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राज्य की वास्तविक कार्यपालिका का प्रमुख : अनुच्छेद 163 से 167

राजस्थान के मुख्यमंत्री (Chief Minister of Rajasthan) :
संवैधानिक स्थिति, शक्तियाँ, मनोनीत व निर्वाचित, उप-मुख्यमंत्री व सम्पूर्ण कालक्रम

राजस्थान राजव्यवस्था का सबसे प्रामाणिक एवं विस्तृत अध्ययन — 'प्रधानमंत्री' पदनाम से मुख्यमंत्री में रूपांतरण (1950), मनोनीत मुख्यमंत्री (शास्त्री, वेंकटाचारी, व्यास), प्रथम निर्वाचित सीएम टीकाराम पालीवाल, मनोनीत व निर्वाचित दोनों रहने वाले जयनारायण व्यास, 17 वर्ष तक शासन करने वाले मोहनलाल सुखाड़िया, राजस्थान के 7 उप-मुख्यमंत्री, 4 बार राष्ट्रपति शासन के समय सीएम-राज्यपाल समीकरण, मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO), वर्तमान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तक की 100% प्रामाणिक कालक्रम सूची और RAS/RPSC विगत 15 वर्षों के प्रश्नों का संपूर्ण सार।

संवैधानिक स्थिति वास्तविक प्रमुख (De-Facto)
प्रथम मनोनीत CM पं. हीरालाल शास्त्री
प्रथम निर्वाचित CM टीकाराम पालीवाल (1952)
सर्वाधिक कार्यकाल मोहनलाल सुखाड़िया (17 वर्ष)
राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी एवं संवैधानिक प्रामाणिक स्रोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री: सम्पूर्ण संवैधानिक, राजनीतिक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन

अनुच्छेद 163 से 167 की संवैधानिक बारीकियां, 'प्रधानमंत्री' पद से संक्रमण, 3 मनोनीत मुख्यमंत्री, प्रथम निर्वाचित सीएम, 7 उप-मुख्यमंत्रियों का इतिहास, सुखाड़िया-शेखावत-गहलोत-राजे के युगांतकारी निर्णय, CMO सचिवालय ढाँचा और RPSC/RAS विगत 15 वर्षों के प्रामाणिक प्रश्नों का संग्रह।

1. संवैधानिक ढाँचा एवं प्रमुख अनुच्छेद (Articles 163, 164, 166, 167)

संसदीय शासन प्रणाली में राज्य स्तर पर राज्यपाल राज्य का संवैधानिक अथवा औपचारिक प्रमुख (De-Jure Head) होता है, जबकि मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख (De-Facto Executive Head) तथा राज्य सरकार का मुखिया (Head of Government) होता है। संविधान में मुख्यमंत्री के चयन व नियुक्ति के संबंध में कोई विशेष प्रक्रिया नहीं दी गई है, केवल इतना उल्लेख है कि उसकी नियुक्ति राज्यपाल करेगा।

मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति एवं शक्ति-संतुलन फ्लोचार्ट
विधानसभा बहुमत दल का नेता चयन राज्यपाल द्वारा नियुक्ति अनुच्छेद 164(1) मुख्यमंत्री वास्तविक प्रमुख (De-Facto) कैबिनेट का मुखिया संवाद की कड़ी अनुच्छेद 167 कर्तव्य
अनुच्छेद संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provision) RPSC / RAS परीक्षा विशेष दृष्टिकोण
अनुच्छेद 163(1) सलाह हेतु मंत्रिपरिषद्: जिन बातों में राज्यपाल को संविधान द्वारा विवेकाधिकार दिए गए हैं, उन्हें छोड़कर अन्य कृत्यों के संपादन हेतु एक मंत्रिपरिषद् होगी, जिसका प्रधान 'मुख्यमंत्री' होगा। राज्यपाल की वास्तविक शक्ति का स्रोत यही है। मुख्यमंत्री के बिना मंत्रिपरिषद् की कल्पना असंभव है।
अनुच्छेद 164(1) मुख्यमंत्री की नियुक्ति: मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करेगा। संसदीय परंपरा अनुसार राज्यपाल विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल/गठबंधन के नेता को ही मुख्यमंत्री नियुक्त करने को बाध्य है।
अनुच्छेद 164(1A) मंत्रियों की अधिकतम व न्यूनतम संख्या: 91वें संविधान संशोधन 2003 द्वारा जोड़ा गया। मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के अधिकतम 15% (राजस्थान में 200 का 15% = अधिकतम 30) और न्यूनतम 12 होगी। RPSC का सर्वाधिक चहेता प्रश्न: राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल की न्यूनतम संख्या 12 तथा अधिकतम 30 होती है।
अनुच्छेद 164(2) सामूहिक उत्तरदायित्व (Collective Responsibility): मंत्रिपरिषद् राज्य की विधानसभा (Legislative Assembly) के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। यदि विधानसभा अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दे, तो मुख्यमंत्री सहित संपूर्ण सरकार को त्यागपत्र देना होता है।
अनुच्छेद 164(4) सदन का सदस्य न होने पर स्थिति: कोई भी व्यक्ति जो विधानमंडल का सदस्य नहीं है, वह भी मुख्यमंत्री बन सकता है, बशर्ते उसे 6 माह के भीतर किसी सदन का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य है। उदाहरण: 1952 में जयनारायण व्यास तथा 2003 में वसुंधरा राजे विधायक बने बिना मुख्यमंत्री बनीं और बाद में उपचुनाव जीते।
अनुच्छेद 166 राज्य सरकार के कार्य संचालन नियम: राज्य सरकार की सभी कार्यपालिका कार्रवाइयां राज्यपाल के नाम से की जाएंगी, परंतु वास्तविक निर्णय मुख्यमंत्री व कैबिनेट लेती है। राजस्थान कार्य संचालन नियम (Rajasthan Rules of Business) इसी अनुच्छेद के तहत संचालित होते हैं।
अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्य (Duties of Chief Minister): राज्यपाल को सूचना देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के तीन प्रमुख संवैधानिक कर्तव्य:
  1. प्रशासन संबंधी व विधान संबंधी सभी निर्णय राज्यपाल को संसूचित करना।
  2. प्रशासन व विधान संबंधी ऐसी सूचना देना जो राज्यपाल मांगे।
  3. किसी विषय पर किसी मंत्री ने निर्णय ले लिया हो परंतु मंत्रिपरिषद् ने विचार न किया हो, राज्यपाल की अपेक्षा पर उसे मंत्रिपरिषद् के समक्ष रखना।
अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री को राज्यपाल और मंत्रिपरिषद् के मध्य "संवाद का एकमात्र मुख्य सेतु" (Channel of Communication) बनाता है।

