लोड हो रहा है...
Home / Notes / राजस्थान का इतिहास / राजस्थान का एकीकरण / मत्स्य संघ, पूर्व व संयुक्त राजस्थान (चरण 1-3)
मुख्य एकीकरण हब पर वापस जाएँ

राजस्थान एकीकरण के आरंभिक चरण :
मत्स्य संघ, पूर्व राजस्थान एवं संयुक्त राजस्थान (1948)

18 मार्च 1948 से 18 अप्रैल 1948 के मध्य संपन्न हुए प्रथम तीन चरणों का गहन दस्तावेजी विश्लेषण। अलवर-भरतपुर का साम्प्रदायिक संकट व गांधी हत्याकांड जांच, हाड़ौती व वागड़ संघ बनाने के असफल प्रयास, मेवाड़ महाराणा की 3 शर्तें, तीनों मंत्रिमंडलों का गठन एवं पं. जवाहरलाल नेहरू व एन.वी. गाडगिल की भूमिका।

कालखंड: मार्च - अप्रैल 1948 14 रियासतें + 2 ठिकाने एकीकृत 3 प्रधानमंत्री व मंत्रिमंडल
आरंभिक 1 माह का तूफानी घटनाक्रम

मात्र 31 दिनों के भीतर राजस्थान के दक्षिण, दक्षिण-पूर्व और पूर्व की 14 रियासतों का 3 अलग-अलग संघों में विलय हुआ:

1. मत्स्य संघ: 18 मार्च 1948 (4 रियासतें)
2. पूर्व राजस्थान: 25 मार्च 1948 (9 रियासतें)
3. संयुक्त राजस्थान: 18 अप्रैल 1948 (+ मेवाड़)

उद्घाटनकर्ता: एन.वी. गाडगिल (1 व 2) एवं पं. नेहरू (3)

चरण 1, 2 व 3 : Complete Test

1. प्रथम चरण : मत्स्य संघ (Matsya Sangh) – 18 मार्च 1948

🚨 मत्स्य संघ गठन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : मेवात संकट एवं गांधी हत्याकांड जाँच

1947 में भारत विभाजन के समय अलवर और भरतपुर रियासतों में भीषण मेव-साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी। इसी दौरान 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद खुफिया रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि हत्या के मुख्य षड्यंत्रकारियों (नाथूराम गोडसे व नारायण आप्टे) को अलवर रियासत में शरण मिली थी तथा तत्कालीन हिंदू महासभा समर्थक अलवर के प्रधानमंत्री डॉ. एन.बी. खरे (Dr. N.B. Khare) व महाराजा तेज सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

  • 7 फरवरी 1948: भारत सरकार के गृह मंत्रालय (सरदार पटेल) ने अलवर व भरतपुर का प्रशासन अपने प्रत्यक्ष नियंत्रण में ले लिया। शासक तेज सिंह व डॉ. खरे को दिल्ली में नजरबंद रखकर जाँच शुरू की गई (यद्यपि बाद में वे दोषमुक्त हुए)।
  • भरतपुर प्रशासन: भरतपुर के महाराजा बृजेंद्र सिंह आंतरिक विद्रोह व आर्थिक संकट के कारण शासन चलाने में असमर्थ थे, अतः वहाँ भारत सरकार ने एस.एन. सप्रू (S.N. Sapru) को प्रशासक नियुक्त किया।
  • विलय पर सहमति: 27-28 फरवरी 1948 को दिल्ली में सरदार पटेल, वी.पी. मेनन और चारों शासकों (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली) के मध्य बैठक हुई, जिसमें एक अलग 'मत्स्य संघ' बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
📌 प्रशासनिक संरचना व पदाधिकारी
  • शामिल रियासतें: अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली (ABCD) + नीमराना ठिकाना।
  • उद्घाटन तिथि व स्थान: 18 मार्च 1948 (लोहागढ़ दुर्ग, भरतपुर)। (नोट: उद्घाटन मूलतः 17 मार्च को होना था, किन्तु भरतपुर महाराज के भाई देशराज द्वारा विरोध के कारण 1 दिन टलकर 18 मार्च को हुआ)।
  • उद्घाटनकर्ता: नरहरि विष्णु गाडगिल (N.V. Gadgil - केंद्रीय विद्युत व खनन मंत्री)।
  • राजधानी: अलवर।
  • राजप्रमुख: महाराजा उदयभान सिंह (धौलपुर)।
  • उप-राजप्रमुख: महाराजा गणेशपाल वासुदेव (करौली)।
  • प्रधानमंत्री: शोभाराम कुमावत (अलवर प्रजामंडल)।
📊 भौगोलिक व आर्थिक सांख्यिकी
  • कुल क्षेत्रफल: 12,000 वर्ग किलोमीटर (लगभग 7,536 वर्ग मील)।
  • कुल जनसंख्या: लगभग 18.38 लाख (1941 की जनगणना के आधार पर)।
  • वार्षिक राजस्व: लगभग ₹1.84 करोड़ (₹1,84,00,000)।
  • नामकरण का इतिहास: प्रसिद्ध साहित्यकार व संविधान सभा सदस्य कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (K.M. Munshi) के सुझाव पर महाभारत कालीन 'मत्स्य जनपद' (विराटनगर राजधानी) के आधार पर इसका नाम 'मत्स्य संघ' रखा गया।

