राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त :
अधिनियम 1973, जांच क्षेत्राधिकार, 5 वर्ष कार्यकाल (2019 संशोधन) व लोकायुक्त सूची
राजस्थान में प्रशासनिक शुचिता एवं भ्रष्टाचार निवारण की शीर्ष वैधानिक संस्था का संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन — अधिनियम 1973 (प्रभावी 3 फरवरी 1973), नियुक्ति प्रक्रिया (राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश व नेता प्रतिपक्ष के परामर्श से), जांच क्षेत्राधिकार (मंत्री, सचिव, जिला प्रमुख, प्रधान), जांच दायरे से बाहर (मुख्यमंत्री, विधायक, सरपंच, पंच, RPSC), कार्यकाल 5 वर्ष (2018 में 8 वर्ष, पुनः 2019 संशोधन में 5 वर्ष), प्रथम लोकायुक्त जस्टिस आई.डी. दुआ, एकमात्र उप-लोकायुक्त के.पी.यू. मेनन से वर्तमान तक की सम्पूर्ण प्रामाणिक सूची व RAS Pre/Mains हेतु नोट्स।
राजस्थान राज्य प्रशासनिक व संवैधानिक व्यवस्था हब
सम्पूर्ण 24 अध्याय इंडेक्स देखेंराजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त : अधिनियम 1973, जांच क्षेत्राधिकार व कार्यकाल
3 फरवरी 1973 से प्रभावी, 5 वर्ष कार्यकाल (2019 संशोधन), राज्यपाल-CJ-LoP परामर्श नियुक्ति, मंत्री/सचिव/प्रमुख जांच दायरे में, CM/MLA/सरपंच बाहर, आई.डी. दुआ से लेकर वर्तमान पी.के. लोहरा तक सम्पूर्ण विश्लेषण।
1. लोकायुक्त संस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम 1973
लोकायुक्त संस्था विश्व के स्कैंडिनेवियाई देशों (स्वीडन में 1809) में प्रचलित 'ओम्बड्समैन' (Ombudsman) प्रणाली का भारतीय संस्करण है। भारत में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (First ARC, 1966 - मोरारजी देसाई व के. हनुमंतैया की अध्यक्षता) ने केंद्र में 'लोकपाल' तथा राज्यों में 'लोकायुक्त' की स्थापना की सर्वप्रथम सशक्त सिफारिश की थी। राजस्थान में भी 1963 में हरीश चंद्र माथुर प्रशासनिक सुधार समिति ने ऐसी संस्था की आवश्यकता पर बल दिया था।
2. लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया, योग्यताएं एवं पद की शपथ (धारा 3)
अधिनियम की धारा 3 के अनुसार लोकायुक्त की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के लिए एक विशेष विचार-विमर्श प्रक्रिया निर्धारित की गई है:
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का न्यायाधीश रहा हो, अथवा
- किसी उच्च न्यायालय (High Court) का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा हो।
3. लोकायुक्त का कार्यकाल (Tenure) एवं 2018 व 2019 का विधिक संशोधन विवाद
राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाने वाला सर्वाधिक संवेदनशील विषय है। अधिनियम की धारा 5 में कार्यकाल का क्रमिक विकास इस प्रकार रहा है:
4. लोकायुक्त का जांच क्षेत्राधिकार : कौन दायरे में शामिल है और कौन बाहर?
RPSC और RSSB परीक्षाओं में लोकायुक्त के जांच क्षेत्राधिकार से सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। अधिनियम की धारा 7 व 8 में जांच के दायरे तथा धारा 10 में अपवादों का स्पष्ट उल्लेख है:
- मंत्रीगण: राज्य के सभी मंत्री (कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उप-मंत्री)।
- उच्च प्रशासनिक अधिकारी: राज्य सरकार के मुख्य सचिव सहित सभी सचिव, विशेषाधिकारी व विभागाध्यक्ष।
- समस्त लोक सेवक: राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सभी श्रेणियों के सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी।
- पंचायती राज संस्थाएँ: जिला परिषद के प्रमुख व उप-प्रमुख तथा पंचायत समिति के प्रधान व उप-प्रधान।
- नगरीय निकाय: नगर निगम के महापौर व उप-महापौर, नगर परिषद व नगरपालिकाओं के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष।
- स्वायत्तशासी निगम व बोर्ड: राज्य विधानमंडल के अधिनियम द्वारा स्थापित निगमों, मंडलों, बोर्डों (जैसे विद्युत मंडल, रीको आदि) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं अधिकारी।
- राज्य विश्वविद्यालय: विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं संबंधित पदाधिकारी।
- मुख्यमंत्री (Chief Minister): राजस्थान में CM लोकायुक्त के जांच दायरे से बाहर हैं।
- विधानसभा सदस्य (विधायक / MLA): विधायक लोकायुक्त की जांच परिधि में नहीं आते।
- सरपंच एवं पंच: ग्राम पंचायत के सरपंच व वार्ड पंच लोकायुक्त दायरे से बाहर हैं (अति-महत्वपूर्ण प्रश्न)।
- RPSC के अध्यक्ष एवं सदस्य: लोक सेवा आयोग के सदस्य शामिल नहीं हैं।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त व मुख्य निर्वाचन अधिकारी: चुनाव तंत्र लोकायुक्त से बाहर है।
- न्यायाधीशगण (Judges): उच्च न्यायालय व अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी।
