राजस्थान का इतिहास
(History of Rajasthan Notes)
प्राचीन सभ्यताएं, प्रमुख राजवंश, 1857 की क्रांति, किसान आंदोलन, प्रजामंडल, 19 देशी रियासतें व प्रिवीपर्स तथा 7 चरणों में राजस्थान का एकीकरण — डॉ. गोपीनाथ शर्मा, डॉ. वी.एस. भार्गव एवं RBSE पर आधारित संपूर्ण प्रामाणिक अध्याय।
राजस्थान के इतिहास की ऐतिहासिक रूपरेखा
प्राचीन नदी घाटी संस्कृति से लेकर राजपूत काल के शौर्य एवं आधुनिक स्वाधीनता संघर्ष व एकीकरण का प्रामाणिक घटनाक्रम।
1. प्राचीन सभ्यताएं एवं संस्कृति
सरस्वती-दृषद्वती के तट पर पनपी कालीबंगा, कांतली नदी तट पर गणेश्वर (ताम्रयुगीन जननी), बनास संस्कृति का केंद्र आहड़ (धूलकोट) एवं मत्स्य जनपद की राजधानी बैराठ ने प्राचीन इतिहास का आधार निर्मित किया।
2. राजपूतों की उत्पत्ति व उत्कर्ष
7वीं से 12वीं शताब्दी में गुर्जर-प्रतिहार (कन्नौज व भीनमाल), शाकंभरी के चौहान (पृथ्वीराज III), मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया (कुंभा, सांगा, प्रताप) एवं आमेर के कछवाहा शासकों ने सामरिक व स्थापत्य उपलब्धियां अर्जित कीं।
3. स्वाधीनता संग्राम व एकीकरण
1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (नसीराबाद, आउवा, कोटा), 44 वर्षीय बिजोलिया किसान आंदोलन, 19 प्रजामंडल तथा 19 देशी रियासतों व 3 ठिकानों का 7 चरणों में आधुनिक राजस्थान एकीकरण (1948-1956)।
1. राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं (Ancient Civilizations)
1. कालीबंगा सभ्यता (Kalibangan Civilization)
हनुमानगढ़ (घग्गर नदी तट), अमलानंद घोष द्वारा खोज (1952), जुते हुए खेत का विश्व का प्राचीनतम साक्ष्य, 7 अग्निकुंड एवं लकड़ी की नालियाँ।
2. गणेश्वर सभ्यता (Ganeshwar Civilization)
नीम का थाना (कांतली नदी), भारत में 'ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी', 99% शुद्ध तांबे के तीर, बाण व मछली पकड़ने का कांटा।
3. आहड़ सभ्यता (Ahar Civilization)
उदयपुर (बेड़च/आयड़ नदी), 'ताम्रवती नगरी', 'आघाटपुर' व 'धूलकोट', बिना हत्थे का ईरानी जलपात्र एवं बनासियन बुल।
4. बैराठ सभ्यता (Bairath Civilization)
कोटपूतली-बहरोड़ (बाणगंगा नदी), प्राचीन विराटघर (मत्स्य जनपद), बीजक की पहाड़ी से कैप्टन बर्ट द्वारा खोजा गया अशोक का भाब्रू शिलालेख।
5. रंगमहल सभ्यता (Rangmahal Civilization)
हनुमानगढ़ (सूरतगढ़ के पास - घग्घर नदी), स्वीडिश दल (डॉ. हन्ना रिड) द्वारा उत्खनन। गांधार शैली के विशेष चित्रित मृद्भाण्ड और कुषाण-गुप्त कालीन अवशेष।
2. राजस्थान के प्रमुख राजवंश (Major Dynasties)
1. चौहान राजवंश (Chauhan Dynasty)