2. द्वितीय चरण : पूर्व राजस्थान संघ (Rajasthan Union) – 25 मार्च 1948

⚔️ आंतरिक कूटनीति : हाड़ौती संघ एवं वागड़ संघ के असफल प्रयास

स्वतंत्रता के समय छोटी रियासतों के राजा अपने अस्तित्व को बचाने के लिए क्षेत्रीय गुट बना रहे थे:

  • हाड़ौती संघ का प्रयास: कोटा के महाराव भीमसिंह द्वितीय ने कोटा, बूंदी और झालावाड़ को मिलाकर एक पृथक 'हाड़ौती संघ' बनाने का प्रस्ताव रखा। किन्तु बूंदी के महाराव बहादुर सिंह ने कोटा के अधीन रहने से इनकार कर दिया, जिससे यह योजना विफल हो गई।
  • वागड़ संघ का प्रयास: डूंगरपुर के महारावल लक्ष्मण सिंह ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और कुशलगढ़ को मिलाकर एक स्वतंत्र 'वागड़ संघ' बनाने का खाका तैयार किया, किन्तु बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ के असहयोग तथा सरदार पटेल की सख्ती से यह प्रस्ताव भी खारिज हो गया।
  • शाहपुरा की लोकतांत्रिक पहल: राजाधिराज सुदर्शन देव ने प्रजामंडल के दबाव के बिना ही विलय का समर्थन किया। अंततः 9 रियासतों और 1 ठिकाने को मिलाकर 'पूर्व राजस्थान संघ' का निर्माण हुआ।
📌 प्रशासनिक संरचना व पदाधिकारी
  • शामिल 9 रियासतें: कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, शाहपुरा, किशनगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़।
  • शामिल ठिकाना: कुशलगढ़ (बांसवाड़ा)।
  • उद्घाटन तिथि व स्थान: 25 मार्च 1948 (कोटा दुर्ग)।
  • उद्घाटनकर्ता: एन.वी. गाडगिल (N.V. Gadgil)।
  • राजधानी: कोटा।
  • राजप्रमुख: महाराव भीमसिंह द्वितीय (कोटा)।
  • वरिष्ठ उप-राजप्रमुख: महाराव बहादुर सिंह (बूंदी)।
  • कनिष्ठ उप-राजप्रमुख: महारावल लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर)।
  • प्रधानमंत्री: गोकुललाल असावा (शाहपुरा प्रजामंडल)।
💡 ऐतिहासिक महत्व व सांख्यिकी
  • प्रथम बार 'राजस्थान' शब्द: एकीकरण की प्रक्रिया में वैधानिक रूप से पहली बार इसी चरण में संघ के नाम में 'राजस्थान' शब्द का प्रयोग हुआ।
  • चंद्रवीर सिंह का ऐतिहासिक कथन: बांसवाड़ा के महारावल चंद्रवीर सिंह ने विलय-पत्र पर हस्ताक्षर करते समय पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा — "मैं अपने डेथ वारंट (मृत्यु पत्र) पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ।"
  • कुल क्षेत्रफल: ~16,807 वर्ग मील।
  • कुल जनसंख्या: ~23.5 लाख।
  • वार्षिक आय: लगभग ₹2 करोड़ (₹2,00,00,000)।

