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राजस्थान की बहुरंगी संस्कृति एवं लोक जीवन

राजस्थान के वस्त्र एवं आभूषण :
पारंपरिक परिधान, 85+ आभूषण व स्मरण ट्रिक्स

राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान उसके पारंपरिक परिधानों एवं नख-सिख आभूषणों में झलकती है। पुरुषों की आन-बान-शान की प्रतीक पगड़ी (साफा), स्त्रियों का लहरिया, पोमचा, घाघरा तथा सिर से पाँव तक पहने जाने वाले आभूषण (मेमंद, चूँप, रखन, तिमणिया, बजट्टी, नेवरी, कड़ा) — RAS, RPSC एवं RSSB परीक्षाओं हेतु मानक हिंदी ग्रंथ अकादमी पर आधारित सम्पूर्ण प्रामाणिक अध्ययन नोट्स।

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वस्त्र एवं आभूषण 📍 सम्पूर्ण राजस्थान

पगड़ी शैलियाँ

12+ प्रकार

आभूषण

85+ प्रकार

जनजातीय वस्त्र

सम्पूर्ण सार

पुरुष/महिला परिधान | पोमचा, लहरिया | सिर से पैर तक आभूषण

राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी प्रामाणिक अध्ययन

राजस्थान के वस्त्र एवं आभूषण: सम्पूर्ण विश्लेषण

पुरुष व महिला परिधान, पगड़ी शैलियाँ, पोमचा-लहरिया, आदिवासी वेशभूषा, सिर से पैर तक के 85+ आभूषण, स्मरण ट्रिक्स एवं RAS/RPSC परीक्षा उपयोगी तथ्य।

1. राजस्थान में पुरुषों के प्रमुख परिधान (Men's Attire)

राजस्थान में पुरुषों की वेशभूषा उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, जाति, ऋतु तथा क्षेत्रीयता की परिचायक रही है। मुख्य रूप से सिर पर पगड़ी/साफा, शरीर के ऊपरी भाग में अंगरखी/कुर्ता तथा निचले भाग में धोती/पायजामा पहना जाता है।

(A) पगड़ी, पाग, साफा एवं फेंटा (Headgear / Turban)

पगड़ी राजस्थान में आन, बान और मान का सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती है। रियासत काल में विभिन्न रियासतों की अपनी विशिष्ट पगड़ियाँ थीं:

मेवाड़ की पगड़ियाँ:

अमरशाही, उदयशाही, स्वरूपशाही, भीमशाही, अरसीशाही एवं चूड़ावतशाही। मेवाड़ में पगड़ी बाँधने वाला व्यक्ति 'छाबदार' कहलाता था।

मारवाड़ (जोधपुर) का साफा:

जोधपुरी साफा (जसवंतशाही साफा) पूरे भारत में प्रसिद्ध है। मारवाड़ में विजयशाही, तख्तशाही एवं मानशाही पगड़ियाँ भी प्रचलित थीं।

जयपुर की पगड़ियाँ:

मानशाही, सवाईशाही, जहाँगीरशाही एवं खूँटेदार पगड़ी जयपुर राज्य की प्रमुख पहचान थीं।

ऋतु / पर्व (Occasion) पगड़ी का प्रकार (Turban Type) विशेषता / विवरण (Significance)
श्रावण मास (तीज पर्व) लहरिया पगड़ी वर्षा ऋतु और हरियाली तीज पर विशेष रूप से बाँधी जाती है।
दशहरा (विजयादशमी) मदील (Madil) जरी और सुनहरे तारों के काम से युक्त विशिष्ट पगड़ी। (RPSC में बार-बार पूछा गया)
दीपावली पर्व आटे वाली पगड़ी लक्ष्मी पूजन एवं दीपोत्सव के समय पहनी जाती है।
होली पर्व फूल-पत्ती छपी पगड़ी गुलाल और रंगोत्सव के उल्लास की प्रतीक श्वेत-रंगीन पगड़ी।
वसंत पंचमी बसंती / पीली पगड़ी सरसों के खिले फूलों और वसंत के आगमन का प्रतीक पीत वर्ण।
युद्ध के समय केसरिया पगड़ी शाके या बलिदान के अवसर पर 'केसरिया' करने हेतु धारण की जाती थी।
शोक / मृत्यु प्रसंग सफेद / खाकी / मटमैली शोक सभाओं में बाँधी जाने वाली सादी बिना रंग की पगड़ी।
💡 पगड़ी के आभूषण (Turban Ornaments): पगड़ी को सजाने के लिए उस पर तुर्रा, सरपेच, बालाबंदी, दुगदुगी, कलंगी, जाजम, फतेहपेच एवं लटकन लगाए जाते हैं।