संवैधानिक बारीकी (RPSC परीक्षा दृष्टि): संविधान में मुख्यमंत्री के वेतन-भत्तों का कोई स्वतंत्र उल्लेख नहीं है। अनुच्छेद 164(5) के अनुसार मुख्यमंत्री का वेतन एवं भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा विधि बनाकर निर्धारित किए जाते हैं और यह राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund) से दिए जाते हैं।

2. ऐतिहासिक संक्रमण: रियासती 'प्रधानमंत्री' (Premier) से 'मुख्यमंत्री' का विकास

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के बाद राजस्थान के एकीकरण के प्रारंभिक चरणों में लोकतांत्रिक सरकारों के मुखिया को 'प्रधानमंत्री' (Premier / Prime Minister) कहा जाता था। 26 जनवरी 1950 को जब भारत का संविधान लागू हुआ, तब यह पदनाम समाप्त होकर 'मुख्यमंत्री' (Chief Minister) में परिवर्तित हुआ:

1
मत्स्य संघ (18 मार्च 1948): प्रथम चरण में मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत (अलवर) बने।
2
पूर्व राजस्थान संघ (25 मार्च 1948): द्वितीय चरण में शाहपुरा के गोकुल लाल असावा प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए।
3
संयुक्त राजस्थान (18 अप्रैल 1948): मेवाड़ के विलय पर तृतीय चरण में माणिक्य लाल वर्मा को प्रधानमंत्री बनाया गया।
4
वृहत् राजस्थान (30 मार्च 1949): चतुर्थ चरण में 7 अप्रैल 1949 को पंडित हीरालाल शास्त्री ने वृहत् राजस्थान के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला।
5
26 जनवरी 1950 — पदनाम परिवर्तन: भारतीय संविधान लागू होने के दिन रियासती पदनाम 'प्रधानमंत्री' औपचारिक रूप से समाप्त हो गया और पंडित हीरालाल शास्त्री राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री (मनोनीत) बने।

RPSC प्रीलिम्स फैक्ट: राजस्थान के एकीकरण के समय अलग-अलग चरणों के प्रधानमंत्रियों का सही क्रम: शोभाराम कुमावत → गोकुल लाल असावा → माणिक्य लाल वर्मा → हीरालाल शास्त्री।

3. राजस्थान के मनोनीत मुख्यमंत्री एवं प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री (1949 से 1954)

1952 के प्रथम आम चुनावों से पूर्व राजस्थान में 3 मनोनीत (Nominated) मुख्यमंत्री रहे, जिनका चयन केंद्र सरकार व प्रांतीय कांग्रेस समिति के परामर्श से राजप्रमुख द्वारा किया गया था:

1. प्रथम मनोनीत CM

पं. हीरालाल शास्त्री

07-04-1949 से 05-01-1951

वनस्थली विद्यापीठ के संस्थापक। इनके समय जयपुर को स्थायी राजधानी घोषित किया गया। आंतरिक मतभेदों के चलते इस्तीफा दिया।

2. द्वितीय मनोनीत CM

सी.एस. वेंकटाचारी

06-01-1951 से 25-04-1951

राजस्थान के एकमात्र ICS (प्रशासनिक अधिकारी) मुख्यमंत्री। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त सिविल सर्वेंट मुख्यमंत्री।

