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राजस्थान इतिहास – जन-आंदोलन एवं राजनीतिक चेतना काल

प्रजामंडल आंदोलन (राजस्थान):
स्थापना, जननायक, रियासती संघर्ष एवं कांड

राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलन (Prajamandal Movement) उत्तरदायी शासन की स्थापना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु लड़ा गया जन-संग्राम था। 19 प्रमुख प्रजामंडल (जयपुर से 1931 में प्रारंभ), हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन 1938, जेंटलमेन्स एग्रीमेंट व आजाद मोर्चा, रास्तापाल, डाबड़ा व तसीमो कांड, सागरमल गोपा व बालमुकुंद बिस्सा का बलिदान — RAS, RPSC, RSSB परीक्षा हेतु संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन।

100% NCERT/RBSE प्रामाणिक RAS/RPSC Special 19 रियासती संगठन
प्रथम: जयपुर (1931) अंतिम: झालावाड़ (1946)

मूल उद्देश्य

उत्तरदायी शासन

मार्गदर्शक प्रस्ताव

हरिपुरा (1938)

जेंटलमेन्स एग्रीमेंट | आजाद मोर्चा | रास्तापाल-डाबड़ा कांड

प्रजामंडल आंदोलन : Complete Test
विस्तृत प्रामाणिक नोट्स

राजस्थान के प्रजामंडल आंदोलन: संपूर्ण इतिहास व विश्लेषण

आरएएस (RAS Pre & Mains), आरपीएससी (Assistant Professor, 1st & 2nd Grade), आरएसएसबी (CET, REET, Patwar) परीक्षाओं हेतु प्रामाणिक सामग्री।

1. प्रजामंडल का अर्थ, उद्देश्य एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रजामंडल (Praja Mandal) का शाब्दिक अर्थ है — "प्रजा का मंडल या जनता का संगठन"। ब्रिटिश भारत में जब राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा था, तब राजस्थान की देशी रियासतों में सामंती निरंकुशता, बेगार प्रथा, भारी लाग-बाग और गैर-कानूनी करों के विरुद्ध जनता को कोई नागरिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। इसी दोहरी गुलामी (अंग्रेज + रियासती राजा) से मुक्ति हेतु प्रजामंडलों की स्थापना हुई।

🎯 प्रजामंडल आंदोलन के मुख्य उद्देश्य

  • उत्तरदायी शासन (Responsible Government): रियासतों में राजा के संरक्षण में जनता द्वारा चुनी गई उत्तरदायी सरकार की स्थापना करना।
  • मौलिक व नागरिक अधिकार: भाषण, प्रेस, सभा करने एवं संगठन बनाने की स्वतंत्रता प्राप्त करना।
  • अत्याचारी करों व बेगार की समाप्ति: किसानों व आम जनता पर लदे अनुचित करों (लाग-बाग) व बेगार प्रथा का उन्मूलन।
  • राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव: देशी रियासतों की जनता को अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की मुख्यधारा से जोड़ना।

🏛️ पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण संस्थाएँ व प्रस्ताव

  • राजपूताना मध्य भारत सभा (1918/19): दिल्ली के चांदनी चौक स्थित मारवाड़ी पुस्तकालय में स्थापना। अध्यक्ष: जमनालाल बजाज, उपाध्यक्ष: विजय सिंह पथिक।
  • राजस्थान सेवा संघ (1919): वर्धा (महाराष्ट्र) में विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी व हरिभाई किंकर द्वारा स्थापित। 1920 में अजमेर स्थानांतरित।
  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (AISPC - 1927): स्थापना बंबई में। अध्यक्ष: दीवान बहादुर रामचंद्र राव। विजय सिंह पथिक इसके उपाध्यक्ष बनाए गए।
  • कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन (1938): सुभाष चंद्र बोस की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार प्रस्ताव पारित कर देशी रियासतों के प्रजामंडल आंदोलनों को पूर्ण नैतिक व राजनीतिक समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद राजस्थान में प्रजामंडलों की बाढ़ आ गई।

