राजस्थान कला एवं संस्कृति
(Rajasthan Art & Culture Notes)
डॉ. गोपीनाथ शर्मा (राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी) एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE कक्षा 10) के प्रामाणिक ग्रंथों के गहन विश्लेषण पर आधारित सम्पूर्ण अध्यायवार स्टडी नोट्स।
राजस्थान की कला एवं संस्कृति का उद्भव एवं स्वरूप
भौगोलिक विषमताओं, अरावली पर्वतमाला और प्राचीन नदी घाटियों में पल्लवित राजस्थान का सांस्कृतिक इतिहास।
1. स्थापत्य व दुर्ग निर्माण कला
अरावली पर्वत शृंखलाओं एवं मरुस्थलीय सुरक्षा की दृष्टि से निर्मित चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, मेहरानगढ़, आमेर, जैसलमेर व रणथंभोर दुर्ग राजपूती शौर्य और बेजोड़ स्थापत्य के प्रतीक हैं।
2. लोकरंग, संगीत एवं नृत्य
घूमर का राजसी वैभव, कालबेलिया की यूनेस्को वैश्विक पहचान, जसनाथी सिद्धों का चमत्कारिक अग्नि नृत्य एवं शेखावाटी के गींदड़ व कच्ची घोड़ी नृत्य लोक जीवन के आनंद को प्रकट करते हैं।
3. लोक आस्था, संत एवं हस्तशिल्प
पंचपीर, रामदेवजी, तेजाजी की लोक आस्था, विश्नोई व जसनाथी आचार संहिता, बणी-ठणी चित्रकला, फड़, थेवा कला तथा रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र व आभूषण मरुधरा की अद्वितीय पहचान हैं।
1. राजस्थान के प्रमुख दुर्ग (Forts of Rajasthan)
1. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (Chittorgarh Fort)
दुर्गों का सिरमौर, 3 प्रसिद्ध साके (1303, 1535, 1568), विजय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, पद्मिनी महल एवं कुंभश्याम मंदिर।
2. कुंभलगढ़ दुर्ग (Kumbhalgarh Fort)
भारत की महान दीवार (36 किमी प्राचीर), कटारगढ़ (मेवाड़ की आँख), महाराणा प्रताप जन्मस्थली एवं नीलकंठ महादेव मंदिर।
3. रणथंभोर दुर्ग (Ranthambore Fort)
बख्तरबंद दुर्ग, हम्मीर देव का हठ, राजस्थान का प्रथम साका (1301 ई. जल जौहर), त्रिनेत्र गणेश मंदिर एवं 32 खंभों की छतरी।
4. मेहरानगढ़ दुर्ग (Mehrangarh Fort)
चिड़ियाटूक पहाड़ी (राव जोधा 1459 ई.), मयूरध्वजगढ़, 7 प्रवेश द्वार, फूल महल, मोती महल, चामुंडा माता मंदिर व तोपें।
5. जैसलमेर दुर्ग (Sonar Kella)
सोनार किला, त्रिकूट पहाड़ी, 99 बुर्ज, ढाई साके, बिना चूने का निर्माण, जिन भद्र सूरि ज्ञान भंडार एवं घाघरा कोट।
6. आमेर दुर्ग (Amer Fort Jaipur)
राजा मानसिंह प्रथम (1592 ई.), शीश महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीला देवी मंदिर, कदमी महल एवं जयगढ़ से सुरंग।
2. राजस्थान के प्रमुख लोक नृत्य (Folk Dances)
1. घूमर नृत्य (Ghoomar Dance)
राजस्थान का राज्य नृत्य, नृत्यों का सिरमौर, अष्टताल (सवाई) गति, लूर व झुमरिया प्रकार, 80 कली का घाघरा एवं घूमर अकादमी 1986।
2. कालबेलिया नृत्य (Kalbelia Dance)
सपेरा जाति का विश्वप्रसिद्ध नृत्य, यूनेस्को धरोहर (2010), शंकरिया (प्रेम प्रसंग), पणिहारी, इंडोणी, पूँगी-खंजरी वाद्य व गुलाबो सपेरा।
3. अग्नि नृत्य (Agni Dance)
कतरियासर (बीकानेर), जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध पुरुषों द्वारा धूणा पर नंगे पाँव नृत्य, "फतेह-फतेह" रणघोष, मतीरा फोड़ना व नगाड़ा वाद्य।