3. तृतीय मनोनीत CM

जयनारायण व्यास

26-04-1951 से 03-03-1952

'शेर-ए-राजस्थान', 'लक्कड़ और कक्कड़ के फकीर'। मनोनीत कार्यकाल के दौरान ही प्रथम आम चुनाव (1952) संपन्न करवाए।

प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री: टीकाराम पालीवाल (03 मार्च 1952 से 31 अक्टूबर 1952)

1952 के प्रथम आम चुनाव में जयनारायण व्यास दो स्थानों (जोधपुर शहर 'ए' और जालौर) से चुनाव लड़े, परंतु दोनों ही जगह हार गए। ऐसी स्थिति में महुवा (दौसा) से विधायक चुने गए टीकाराम पालीवाल को राजस्थान का प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री बनाया गया।

🎯 जयनारायण व्यास का अनोखा रिकॉर्ड: व्यास जी ने बाद में किशनगढ़ विधानसभा सीट से उपचुनाव जीता। इसके बाद टीकाराम पालीवाल ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिया और 1 नवंबर 1952 को जयनारायण व्यास निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। इस प्रकार जयनारायण व्यास राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो 'मनोनीत' और 'निर्वाचित' दोनों रूपों में मुख्यमंत्री रहे

🎯 टीकाराम पालीवाल का दोहरा रिकॉर्ड: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद वे व्यास मंत्रिमंडल में उप-मुख्यमंत्री बने। अतः वे राजस्थान के ऐसे प्रथम राजनेता हैं जो मुख्यमंत्री रहने के बाद उप-मुख्यमंत्री बने!

4. राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री (Deputy Chief Ministers) : संवैधानिक स्थिति व सम्पूर्ण इतिहास

संविधान में 'उप-मुख्यमंत्री' (Deputy Chief Minister) पद का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है। यह एक गैर-संवैधानिक अथवा राजनीतिक पद है, जिसका सृजन केवल राजनीतिक संतुलन एवं गठबंधन को साधने हेतु किया जाता है। उप-मुख्यमंत्री को कैबिनेट मंत्री के समान ही वेतन, भत्ते एवं दर्जा प्राप्त होता है तथा वह कैबिनेट मंत्री के रूप में ही पद व गोपनीयता की शपथ लेता है।

क्र.सं. उप-मुख्यमंत्री का नाम कार्यकाल (अवधि) तत्कालीन मुख्यमंत्री विशिष्ट ऐतिहासिक तथ्य
1 टीकाराम पालीवाल 01-11-1952 से 13-11-1954 जयनारायण व्यास राजस्थान के प्रथम उप-मुख्यमंत्री। पूर्व में राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे थे।
2 हरिशंकर भाभड़ा 06-10-1994 से 01-12-1998 भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष। भाजपा शासनकाल के प्रथम उप-मुख्यमंत्री।
3 बनवारी लाल बैरवा 25-01-2003 से 08-12-2003 अशोक गहलोत (प्रथम कार्यकाल) राजस्थान के प्रथम दलित उप-मुख्यमंत्री।
4 डॉ. कमला बेनीवाल 25-01-2003 से 08-12-2003 अशोक गहलोत (प्रथम कार्यकाल) राजस्थान की प्रथम महिला उप-मुख्यमंत्री। गुजरात, मिजोरम आदि राज्यों की राज्यपाल भी रहीं। (2003 में गहलोत सरकार ने एक साथ दो उप-मुख्यमंत्री बनाए थे)।
5 सचिन पायलट 17-12-2018 से 14-07-2020 अशोक गहलोत (तृतीय कार्यकाल) पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं PCC अध्यक्ष; टोंक विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित।
6 दीया कुमारी 15-12-2023 से वर्तमान भजन लाल शर्मा राजस्थान की वर्तमान उप-मुख्यमंत्री। राज्य की दूसरी महिला उप-मुख्यमंत्री एवं वर्तमान वित्त मंत्री। विद्याधर नगर विधायक।
7 डॉ. प्रेमचंद बैरवा 15-12-2023 से वर्तमान भजन लाल शर्मा राजस्थान के वर्तमान उप-मुख्यमंत्री। दूदू विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं उच्च शिक्षा व परिवहन मंत्री।

5. मुख्यमंत्री की नियुक्ति, अर्हताएँ, शपथ, कार्यकाल एवं पदमुक्ति

नियुक्ति एवं योग्यताएँ (Appointment & Eligibility)

  • अनुच्छेद 164(1): मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। आम चुनावों में विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त दल/गठबंधन के नेता को आमंत्रित किया जाता है।
  • त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल का विवेकाधिकार: यदि किसी दल को बहुमत न मिले, तो राज्यपाल अपने विवेकानुसार सबसे बड़े दल या चुनाव-पूर्व गठबंधन के नेता को सरकार बनाने का न्योता देता है (शर्त: निर्धारित समय में विधानसभा में बहुमत सिद्ध करना)।
  • अर्हता: भारत का नागरिक हो, न्यूनतम 25 वर्ष की आयु (विधानसभा सदस्य हेतु) अथवा 30 वर्ष (विधान परिषद् हेतु), तथा विधानमंडल के किसी सदन का सदस्य हो (या 6 माह के भीतर सदस्य बनने की योग्यता रखता हो)।

