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राजस्थान की 19 देशी रियासतें, 3 ठिकाने एवं प्रिवीपर्स :
शासक, तोपों की सलामी, राजस्व व 26वाँ संविधान संशोधन

15 अगस्त 1947 के समय राजपूताना की 19 रियासतों, 3 स्वायत्त ठिकानों (लावा, कुशलगढ़, नीमराना) और अजमेर-मेरवाड़ा ('C' श्रेणी) का गजेटियर-स्तरीय प्रामाणिक अध्ययन। शासक, राजवंश, वार्षिक आय, जनसंख्या, विलय-पत्र (Instrument of Accession) की शर्तें, प्रिवीपर्स का संपूर्ण वित्तीय विवरण एवं 1971 में उन्मूलन तक का इतिहास।

मूल विलय-पत्र दस्तावेज कुल प्रिवीपर्स: ₹1.35+ करोड़ वार्षिक 19, 17, 15 तोपों की सलामी
रियासती विभाग मापदंड (1947)

स्वतंत्र रहने हेतु न्यूनतम 10 लाख जनसंख्या₹1 करोड़ वार्षिक राजस्व अनिवार्य था।

1. जयपुर रियासत: ₹2.20 करोड़ आय
2. जोधपुर रियासत: ₹1.85 करोड़ आय
3. बीकानेर रियासत: ₹1.25 करोड़ आय
4. मेवाड़ (उदयपुर): ₹1.15 करोड़ आय

स्रोत: V.P. Menon, 'The Story of the Integration of the Indian States'

रियासतें एवं प्रिवीपर्स : टेस्ट दें

1. संवैधानिक पृष्ठभूमि, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 एवं रियासती विभाग

ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act, 1947) की धारा 7(1)(b) के तहत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश क्राउन की सर्वोच्च सत्ता (Paramountcy) समाप्त हो गई। इसके परिणामस्वरूप भारत की 565 देशी रियासतों (जिनमें राजस्थान की 19 रियासतें व 3 ठिकाने शामिल थे) पर ब्रिटिश संप्रभुता समाप्त हो गई और वे तकनीकी रूप से संप्रभु (Sovereign) हो गईं। उन्हें तीन विकल्प दिए गए थे:

विकल्प A

भारत अधिराज्य (Dominion of India) में विलय

विकल्प B

पाकिस्तान अधिराज्य (Dominion of Pakistan) में विलय

विकल्प C

स्वतंत्र अस्तित्व (Independent Sovereign State) बनाए रखना

📌 रियासती विभाग (States Department) की स्थापना एवं मापदंड

भारत के संभावित विखंडन को रोकने के लिए भारत सरकार ने 5 जुलाई 1947 को 'रियासती विभाग' (States Department) का गठन किया। इसके गृहमंत्री व अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल तथा सचिव वरिष्ठ सिविल सेवक वी.पी. मेनन (V.P. Menon) थे।

रियासती विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी किया कि केवल वही रियासत स्वतंत्र राज्य के रूप में रह सकती है जो दो अनिवार्य शर्तें पूरी करती हो:
1. न्यूनतम जनसंख्या: 10 लाख (1 Million) या अधिक।
2. न्यूनतम वार्षिक राजस्व: ₹1 करोड़ (₹10 Million) या अधिक।
राजस्थान की 19 रियासतों में से केवल जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और मेवाड़ (उदयपुर) ही इस मापदंड पर खरी उतरती थीं। शेष 15 रियासतों को अपने पड़ोसी राज्यों या संघों में एकीकृत होना अनिवार्य था।

2. राजस्थान की सभी 19 देशी रियासतों का गजेटियर-स्तरीय प्रामाणिक विवरण

राजस्थान की 19 रियासतों का विलय विभिन्न चरणों में संपन्न हुआ। नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक रियासत का राजवंश, तत्कालीन शासक, तोपों की सलामी (Gun Salutes), 1941 की जनगणना के अनुसार अनुमानित जनसंख्या, वार्षिक आय, विलय-पत्र पर हस्ताक्षर की तिथि तथा एकीकरण का चरण संकलित है:

क्र.सं. रियासत राजवंश तत्कालीन शासक (1947-49) तोपों की सलामी अनुमानित जनसंख्या व आय विलय-पत्र हस्ताक्षर एकीकरण चरण
1 मेवाड़ (उदयपुर) गुहिल / सिसोदिया महाराणा भूपाल सिंह 19 तोपें (स्थानीय 21) जनसंख्या: ~19.2 लाख
आय: ₹1.15 करोड़
11 अप्रैल 1948 तृतीय चरण (18 अप्रैल 1948)
2 जयपुर कछवाहा राजपूत सवाई मानसिंह द्वितीय 17 तोपें (स्थानीय 19) जनसंख्या: ~30.4 लाख
आय: ₹2.20 करोड़
14 जनवरी 1949 (सहमति) चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949)
3 जोधपुर (मारवाड़) राठौड़ राजपूत महाराजा हनवंत सिंह 17 तोपें (स्थानीय 19) जनसंख्या: ~25.5 लाख
आय: ₹1.85 करोड़
10 अगस्त 1947 चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949)
4 बीकानेर राठौड़ राजपूत महाराजा सार्दुल सिंह 17 तोपें (स्थानीय 19) जनसंख्या: ~12.9 लाख
आय: ₹1.25 करोड़
7 अगस्त 1947 (प्रथम) चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949)
5 कोटा हाड़ा चौहान महाराव भीमसिंह द्वितीय 17 तोपें (स्थानीय 19) जनसंख्या: ~7.7 लाख
आय: ₹55 लाख
15 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
6 बूंदी हाड़ा चौहान महाराव राजा बहादुर सिंह 17 तोपें जनसंख्या: ~2.5 लाख
आय: ₹20 लाख
20 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
7 झालावाड़ झाला राजपूत महाराज राणा हरिश्चंद्र बहादुर 13 तोपें (स्थानीय 15) जनसंख्या: ~1.2 लाख
आय: ₹12 लाख
18 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
8 अलवर नरूका कछवाहा महाराजा तेज सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~8.2 लाख
आय: ₹45 लाख
28 फरवरी 1948 प्रथम चरण (18 मार्च 1948)
9 भरतपुर सिनसिनवार जाट महाराजा बृजेंद्र सिंह 17 तोपें (स्थानीय 19) जनसंख्या: ~5.7 लाख
आय: ₹38 लाख
28 फरवरी 1948 प्रथम चरण (18 मार्च 1948)
10 धौलपुर बमरौलिया जाट महाराजा उदयभान सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~2.8 लाख
आय: ₹18 लाख
14 अगस्त 1947 (अंतिम) प्रथम चरण (18 मार्च 1948)
11 करौली जादौन (यदुवंशी) महाराजा गणेशपाल वासुदेव 17 तोपें जनसंख्या: ~1.5 लाख
आय: ₹10 लाख
28 फरवरी 1948 प्रथम चरण (18 मार्च 1948)
12 बांसवाड़ा सिसोदिया (गहलोत) महारावल चंद्रवीर सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~2.9 लाख
आय: ₹14 लाख
23 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
13 डूंगरपुर सिसोदिया (गहलोत) महारावल लक्ष्मण सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~2.7 लाख
आय: ₹12.5 लाख
20 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
14 प्रतापगढ़ सिसोदिया (गहलोत) महारावल रामसिंह II / अम्बिका प्रताप 15 तोपें जनसंख्या: ~91 हजार
आय: ₹8.5 लाख
20 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
15 शाहपुरा सिसोदिया (गहलोत) राजाधिराज सुदर्शन देव 9 तोपें (गैर-सलामी से प्रमोट) जनसंख्या: ~61 हजार
आय: ₹4.5 लाख
15 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
16 टोंक मुस्लिम (पिंडारी/पठान) नवाब इस्माइल अली खाँ / फारूक अली 17 तोपें जनसंख्या: ~3.5 लाख
आय: ₹24 लाख
19 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
17 किशनगढ़ राठौड़ राजपूत महाराजा सुमेर सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~1.04 लाख
आय: ₹9 लाख
18 मार्च 1948 द्वितीय चरण (25 मार्च 1948)
18 सिरोही देवड़ा चौहान महाराव तेजबहादुर / अभय सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~2.3 लाख
आय: ₹15 लाख
25 जनवरी 1950 (विभाजित) षष्ठम व सप्तम चरण
19 जैसलमेर भाटी राजपूत महारावल गिरधर सिंह 15 तोपें जनसंख्या: ~93 हजार
आय: ₹6.5 लाख
10 जनवरी 1949 चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949)