RPSC माइलस्टोन फैक्ट: जवाहरलाल नेहरू 1939 में 'अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद' के अध्यक्ष बने। 1945-46 में इसका 7वाँ अधिवेशन उदयपुर के सहेलियों की बाड़ी मैदान में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता पं. नेहरू ने की थी और शेख अब्दुल्ला भी उपस्थित हुए थे।

2. राजस्थान के सभी प्रजामंडल : स्थापना वर्ष, संस्थापक एवं अध्यक्ष

RPSC और RSSB की लगभग हर परीक्षा में प्रजामंडल, उनके स्थापना वर्ष और संस्थापकों के सीधे या मिलान वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। नीचे प्रामाणिक कालक्रमानुसार संपूर्ण सूची दी गई है:

स्थापना वर्ष प्रजामंडल का नाम प्रमुख संस्थापक / कर्ताधर्ता प्रथम अध्यक्ष / सहयोगी विशेष विवरण
1931 जयपुर प्रजामंडल कर्पूरचंद पाटनी कर्पूरचंद पाटनी (1938 में जमनालाल बजाज) राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल (1936/38 में पुनर्गठित)
1931 बूंदी प्रजामंडल कांतिलाल चौथानी कांतिलाल (सहयोगी: नित्यानंद) 1931 में गठित दूसरा प्रजामंडल
1934 मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल जयनारायण व्यास, भंवरलाल सर्राफ भंवरलाल सर्राफ 1938 में रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में 'मारवाड़ लोक परिषद' बनी
1934 हाड़ौती प्रजामंडल पं. नयनूराम शर्मा पं. नयनूराम शर्मा बाद में 1939 में कोटा प्रजामंडल के रूप में सक्रिय हुआ
1936 बीकानेर प्रजामंडल मघाराम वैद्य, लक्ष्मणदास स्वामी मघाराम वैद्य स्थापना कलकत्ता (बंगाल) में हुई
1936 धौलपुर प्रजामंडल ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु, जौहरीलाल इंदु कृष्णदत्त पालीवाल (1938 में) 1938 में विधिवत गठन
1938 मेवाड़ (उदयपुर) प्रजामंडल माणिक्यलाल वर्मा बलवंत सिंह मेहता (उपाध्यक्ष: भूरेश्याम) 24 अप्रैल 1938 को स्थापित; 1941 में पहला अधिवेशन
1938 अलवर प्रजामंडल पं. हरिनारायण शर्मा, कुंजबिहारी लाल मोदी सरदार नत्था सिंह (1939 में) 'जागीर माफी प्रजा सम्मेलन' का आयोजन किया
1938 भरतपुर प्रजामंडल किशनलाल जोशी, गोपीलाल यादव, मास्टर आदित्येंद्र गोपीलाल यादव स्थापना रेवाड़ी (हरियाणा) में हुई
1938 शाहपुरा प्रजामंडल रमेशचंद्र ओझा, लादूराम व्यास, अभयसिंह डांगी अभयसिंह डांगी माणिक्यलाल वर्मा के सहयोग से स्थापित; पूर्ण उत्तरदायी शासन देने वाली प्रथम रियासत
1939 कोटा प्रजामंडल पं. नयनूराम शर्मा, अभिन्न हरि पं. नयनूराम शर्मा (पहला अधिवेशन: मांगरोल, बारां) हाड़ौती प्रजामंडल का पुनर्गठित रूप
1939 सिरोही प्रजामंडल गोकुलभाई भट्ट (राजस्थान के गांधी) गोकुलभाई भट्ट 1934 में वृद्धिचंद शास्त्री ने बंबई में सिरोही प्रजामंडल की नींव रखी थी
1939 करौली प्रजामंडल त्रिलोकचंद माथुर, चिरंजीलाल शर्मा, मदनसिंह त्रिलोकचंद माथुर कल्याण प्रसाद गुप्ता सहयोगी रहे
1939 किशनगढ़ प्रजामंडल कांतिलाल चौथानी, जमाल शाह जमाल शाह अजमेर के निकट स्वायत्त संगठन
1942 कुशलगढ़ प्रजामंडल भंवरलाल निगम, कन्हैयालाल सेठिया भंवरलाल निगम बांसवाड़ा ठिकाने में स्थापित
1943 बांसवाड़ा प्रजामंडल भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजी भाई भावसार विनोदचंद्र कोठारी 'दैनिक संग्राम' समाचार पत्र भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी ने बंबई से निकाला
1944 डूंगरपुर प्रजामंडल भोगीलाल पंड्या (वागड़ के गांधी), हरिदेव जोशी भोगीलाल पंड्या रास्तापाल व पूनावाड़ा कांड इसी प्रजामंडल काल में हुए
1945 जैसलमेर प्रजामंडल मीठालाल व्यास मीठालाल व्यास स्थापना जोधपुर में की गई (सागरमल गोपा का संघर्ष)
1945 प्रतापगढ़ प्रजामंडल अमृतलाल पायक, चुन्नीलाल प्रभाकर अमृतलाल पायक जन-जागृति हेतु हरिजन सेवा समिति बनी
1946 झालावाड़ प्रजामंडल मांगीलाल भव्य, कन्हैयालाल मित्तल, मकबूल आलम मांगीलाल भव्य राजस्थान का अंतिम प्रजामंडल (शासक हरिश्चंद्र ने स्वयं सहयोग दिया)