शाकंभरी/सांभर के चौहान (वासुदेव 551 ई.), अजमेर शाखा (अजयराज, विग्रहराज IV, पृथ्वीराज III) एवं रणथंभौर (हम्मीर) व जालौर (कान्हड़देव)।
2. गुर्जर-प्रतिहार राजवंश (Gurjar Pratihar)
मंडोर व भीनमाल शाखा (हरिश्चंद्र, नागभट्ट I), वत्सराज (त्रिपक्षीय संघर्ष), मिहिर भोज एवं प्रतिहारों की भव्य महामारू स्थापत्य शैली।
3. मेवाड़ का गुहिल व सिसोदिया राजवंश
गुहादित्य, बाप्पा रावल (734 ई.), जैत्रसिंह, रतनसिंह (चित्तौड़ प्रथम साका 1303), महाराणा कुंभा, सांगा (खानवा 1527) एवं महाराणा प्रताप (हल्दीघाटी 1576)।
4. आमेर का कछवाहा राजवंश (Kachhawa)
दूल्हेराय (1137 ई.), भारमल (मुगल संधि 1562), मानसिंह प्रथम, मिर्जा राजा जयसिंह (पुरंदर संधि 1665) एवं सवाई जयसिंह (जयपुर स्थापना 1727 व वेधशालाएं)।
5. आबू व वागड़ का परमार राजवंश (Parmar Dynasty)
धूमराज व उत्पलराज द्वारा स्थापना, आबू के परमार (धंधुक, धारावर्ष परमार), वागड़ (अर्थूणा) व किराडू के परमार शासक एवं उनका सांस्कृतिक योगदान।
3. आधुनिक राजस्थान : 1857 क्रांति, किसान व प्रजामंडल आंदोलन
1. 1857 की क्रांति (1857 Revolt)
6 सैनिक छावनियाँ, नसीराबाद से विस्फोट (28 मई), आउवा के युद्ध (बिथोड़ा, चेलावास - सुगाली माता), कोटा व धौलपुर जनविद्रोह एवं तात्या तोपे।
2. किसान आंदोलन (Peasant Movements)
मातृकुंडिया (1880), बिजोलिया (44 वर्ष अहिंसक), बेगू (रूपाजी-कृपाजी), नीमूचणा (दोहरी डायरशाही), बूंदी (नानकजी भील) व डाबड़ा कांड।
3. प्रजामंडल आंदोलन (Prajamandal)
सभी 19 प्रजामंडल, हरिपुरा अधिवेशन (1938), जेंटलमेन्स एग्रीमेंट, रास्तापाल कांड (कालीबाई) व सागरमल गोपा का अमर बलिदान।
4. राजस्थान का एकीकरण एवं रियासती अध्ययन (7 चरण शृंखला)
18 मार्च 1948 से 1 नवंबर 1956 तक (8 वर्ष, 7 माह, 14 दिन) चले राजस्थान एकीकरण, 19 देशी रियासतों, 3 ठिकानों, प्रिवीपर्स एवं प्रमुख समितियों (सत्यनारायण राव, शंकरराव देव, फजल अली आयोग) का संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन:
1. राजस्थान का एकीकरण : मास्टर तुलनात्मक सारणी एवं 7 चरण संपूर्ण विश्लेषण
सातों चरणों की संपूर्ण तुलनात्मक सारणी, राजप्रमुख, उप-राजप्रमुख, प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री, उद्घाटनकर्ता, क्षेत्रफल, जनसंख्या, आय, प्रिवीपर्स एवं RAS Mains मॉडल प्रश्नोत्तर एक ही मास्टर पेज पर।
2. 19 रियासतें, 3 ठिकाने एवं प्रिवीपर्स (Privy Purses)
तत्कालीन शासक, राजवंश, तोपों की सलामी, विलय-पत्र (Instrument of Accession) की तिथियाँ, प्रिवीपर्स का वित्तीय आवंटन एवं 26वाँ संविधान संशोधन 1971।
3. आरंभिक चरण : मत्स्य संघ, पूर्व व संयुक्त राजस्थान
