खनिज श्रेणी प्रसिद्ध खानें प्रमुख ज़िले (नवीन 50 अनुसार) विशेष उपयोग / राष्ट्रीय स्थिति
सीसा-जस्ता (Galena) धात्विक (Metallic) जावर, रामपुरा-आगुचा, दरीबा सलूंबर, शाहपुरा, भीलवाड़ा, राजसमंद लगभग 100% एकाधिकार, चाँदी साथ निकलती है
तांबा (Copper) धात्विक (Metallic) खेतड़ी-सिंघाना, खो-दरीबा नीम का थाना, अलवर, उदयपुर हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (खेतड़ी)
रॉक फास्फेट अधात्विक (Non-metallic) झामरकोटड़ा, बिरमानिया सलूंबर, उदयपुर, जैसलमेर DAP खाद व अम्लीय मिट्टी उपचार
जिप्सम (हरसोट) अधात्विक (Non-metallic) जामसर, गोठ-मांगलोद, मोहनगढ़ बीकानेर, डिडवाना-कुचामन, जैसलमेर क्षारीय मिट्टी सुधार व POP उद्योग
खनिज तेल (Petroleum) ईंधन (Fuel) मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, पूनम बाड़मेर, बालोतरा, सांचौर, बीकानेर देश का 20%+ कच्चा तेल उत्पादन

8. परीक्षा-उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick One-Liners)

  • राजस्थान को 'खनिजों का अजायबघर' (Museum of Minerals) कहा जाता है।
  • राजस्थान की प्रथम खनन नीति 1978 में घोषित की गई थी।
  • जावर सीसा-जस्ता खान अब नवीन सलूंबर जिले के अंतर्गत आती है।
  • राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट पचपदरा अब नवीन बालोतरा जिले में स्थित है।
  • खेतड़ी तांबा बेल्ट अब नवीन नीम का थाना जिले में आती है।
  • यूरेनियम के विशाल भंडार रोहिल (खंडेला, नीम का थाना) में तथा लिथियम के भंडार डेगाना (डिडवाना-कुचामन) में मिले हैं।
  • वोलस्टोनाइट, जास्पर एवं तामड़ा उत्पादन में राजस्थान का 100% एकाधिकार है।
  • बाड़मेर बेसिन के प्रथम व्यावसायिक तेल कुएँ 'मंगला' का शुभारंभ 29 अगस्त 2009 को हुआ था।
  • देश का सबसे बड़ा जिंक स्मेल्टर संयंत्र चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) में स्थित है।
  • भारत की सबसे बड़ी रॉक फास्फेट खान झामरकोटड़ा (उदयपुर/सलूंबर) में है।
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खनिज संसाधन एवं पेट्रोलियम बेसिन क्यों महत्वपूर्ण है?

राजस्थान भूगोल में 'खनिज संसाधन' से हर वर्ष RPSC RAS, Assistant Professor, PTI, SI, CET तथा REET में 2 से 4 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

  • 1 खनिजों का अजायबघर: 81 खनिज प्रकार एवं 100% एकाधिकार (वोलस्टोनाइट, जास्पर, तामड़ा)।
  • 2 धात्विक खनिज: जावर सीसा-जस्ता, खेतड़ी कॉपर बेल्ट (नीम का थाना), हेमेटाइट लोहा।
  • 3 4 पेट्रोलियम बेसिन: बाड़मेर-सांचौर, जैसलमेर, बीकानेर-नागौर व विंध्यन बेसिन।
  • 4 50 नवीन ज़िले: पचपदरा (बालोतरा), जावर (सलूंबर), खेतड़ी (नीम का थाना), डेगाना (डिडवाना-कुचामन)।

एकाधिकार खनिज

वोलस्टोनाइट, जास्पर, गारनेट

4 पेट्रोलियम बेसिन

मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या

पचपदरा रिफाइनरी

HPCL 74% : राज. 26%

50 नवीन ज़िले

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थान के खनिज संसाधन, पेट्रोलियम बेसिन एवं रिफाइनरी से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर।

राजस्थान में अरावली एवं थार मरुस्थल की भूगर्भिक विविधता के कारण 81 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिनमें से 57 खनिजों का व्यावसायिक खनन होता है। इसी विविधता के कारण इसे 'खनिजों का अजायबघर' कहा जाता है।
राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट पचपदरा में स्थित है, जो अब नवीन जिला बालोतरा के अंतर्गत आता है। इसमें HPCL की 74% एवं राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है।
राजस्थान का वोलस्टोनाइट (Wollastonite), जास्पर (Jasper) एवं तामड़ा/गारनेट (Garnet) के उत्पादन में सम्पूर्ण भारत में 100% एकाधिकार है।
नवीन जिला पुनर्गठन के अनुसार, खेतड़ी-सिंघाना कॉपर बेल्ट अब नीम का थाना जिले में आती है (पूर्व में यह झुंझुनूं जिले का भाग थी)।

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