🧥 (B) शरीर के ऊपरी भाग के वस्त्र

  • अंगरखी (Angarkhi): बिना कॉलर का शरीर पर कसा रहने वाला वस्त्र। इसे बुगतरी, तनसुक, मिर्जाई, डगला, कानो एवं गदर भी कहते हैं।
  • चोंगा / जामा (Chonga / Jama): अंगरखी के ऊपर पहना जाने वाला लंबा, घुटनों तक का रेशमी या ऊनी कोट।
  • पटका / कमरबंद (Patka): कमर पर बाँधा जाने वाला वस्त्र जिसमें कटार या तलवार रखी जाती थी।
  • आत्मसुख (Aatamsukh): तेज सर्दी में पूरे शरीर पर पहना जाने वाला ऊनी कश्मीरी गाउन। (जयपुर के सिटी पैलेस में सवाई माधोसिंह प्रथम का आत्मसुख सुरक्षित है)।
  • पछेवड़ा (Pachewada): सर्दी से बचाव हेतु पुरुषों द्वारा ओढ़ा जाने वाला मोटा सूती चद्दर।

👖 (C) शरीर के निचले भाग के वस्त्र

  • धोती (Dhoti): कमर से घुटनों/टखनों तक बाँधा जाने वाला श्वेत सूती वस्त्र (सामान्यतः 4 मीटर लंबा व 90 सेमी चौड़ा)।
  • बृजेश / बिरजस (Brijes): चूड़ीदार पायजामे का रूप जो कमर से जांघों तक ढीला एवं घुटनों से नीचे अत्यंत चुस्त होता है (जोधपुर का शिकारी परिधान)।
  • चूड़ीदार पायजामा: नीचे की ओर अनेक सिलवटों (चूड़ियों) वाला पायजामा।

2. राजस्थान में महिलाओं के पारंपरिक परिधान (Women's Attire)

राजस्थानी महिलाओं का पारंपरिक पहनावा कुर्ती-कांचली (ऊपरी भाग), घाघरा/लहंगा (निचला भाग) और ओढ़नी/लूगड़ी (सिर व देह को ढकने हेतु) का त्रिवेणी संगम है।

👚 कुर्ती एवं कांचली

कांचली (Kanchli): सीने को ढकने हेतु बाँधा जाने वाला आस्तीनयुक्त अंतःवस्त्र जो पीछे डोरियों से कसा जाता है।

कुर्ती (Kurti): कांचली के ऊपर पहनी जाने वाली बिना आस्तीन की चोली (गले का भाग गोल या चौकोर कटा होता है)।

👗 घाघरा / दामिनी

कमर से नीचे पहना जाने वाला घेरदार वस्त्र। इसमें कई कलियाँ (80 कली, 120 कली) जोड़ी जाती हैं। घाघरे के नीचे का गोटा या किनारी 'नेफा' और 'मूंजी/मगजी' कहलाती है। 'दामिनी' मारवाड़ में लाल रंग की कशीदाकारी युक्त ओढ़नी/घाघरे की श्रेणी में आती है।

🧣 ओढ़नी / लूगड़ी / चूनर

स्त्री के संपूर्ण सौंदर्य का मुख्य परिधान। इसके किनारों पर लप्पा, लप्पी, किरण, बांकड़ी, चंपाकली, बिजिया आदि गोटा लगाया जाता है। (सीकर का खंडेला गोटा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है)।