शपथ, पदावधि एवं त्यागपत्र (Oath & Tenure)

  • शपथ (Oath): अनुच्छेद 164(3) के अनुसार राज्यपाल द्वारा तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में दिए गए प्रारूप अनुसार 'पद एवं गोपनीयता की शपथ' दिलाई जाती है।
  • कार्यकाल (Tenure): मुख्यमंत्री का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (During the pleasure of Governor) पद धारण करता है।
  • वास्तविक स्थिति: जब तक मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत (Majority in Vidhan Sabha) प्राप्त है, राज्यपाल उसे पद से नहीं हटा सकता।
  • त्यागपत्र: मुख्यमंत्री अपना त्यागपत्र राज्यपाल को संबोधित कर सौंपता है। मुख्यमंत्री के त्यागपत्र या आकस्मिक निधन से संपूर्ण मंत्रिपरिषद् स्वतः भंग हो जाती है।

6. मुख्यमंत्री की शक्तियाँ, कार्यप्रणाली एवं मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO)

1. मंत्रिपरिषद् के संदर्भ में शक्तियाँ:
  • मंत्रियों की नियुक्ति हेतु राज्यपाल को नामों की सिफारिश करना।
  • मंत्रियों के विभागों का वितरण (Allotment) एवं फेरबदल करना।
  • मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करना एवं कार्यसूची (Agenda) तय करना।
  • किसी मंत्री से असंतुष्ट होने पर उससे त्यागपत्र मांगना या राज्यपाल को बर्खास्तगी की सलाह देना।
  • मुख्यमंत्री के त्यागपत्र से पूरी मंत्रिपरिषद् स्वतः समाप्त हो जाती है।
2. राज्यपाल के संदर्भ में शक्तियाँ (अनु. 167):
  • राज्यपाल और मंत्रिपरिषद् के बीच संवाद की मुख्य कड़ी के रूप में कार्य करना।
  • राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General), RPSC अध्यक्ष व सदस्यों, राज्य निर्वाचन आयुक्त तथा राज्य वित्त आयोग के गठन हेतु राज्यपाल को सलाह देना।
  • विधानसभा सत्र आहूत (Summon) करने व सत्रावसान करने हेतु राज्यपाल को परामर्श देना।
3. विधानसभा के संदर्भ में शक्तियाँ:
  • वह राज्य विधानसभा में सदन का नेता (Leader of the House) होता है।
  • सरकारी नीतियों एवं महत्वपूर्ण विधेयकों की घोषणा सदन के पटल पर करता है।
  • कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व भी राज्यपाल को विधानसभा भंग (Dissolve) करने की सिफारिश कर सकता है।
4. पदेन अध्यक्षीय भूमिकाएँ (Ex-Officio):
  • राज्य आयोजना बोर्ड / राज्य नीति एवं योजना आयोग का अध्यक्ष।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) का अध्यक्ष।
  • राज्य वन्यजीव मंडल (State Board for Wildlife) का अध्यक्ष।
  • नीति आयोग की शासी परिषद् (Governing Council) में राज्य का प्रतिनिधित्व।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) एवं मुख्य सचिव (Chief Secretary) का प्रशासनिक संबंध

मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO - 1951 में स्थापित): यह राज्य प्रशासन का तंत्रिकीय केंद्र (Nerve Centre) है। इसका प्रशासनिक प्रमुख प्रमुख शासन सचिव (Principal Secretary to CM) होता है। वहीं राज्य की संपूर्ण सिविल सेवा का प्रशासनिक प्रमुख मुख्य सचिव (Chief Secretary) होता है, जिसे मुख्यमंत्री का प्रमुख प्रशासनिक सलाहकार माना जाता है। राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव के. राधाकृष्णन (1949) थे। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच का समन्वय ही राज्य में सुशासन (Good Governance) का आधार होता है।

7. राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की सम्पूर्ण प्रामाणिक कालक्रम सूची (1949 से वर्तमान)

नीचे 7 अप्रैल 1949 से वर्तमान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तक की सम्पूर्ण ऐतिहासिक व प्रामाणिक कालक्रम तालिका दी गई है:

क्र.सं. मुख्यमंत्री का नाम कार्यकाल (अवधि) दल प्रकृति / विधानसभा विशिष्ट ऐतिहासिक एवं RPSC परीक्षा तथ्य
1 पं. हीरालाल शास्त्री 07-04-1949 से 05-01-1951 कांग्रेस मनोनीत राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री। 26 जनवरी 1950 को पदनाम 'प्रधानमंत्री' से 'मुख्यमंत्री' हुआ। जयपुर को राजधानी बनाया।
2 सी.एस. वेंकटाचारी 06-01-1951 से 25-04-1951 गैर-दलीय मनोनीत (ICS) राजस्थान के एकमात्र ICS (सिविल सेवक) मुख्यमंत्री। केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त।
3 जयनारायण व्यास (प्रथम बार) 26-04-1951 से 03-03-1952 कांग्रेस मनोनीत 'लक्कड़ और कक्कड़ के फकीर'। मनोनीत सीएम के रूप में प्रथम आम चुनाव कराए।
4 टीकाराम पालीवाल 03-03-1952 से 31-10-1952 कांग्रेस 1ली वि.स. (निर्वाचित) राजस्थान के प्रथम लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित मुख्यमंत्री। महुवा (दौसा) से विधायक। पद छोड़ने के बाद उप-मुख्यमंत्री बने।
(3) जयनारायण व्यास (द्वितीय बार) 01-11-1952 से 13-11-1954 कांग्रेस 1ली वि.स. (निर्वाचित) किशनगढ़ उपचुनाव जीतकर सीएम बने। एकमात्र व्यक्ति जो मनोनीत और निर्वाचित दोनों रहे। 1954 में सुखाड़िया से मात्र 1 मत से दल के नेता चुनाव में हारे।
5 मोहनलाल सुखाड़िया (1) 13-11-1954 से 11-04-1957 कांग्रेस 1ली वि.स. मात्र 38 वर्ष की आयु में सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। उदयपुर विधानसभा।
(5) मोहनलाल सुखाड़िया (2) 11-04-1957 से 11-03-1962 कांग्रेस 2री वि.स. 2 अक्टूबर 1959 को नागौर से देश में सर्वप्रथम त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ।
(5) मोहनलाल सुखाड़िया (3) 12-03-1962 से 13-03-1967 कांग्रेस 3री वि.स. 1962 में संभागीय व्यवस्था (Divisional System) को समाप्त किया।
- राष्ट्रपति शासन (13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967) – 44 दिन (न्यूनतम अवधि) | राज्यपाल: डॉ. सम्पूर्णानंद
(5) मोहनलाल सुखाड़िया (4) 26-04-1967 से 09-07-1971 कांग्रेस 4थी वि.स. सर्वाधिक 17 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड। 'आधुनिक राजस्थान के निर्माता'
6 बरकतुल्लाह खान 09-07-1971 से 11-10-1973 कांग्रेस 4थी व 5वीं वि.स. राजस्थान के एकमात्र अल्पसंख्यक (मुस्लिम) मुख्यमंत्री। तिजारा से विधायक। पद पर रहते हुए मृत्यु (Demised in office) को प्राप्त होने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री (हार्ट अटैक)। लोकप्रिय नाम 'प्यारे मियां'।
7 हरिदेव जोशी (1) 11-10-1973 से 29-04-1977 कांग्रेस 5वीं वि.स. घांगोदरा (बांसवाड़ा) के खांदू गांव निवासी; स्वतंत्रता सेनानी। आपातकाल के समय मुख्यमंत्री।
- राष्ट्रपति शासन (30 अप्रैल 1977 से 22 जून 1977) – 53 दिन | राज्यपाल: वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक)
8 भैरोंसिंह शेखावत (1) 22-06-1977 से 16-02-1980 जनता पार्टी 6ठी वि.स. राजस्थान के प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री। 'बाबोसा' के नाम से विख्यात। छबड़ा से विधायक। अंत्योदय योजना प्रारंभ।
- राष्ट्रपति शासन (16 फरवरी 1980 से 06 जून 1980) – 111 दिन | राज्यपाल: रघुकुल तिलक
9 जगन्नाथ पहाड़िया 06-06-1980 से 14-07-1981 कांग्रेस 7वीं वि.स. राजस्थान के प्रथम अनुसूचित जाति (दलित) मुख्यमंत्री। भुसावर (भरतपुर) निवासी। राजस्थान में पूर्ण शराबबंदी लागू की। महादेवी वर्मा पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद इस्तीफा देना पड़ा।
10 शिवचरण माथुर (1) 14-07-1981 से 23-02-1985 कांग्रेस 7वीं वि.स. एमपी मूल के राजनेता; डीग में राजा मानसिंह गोलीकांड (1985) के नैतिक दायित्व पर इस्तीफा दिया।
11 हीरालाल देवपुरा 23-02-1985 से 10-03-1985 कांग्रेस 7वीं वि.स. कुंभलगढ़ से विधायक। राजस्थान में सबसे न्यूनतम कार्यकाल (मात्र 16 दिन) वाले मुख्यमंत्री। बाद में विधानसभा अध्यक्ष भी बने।
(7) हरिदेव जोशी (2) 10-03-1985 से 20-01-1988 कांग्रेस 8वीं वि.स. 1987 में संभागीय व्यवस्था को पुनः शुरू किया (अजमेर 6ठा संभाग बना)।
(10) शिवचरण माथुर (2) 20-01-1988 से 04-12-1989 कांग्रेस 8वीं वि.स. दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। बाद में असम के राज्यपाल रहे।
(7) हरिदेव जोशी (3) 04-12-1989 से 04-03-1990 कांग्रेस 8वीं वि.स. कुल 3 बार सीएम बने, परंतु एक बार भी 5 वर्ष का पूर्ण कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। असम, मेघालय, प. बंगाल के राज्यपाल रहे।
(8) भैरोंसिंह शेखावत (2) 04-03-1990 से 15-12-1992 भाजपा 9वीं वि.स. जनता दल के साथ गठबंधन सरकार। अयोध्या बाबरी मस्जिद घटना के बाद सरकार बर्खास्त।
- राष्ट्रपति शासन (15 दिसंबर 1992 से 04 दिसंबर 1993) – 354 दिन (सर्वाधिक अवधि) | राज्यपाल: डॉ. एम. चन्ना रेड्डी
(8) भैरोंसिंह शेखावत (3) 04-12-1993 से 01-12-1998 भाजपा 10वीं वि.स. पूर्ण 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। बाद में भारत के 11वें उपराष्ट्रपति (2002-2007) बने।
12 अशोक गहलोत (1) 01-12-1998 से 08-12-2003 कांग्रेस 11वीं वि.स. सरदारपुरा (जोधपुर) से विधायक। 153 सीटों का भारी बहुमत। सूखा-अकाल प्रबंधन हेतु प्रशंसा।
13 वसुंधरा राजे सिंधिया (1) 08-12-2003 से 12-12-2008 भाजपा 12वीं वि.स. राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री। झालरापाटन (झालावाड़) से विधायक। भाजपा को पहली बार 120 सीटों का स्पष्ट बहुमत मिला।
(12) अशोक गहलोत (2) 12-12-2008 से 13-12-2013 कांग्रेस 13वीं वि.स. मुफ्त दवा योजना (2011), मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना प्रारंभ।
(13) वसुंधरा राजे सिंधिया (2) 13-12-2013 से 17-12-2018 भाजपा 14वीं वि.स. राजस्थान इतिहास में भाजपा की सर्वाधिक 163 सीटें। भामाशाह योजना, जल स्वावलंबन अभियान।
(12) अशोक गहलोत (3) 17-12-2018 से 15-12-2023 कांग्रेस 15वीं वि.स. चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS), 19 नवीन जिलों का गठन। तीसरी बार सीएम बनकर शेखावत व जोशी की बराबरी की।
14 भजन लाल शर्मा 15-12-2023 से वर्तमान भाजपा 16वीं वि.स. राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री। सांगानेर (जयपुर) विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार विधायक बनकर सीएम पद पर आसीन। मूल निवासी अटारी (नदबई, भरतपुर)। शपथ ग्रहण 15 दिसंबर 2023।