RPSC सुपर ट्रिक (स्थापना वर्ष समूह):
1931: जयपुर, बूंदी | 1934: मारवाड़, हाड़ौती | 1936: बीकानेर, धौलपुर | 1938 (हरिपुरा वर्ष): मेवाड़, अलवर, भरतपुर, शाहपुरा | 1939: कोटा, सिरोही, करौली, किशनगढ़ | 1942-46: कुशलगढ़ (1942), बांसवाड़ा (1943), डूंगरपुर (1944), जैसलमेर-प्रतापगढ़ (1945), झालावाड़ (1946)।

3. अपनी मूल रियासत से बाहर स्थापित प्रजामंडल (अति-महत्वपूर्ण)

स्थापना: 1936

1. बीकानेर प्रजामंडल

स्थान: कलकत्ता (कोलकाता)

मघाराम वैद्य व रघुवरदयाल गोयल द्वारा बीकानेर रियासत में दमनकारी नीतियों के कारण कलकत्ता में स्थापना की गई।

स्थापना: 1934 / 1939

2. सिरोही प्रजामंडल

स्थान: बंबई (मुंबई)

1934 में वृद्धिचंद शास्त्री व साथियों ने बंबई में स्थापना की। 1939 में गोकुलभाई भट्ट ने सिरोही में इसका पुनर्गठन किया।

स्थापना: 1938

3. भरतपुर प्रजामंडल

स्थान: रेवाड़ी (हरियाणा)

किशनलाल जोशी के प्रयासों से गोपीलाल यादव की अध्यक्षता में रेवाड़ी (हरियाणा) में इसका गठन किया गया था।

स्थापना: 1945

4. जैसलमेर प्रजामंडल

स्थान: जोधपुर

जैसलमेर के कठोर प्रतिबंधों व सागरमल गोपा पर अत्याचारों के चलते मीठालाल व्यास ने जोधपुर में प्रजामंडल की स्थापना की।