🌺 प्रमुख ओढ़नियों के प्रकार एवं महत्व

1. पोमचा (Pomcha):

कमल के फूल की आकृति वाली ओढ़नी।
• पीला पोमचा: पुत्र जन्म पर प्रसूता को पीहर पक्ष द्वारा भेजा जाता है।
• गुलाबी पोमचा: पुत्री (कन्या) जन्म के समय प्रसूता के लिए आता है।
• चीड़ का पोमचा: हाड़ौती क्षेत्र में विधवा महिलाओं द्वारा ओढ़ी जाने वाली काले रंग की विशेष ओढ़नी।

2. लहरिया एवं मोठड़ा (Lahariya & Mothda):

• लहरिया: तिरछी धारियों वाली रंगाई। श्रावण मास में तीज के अवसर पर सुहागिन स्त्रियाँ पहनती हैं (जयपुर का पचरंगा लहरिया प्रसिद्ध है)।
• मोठड़ा: जब लहरिये की धारियाँ एक-दूसरे को क्रॉस (काटती) करती हुई चौकोर जाल बनाती हैं, तो उसे 'मोठड़ा' कहा जाता है (जोधपुर का मोठड़ा प्रसिद्ध है)।

3. आदिवासी व जनजातीय वेशभूषा (Tribal Attire)

राजस्थान की जनजातियों (भील, गरासिया, सहरिया, मीणा आदि) के परिधानों से जुड़े शब्दावली प्रश्न RPSC और RSSB की हर परीक्षा में अनिवार्यतः पूछे जाते हैं:

वस्त्र का नाम (Costume Name) संबंधित जनजाति / वर्ग प्रकार एवं विस्तृत विवरण (Description)
ताराभांत की ओढ़नी आदिवासी महिलाएँ जमीन भूरी और किनारों पर तारों जैसी छपाई वाली अत्यंत लोकप्रिय ओढ़नी।
केरीभांत की ओढ़नी आदिवासी महिलाएँ आम (केरी) के फल के आकार के छापों वाली ओढ़नी।
ज्वारभांत / लहरभांत आदिवासी महिलाएँ ज्वार के दानों अथवा लहरदार रेखाओं की नक्काशी वाली ओढ़नी।
नांदणा / नाणंदा आदिवासी महिलाएँ नीले रंग के छींटदार वस्त्र से बना आदिवासियों का सबसे प्राचीन घाघरा।
कछावू (Kachhavu) भील महिलाएँ भील स्त्रियों द्वारा घुटनों तक पहना जाने वाला लाल या काले रंग का तंग घाघरा।
पीरिया (Peeriya) भील वधू भील जनजाति में विवाह के अवसर पर दुल्हन द्वारा पहनी जाने वाली पीले रंग की साड़ी।
सिंदूरी (Sindoori) भील दुल्हन विवाह के समय पहनी जाने वाली लाल/सिंदूरी रंग की साड़ी।
ढेपाड़ा (Dhepada) भील पुरुष भील पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली तंग (चूसत) धोती।
खोयतू (Khoytu) भील पुरुष कमर पर बाँधा जाने वाला लंगोटनुमा छोटा वस्त्र।
पोत्या (Potya) भील पुरुष भील पुरुषों द्वारा सिर पर बाँधा जाने वाला सफेद साफा/अंगोछा।
फालू (Phaalu) भील पुरुष कमर पर लपेटा जाने वाला गमछा या तौलिया।
झूलकी / सलूका सहरिया पुरुष सहरिया जनजाति के पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली अंगरखी नुमा कुर्ता।
खपटा (Khapta) सहरिया पुरुष सहरिया पुरुषों का सिर का साफा।
रेजा (Reja) सहरिया महिलाएँ सहरिया स्त्रियों द्वारा विवाह के अवसर पर प्रयुक्त पारंपरिक वस्त्र।