8. प्रमुख मुख्यमंत्रियों का विशिष्ट योगदान एवं ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स

मोहनलाल सुखाड़िया (आधुनिक राजस्थान के निर्माता)

  • लगातार सर्वाधिक 17 वर्ष (1954 से 1971) तक मुख्यमंत्री रहे।
  • कुल 4 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली (सर्वाधिक)।
  • 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज का श्रीगणेश नागौर के बगदरी गांव से कराया।
  • राजस्थान में प्रथम राष्ट्रपति शासन (1967) इन्हीं के कार्यकाल में लगा।
  • बाद में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के राज्यपाल रहे।

भैरोंसिंह शेखावत ('बाबोसा' - राजस्थान के गौरव)

  • राजस्थान के प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री (1977)।
  • कुल 3 बार मुख्यमंत्री रहे (1977-80, 1990-92, 1993-98)।
  • इनके मुख्यमंत्रित्व काल में दो बार (1980 व 1992) राष्ट्रपति शासन लगा।
  • प्रसिद्ध 'काम के बदले अनाज' व 'अंत्योदय योजना' के जनक।
  • वर्ष 2002 से 2007 तक भारत के 11वें उपराष्ट्रपति रहे।

श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया

  • राजस्थान की प्रथम व एकमात्र महिला मुख्यमंत्री (2003-08, 2013-18)।
  • 2003 में जब वे मुख्यमंत्री बनीं, उस समय राज्य की राज्यपाल भी महिला (प्रतिभा पाटिल) तथा विधानसभा अध्यक्ष भी महिला (सुमित्रा सिंह) थीं!
  • 2013 विधानसभा चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक 163 सीटें दिलाईं।
  • भामाशाह योजना एवं मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA) की सूत्रधार।

हरिदेव जोशी एवं अन्य विशिष्ट रिकॉर्ड्स

  • हरिदेव जोशी: 3 बार मुख्यमंत्री बने (1973, 1985, 1989), लेकिन कभी भी 5 वर्ष पूर्ण नहीं कर सके। प्रथम विधानसभा (1952) से लेकर लगातार 10 विधानसभाओं तक चुनाव जीतने का अनूठा रिकॉर्ड।
  • हीरालाल देवपुरा: राजस्थान में सबसे न्यूनतम कार्यकाल (मात्र 16 दिन) वाले मुख्यमंत्री।
  • बरकतुल्लाह खान: पद पर रहते हुए दिवंगत होने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री (1973)।
  • जगन्नाथ पहाड़िया: राजस्थान के प्रथम दलित (SC) मुख्यमंत्री (1980)।