4. कच्ची घोड़ी नृत्य (Kacchi Ghodi Dance)
शेखावाटी का पुरुष प्रधान व्यावसायिक नृत्य, काठ की घोड़ी, बाँकिया व झाँझ वाद्य, फूल खिलने व बंद होने का पैटर्न एवं तलवारबाज़ी।
5. गींदड़ नृत्य (Ginder Dance Shekhawati)
शेखावाटी अंचल (सीकर, चूरू, झुंझुनूं) में होली डांडा रोपण से धुलंडी तक, पुरुषों का स्त्री वेश 'मेहरी/गंगौर', नगाड़े की थाप व विविध स्वांग कला।
3. लोक आस्था, संत संप्रदाय, मेले एवं त्यौहार
1. प्रमुख संत एवं लोक देवता (Lok Devta & Sant)
पंचपीर (पाबूजी, रामदेवजी, गोगाजी, मेहाजी, हड़बूजी), तेजाजी, देवनारायणजी, कल्लाजी, दादू दयाल, जाम्भोजी (29 नियम), जसनाथजी (36 नियम) एवं रामस्नेही पीठें।
2. उत्सव, त्यौहार एवं मेले (Fairs & Festivals)
12 माह के त्यौहार (श्रावणी तीज, कजली तीज, गणगौर, आखा तीज), पुष्कर व बेणेश्वर धाम मेला, 10 राज्य स्तरीय पशु मेले, होली के विविध रूप व पर्यटन उत्सव।
4. चित्रकला, लोककला, संगीत एवं वाद्ययंत्र
1. चित्रकला एवं लोककला (Paintings & Crafts)
4 स्कूल (मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़, हाड़ौती), बणी-ठणी (भारत की मोनालिसा), पिछवाई, फड़ चित्रांकन (शाहपुरा), थेवा कला, उस्ता कला व कावड़।
2. लोक संगीत, गीत एवं वाद्ययंत्र (Music & Instruments)
मांड, मांगणियार, लंगा गायकी, लोक गीत (कुरजां, मूमल, जोरावा, हमसीढो) तथा 4 प्रकार के वाद्ययंत्र (तत - रावणहत्था, सुषिर - अलगोजा, अवनद्ध, घन)।
5. वस्त्र-आभूषण, सांस्कृतिक व्यक्तित्व एवं पर्यटन स्थल
1. वस्त्र एवं आभूषण
पगड़ी शैलियाँ, अंगरखी, पोमचा, लहरिया, आदिवासी वेशभूषा (ताराभांत, कछावू) एवं 85+ आभूषण (मेमंद, चूँप, रखन, तिमणिया)।
2. सांस्कृतिक व्यक्तित्व
कोमल कोठारी, देवीलाल सामर, विजयदान देथा 'बिज्जी', कृपाल सिंह शेखावत, अल्लाह जिलाई बाई, गुलाबो सपेरा व कन्हैयालाल सेठिया।
3. प्रमुख पर्यटन स्थल
10 पर्यटन सर्किट, यूनेस्को धरोहर स्थल, हवामहल, डीग जलमहल, उम्मेद भवन, चांद बावड़ी, रणकपुर, देलवाड़ा व शाही ट्रेनें।
कला-संस्कृति पाठ्यक्रम (Live Index)
राजस्थान कला एवं संस्कृति के प्रमुख अध्याय:
- प्रमुख दुर्ग (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़..) 6 दुर्ग
- प्रमुख लोक नृत्य (घूमर, कालबेलिया..) 5 नृत्य
- प्रमुख संत व लोक देवता सक्रिय
- उत्सव, त्यौहार एवं मेले सक्रिय
- चित्रकला एवं लोककला सक्रिय
- लोक संगीत एवं वाद्ययंत्र सक्रिय
- वस्त्र एवं आभूषण सक्रिय
- प्रमुख सांस्कृतिक व्यक्तित्व सक्रिय
- प्रमुख पर्यटन स्थल (10 सर्किट) सक्रिय
- राजस्थानी भाषा एवं साहित्य शीघ्र
हमारे प्रामाणिक अध्ययन स्रोत (Source Books)
"RAJShiksha टीम द्वारा सभी नोट्स मौलिक एवं परीक्षा-उपयोगी प्रारूप में तैयार किए गए हैं। तथ्यों की 100% प्रामाणिकता हेतु डॉ. गोपीनाथ शर्मा, डॉ. हुकमचंद जैन, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी एवं RBSE (कक्षा 10) की पुस्तकों को प्राथमिक आधार बनाया गया है।"
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