4. सिर, मस्तक एवं बालों के आभूषण (Head & Forehead)

स्त्री के नख-शिख सौंदर्य में सिर और मस्तक के आभूषण सर्वाधिक गरिमामयी माने जाते हैं:

मेमंद (Memand)

सिर के बालों के बीच माथे पर बाँधा जाने वाला अत्यंत प्रसिद्ध आभूषण (लोकगीत: "म्हारा छैल भंवर रो मेमंद ल्याई दो जी...")।

शीशफूल (Sheeshphool)

सिर के पिछले भाग में बालों के साथ गूंथा जाने वाला सोने-चाँदी का फूलनुमा जड़ाऊ आभूषण।

बोर / बोरला (Borla)

माथे के बीच लटकने वाला बेर (फल) के आकार का गोल गोल आभूषण, जिसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है।

राखड़ी / रखड़ी (Rakhdi)

बोरला के पीछे की ओर सिर पर बाँधी जाने वाली गोलाकार जड़ाऊ पट्टी।

टीकड़ा, टीकी, मांगटीका

मांग के बीच लटकाए जाने वाला आभूषण, जिसके दोनों ओर सोने की बारीक जंजीरें (सांकली) जुड़ी होती हैं।

गोफण, फूँदा, तावड़ा

गोफण: सिर की चोटी में बालों के साथ गूंथा जाने वाला आभूषण। सांकली व गेड़ी भी सिर में पहनी जाती हैं।

5. कान, नाक एवं दाँत के आभूषण (Ear, Nose & Teeth)

कान के आभूषण (Ear)

  • • झूमर / झुमका / झूमकी: कान के नीचे लटकने वाला।
  • • कर्णफूल / फूलझुमका: फूल के आकार का कुंडल।
  • • टोपस (Tops): कान के छिद्र पर जड़ाऊ छोटा आभूषण।
  • • सुरलिया (Suraliya): कान के ऊपरी भाग में (RPSC फेवरेट)।
  • • ओगणिया / अगोत्या: कान के ऊपरी सिरे का आभूषण।
  • • पीपलपन्ना (Peepal Panna): पीपल के पत्ते जैसा आभूषण।
  • • अंगोटिया, जेला, लटकन, बाली, एरंग, मुरकी।

नाक के आभूषण (Nose)

  • • नथ / नथनी: नाक की बाईं तरफ पहनी जाने वाली बड़ी बाली।
  • • बेसरि / बेसर (Besari): किशनगढ़ चित्रकला की 'बणी-ठणी' द्वारा पहनी गई प्रसिद्ध नाक की नथ।
  • • लौंग (Laung): लौंग के आकार का सोने/चाँदी का आभूषण।
  • • कांटा (Kanta): नाक का छोटा पिन।
  • • चोंप (Chomp): नाक में पहने जाने वाला दाना।
  • • बारी / वारी: नाक का छोटा छल्ला।
  • • फीणी (Feeni), भंवरिया, नकेसर, बुलाक।

दाँत के आभूषण (Teeth)

1. रखन (Rakhan):
सामने के दाँतों पर सोने या चाँदी का लगाया जाने वाला आवरण/पत्तर (खोल)।
2. चूँप (Chunp):
दाँत के बीच में सोने की कील/मेख जड़वाने की कला को 'चूँप' कहते हैं। (ध्यान दें: चूँप = दाँत, चोंप = नाक)।
3. धांस (Dhaans) व मेक:
दाँतों में छिद्र करवाकर सोने का तार बिठाना।

6. गले एवं वक्षस्थल के आभूषण (Neck & Chest)

गले के आभूषणों को उनकी लंबाई और बनावट के आधार पर दो भागों में बाँटा जा सकता है— (1) गले से चिपके रहने वाले (हंसली, आड़, खुंगाली) एवं (2) छाती पर नीचे लटकने वाले लंबे हार (तिमणिया, चम्पाकली, मांदलिया आदि):

