सिरोही, आबू-देलवाड़ा एवं अजमेर का अंतिम एकीकरण :
चरण 6 व 7 (फजल अली आयोग व 1 नवंबर 1956)
राजस्थान एकीकरण के सबसे पेचीदा सीमा विवादों और अंतिम स्वरूप का प्रामाणिक दस्तावेजी अध्ययन। सिरोही विभाजन एवं गोकुलभाई भट्ट का सत्याग्रह, अजमेर-मेरवाड़ा की 'धारा सभा' व हरिभाऊ उपाध्याय, राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग 1953-56), सुनील टप्पा-सिरोंज क्षेत्रीय विनिमय एवं 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा राज्यपाल पद का सृजन।
फजल अली आयोग की सिफारिश पर राजस्थान और मध्य प्रदेश के मध्य सीमाओं का पुनर्संयोजन हुआ:
संवैधानिक आधार: 7वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
1. षष्ठम चरण : राजस्थान संघ एवं सिरोही विभाजन विवाद (26 जनवरी 1950)
📜 सिरोही विभाजन की पृष्ठभूमि एवं सरदार पटेल की योजना
स्वतंत्रता के समय सिरोही रियासत के नाबालिग शासक होने के कारण इसका प्रशासन बंबई सरकार की देखरेख में चल रहा था। सरदार वल्लभभाई पटेल माउंट आबू की स्वास्थ्यवर्धक जलवायु, जैन तीर्थ देलवाड़ा और पर्यटन क्षमता के कारण संपूर्ण सिरोही को बंबई प्रेसीडेंसी (गुजरात क्षेत्र) में शामिल करना चाहते थे।
- जनवरी 1949: भारत सरकार ने सिरोhi का प्रशासन सीधे बंबई प्रांत को सौंप दिया। इसके विरोध में राजस्थान प्रजामंडल और आम जनता ने तीव्र आंदोलन छेड़ दिया।
- 26 जनवरी 1950 का समझौता (षष्ठम चरण): भारतीय संविधान लागू होने के ऐतिहासिक अवसर पर सरदार पटेल ने बीच का रास्ता निकाला। सिरोही की आबू एवं देलवाड़ा तहसीलों (कुल 89 गाँव) को बंबई प्रांत में बनाए रखा गया तथा प्रजामंडल नेता गोकुलभाई भट्ट के गाँव 'हाथल' सहित शेष सिरोही का विलय राजस्थान में कर दिया गया।
- संवैधानिक स्थिति: 26 जनवरी 1950 को इस भू-भाग का वैधानिक नाम आधिकारिक रूप से 'राजस्थान' स्वीकार किया गया और इसे भारतीय संविधान के तहत 'B' (ख) श्रेणी का राज्य बनाया गया। हीरालाल शास्त्री राजस्थान के प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री बने।
2. गोकुलभाई भट्ट, 'हाथल' गाँव प्रसंग एवं राजस्थान में जन-आंदोलन
जब राजस्थान के प्रजामंडल नेताओं ने सरदार पटेल से कहा कि "गोकुलभाई भट्ट के बिना हम राजस्थान की कल्पना भी नहीं कर सकते", तो पटेल ने व्यंग्यात्मक व कूटनीतिक शैली में उत्तर दिया कि — "हमने गोकुलभाई का गाँव हाथल राजस्थान को दे दिया है, अब आपका गोकुलभाई आपके पास है।"
🗣️ राजस्थान के गांधी : गोकुलभाई भट्ट
सिरोही प्रजामंडल के संस्थापक गोकुलभाई दौलतराम भट्ट (जिन्हें 'राजस्थान का गांधी' कहा जाता है) ने आबू-देलवाड़ा को बंबई में मिलाए जाने को राजस्थान की अस्मिता के साथ अन्याय बताया। उन्होंने भूख हड़ताल, पदयात्राएं और सत्याग्रह प्रारंभ किया।
📢 प्रजामंडल नेताओं का संयुक्त मोर्चा
माणिक्यलाल वर्मा, जयनारायण व्यास, हीरालाल शास्त्री और बलवंत सिंह मेहता ने संसद और कांग्रेस कार्यसमिति में आबू-देलवाड़ा को पुनः राजस्थान में शामिल करने का पुरजोर दबाव बनाया। अंततः इस विवाद को राज्य पुनर्गठन आयोग को सौंपने पर सहमति बनी।
3. अजमेर-मेरवाड़ा की 'धारा सभा' एवं पंडित हरिभाऊ उपाध्याय का रुख
🏛️ 'C' श्रेणी का राज्य अजमेर-मेरवाड़ा एवं पृथक विधानसभा 'धारा सभा'