शाहपुरा : उत्तरदायी शासन स्थापित करने वाली प्रथम रियासत

शाहपुरा क्षेत्रफल एवं जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान की सबसे छोटी रियासतों में से एक थी। इसके प्रबुद्ध शासक राजाधिराज सुदर्शन देव ने भारत के स्वतंत्र होने से ठीक एक दिन पूर्व 14 अगस्त 1947 को ही रियासत में प्रजामंडल नेता गोकुललाल असावा के नेतृत्व में पूर्ण उत्तरदायी और लोकतांत्रिक मंत्रिमंडल की स्थापना कर दी थी। शाहपुरा ने बिना किसी हिचकिचाहट के राजस्थान संघ में सबसे पहले विलय की सहमति दी।

झालावाड़ : नरेश स्वयं बने मंत्रिमंडल के सदस्य

झालावाड़ के युवा शासक महाराज राणा हरिश्चंद्र बहादुर ने न केवल अपनी रियासत का पूर्व राजस्थान में सहजता से विलय किया, बल्कि वे भारत के ऐसे विरले शासक बने जिन्होंने बाद में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और राजस्थान के मोहनलाल सुखाड़िया मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी कार्य किया।

3. तोपों की सलामी व्यवस्था (Gun Salutes Protocol)

ब्रिटिश काल में देशी रियासतों की संप्रभुता और प्रतिष्ठा का निर्धारण ब्रिटिश प्रोटोकॉल के तहत 'तोपों की सलामी' (Gun Salutes) द्वारा तय होता था। राजस्थान की रियासतों में सलामी का पदानुक्रम इस प्रकार था:

19 तोपों की सलामी

मेवाड़ (उदयपुर)

(स्थानीय रूप से उदयपुर की सीमाओं में 21 तोपें)। राजपूताना में सर्वोच्च मर्यादा।

17 तोपों की सलामी

जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, बूंदी, करौली, भरतपुर, टोंक

प्रथम श्रेणी की प्रमुख रियासतें।

15 तोपों की सलामी

अलवर, धौलपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, जैसलमेर, सिरोही, किशनगढ़

मध्यम श्रेणी की संप्रभु रियासतें।

13 व 9 तोपों की सलामी

झालावाड़ (13 तोपें)
शाहपुरा (9 तोपें)

शाहपुरा को पूर्व में तोपों की सलामी प्राप्त नहीं थी, बाद में 9 तोपों की सलामी दी गई।

💡 नोट: राजस्थान के तीनों ठिकाने (कुशलगढ़, लावा, नीमराना) गैर-सलामी (Non-Salute States) की श्रेणी में आते थे।

4. राजस्थान के 3 ठिकाने (Non-Salute States / Chiefships)

1. कुशलगढ़ ठिकाना

बांसवाड़ा क्षेत्र
  • शासक: राव हरेंद्र सिंह (राठौड़ वंश)।
  • भौगोलिक स्थिति: बांसवाड़ा रियासत के दक्षिण में स्थित था, किन्तु आंतरिक रूप से काफी स्वायत्तता प्राप्त थी।
  • क्षेत्रफल व जनसंख्या: क्षेत्रफल ~340 वर्ग मील, जनसंख्या ~35,000 थी।
  • विलय: 25 मार्च 1948 को द्वितीय चरण (पूर्व राजस्थान संघ) में बांसवाड़ा के साथ ही राजस्थान में शामिल हुआ।
RPSC Point: यह राजस्थान का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा ठिकाना था।

2. लावा ठिकाना

टोंक/जयपुर सीमा
  • शासक: बंशीप्रदीप सिंह (नरूका कछवाहा)।
  • ऐतिहासिक विवाद: 1867 में टोंक के नवाब मुहम्मद अली खाँ और लावा के ठाकुर धीरत सिंह के बीच हिंसक संघर्ष हुआ, जिसके बाद अंग्रेजों ने लावा को टोंक से अलग कर सीधे ब्रिटिश रेजिडेंट के अधीन कर दिया था।
  • विलय प्रक्रिया: जुलाई 1948 में केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर लावा को जयपुर राज्य में प्रशासनिक रूप से मिला दिया। चतुर्थ चरण (30 मार्च 1949) में वृहत् राजस्थान का अभिन्न अंग बना।
RPSC Point: यह क्षेत्रफल (मात्र ~20 वर्ग मील) की दृष्टि से सबसे छोटा ठिकाना था।