4. प्रमुख प्रजामंडल : विस्तृत ऐतिहासिक विश्लेषण

(A) जयपुर प्रजामंडल – प्रथम प्रजामंडल एवं संघर्ष

जयपुर प्रजामंडल की स्थापना 1931 ई. में कर्पूरचंद पाटनी द्वारा की गई, किन्तु सामंती विरोध के कारण यह ज्यादा सक्रिय नहीं हो सका। 1936-37 में सेठ जमनालाल बजाज एवं हीरालाल शास्त्री के प्रयासों से इसका पुनर्गठन हुआ।

📌 महत्वपूर्ण अधिवेशन एवं सत्याग्रह:
  • प्रथम वार्षिक अधिवेशन (1938): जयपुर में सेठ जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में हुआ। कस्तूरबा गांधी भी इसमें उपस्थित हुईं।
  • 1939 का सत्याग्रह: जमनालाल बजाज के जयपुर राज्य में प्रवेश पर रोक के विरोध में सत्याग्रह हुआ, जिसमें बजाज जी को बंदी बनाया गया।
  • 1940: प्रजामंडल को राज्य सरकार द्वारा मान्यता दी गई और हीरालाल शास्त्री अध्यक्ष बने।
📌 चरखा संघ व प्रजामंडल की नर्सरी:
  • 1927 में जमनालाल बजाज ने जयपुर में 'चरखा संघ' की स्थापना की, जो बाद में राजनीतिक कार्यकर्ताओं का केंद्र बना।
  • हीरालाल शास्त्री ने वनस्थली (टोंक) में 'जीवन कुटीर' (शांताबाई शिक्षा कुटीर, वर्तमान वनस्थली विद्यापीठ) की स्थापना की।

(B) मारवाड़ (जोधपुर) प्रजामंडल – जयनारायण व्यास का संघर्ष

मारवाड़ में राजनीतिक चेतना के जनक जयनारायण व्यास (शेर-ए-राजस्थान / लोकनायक) थे। 1934 में भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में मारवाड़ प्रजामंडल का गठन हुआ।

📌 प्रमुख सहयोगी संस्थाएँ:
  • मारवाड़ सेवा संघ (1920): जयनारायण व्यास द्वारा स्थापित (तोल आंदोलन चलाया)।
  • मारवाड़ हितकारिणी सभा (1923): चाँदकरण शारदा व व्यास जी द्वारा पुनर्जीवित (मादा पशुओं के निर्यात पर रोक का आंदोलन)।
  • मारवाड़ यूथ लीग (1931): जयनारायण व्यास द्वारा।
  • मारवाड़ लोक परिषद (1938): रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में स्थापित।
📌 व्यास जी के समाचार पत्र व पुस्तकें:
  • अखंड भारत: मुंबई से प्रकाशित दैनिक हिंदी समाचार पत्र।
  • पीप (Peep): दिल्ली से प्रकाशित अंग्रेजी पाक्षिक पत्रिका।
  • आगीबाण (अग्निबाण): ब्यावर से प्रकाशित राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक समाचार पत्र (1932)।
  • पुस्तिकाएँ: 'पोपाबाई की पोल' और 'मारवाड़ की अवस्था'।

(C) मेवाड़ प्रजामंडल (24 अप्रैल 1938) – माणिक्यलाल वर्मा

मेवाड़ प्रजामंडल की स्थापना 24 अप्रैल 1938 को बलवंत सिंह मेहता के घर (साहित्य कुटीर, उदयपुर) में हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता, उपाध्यक्ष भूरेलाल बया और महामंत्री माणिक्यलाल वर्मा बने।