1818 से ही अजमेर-मेरवाड़ा अंग्रेजों का सीधा चीफ कमिश्नर शासित प्रांत (Chief Commissioner's Province) था। 1950 में संविधान लागू होने पर इसे 'C' (ग) श्रेणी का राज्य बनाया गया।
- धारा सभा: अजमेर-मेरवाड़ा की अपनी 30 सदस्यीय पृथक विधानसभा थी, जिसे स्थानीय भाषा में 'धारा सभा' कहा जाता था।
- एकमात्र मुख्यमंत्री: प्रसिद्ध गांधीवादी लेखक एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित हरिभाऊ उपाध्याय इसके एकमात्र मुख्यमंत्री (1952-1956) थे।
- हरिभाऊ उपाध्याय का विरोध: प्रारंभ में हरिभाऊ जी अजमेर के राजस्थान में विलय के पक्ष में नहीं थे। उनका तर्क था कि अजमेर एक छोटा, शांत और सीधा केंद्रीय सहायता प्राप्त राज्य है, राजस्थान के सामंती माहौल में मिलने से अजमेर का प्रशासनिक व आर्थिक विकास बाधित होगा।
- अंतिम सहमति: राज्य पुनर्गठन आयोग के कड़े रुख और अजमेर की जनता की राजस्थान के साथ सांस्कृतिक एकात्मकता को देखते हुए 1956 में धारा सभा को भंग कर अजमेर-मेरवाड़ा का पूर्ण विलय राजस्थान में कर दिया गया।
4. सप्तम चरण : राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) एवं अंतिम एकीकरण
⚖️ राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC - 1953) की संरचना एवं राजस्थान संबंधी सिफारिशें
भारत सरकार ने 22 दिसंबर 1953 को भाषाई व प्रशासनिक आधार पर राज्यों के पुनर्गठन हेतु 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय आयोग नियुक्त किया:
1. न्यायमूर्ति फजल अली (अध्यक्ष - उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश)
2. पंडित हृदयनाथ कुंजरू (सदस्य - प्रख्यात शिक्षाविद् व सांसद)
3. सरदार के.एम. पणिक्कर (सदस्य - प्रख्यात इतिहासकार व राजनयिक)
आयोग की राजस्थान संबंधी 4 प्रमुख सिफारिशें (1955 रिपोर्ट):
(i) आबू एवं देलवाड़ा तहसीलों को बंबई प्रांत से वापस लेकर राजस्थान में मिलाया जाए।
(ii) केंद्र शासित 'C' श्रेणी के अजमेर-मेरवाड़ा राज्य को राजस्थान में पूर्णतः विलीन किया जाए।
(iii) मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का सुनील टप्पा क्षेत्र राजस्थान (झालावाड़) को सौंपा जाए।
(iv) राजस्थान (झालावाड़/कोटा) के सिरोंज उपखंड को मध्य प्रदेश (विदिशा) में शामिल किया जाए।
5. क्षेत्रीय विनिमय (Territorial Exchange) : सुनील टप्पा बनाम सिरोंज
1 नवंबर 1956 को भौगोलिक सीमाओं को तर्कसंगत और सुगम बनाने हेतु राजस्थान और मध्य प्रदेश के मध्य क्षेत्रों की अदला-बदली की गई:
📥 सुनील टप्पा (Sunel Tappa)
राजस्थान में शामिल- पूर्व स्थिति: तत्कालीन मध्य भारत (मध्य प्रदेश) के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का एक उप-भाग।
- विलय: 1 नवंबर 1956 को इसे राजस्थान के झालावाड़ जिले (पिड़ावा तहसील) में विधिवत शामिल किया गया।
📤 सिरोंज उपखंड (Sironj Sub-division)
मध्य प्रदेश को दिया- पूर्व स्थिति: पूर्व में टोंक रियासत का एक बाहरी परगना (Enclave), जो एकीकरण में झालावाड़/कोटा संभाग के अंतर्गत था।
- हस्तांतरण: भौगोलिक रूप से मध्य प्रदेश के बीच में स्थित होने के कारण इसे राजस्थान से अलग कर मध्य प्रदेश के विदिशा जिले को सौंप दिया गया।
6. 7वाँ संविधान संशोधन (1956) एवं प्रशासनिक रूपांतरण (राजप्रमुख ➔ राज्यपाल)
🏛️ संवैधानिक परिवर्तन