3. नीमराना ठिकाना

अलवर क्षेत्र
  • शासक: राव राजेंद्र सिंह (चौहान वंश - पृथ्वीराज चौहान के वंशज)।
  • भौगोलिक स्थिति: अलवर राज्य के उत्तर-पश्चिम में स्थित अर्ध-स्वायत्त जागीर।
  • विलय: 18 मार्च 1948 को प्रथम चरण में मत्स्य संघ के गठन के साथ ही इसका भारत संघ में विधिवत विलय संपन्न हुआ।
RPSC Point: प्रथम चरण (मत्स्य संघ) में शामिल होने वाला एकमात्र ठिकाना।

5. प्रिवीपर्स (Privy Purse) की संपूर्ण सूची, संवैधानिक प्रावधान एवं 26वाँ संशोधन (1971)

💰 प्रिवीपर्स (Privy Purse) क्या था?

देशी नरेशों को अपने राज्य का संप्रभु अधिकार, सेना, कोष और कर लगाने का अधिकार भारत संघ को सौंपने के एवज में भारत सरकार द्वारा उनके जीवनयापन, राजपरिवार के खर्च, निजी कर्मचारियों के भत्तों और धार्मिक दायित्वों के निर्वहन हेतु दी जाने वाली वार्षिक कर-मुक्त पेंशन/अनुदान को 'प्रिवीपर्स' (Privy Purse) कहा जाता था। इसका उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेद 291 (प्रिवीपर्स राशि) तथा अनुच्छेद 362 (राजाओं के निजी विशेषाधिकार) में था।

📊 राजस्थान के 19 शासकों को स्वीकृत वार्षिक प्रिवीपर्स राशि (राजकीय गजट सूची):

रियासत शासक का नाम स्वीकृत वार्षिक प्रिवीपर्स (₹) विशेष टिप्पणी व संवैधानिक भत्ते
1. मेवाड़ (उदयपुर) महाराणा भूपाल सिंह ₹20,00,000 (कुल) ₹10 लाख मूल प्रिवीपर्स + ₹5 लाख महाराजप्रमुख भत्ता + ₹5 लाख एकलिंगजी मंदिर ट्रस्ट।
2. जयपुर सवाई मानसिंह द्वितीय ₹18,00,000 राजस्थान में सर्वाधिक व्यक्तिगत प्रिवीपर्स। साथ ही आजीवन राजप्रमुख का पद।
3. जोधपुर महाराजा हनवंत सिंह ₹17,50,000 उम्मेद भवन पैलेस व निजी संपत्तियाँ राजा के पास सुरक्षित रखी गईं।
4. बीकानेर महाराजा सार्दुल सिंह ₹17,00,000 लाल Officers व निजी रेलवे नेटवर्क का विशेष समायोजन।
5. कोटा महाराव भीमसिंह द्वितीय ₹7,00,000 उप-राजप्रमुख का पद व विशेष राजभत्ता भी देय था।
6. अलवर महाराजा तेज सिंह ₹5,20,000 मत्स्य संघ गठन के समय तय।
7. भरतपुर महाराजा बृजेंद्र सिंह ₹5,02,000 भरतपुर के लोहागढ़ की निजी संपत्ति का अधिकार सुरक्षित।
8. टोंक नवाब इस्माइल अली खाँ ₹2,78,000 एकमात्र मुस्लिम रियासत।
9. धौलपुर महाराजा उदयभान सिंह ₹2,64,000 मत्स्य संघ के राजप्रमुख का अतिरिक्त भत्ता मिला।
10. बूंदी महाराव राजा बहादुर सिंह ₹2,81,000 द्वितीय चरण में वरिष्ठ उप-राजप्रमुख बनाए गए।
11. सिरोही महाराव अभय सिंह ₹2,12,600 आबू-देलवाड़ा विभाजन विवाद के दौरान समायोजित।
12. डूंगरपुर महारावल लक्ष्मण सिंह ₹1,98,000 वागड़ क्षेत्र के प्रमुख शासक।
13. करौली महाराजा गणेशपाल वासुदेव ₹1,30,500 मत्स्य संघ के उप-राजप्रमुख का मानदेय।
14. झालावाड़ महाराज राणा हरिश्चंद्र ₹1,36,000 राजभत्ता व निजी संपत्ति संरक्षण।
15. किशनगढ़ महाराजा सुमेर सिंह ₹1,36,000 पूर्व राजस्थान संघ में विलय।
16. बांसवाड़ा महारावल चंद्रवीर सिंह ₹1,26,000 विलय पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता।
17. प्रतापगढ़ महारावल अम्बिका प्रताप सिंह ₹1,02,000 सिसोदिया गहलोत शासक।
18. शाहपुरा राजाधिराज सुदर्शन देव ₹90,000 राजस्थान में सबसे कम प्रिवीपर्स प्राप्त करने वाली रियासतों में से एक।
19. जैसलमेर महारावल गिरधर सिंह ₹1,80,000 सीमांत रियासत का विशेष सुरक्षा पैकेज।