  • भूरेलाल बया व सराड़ा का किला: उपाध्यक्ष भूरेलाल बया को गिरफ्तार कर सराड़ा के किले में नजरबंद रखा गया, जिसे 'मेवाड़ का काला पानी' कहा जाता है।
  • राज्य निर्वासन: मेवाड़ सरकार ने प्रजामंडल को तुरंत गैर-कानूनी घोषित कर वर्मा जी को मेवाड़ से निष्कासित कर दिया। वर्मा जी ने अजमेर रहकर आंदोलन का संचालन किया और 'मेवाड़ का वर्तमान शासन' नामक पुस्तिका प्रकाशित की।
  • प्रथम अधिवेशन (नवंबर 1941): उदयपुर के शाहपुरा हवेली मैदान में हुआ। उद्घाटन आचार्य जे.बी. कृपलानी ने किया तथा इसमें श्रीमती विजयालक्ष्मी पंडित भी शामिल हुईं।
  • पंछीड़ा गीत: माणिक्यलाल वर्मा का प्रसिद्ध प्रेरणादायक गीत जो आंदोलनकारियों में उत्साह भरता था।

(D) बीकानेर प्रजामंडल व दमन-विरोधी संघर्ष

महाराजा गंगासिंह के कठोर प्रतिबंधों के बीच 1936 में मघाराम वैद्य व लक्ष्मणदास स्वामी ने कलकत्ता में प्रजामंडल स्थापित किया। 1942 में रघुवरदयाल गोयल ने 'बीकानेर राज्य प्रजा परिषद' बनाई।

  • सर्वहितकारिणी सभा (1907): स्वामी गोपालदास व कन्हैयालाल ढूँढ द्वारा चूरू में स्थापित (इसे 'बीकानेर की कांग्रेस' कहा जाता है)। इन्होंने 'पुत्री पाठशाला' व 'कबीर पाठशाला' खोली।
  • धर्म स्तूप पर तिरंगा (1930): 26 जनवरी 1930 को चूरू के सर्वहितकारिणी धर्म स्तूप पर स्वामी गोपालदास व चंदनमल बहड़ ने तिरंगा फहराया।
  • बीकानेर षड्यंत्र केस (1932): लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) के दौरान महाराजा गंगासिंह की नीतियों की पोल खोलने के लिए 'बीकानेर दिग्दर्शन' (Bikaner Administration) नामक पर्चा बाँटा गया था। इसके प्रतिशोध में रियासत ने स्वामी गोपालदास, चंदनमल बहड़, सत्यनारायण सर्राफ व खूबचंद सर्राफ पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया।
  • कांगड़ कांड (1946): बीकानेर रियासत के रतनगढ़ क्षेत्र के कांगड़ गाँव में अकाल के बावजूद जागीरदार द्वारा किसानों पर भीषण अत्याचार किए गए।

5. जेंटलमेन्स एग्रीमेंट (1942) एवं आजाद मोर्चा का गठन

अगस्त 1942 में जब महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) शुरू किया, तब जयपुर प्रजामंडल में एक ऐतिहासिक मोड़ आया:

🤝 जेंटलमेन्स एग्रीमेंट (Gentlemen's Agreement - 1942)

  • पक्ष: जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल एवं प्रजामंडल अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री
  • शर्तें:
    • जयपुर प्रजामंडल 'भारत छोड़ो आंदोलन' में भाग नहीं लेगा।
    • जयपुर सरकार युद्ध में अंग्रेजों की जन-धन से सहायता नहीं करेगी।
    • जयपुर सरकार प्रजामंडल को शांतिपूर्ण आंदोलन व उत्तरदायी शासन की दिशा में कार्य करने देगी।

🚩 आजाद मोर्चा (Azad Morcha - 1942)

  • कारण: प्रजामंडल के कुछ युवा नेता जेंटलमेन्स समझौते से असंतुष्ट थे और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लेना चाहते थे।
  • संस्थापक: बाबा हरिश्चंद्र, रामकरण जोशी, दौलतमल भंडारी और गुलाबचंद कासलीवाल।
  • आजाद मोर्चा ने जयपुर में भारत छोड़ो आंदोलन का सफल संचालन किया।
  • विलय (1945): पं. जवाहरलाल नेहरू की मध्यस्थता व सलाह पर 1945 में आजाद मोर्चे का पुनः जयपुर प्रजामंडल में विलय हो गया।