3. तृतीय चरण : संयुक्त राजस्थान (United Rajasthan) – 18 अप्रैल 1948

👑 मेवाड़ महाराणा भूपाल सिंह की 3 ऐतिहासिक शर्तें एवं सरदार पटेल की कूटनीति

पूर्व राजस्थान संघ के निर्माण के तुरंत बाद राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित रियासत मेवाड़ (उदयपुर) ने संघ में शामिल होने की इच्छा जताई। महाराणा भूपाल सिंह के दीवान सर राममूर्ति (Sir S.V. Ramamurthy) ने रियासती विभाग के समक्ष 3 कठोर शर्तें रखीं:

शर्त 1: वंशानुगत राजप्रमुख मेवाड़ महाराणा को नए संयुक्त राजस्थान का आजीवन व वंशानुगत राजप्रमुख बनाया जाए।
शर्त 2: ₹20 लाख प्रिवीपर्स मेवाड़ की प्राचीन मर्यादा के अनुसार वार्षिक ₹20 लाख की प्रिवीपर्स राशि स्वीकृत हो।
शर्त 3: स्थायी राजधानी नए संघ की राजधानी कोटा के स्थान पर अनिवार्य रूप से 'उदयपुर' घोषित की जाए।

पटेल-मेनन का समझौता फार्मूला: वी.पी. मेनन ने महाराणा को समझाया कि लोकतंत्र में वंशानुगत पद संभव नहीं है, अतः महाराणा भूपाल सिंह को 'आजीवन राजप्रमुख' बनाया गया। प्रिवीपर्स की ₹20 लाख मांग को विभाजित करते हुए ₹10 लाख मूल प्रिवीपर्स, ₹5 लाख राजप्रमुख विशेष भत्ता तथा ₹5 लाख एकलिंगजी मंदिर व धार्मिक ट्रस्ट के नाम पर स्वीकृत कर समझौता संपन्न किया गया।

📌 प्रशासनिक संरचना व पदाधिकारी
  • शामिल क्षेत्र: पूर्व राजस्थान (9 रियासतें + 1 ठिकाना) + उदयपुर (मेवाड़)।
  • उद्घाटन तिथि व स्थान: 18 अप्रैल 1948 (सिटी पैलेस, उदयपुर)।
  • उद्घाटनकर्ता: पं. जवाहरलाल नेहरू (भारत के प्रथम प्रधानमंत्री)।
  • राजधानी: उदयपुर (कोटा को विकास निधि के रूप में ₹5.5 लाख वार्षिक भत्ता व वन विद्यालय आदि देने का आश्वासन मिला)।
  • राजप्रमुख: महाराणा भूपाल सिंह (उदयपुर)।
  • वरिष्ठ उप-राजप्रमुख: महाराव भीमसिंह द्वितीय (कोटा)।
  • कनिष्ठ उप-राजप्रमुख: बहादुर सिंह (बूंदी) व लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर)।
  • प्रधानमंत्री: माणिक्यलाल वर्मा (मेवाड़ प्रजामंडल)।
📊 सांख्यिकी व प्रजामंडल का उभार
  • कुल क्षेत्रफल: लगभग 29,777 वर्ग मील।
  • कुल जनसंख्या: लगभग 42.60 लाख।
  • वार्षिक राजस्व: लगभग ₹3.16 करोड़।
  • जन-आंदोलन की विजय: मेवाड़ के विलय के साथ ही सामंती प्रभुत्व पर प्रजामंडल नेताओं (माणिक्यलाल वर्मा, हीरालाल शास्त्री, जयनारायण व्यास) की पकड़ मजबूत हुई और भविष्य के 'वृहत् राजस्थान' की स्पष्ट रूपरेखा तैयार हो गई।

4. तीनों आरंभिक चरणों का तुलनात्मक विश्लेषण (मास्टर चार्ट)