⚖️ 26वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 : प्रिवीपर्स की ऐतिहासिक समाप्ति

तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा समाजवादी नीतियों और लोकतांत्रिक समानता की स्थापना हेतु संसद में 26वाँ संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया।

  • अनुच्छेद 291 व 362 का विलोपन: संविधान से प्रिवीपर्स और राजाओं के विशेष विशेषाधिकार (जैसे- व्यक्तिगत लाल बत्ती, राजकीय ध्वज, तोपों की सलामी, कर-मुक्ति, बंदूक रखने की छूट) समाप्त कर दिए गए।
  • अनुच्छेद 363A का अंतःस्थापन: इस नए अनुच्छेद के तहत भारतीय गणतंत्र में किसी भी व्यक्ति को 'शासक', 'महाराजा' या 'नवाब' के रूप में सरकारी मान्यता देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
  • माधवराव सिंधिया बनाम भारत संघ केस: सर्वोच्च न्यायालय ने प्रारंभ में 1970 के राष्ट्रपति के अध्यादेश को असंवैधानिक ठहराया था, जिसके बाद 1971 में यह संशोधन पारित कर प्रिवीपर्स को हमेशा के लिए समाप्त किया गया।

6. विलय-पत्र (Instrument of Accession) एवं यथास्थिति समझौता (Standstill Agreement)

रियासतों के भारत में एकीकरण हेतु रियासती विभाग ने दो कानूनी प्रारूप (Legal Drafts) तैयार किए थे:

1. विलय-पत्र (Instrument of Accession)

इसके तहत रियासतों ने अपनी संप्रभुता के 3 प्रमुख विषय भारत संघ (Dominion of India) को सौंपे:
(i) रक्षा (Defence)
(ii) विदेश मामले (External Affairs)
(iii) संचार व परिवहन (Communications)
शेष सभी आंतरिक विषय नरेशों के पास सुरक्षित रखे गए थे, जिन्हें बाद में संघ निर्माण (Unions) के समय पूरी तरह हस्तांतरित कराया गया।

2. यथास्थिति समझौता (Standstill Agreement)

यह समझौता 15 अगस्त 1947 से पूर्व ब्रिटिश सत्ता और रियासतों के मध्य चल रही प्रशासनिक, व्यापारिक, डाक-तार, मुद्रा और सीमा-शुल्क व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के तब तक जारी रखने के लिए था जब तक कि नया संविधान या स्थायी संधि लागू न हो जाए।

7. आरएएस मुख्य परीक्षा (RAS Mains) विशेष मॉडल प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 (2 अंक / 20 शब्द): 'प्रिवीपर्स' (Privy Purse) को परिभाषित कीजिए।

RAS Mains Paper-1

उत्तर: भारतीय संघ में विलय के बदले देशी रियासतों के शासकों को उनके जीवनयापन व निजी खर्च हेतु दी जाने वाली कर-मुक्त वार्षिक पेंशन को प्रिवीपर्स कहा जाता था (अनुच्छेद 291)। इसे 26वें संविधान संशोधन 1971 द्वारा समाप्त किया गया।