6. प्रजामंडल काल के प्रमुख गोलीकांड, दमनकारी घटनाएँ एवं अमर शहीद

⭐ रास्तापाल एवं पूनवाड़ा कांड (डूंगरपुर)

मई – जून 1947

रास्तापाल कांड (19 जून 1947): डूंगरपुर रियासत द्वारा पाठशाला बंद कराने के विरोध में अध्यापक सेंगाभाई को बचाते हुए 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाईनानाभाई खांट शहीद हुए। गैब सागर झील किनारे कालीबाई का स्मारक बना है।

पूनवाड़ा कांड (मई 1947): रास्तापाल से पूर्व डूंगरपुर राज्य की पुलिस ने पूनवाड़ा गाँव की पाठशाला पर हमला कर सेवा संघ के अध्यापक शिवराम भील को बुरी तरह पीटा और पाठशाला बंद करवा दी थी।

⭐ डाबड़ा कांड (डीडवाना, नागौर)

13 मार्च 1947

मारवाड़ लोक परिषद व किसान सभा के संयुक्त सम्मेलन में जागीरदारों ने मोतीराम किसान के घर एकत्रित नेताओं (मथुरादास माथुर, छगनराज चौपासनीवाला आदि) पर जानलेवा हमला कर दिया। इसमें चुन्नीलाल शर्मा, रूघाराम, रामूराम सहित कई किसान शहीद हो गए।

⭐ तसीमो गोलीकांड (धौलपुर)

11 अप्रैल 1947

धौलपुर प्रजामंडल की सभा में नीम के पेड़ पर तिरंगा फहराने को लेकर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग की। तिरंगे की रक्षा करते हुए ठाकुर छत्तरसिंह एवं पंचम सिंह शहीद हो गए। यह राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम बड़ा गोलीकांड माना जाता है।

⭐ सागरमल गोपा का अमर बलिदान (जैसलमेर)

4 अप्रैल 1946

जैसलमेर के महारावल जवाहरसिंह के अत्याचारों का पर्दाफाश करने वाले अमर क्रांतिकारी। पुस्तकें: 'जैसलमेर का गुंडाराज', 'आजादी के दीवाने' एवं 'रघुनाथ सिंह का मुकदमा'। जेलर गुमान सिंह ने जेल में मिट्टी का तेल छिड़ककर इन्हें जिंदा जला दिया। इसकी जाँच हेतु गोपाल स्वरूप पाठक आयोग बैठाया गया था।

⭐ बालमुकुंद बिस्सा (राजस्थान के जतिन दास)

19 जून 1942

डीडवाना (नागौर) निवासी। जोधपुर जेल में राजनीतिक बंदियों के साथ होने वाले अमानवीय व्यवहार व खराब भोजन के विरोध में भूख हड़ताल की और उपचार के अभाव में 19 जून 1942 को शहीद हो गए। इन्हें "राजस्थान का जतिन दास" कहा जाता है। इन्होंने जोधपुर में 'जवाहर खादी भंडार' की स्थापना की थी।

⭐ बीरबल सिंह ढालिया व बीरबल दिवस (बीकानेर)

30 जून / 17 जुलाई 1946

रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर) में प्रजा परिषद के जुलूस पर पुलिस फायरिंग में तिरंगा हाथ में थामे बीरबल सिंह शहीद हुए। बीकानेर प्रजा परिषद द्वारा 17 जुलाई 1946 को 'बीरबल दिवस' मनाया गया। इंदिरा गांधी नहर परियोजना की एक शाखा का नाम 'शहीद बीरबल शाखा' रखा गया है।

7. प्रजामंडल आंदोलन में प्रमुख महिला स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान

श्रीमती रमादेवी (जयपुर/बिजोलिया)

लादूराम जोशी की पत्नी। 1931 के बिजोलिया किसान आंदोलन व बाद में 1939 के जयपुर प्रजामंडल सत्याग्रह में जेल गईं। इन्होंने महिलाओं को लामबंद कर धरना-प्रदर्शनों का नेतृत्व किया।