तुलना बिंदु चरण 1: मत्स्य संघ चरण 2: पूर्व राजस्थान चरण 3: संयुक्त राजस्थान
दिनांक 18 मार्च 1948 25 मार्च 1948 18 अप्रैल 1948
शामिल रियासतें / ठिकाने 4 रियासतें (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली) + नीमराना 9 रियासतें (कोटा, बूंदी, झालावाड़, टोंक, शाहपुरा, किशनगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़) + कुशलगढ़ पूर्व राजस्थान संघ + उदयपुर (मेवाड़ रियासत)
राजधानी अलवर कोटा उदयपुर
राजप्रमुख उदयभान सिंह (धौलपुर) भीमसिंह द्वितीय (कोटा) महाराणा भूपाल सिंह (उदयपुर)
उप-राजप्रमुख गणेशपाल वासुदेव (करौली) बहादुर सिंह (बूंदी - वरिष्ठ)
लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर - कनिष्ठ)
भीमसिंह द्वितीय (कोटा - वरिष्ठ)
बूंदी व डूंगरपुर नरेश (कनिष्ठ)
प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत (अलवर) गोकुललाल असावा (शाहपुरा) माणिक्यलाल वर्मा (उदयपुर)
उद्घाटनकर्ता एन.वी. गाडगिल (केंद्रीय मंत्री) एन.वी. गाडगिल पं. जवाहरलाल नेहरू (प्रधानमंत्री)
वार्षिक आय ₹1.84 करोड़ ₹2.00 करोड़ ₹3.16 करोड़
कुल जनसंख्या ~18.38 लाख ~23.50 लाख ~42.60 लाख

5. प्रथम तीन चरणों के संपूर्ण मंत्रिमंडल (Cabinet Portfolios)

1. शोभाराम कुमावत मंत्रिमंडल (मत्स्य संघ)

  • शोभाराम कुमावत (अलवर): प्रधानमंत्री (गृह व सामान्य प्रशासन)।
  • युगल किशोर चतुर्वेदी (भरतपुर): उप-प्रधानमंत्री (जिन्हें 'राजस्थान का दूसरा नेहरू' कहा जाता है)।
  • गोपीलाल यादव (भरतपुर): उप-प्रधानमंत्री / वरिष्ठ मंत्री।
  • मास्टर भोलानाथ (अलवर): शिक्षा व लोक निर्माण विभाग।
  • डॉ. मंगल सिंह (धौलपुर): स्वास्थ्य एवं स्थानीय स्वशासन।
  • चिरंजीलाल शर्मा (करौली): राजस्व व विधि मंत्री।

2. गोकुललाल असावा मंत्रिमंडल (पूर्व राजस्थान)

  • गोकुललाल असावा (शाहपुरा): प्रधानमंत्री।
  • अभिन्न हरि (कोटा): वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री (प्रजामंडल नेता)।
  • लादूराम जोशी / भूरेलाल: वित्त एवं राजस्व विभाग।
  • ब्रजसुंदर शर्मा (बूंदी): श्रम व विधि विभाग।
  • भोगीलाल पंड्या (डूंगरपुर): वागड़ क्षेत्र प्रतिनिधि (आदिवासी कल्याण व शिक्षा)।

3. माणिक्यलाल वर्मा मंत्रिमंडल (संयुक्त राजस्थान)

  • माणिक्यलाल वर्मा (उदयपुर): प्रधानमंत्री।
  • गोकुललाल असावा (शाहपुरा): उप-प्रधानमंत्री।
  • मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर): सिंचाई व लोक निर्माण मंत्री।
  • भूरेलाल बया (उदयपुर): गृह व जेल विभाग (सराड़ा जेल में बंदी रहे सेनानी)।
  • प्रेम नारायण माथुर (उदयपुर): वित्त व शिक्षा मंत्री।
  • अभिन्न हरि (कोटा) व ब्रजसुंदर शर्मा (बूंदी): कैबिनेट मंत्री।

6. आरएएस मुख्य परीक्षा (RAS Mains) विशेष मॉडल प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1 (2 अंक / 20 शब्द): 'युगल किशोर चतुर्वेदी' का एकीकरण में क्या महत्व है?