प्रश्न 2 (5 अंक / 50 शब्द): रियासती विभाग द्वारा निर्धारित 'स्वतंत्र अस्तित्व' के मापदंडों एवं राजस्थान में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालिए।

RAS Mains Paper-1

उत्तर: 5 जुलाई 1947 को सरदार पटेल के नेतृत्व में गठित रियासती विभाग ने स्वतंत्र राज्य हेतु न्यूनतम 10 लाख जनसंख्या तथा ₹1 करोड़ वार्षिक आय का मापदंड तय किया। राजस्थान की 19 रियासतों में से केवल 4 रियासतें (जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और मेवाड़) ही इसे पूरा करती थीं। इस नियम ने राजस्थान की शेष 15 छोटी व मध्यम रियासतों को एकीकरण हेतु विवश कर आधुनिक राजस्थान के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

प्रश्न 3 (10 अंक / 100 शब्द): 26वें संविधान संशोधन अधिनियम (1971) की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजस्थान के पूर्व नरेशों पर इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

RAS Mains Paper-1

उत्तर ढांचा:
1. पृष्ठभूमि: संविधान के अनुच्छेद 291 व 362 के तहत नरेशों को मिले विशेषाधिकार लोकतंत्र व समाजवाद की भावना के विरुद्ध थे। 1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी सरकार ने अनुच्छेद 363A जोड़कर प्रिवीपर्स समाप्त किया।
2. आर्थिक प्रभाव: राजस्थान के राजघरानों की लगभग ₹1.35 करोड़ से अधिक की वार्षिक सुनिश्चित कर-मुक्त आय समाप्त हो गई, जिससे उन्हें अपने विशाल महलों के रख-रखाव हेतु हेरिटेज होटल्स (Heritage Hospitality) और पर्यटन व्यवसाय का रुख करना पड़ा।
3. सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव: राजकीय पदवियों की मान्यता समाप्त होने से सामंती प्रभाव घटा, यद्यपि कई पूर्व नरेशों ने लोकतांत्रिक चुनावों में उतरकर सांसद व विधायक के रूप में नई राजनीतिक स्वीकार्यता प्राप्त की।

महत्वपूर्ण शंका समाधान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

19 रियासतों, ठिकानों और प्रिवीपर्स से संबंधित RPSC व RSSB के मुख्य प्रश्नोत्तर।

राजस्थान में विलय-पत्र पर सर्वप्रथम हस्ताक्षर बीकानेर के महाराजा सार्दुल सिंह ने 7 अगस्त 1947 को किए थे, जबकि सबसे अंत में हस्ताक्षर धौलपुर के महाराजा उदयभान सिंह ने 14 अगस्त 1947 को किए थे।
रियासती विभाग (States Department) के परिपत्र के अनुसार केवल वही रियासत स्वतंत्र अस्तित्व रख सकती थी जिसकी न्यूनतम जनसंख्या 10 लाख या अधिक और वार्षिक राजस्व ₹1 करोड़ या अधिक हो। राजस्थान की केवल 4 रियासतें — जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और मेवाड़ (उदयपुर) ही इन दोनों शर्तों को पूरा करती थीं।
मेवाड़ के महाराणा भूपाल सिंह को कुल ₹20 लाख वार्षिक राशि तय की गई थी (जिसमें ₹10 लाख मूल प्रिवीपर्स, ₹5 लाख महाराजप्रमुख का विशेष राजभत्ता एवं ₹5 लाख एकलिंगजी मंदिर ट्रस्ट हेतु निर्धारित था)। विशुद्ध व्यक्तिगत प्रिवीपर्स के रूप में जयपुर महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय को सर्वाधिक ₹18 लाख प्रतिवर्ष प्राप्त होते थे।
श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा वर्ष 1971 में पारित 26वें संविधान संशोधन अधिनियम (26th Constitutional Amendment Act, 1971) के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 291 और 362 को समाप्त कर तथा अनुच्छेद 363A जोड़कर प्रिवीपर्स व राजाओं की राजकीय मान्यता को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया।
शाहपुरा रियासत के राजाधिराज सुदर्शन देव ने 14 अगस्त 1947 को ही प्रजामंडल नेता गोकुललाल असावा के नेतृत्व में पूर्ण उत्तरदायी और लोकतांत्रिक मंत्रिमंडल की स्थापना कर दी थी।

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