रतन शास्त्री (जयपुर)

हीरालाल शास्त्री की धर्मपत्नी। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिगत रहकर कार्यकर्ताओं की सहायता की तथा वनस्थली विद्यापीठ के माध्यम से बालिका शिक्षा व राष्ट्रभक्ति का प्रसार किया। (पद्म भूषण व पद्म श्री सम्मानित)।

अंजना देवी चौधरी

रामनारायण चौधरी की पत्नी। राजस्थान की प्रथम महिला जो स्वतंत्रता आंदोलन व प्रजामंडल सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तार होकर जेल गईं।

नगेंद्र बाला (हाड़ौती/कोटा)

केसरी सिंह बारहट की पौत्री। कोटा प्रजामंडल आंदोलन में सक्रिय रहीं तथा स्वतंत्रता के बाद राजस्थान की प्रथम महिला जिला प्रमुख (कोटा) बनीं।

कृष्णा कुमारी व महिमा देवी (जोधपुर)

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में मारवाड़ लोक परिषद के बैनर तले जोधपुर की महिलाओं का नेतृत्व किया और विदेशी वस्त्रों की दुकानों पर पिकेटिंग की।

नारायणी देवी वर्मा (मेवाड़)

माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी। 1942 के आंदोलन में 6 माह के पुत्र के साथ जेल गईं। 1944 में भीलवाड़ा में 'महिला आश्रम' की स्थापना कर नारी शिक्षा को बढ़ावा दिया।

8. रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना (प्रथम व अंतिम)

🏆 प्रथम रियासत: शाहपुरा (14 अगस्त 1947)

राजस्थान में सर्वप्रथम पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित करने वाली रियासत शाहपुरा थी। शासक राजा सुदर्शन देव ने बिना किसी रक्तपात के 14 अगस्त 1947 को सत्ता जनता को सौंप दी और गोकुललाल असावा को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

👑 झालावाड़ का विशिष्ट उदाहरण

झालावाड़ प्रजामंडल (1946) के गठन में वहाँ के प्रगतिशील शासक महाराणा हरिश्चंद्र ने स्वयं जनता का साथ दिया तथा 1947 में मांगीलाल भव्य के नेतृत्व में लोकप्रिय मंत्रिमंडल का गठन किया।

9. आरएएस / आरपीएससी विशेष बुलेट फैक्ट्स (High-Yield Facts)

🎯 Quick Revision Points

  • राजस्थान का गांधी: गोकुलभाई भट्ट (सिरोही)।
  • वागड़ के गांधी: भोगीलाल पंड्या (डूंगरपुर)।
  • चिड़ावा के गांधी: मास्टर प्यारेलाल गुप्ता।
  • मारवाड़ का गांधी: जयनारायण व्यास।
  • गांधीजी के पाँचवें पुत्र: जमनालाल बजाज।
  • राजस्थान का जतिन दास: बालमुकुंद बिस्सा (1942 में शहीद)।

🔥 RPSC Repeater Questions

  • बीरबल दिवस: 17 जुलाई 1946 (बीकानेर रियासत)।
  • कृष्णा दिवस: 1936 में मारवाड़ प्रजामंडल (बंबई में मनाया गया)।
  • मोतीलाल दिवस: 5 अप्रैल 1931 को जयपुर प्रजामंडल में।
  • गोपाल स्वरूप पाठक समिति: सागरमल गोपा हत्याकांड की जाँच हेतु।
  • आजाद मोर्चा का विलय: 1945 में नेहरूजी की सलाह पर जयपुर प्रजामंडल में।
  • 'पोपाबाई की पोल' व 'मारवाड़ की अवस्था': जयनारायण व्यास की प्रसिद्ध पुस्तिकाएँ।

RAS Pre Tip: प्रजामंडल में संस्थापक/वर्ष का मिलान, रियासत से बाहर बने प्रजामंडल (कलकत्ता, बंबई, रेवाड़ी, जोधपुर), प्रमुख दिवस (बीरबल, कृष्णा, शिक्षा दिवस) एवं जेंटलमेन्स एग्रीमेंट की शर्तें हमेशा सर्वाधिक अंकदायी प्रश्न रहे हैं।

परीक्षा महत्व

यह टॉपिक परीक्षा हेतु क्यों आवश्यक है?