आभूषण का नाम (Necklace/Pendant) बनावट एवं धातु (Design & Material) विशिष्ट पहचान / परीक्षा तथ्य (Exam Note)
तिमणिया (Timaniya) सोने के तीन पत्तों जैसी आकृति इसके नीचे मोतियों की लड़ियाँ लटकी होती हैं (RPSC बार-बार पूछता है)।
बजट्टी / बजंटी (Bajatti) कपड़े की पट्टी पर जड़े सोने के दाने गले में बाँधी जाने वाली सुहाग सूचक कंठी।
मांदलिया (Madaliya) बेलनाकार/ताबीज रूपी आभूषण काले धागे में पिरोकर गले में पहना जाने वाला ताबीज।
चम्पाकली (Champakali) चंपा की कली के आकार के दाने गले में नीचे लटकने वाला पारंपरिक स्वर्णिम हार।
आड़ / ठुस्सी (Aad / Thussi) आयताकार जड़ाऊ सोने का तख्ता राजपूती स्त्रियों का प्रसिद्ध कंठाहार जो गले से पूरी तरह सटा रहता है।
हंसली / खूंगाली (Khungali) सोने या चाँदी का भारी मोटा तार छोटे बच्चों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा गले की हंसली हड्डी पर पहना जाता है।
मादलिया, मंगलसूत्र, कंठी, हालरो मोतियों और रत्नों की लड़ियाँ हालरो: छाती पर झूलने वाला बड़ा हार।
पोत, चंद्रहार, रानीहार, पंचलड़ी रेशम के धागे में पिरोए मोती पोत: काले मोतियों की लड़ी। पंचलड़ी/सतलड़ी: पाँच/सात लड़ियों का हार।

7. हाथ, बाजू, कलाई, अंगुली एवं कमर के आभूषण

💪 (A) बाजू के आभूषण (Upper Arm)

  • • भुजबंद / बाजूबंद: कोहनी के ऊपर कसा जाने वाला।
  • • टड्डा / अणत (Anat): चाँदी या तांबे का भारी कड़ा।
  • • नवरत्न: नौ बहुमूल्य रत्नों से जड़ित बाजूबंद।
  • • हारपान, बट्टा, बजूटी, आरत, तकिया।

🖐️ (B) कलाई व हथेली (Wrist & Hand)

  • • चूड़ा / चूड़ियाँ: हाथीदांत या लाख का चूड़ा।
  • • नौगरी (Naugari): मोतियों से बनी कलाई की चूड़ी।
  • • गोखरू (Gokhru): खुरदरे/दानेदार किनारों वाली चूड़ी।
  • • पूंछिया / पूँचे: कलाई पर राखी जैसा आभूषण।
  • • हथफूल / सोवनपान: हथेली के पीछे अंगूठियों से जुड़ा।
  • • बंगड़ी, कांकणी, पछेली, चांट।

💃 (C) कमर व अंगुली (Waist & Fingers)

  • • कंदोरा / करधनी (Kandora): कमर में बाँधी जाने वाली सोने/चाँदी की जंजीर।
  • • तगड़ी (Tagdi): कमर में पहना जाने वाला हल्का आभूषण।
  • • कणकती, सटका: घाघरे के नेफे में अटकाया जाने वाला लटकन।
  • • अरसी (Arsi): हाथ के अंगूठे में पहनी जाने वाली शीशे (दर्पण) युक्त अँगूठी।
  • • दामणा (Damna): दो अंगुलियों में एक साथ पहनी जाने वाली अँगूठी।
  • • हथपान, बींटी, मूंदड़ी, छल्ला।

8. पैर, टखने एवं पाँव की अंगुलियों के आभूषण (Feet & Toes)

हिंदू परंपरा में कमर के नीचे (पैरों में) सामान्यतः सोने के आभूषण नहीं पहने जाते हैं, अतः पैर के आभूषण चाँदी (Silver) अथवा कांसा-पीतल के बनाए जाते हैं:

🦶 पैर एवं टखने के आभूषण

  • • कड़ा / लंगर / लच्छे: चाँदी का ठोस मोटा कड़ा।
  • • पायजेब / पायल / पाजेब: घुंघरुओं वाली मधुर ध्वनि वाली पट्टी।
  • • नेवरी (Nevari): पाजेब के नीचे पहना जाने वाला आभूषण (RPSC फेवरेट)।
  • • झांझर / रमझोल: नृत्य करते समय बजने वाली घुंघरूदार पट्टी।
  • • आंवला (Aanwla): आंवले के आकार के गोल छल्लेदार कड़े।
  • • तोड़ो, तेधड़, हिरणामैन, नूपुर, छैलकड़ा।

👣 पाँव की अंगुलियों के आभूषण (Toe Rings)

  • • बिछिया / बिछुड़ी: पाँव के अंगूठे के पास वाली अंगुली में सुहाग का प्रतीक।
  • • गोर (Gor): पैर के अंगूठे या बीच की अंगुली का गोल छल्ला।
  • • फोलरी (Pholari): फूल के आकार की चाँदी की मुद्रिका।
  • • पगपान / पगफूल: हथफूल की भाँति पैर के पंजों पर सजने वाला आभूषण।
  • • नखलियों, चुटकी, गुठड़ा।

9. पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले प्रमुख आभूषण

राजस्थान में सामंती काल से ही पुरुष भी विभिन्न आभूषण धारण करते रहे हैं:

👂 कान के आभूषण

मुरकी (Murki), लौंग, झाला, बाली, गोखरू

📿 गले के आभूषण

चौकी, कंठी, जंजीर, फूल, मादलिया, कंठमाला

💪 हाथ / कलाई

कड़ा, माठिया, बींटी, छल्ला, नौरंग

🦶 पैर के आभूषण

कड़ा / छैलकड़ा (वीरता का प्रतीक चाँदी का कड़ा)

10. याद रखने के आसान स्मरण सूत्र (Short Tricks)

🎯 ट्रिक 1: सिर व मस्तक के आभूषण

"शीशे में शकल देख टीका रो मांग भरा गोफण से"

स्पष्टीकरण: शीशे (शीशफूल) + में (मेमंद) + शकल (सांकली) + टीका (मांगटीका/टीकड़ा) + रो (रखड़ी) + मांग (मांग) + भरा (बोरला) + गोफण (गोफण)।

🎯 ट्रिक 2: गले के आभूषण

"तुम चम्पा की तिमणिया और बजट्टी देख मांदलिया हालरो हो गया"

स्पष्टीकरण: तुम (ठुस्सी) + चम्पा (चम्पाकली) + तिमणिया + बजट्टी + मांदलिया + हालरो (हालरो/हार)।

⚠️ अक्सर कन्फ्यूज करने वाले समान नाम

  • चूँप (Chunp): दाँत का आभूषण | चोंप (Chomp): नाक का आभूषण।
  • दामणा (Damna): हाथ की अंगुली | दामिनी (Damini): मारवाड़ की लाल ओढ़नी/घाघरा।
  • गोखरू (Gokhru): हाथ की कलाई/बाजू (महिलाओं में) तथा कान (पुरुषों में)।
  • कंदोरा (Kandora): कमर | टड्डा (Tadda): बाजू।

11. RPSC / RSSB विगत परीक्षाओं के अति-महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)

📌 वस्त्र संबंधी परीक्षा तथ्य

  • मदील (Madil): दशहरे के पर्व पर पहनी जाने वाली विशेष पगड़ी।
  • अमरशाही पगड़ी: महाराणा अमरसिंह द्वितीय के समय प्रारंभ हुई मेवाड़ की पगड़ी।
  • खंडेला (सीकर): गोटा, लप्पा-लप्पी उद्योग का राजस्थान में प्रमुख केंद्र।
  • चीड़ का पोमचा: हाड़ौती अंचल में विधवा स्त्रियों का काले रंग का ओढ़ना।
  • नांदणा: आदिवासियों का प्राचीनतम नीले रंग का घाघरा।
  • ढेपाड़ा व खोयतू: भील पुरुषों की क्रमशः तंग धोती एवं लंगोटी।
  • बृजेश: घुटनों तक ढीला व नीचे चुस्त पुरुषों का शिकारी पैंट/पायजामा।