- राज्यों की श्रेणियों की समाप्ति: 7वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा भारतीय संविधान से A, B, C, D श्रेणियों का वर्गीकरण समाप्त कर दिया गया। राजस्थान को 'B' श्रेणी से पदोन्नत कर भारत का एक पूर्ण स्वायत्त राज्य बनाया गया।
- राजप्रमुख पद समाप्त: 1 नवंबर 1956 को सवाई मानसिंह द्वितीय का 'राजप्रमुख' पद समाप्त कर दिया गया।
- राज्यपाल पद का सृजन: राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में 'राज्यपाल' (Governor) का पद अस्तित्व में आया।
📌 1 नवंबर 1956 के प्रमुख तथ्य
- प्रथम राज्यपाल: सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ने 1 नवंबर 1956 को राजस्थान के प्रथम राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
- मुख्यमंत्री: पूर्ण एकीकरण के समय राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया थे (जिन्हें 'आधुनिक राजस्थान का निर्माता' कहा जाता है)।
- 26वाँ जिला: अजमेर को राजस्थान का 26वाँ जिला घोषित किया गया।
- राजस्थान स्थापना दिवस: 1 नवंबर को प्रतिवर्ष 'राजस्थान स्थापना दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
7. आरएएस मुख्य परीक्षा (RAS Mains) विशेष विश्लेषणात्मक प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1 (2 अंक / 20 शब्द): 'धारा सभा' क्या थी? इसके मुख्यमंत्री कौन थे?
RAS Mains 20 Wordsउत्तर: अजमेर-मेरवाड़ा ('C' श्रेणी राज्य) की 30 सदस्यीय पृथक विधानसभा को 'धारा सभा' कहा जाता था। इसके एकमात्र मुख्यमंत्री पंडित हरिभाऊ उपाध्याय (1952-56) थे।
प्रश्न 2 (5 अंक / 50 शब्द): 1 नवंबर 1956 को संपन्न हुए क्षेत्रीय विनिमय (Sunil Tappa vs Sironj) का संक्षिप्त ब्योरा दीजिए।
RAS Mains 50 Wordsउत्तर: फजल अली आयोग की सिफारिश पर प्रशासनिक सुगमता हेतु: (1) मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का 'सुनील टप्पा' क्षेत्र राजस्थान के झालावाड़ जिले में मिलाया गया। (2) राजस्थान (झालावाड़) के अंतर्गत स्थित 'सिरोंज' उपखंड को मध्य प्रदेश के विदिशा जिले को सौंप दिया गया।
प्रश्न 3 (10 अंक / 100 शब्द): सिरोही एवं आबू-देलवाड़ा के राजस्थान में विलय के ऐतिहासिक संघर्ष एवं राज्य पुनर्गठन आयोग की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
RAS Mains 100 Words
उत्तर ढांचा:
1. विभाजन विवाद (1950): सरदार पटेल द्वारा आबू-देलवाड़ा को बंबई प्रांत में मिलाने तथा केवल हाथल गाँव सहित शेष सिरोही को राजस्थान में देने से भारी जन-असंतोष फैला। गोकुलभाई भट्ट, बलवंत सिंह मेहता आदि ने इसके विरुद्ध व्यापक सत्याग्रह किया।
2. फजल अली आयोग (1953-55): आयोग ने भाषाई, भौगोलिक और सांस्कृतिक साक्ष्यों का परीक्षण किया और माना कि आबू की जनसांख्यिकी, भाषा और ऐतिहासिक रिश्ते राजस्थान से जुड़े हैं।
3. निष्कर्ष: आयोग की संस्तुति पर 1 नवंबर 1956 को 7वें संविधान संशोधन के तहत आबू-देलवाड़ा पुनः राजस्थान को लौटाया गया, जिससे 8 वर्ष, 7 माह और 14 दिन चली एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया पूर्ण हुई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सिरोही विवाद, अजमेर धारा सभा, फजल अली आयोग से जुड़े RPSC/RSSB के मुख्य प्रश्नोत्तर।
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