RPSC द्वारा आयोजित आरएएस (RAS Pre & Mains), सेकंड ग्रेड, फर्स्ट ग्रेड, कॉलेज व्याख्याता, रीट (REET), पटवार, पुलिस उपनिरीक्षक और RSSB CET परीक्षाओं में 'प्रजामंडल आंदोलन' से प्रतिवर्ष 2 से 4 प्रश्न अनिवार्य रूप से आते हैं।

  • 1 स्थापना वर्ष व संस्थापक: कूट (Matching Columns) वाले प्रश्नों का सबसे पसंदीदा क्षेत्र।
  • 2 ऐतिहासिक कांड व तिथियाँ: रास्तापाल, डाबड़ा, तसीमो कांड की तिथियाँ व शहीद।
  • 3 आरएएस मुख्य परीक्षा: प्रजामंडल आंदोलन का स्वरूप, जेंटलमेन्स एग्रीमेंट, आजाद मोर्चा तथा जन-जागृति पर 2/5/10 अंक के विश्लेषणात्मक प्रश्न।

19 प्रजामंडल

पूर्ण सूची व वर्ष

आजाद मोर्चा

जेंटलमेन्स समझौता

रास्तापाल कांड

कालीबाई का बलिदान

उत्तरदायी शासन

शाहपुरा व झालावाड़

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रजामंडल आंदोलन (राजस्थान) से संबंधित RPSC और RSSB में पूछे जाने वाले मुख्य सवाल।

राजस्थान का प्रथम प्रजामंडल जयपुर प्रजामंडल था, जिसकी स्थापना 1931 ई. में कर्पूरचंद पाटनी द्वारा की गई थी। बाद में 1936-38 में जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री के प्रयासों से इसका पुनर्गठन हुआ।
राजस्थान में चार प्रजामंडलों की स्थापना उनकी रियासतों से बाहर हुई थी:
1. बीकानेर प्रजामंडल (1936) – कलकत्ता में (मघाराम वैद्य द्वारा)।
2. सिरोही प्रजामंडल (1934) – बंबई में (वृद्धिचंद शास्त्री द्वारा)।
3. भरतपुर प्रजामंडल (1938) – रेवाड़ी (हरियाणा) में (किशनलाल जोशी व गोपीलाल यादव द्वारा)।
4. जैसलमेर प्रजामंडल (1945) – जोधपुर में (मीठालाल व्यास द्वारा)।
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल और जयपुर प्रजामंडल अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री के मध्य यह समझौता हुआ। इसके तहत जयपुर प्रजामंडल ने आंदोलन में प्रत्यक्ष भाग नहीं लिया और बदले में सरकार ने प्रजामंडल को मान्यता देते हुए दमन न करने का आश्वासन दिया।
पूर्ण उत्तरदायी शासन स्थापित करने वाली राजस्थान की पहली रियासत शाहपुरा थी। 14 अगस्त 1947 को राजा सुदर्शन देव ने गोकुललाल असावा के नेतृत्व में पूर्ण उत्तरदायी मंत्रिमंडल को सत्ता सौंप दी थी।
19 जून 1947 को डूंगरपुर के रास्तापाल गाँव में अपने शिक्षक सेंगाभाई को बचाने के लिए 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई ने अंग्रेजों की गोलियों का सामना करते हुए शहादत दी थी। उनके साथ नानाभाई खांट भी शहीद हुए थे।

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