RAS Mains 20 Words

उत्तर: वे भरतपुर प्रजामंडल के शीर्ष नेता एवं मत्स्य संघ के उप-प्रधानमंत्री थे। नेहरूवादी समाजवादी विचारधारा और जनसेवा के कारण उन्हें 'राजस्थान का दूसरा जवाहरलाल नेहरू' कहा जाता है।

प्रश्न 2 (5 अंक / 50 शब्द): मत्स्य संघ के निर्माण की पृष्ठभूमि में अलवर और भरतपुर की परिस्थितियों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

RAS Mains 50 Words

उत्तर: 1947 में विभाजन के दौरान मेवात (अलवर-भरतपुर) में भीषण साम्प्रदायिक दंगे हुए। 30 जनवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के बाद अलवर के प्रधानमंत्री डॉ. एन.बी. खरे व महाराजा तेज सिंह पर षड्यंत्रकारियों को संरक्षण देने का संदेह हुआ। शांति व निष्पक्ष जाँच हेतु भारत सरकार ने 7 फरवरी 1948 को दोनों राज्यों का प्रशासन अधिग्रहीत कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप 18 मार्च 1948 को मत्स्य संघ का गठन संभव हुआ।

प्रश्न 3 (10 अंक / 100 शब्द): संयुक्त राजस्थान (तृतीय चरण) में मेवाड़ के विलय के कूटनीतिक महत्व एवं महाराणा भूपाल सिंह की शर्तों के समाधान का विश्लेषण कीजिए।

RAS Mains 100 Words

उत्तर ढांचा:
1. कूटनीतिक महत्व: मेवाड़ राजस्थान की सबसे प्राचीन व प्रतिष्ठित रियासत थी। इसके विलय से पूर्व राजस्थान संघ को राष्ट्रीय स्तर पर वैधता मिली तथा अन्य बड़ी रियासतों (जयपुर, जोधपुर) के विलय का मनोवैज्ञानिक मार्ग प्रशस्त हुआ।
2. महाराणा की 3 शर्तें: (i) वंशानुगत राजप्रमुख पद, (ii) ₹20 लाख प्रिवीपर्स, (iii) उदयपुर राजधानी।
3. समाधान: सरदार पटेल व वी.पी. मेनन ने वंशानुगत पद के स्थान पर 'आजीवन राजप्रमुख' का पद दिया। ₹20 लाख की मांग को ₹10 लाख प्रिवीपर्स, ₹5 लाख राजभत्ता व ₹5 लाख देवस्थान ट्रस्ट में विभाजित किया। उदयपुर को राजधानी बनाकर 18 अप्रैल 1948 को पं. नेहरू द्वारा इसका उद्घाटन कराया गया।

प्रामाणिक इतिहास अभ्यास विगत 15 वर्षों के RPSC/RSMSSB प्रश्न

थ्योरी पढ़ ली? अब दें राजस्थान इतिहास (प्राचीन से आधुनिक) टॉपिक टेस्ट

कालीबंगा सभ्यता, मेवाड़-मारवाड़ राजवंश, 1857 क्रांति, किसान आंदोलन व एकीकरण के अध्यायवार ऑनलाइन टेस्ट हल करें। तुरंत रिजल्ट, एक्यूरेसी स्कोरकार्ड और प्रामाणिक व्याख्यात्मक हल पाएं।

मानक स्रोतों (गोपीनाथ शर्मा) पर आधारित • विस्तृत व्याख्यात्मक हल • तुरंत रिजल्ट व स्कोरकार्ड
इतिहास टॉपिक टेस्ट दें फ्री डेमो टेस्ट उपलब्ध है
Special Topicwise Test

एकीकरण चरण 1, 2, 3 : टेस्ट दें

आरपीएससी व कर्मचारी चयन बोर्ड परीक्षा स्तर के नवीनतम वस्तुनिष्ठ प्रश्न।

₹49 ₹9 GET 81% OFF
Complete टेस्ट शुरू करें →
Limited Pass

Rajasthan Test Series

राजस्‍थान की सभी परीक्षाएं, Instant रैंक, सटीक व्याख्या व पिछले 10 वर्षों के RPSC पेपर्स का निचोड़।

₹199 ₹29 / All Access
केवल ₹29 में पास एक्टिवेट करें

⚡ 2 मिनट में एक्टिवेशन | अनलिमिटेड री-अटेम्प्ट

Complete History Hub

राजस्थान इतिहास अध्याय शृंखला

प्रामाणिक संदर्भ अनुसार विषयवार सूची:

परीक्षा में महत्व

आरंभिक 3 चरण क्यों महत्वपूर्ण हैं?