📌 आभूषण संबंधी परीक्षा तथ्य

  • मेमंद (Memand): सिर/मस्तक पर बाँधा जाने वाला आभूषण (RAS Pre में कई बार पूछा गया)।
  • नेवरी (Nevari): पाँव में पाजेब के साथ पहना जाने वाला आभूषण।
  • तिमणिया व बजट्टी: महिलाओं द्वारा गले/वक्षस्थल पर धारण किए जाने वाले आभूषण।
  • सुरलिया व पीपलपन्ना: स्त्रियों के कान के प्रमुख आभूषण।
  • अरसी: हाथ के अंगूठे में पहना जाने वाला शीशायुक्त आभूषण।
  • बेसरि: बणी-ठणी चित्रशैली में नाक में चित्रित आभूषण।
  • चूँप व रखन: दाँत में सोने की मेख जड़ने और सोने की परत चढ़ाने के आभूषण।
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  • 1 अंग-वार आभूषण: सिर, कान, नाक, दाँत, गला, हाथ, कमर और पैर के आभूषणों का सुमेलन।
  • 2 पगड़ी एवं साफा: रियासतकालीन पगड़ियाँ (अमरशाही, उदयशाही) व पर्व विशेष की पगड़ियाँ (मदील, लहरिया)।
  • 3 आदिवासी वेशभूषा: कछावू, ढेपाड़ा, खोयतू, ताराभांत, केरीभांत और नांदणा के प्रश्न।
  • 4 विशेष ओढ़नियाँ: पीला पोमचा, गुलाबी पोमचा, चीड़ का पोमचा और मोठड़ा की सामाजिक प्रासंगिकता।

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

वस्त्र एवं आभूषण से जुड़े परीक्षोपयोगी प्रश्न एवं प्रामाणिक उत्तर।

चूँप (Chunp) दाँत में सोने या चाँदी की मेख/कील के रूप में पहना जाने वाला आभूषण है। वहीं चोंप (Chomp) नाक में पहने जाने वाला दानेदार आभूषण है। दोनों में अक्सर परीक्षार्थी भ्रमित होते हैं।
मेमंद स्त्रियों द्वारा सिर/मस्तक पर माथे के बालों के बीच में बाँधा जाने वाला अत्यंत लोकप्रिय और सुप्रसिद्ध आभूषण है।
ताराभांत, केरीभांत, ज्वारभांत तथा लहरभांत की ओढ़नियाँ राजस्थान की आदिवासी (जनजातीय) महिलाओं द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्सवों में विशेष रूप से ओढ़ी जाती हैं।
अंगरखी को राजस्थान में बुगतरी, मिर्जाई, तनसुक, डगला, कानो एवं गदर के नाम से भी जाना जाता है।
राजस्थान में पुत्र के जन्म पर प्रसूता स्त्री के पीहर पक्ष से 'पीला पोमचा' भेंट किया जाता है, जबकि कन्या (पुत्री) के जन्म पर 'गुलाबी पोमचा' ओढ़ाया जाता है।

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✓ टॉपिक-वाइज टेस्ट्स: वस्त्र एवं आभूषण, पगड़ी शैलियाँ, जनजातीय परिधान, लोक संगीत व संस्कृति
✓ विस्तृत हिंदी व्याख्या: हर प्रश्न का संपूर्ण हल और Instant Test Analysis
✓ अनलिमिटेड एटेम्प्ट्स: अपनी रैंक सुधारने के लिए कितनी भी बार टेस्ट दें
⭐⭐⭐⭐⭐ 412+ अभ्यर्थियों ने इस सप्ताह टेस्ट सीरीज़ जॉइन की!