9. मुख्यमंत्री-राज्यपाल संबंध एवं 4 बार राष्ट्रपति शासन समीकरण

संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री राज्यपाल के प्रति उत्तरदायी है। राजस्थान में जब-जब राजनीतिक संकट या संवैधानिक तंत्र विफल हुआ, अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लागू हुआ। उस समय मुख्यमंत्री-राज्यपाल के समीकरण RPSC का मुख्य केंद्र बिंदु रहे हैं:

राष्ट्रपति शासन अवधि बर्खास्त/तत्कालीन मुख्यमंत्री तत्कालीन राज्यपाल शासन समाप्ति पर नए मुख्यमंत्री
1. प्रथम (1967) 13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967 (44 दिन) मोहनलाल सुखाड़िया डॉ. सम्पूर्णानंद (समाप्ति: हुकुम सिंह) मोहनलाल सुखाड़िया (पुनः सरकार बनाई)
2. द्वितीय (1977) 30 अप्रैल 1977 से 22 जून 1977 (53 दिन) हरिदेव जोशी वेदपाल त्यागी (कार्यवाहक) भैरोंसिंह शेखावत (प्रथम बार गैर-कांग्रेसी)
3. तृतीय (1980) 16 फरवरी 1980 से 06 जून 1980 (111 दिन) भैरोंसिंह शेखावत रघुकुल तिलक जगन्नाथ पहाड़िया (प्रथम दलित CM)
4. चतुर्थ (1992-93) 15 दिसंबर 1992 से 04 दिसंबर 1993 (354 दिन) भैरोंसिंह शेखावत डॉ. एम. चन्ना रेड्डी (समाप्ति: बलीराम भगत) भैरोंसिंह शेखावत (तीसरी बार पूर्ण बहुमत)

विशेष अवलोकन: भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनकी सरकारों को दो बार (1980 एवं 1992) अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त किया गया, और दोनों ही बार राष्ट्रपति शासन हटने के बाद वे पुनः जीतकर मुख्यमंत्री बने!

10. परीक्षा-उपयोगी त्वरित रामबाण तथ्य (High-Yield RPSC/RAS Revision Bullets)

⚡ महत्वपूर्ण सांख्यिकीय तथ्य (Part 1)

  • प्रथम मनोनीत मुख्यमंत्री: पं. हीरालाल शास्त्री (1949)।
  • प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री: टीकाराम पालीवाल (1952)।
  • मनोनीत व निर्वाचित दोनों रहने वाले: जयनारायण व्यास।
  • एकमात्र सिविल सर्वेंट (ICS) सीएम: सी.एस. वेंकटाचारी (1951)।
  • सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल: मोहनलाल सुखाड़िया (17 वर्ष - 4 बार)।
  • न्यूनतम कार्यकाल: हीरालाल देवपुरा (मात्र 16 दिन - 1985)।
  • सबसे युवा मुख्यमंत्री: मोहनलाल सुखाड़िया (38 वर्ष की आयु में)।

⚡ महत्वपूर्ण सांख्यिकीय तथ्य (Part 2)

  • प्रथम गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री: भैरोंसिंह शेखावत (1977, जनता पार्टी)।
  • प्रथम महिला मुख्यमंत्री: वसुंधरा राजे सिंधिया (2003)।
  • प्रथम अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री: बरकतुल्लाह खान (1971)।
  • पद पर रहते हुए निधन: बरकतुल्लाह खान (1973 - एकमात्र सीएम)।
  • प्रथम दलित मुख्यमंत्री: जगन्नाथ पहाड़िया (1980)।
  • मुख्यमंत्री जो उप-मुख्यमंत्री भी रहे: टीकाराम पालीवाल।
  • 3 बार मुख्यमंत्री बनने वाले राजनेता: हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत एवं अशोक गहलोत। (सुखाड़िया जी 4 बार)।

11. विगत RPSC/RAS परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Questions & Analysis)

प्रश्न 1: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुसार राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की अधिकतम व न्यूनतम सदस्य संख्या कितनी हो सकती है? [RAS Pre 2018 / SI 2021]

उत्तर: अधिकतम 30 (200 का 15%) तथा न्यूनतम 12 सदस्य। (अनुच्छेद 164(1A) के तहत)।

प्रश्न 2: राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से कौन मुख्यमंत्री का पद संभालने से पूर्व किसी अन्य राज्य के राज्यपाल रहे अथवा बाद में राज्यपाल बने? [College Lecturer 2021]

उत्तर: मोहनलाल सुखाड़िया (आंध्र, कर्नाटक, तमिलनाडु), हरिदेव जोशी (असम, मेघालय, प. बंगाल), शिवचरण माथुर (असम), तथा जगन्नाथ पहाड़िया (हरियाणा व बिहार) राज्यपाल रहे।