राजस्थान एकीकरण के प्रथम तीन चरण (मत्स्य संघ, पूर्व राजस्थान संघ, संयुक्त राजस्थान) रियासती विभाग की प्रारंभिक कूटनीति, अलवर-भरतपुर संकट, मेवाड़ की ऐतिहासिक शर्तों और प्रजामंडल के नेतृत्व को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

  • 1 मेवात संकट एवं गांधी हत्याकांड जाँच: 7 फरवरी 1948 को अलवर-भरतपुर का प्रशासन भारत सरकार द्वारा अधिग्रहीत किया जाना।
  • 2 क्षेत्रीय संघों की विफलता: हाड़ौती संघ (कोटा) व वागड़ संघ (डूंगरपुर) के असफल प्रयास।
  • 3 मेवाड़ विलय की 3 शर्तें: महाराणा भूपाल सिंह का आजीवन राजप्रमुख पद, ₹20 लाख प्रिवीपर्स का बंटवारा और उदयपुर राजधानी।
  • 4 मंत्रिमंडल व व्यक्तित्व: शोभाराम कुमावत, गोकुललाल असावा, माणिक्यलाल वर्मा एवं युगल किशोर चतुर्वेदी की भूमिका।

मत्स्य संघ

18 मार्च 1948

पूर्व राजस्थान

25 मार्च 1948

संयुक्त राजस्थान

18 अप्रैल 1948

मेवाड़ की शर्तें

पटेल कूटनीति

Ultimate Preparation Pass

राजस्थान की सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़ — केवल ₹29 में

500+ टॉपिक टेस्ट, ऑल राजस्थान रैंक, सटीक व्याख्या व पिछले 10 वर्षों के प्रश्नों का संपूर्ण संग्रह।

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

मत्स्य संघ, पूर्व राजस्थान एवं संयुक्त राजस्थान से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर।

1947 के विभाजन के समय मेवात क्षेत्र (अलवर व भरतपुर) में भयंकर साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इसके अतिरिक्त, महात्मा गांधी की हत्या (30 जनवरी 1948) के बाद अलवर के प्रधानमंत्री डॉ. एन.बी. खरे और शासक तेज सिंह पर षड्यंत्रकारियों को संरक्षण देने का संदेह हुआ। शांति-व्यवस्था बहाल करने और निष्पक्ष जाँच हेतु भारत सरकार ने 7 फरवरी 1948 को दोनों रियासतों का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।
कोटा के महाराव भीमसिंह द्वितीय ने कोटा, बूंदी व झालावाड़ को मिलाकर 'हाड़ौती संघ' बनाने का प्रयास किया था, जबकि डूंगरपुर के महारावल लक्ष्मण सिंह ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ व कुशलगढ़ को मिलाकर 'वागड़ संघ' बनाने का प्रयास किया था। रियासती विभाग की दृढ़ता के कारण ये दोनों पृथक संघ नहीं बन सके।
महाराणा भूपाल सिंह ने तीन शर्तें रखी थीं: (1) वंशानुगत आजीवन राजप्रमुख पद, (2) ₹20 लाख वार्षिक प्रिवीपर्स, और (3) उदयपुर को स्थायी राजधानी बनाना। सरदार पटेल ने ₹20 लाख को ₹10 लाख प्रिवीपर्स, ₹5 लाख राजभत्ता और ₹5 लाख धार्मिक ट्रस्ट में विभाजित कर सहमति बनाई।
प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत (अलवर) के मंत्रिमंडल में उप-प्रधानमंत्री युगल किशोर चतुर्वेदी (भरतपुर) व गोपीलाल यादव (भरतपुर), मास्टर भोलानाथ (अलवर), डॉ. मंगल सिंह (धौलपुर) तथा चिरंजीलाल शर्मा (करौली) शामिल थे।

अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जाएँ

राजस्थान के इतिहास, भूगोल एवं कला-संस्कृति की प्रामाणिक अध्ययन सामग्री