अलवर-भरतपुर संकट व गांधी हत्याकांड जाँच, हाड़ौती-वागड़ संघ के प्रयास, मेवाड़ महाराणा की 3 शर्तें, एन.वी. गाडगिल व पं. नेहरू का आगमन एवं शोभाराम-असावा-वर्मा मंत्रिमंडल।
4. वृहत् राजस्थान एवं मत्स्य संघ विलय (30 मार्च 1949)
JJBJ रियासतों का विलय (राजस्थान दिवस), पी. सत्यनारायण राव समिति (राजधानी व विभाग आवंटन), डॉ. शंकरराव देव समिति एवं हीरालाल शास्त्री मंत्रिमंडल।
5. सिरोही, आबू-देलवाड़ा एवं अजमेर का अंतिम एकीकरण
सिरोही विभाजन व गोकुलभाई भट्ट, अजमेर की धारा सभा व हरिभाऊ उपाध्याय, राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली), सुनील टप्पा-सिरोंज विनिमय व 7वाँ संशोधन।
5. आगामी इतिहास अध्याय (Updating Soon)
इतिहास खंड के निम्नलिखित नए अध्यायों की प्रमाणिक अध्ययन सामग्री शीघ्र प्रकाशित की जा रही है:
मारवाड़ का राठौड़ राजवंश
राव सीहा, राव जोधा, मालदेव, राव चंद्रसेन
बीकानेर व भाटी राजवंश
राव बीका, रायसिंह, जैसलमेर के भाटी शासक
मुगल-राजपूत संबंध व प्रतिरोध
संधियाँ, मनसबदारी, दुर्गादास राठौड़, अमर सिंह
राजस्थान में सामंत प्रथा
उमराव, सोलह, बत्तीस, चार श्रेणियाँ व अधिकार
जनजाति आंदोलन (भील व मीणा)
गोविंद गिरी (मानगढ़ धाम), मोतीलाल तेजावत (एकी)
ऐतिहासिक स्रोत, शिलालेख व सिक्के
बिजोलिया, घटियाला, चीरवा शिलालेख व ताम्रपत्र
इतिहास पाठ्यक्रम (Live Index)
राजस्थान इतिहास के सभी प्रमुख अध्याय:
- प्राचीन सभ्यताएं (कालीबंगा, आहड़...) सक्रिय
- प्रमुख राजवंश (गुहिल, चौहान, कछवाहा) सक्रिय
- 1857 की क्रांति (6 छावनियाँ, आउवा) सक्रिय
- किसान आंदोलन (बिजोलिया, बेगू...) सक्रिय
- प्रजामंडल आंदोलन (19 संगठन, कांड) सक्रिय
- राजस्थान एकीकरण (7 चरण मास्टर हब) सक्रिय
- 19 रियासतें, 3 ठिकाने व प्रिवीपर्स सक्रिय
- मत्स्य संघ, पूर्व व संयुक्त (चरण 1-3) सक्रिय
- वृहत् राजस्थान व मत्स्य विलय (चरण 4-5) सक्रिय
- सिरोही, आबू व अजमेर विलय (चरण 6-7) सक्रिय
- मारवाड़, बीकानेर व भाटी राजवंश शीघ्र
- मुगल-राजपूत संबंध व प्रतिरोध शीघ्र
- जनजाति आंदोलन (भील व मीणा) शीघ्र
- राजस्थान में सामंत प्रथा शीघ्र
हमारे प्रामाणिक अध्ययन स्रोत (Source Books)
"RAJShiksha टीम द्वारा सभी नोट्स मौलिक प्रारूप में तैयार किए गए हैं। तथ्यों की प्रामाणिकता हेतु डॉ. गोपीनाथ शर्मा, डॉ. वी.एस. भार्गव, वी.पी. मेनन ('The Story of the Integration of the Indian States'), राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी एवं RBSE की पाठ्यपुस्तकों को मुख्य आधार बनाया गया है।"
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