प्रश्न 3: संविधान के किस अनुच्छेद में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों (Duties of CM) का उल्लेख है? [2nd Grade GK 2022]

उत्तर: अनुच्छेद 167। इसमें राज्यपाल को प्रशासनिक एवं विधायी सूचना देने के मुख्यमंत्री के 3 विशिष्ट कर्तव्य वर्णित हैं।

प्रश्न 4: राजस्थान के किस मुख्यमंत्री के त्यागपत्र के पश्चात हीरालाल देवपुरा मात्र 16 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे? [RAS Pre 2013]

उत्तर: शिवचरण माथुर। (डीग गोलीकांड 1985 के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया था)।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

कार्यपालिका नेतृत्व

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री के किन्हीं तीन प्रमुख कर्तव्यों को रेखांकित कीजिए।

उत्तर संकेत: 1. राज्य प्रशासन एवं विधायी प्रस्तावों संबंधी मंत्रिपरिषद के समस्त निर्णयों से राज्यपाल को संसूचित करना, 2. राज्यपाल द्वारा मांगी गई प्रशासनिक व विधिक सूचनाएं प्रस्तुत करना, 3. किसी मंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए निर्णय को राज्यपाल के निर्देश पर पूरी मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ रखवाना।

प्रश्न 2 (20 शब्द | 2 अंक): राजस्थान के ऐसे मुख्यमंत्रियों के नाम बताइए जो तीन या तीन से अधिक बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं?

उत्तर संकेत: 1. मोहनलाल सुखाड़िया (सर्वाधिक 4 बार), 2. हरिदेव जोशी (3 बार), 3. भैरोंसिंह शेखावत (3 बार), 4. अशोक गहलोत (3 बार)।
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  • 1 अनुच्छेदों का सूक्ष्म मिलान: अनुच्छेद 164(1A) का 15% नियम, अनुच्छेद 164(2) का सामूहिक उत्तरदायित्व एवं अनुच्छेद 167 के कर्तव्य।
  • 2 उप-मुख्यमंत्री इतिहास: टीकाराम पालीवाल से लेकर वर्तमान दीया कुमारी व प्रेमचंद बैरवा तक के प्रश्न।
  • 3 ऐतिहासिक तुलना: मनोनीत सीएम, न्यूनतम कार्यकाल (देवपुरा), सर्वाधिक कार्यकाल (सुखाड़िया) एवं पद पर निधन (बरकतुल्लाह खान)।
  • 4 राष्ट्रपति शासन व सीएम: 1967, 1977, 1980 व 1992 के समय मुख्यमंत्री-राज्यपाल युग्म।

अनुच्छेद 163-167

संवैधानिक शक्तियां व कर्तव्य

7 उप-मुख्यमंत्री

पालीवाल से प्रेमचंद बैरवा

17 वर्ष शासन

मोहनलाल सुखाड़िया रिकॉर्ड

1 महिला CM

वसुंधरा राजे (दो कार्यकाल)

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थान के मुख्यमंत्री से संबंधित परीक्षोपयोगी प्रश्न एवं प्रामाणिक उत्तर।

राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित हीरालाल शास्त्री थे (7 अप्रैल 1949 से 5 जनवरी 1951)। वे मनोनीत (Nominated) मुख्यमंत्री थे। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने पर रियासती 'प्रधानमंत्री' पदनाम को बदलकर 'मुख्यमंत्री' किया गया था।
राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल थे। 1952 के प्रथम आम चुनावों के पश्चात 3 मार्च 1952 को उन्होंने पदभार ग्रहण किया। वे महुवा (दौसा) विधानसभा क्षेत्र से चुने गए थे।
जयनारायण व्यास राजस्थान के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो पहले मनोनीत (26 अप्रैल 1951 से 3 मार्च 1952) रहे और बाद में किशनगढ़ उपचुनाव जीतकर निर्वाचित मुख्यमंत्री (1 नवंबर 1952 से 13 नवंबर 1954) बने।
मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान में सर्वाधिक दीर्घ अवधि (लगभग 17 वर्ष - 13 नवंबर 1954 से 9 जुलाई 1971) तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने कुल 4 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उन्हें 'आधुनिक राजस्थान का निर्माता' कहा जाता है।
राजस्थान में अब तक कुल 7 उप-मुख्यमंत्री रहे हैं:
1. टीकाराम पालीवाल (प्रथम उप-मुख्यमंत्री, 1952-1954)
2. हरिशंकर भाभड़ा (1993-1998)
3. बनवारी लाल बैरवा (2003)
4. डॉ. कमला बेनीवाल (2003 - प्रथम महिला उप-मुख्यमंत्री)
5. सचिन पायलट (2018-2020)
6. दीया कुमारी (वर्तमान, 2023 से)
7. डॉ. प्रेमचंद बैरवा (वर्तमान, 2023 से)।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन व विधायी प्रस्तावों से संबंधित सभी जानकारियाँ राज्यपाल को संप्रेषित करे।

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