- महालेखाकार (AG) व लोकायुक्त अधिकारी: राजस्थान के महालेखाकार तथा लोकायुक्त सचिवालय के कर्मचारी।
- सेवानिवृत्त लोक सेवक: सेवानिवृत्ति के बाद किए गए कार्यों हेतु।
5. लोकायुक्त की शक्तियाँ, सिविल कोर्ट का दर्जा (धारा 11) एवं संस्था की कमजोरियाँ
- किसी भी व्यक्ति को गवाही हेतु समन जारी करना, हाजिर कराना और शपथ पर उसकी परीक्षा करना।
- किसी भी सरकारी कार्यालय से गोपनीय या सार्वजनिक दस्तावेजों को मंगाना एवं उनका निरीक्षण करना।
- शपथ पत्रों (Affidavits) पर साक्ष्य प्राप्त करना।
- दस्तावेजों या साक्ष्यों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।
- केवल सलाहकारी प्रकृति (Recommendatory Body): लोकायुक्त स्वयं किसी दोषी को दंड (Punishment) नहीं दे सकता और न ही अभियोजन (Prosecution) सीधे चला सकता है। वह केवल सक्षम प्राधिकारी (सक्षम अधिकारी/राज्यपाल/मुख्यमंत्री) को अपनी जांच रिपोर्ट और सिफारिश भेजता है।
- स्वयं की स्वतंत्र जांच एजेंसी का अभाव: लोकायुक्त के पास अपनी कोई पूर्ण स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं होती; उसे राज्य सरकार के पुलिस अधिकारियों अथवा एसीबी (ACB) पर निर्भर रहना पड़ता है।
- स्वप्रेरणा (Suo-Motu) से जांच की सीमित शक्ति: लोकायुक्त सामान्यतः समाचार पत्रों या स्वतः संज्ञान लेकर सीधे जांच शुरू नहीं कर सकता, उसे बाकायदा शपथ-पत्र के साथ हस्ताक्षरित लिखित शिकायत की आवश्यकता होती है।
- झूठी शिकायत पर दंड: झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध 3 वर्ष तक का कारावास एवं जुर्माने का कड़ा प्रावधान है (जिससे कई नागरिक शिकायत करने से झिझकते हैं)।
6. त्यागपत्र, निष्कासन प्रक्रिया (धारा 6) एवं वार्षिक प्रतिवेदन (धारा 12)
- सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा जांच की जाती है।
- जांच उपरांत विधानसभा द्वारा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से पारित समावेदन पर राज्यपाल द्वारा आदेश देकर हटाया जाता है।
अधिनियम की धारा 12(1) के अनुसार लोकायुक्त अपनी जांच पूरी करने के बाद दोष साबित होने पर अपनी सिफारिशें सीधे संबंधित "सक्षम प्राधिकारी" को भेजता है:
| जिस पदाधिकारी के विरुद्ध जांच हुई | सक्षम प्राधिकारी (जिसको रिपोर्ट भेजी जाएगी) |
|---|---|
| राज्य का कोई मंत्री या उप-मंत्री | मुख्यमंत्री (Chief Minister) |
| शासन सचिव या विभागाध्यक्ष (IAS/HOD) | संबंधित विभाग का मंत्री / मुख्यमंत्री |
| जिला प्रमुख एवं पंचायत समिति प्रधान | राज्य सरकार (पंचायती राज विभाग) |
| नगर निगम महापौर व नगर परिषद सभापति | राज्य सरकार (स्वायत्त शासन विभाग) |
*सक्षम प्राधिकारी को लोकायुक्त की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई से 3 माह के भीतर लोकायुक्त को अवगत कराना अनिवार्य होता है।
7. राजस्थान में उप-लोकायुक्त (Up-Lokayukta) की स्थिति एवं ऐतिहासिक तथ्य
राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधिनियम 1973 में एक लोकायुक्त के साथ एक या अधिक उप-लोकायुक्तों (Up-Lokayuktas) की नियुक्ति का भी वैधानिक प्रावधान किया गया है। उप-लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त के परामर्श से की जाती है।
राजस्थान के एकमात्र उप-लोकायुक्त : श्री के.पी.यू. मेनन
राजस्थान के पूर्व मुख्य सचिव श्री के.पी.यू. मेनन (K.P.U. Menon) को 5 जून 1973 को राजस्थान का प्रथम उप-लोकायुक्त नियुक्त किया गया था। वे राजस्थान के इतिहास में अब तक के एकमात्र उप-लोकायुक्त रहे हैं। उनके पश्चात् राजस्थान में आज तक किसी अन्य उप-लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की गई है।
8. राजस्थान के लोकायुक्तों की ऐतिहासिक कालक्रमानुसार सम्पूर्ण सूची (1973 से वर्तमान)
| क्र.सं. | लोकायुक्त का नाम | कार्यकाल (अवधि) | विशिष्ट ऐतिहासिक एवं परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|---|
| 1 | जस्टिस आई.डी. दुआ (Inder Dev Dua) | 28-08-1973 से 27-08-1978 | राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश। 5 वर्ष का पूर्ण कार्यकाल। |
| 2 | जस्टिस डी.पी. गुप्ता (Dwarika Prasad Gupta) | 09-02-1978 से 1983 | राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश। |
| 3 | जस्टिस एम.एल. श्रीमाल (M.L. Shrimal) | 1983 से 1988 | सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश। |
| 4 | जस्टिस पी.डी. कुडाल (Pushpendra D. Kudal) | 1988 से 1993 | कुडाल आयोग (गांधी शांति प्रतिष्ठान जांच) के अध्यक्ष भी रहे थे। |
| 5 | जस्टिस एम.बी. शर्मा (Milap Chand Sharma) | 1994 से 1999 | वरिष्ठ न्यायिक प्रशासनिक अनुभव। |
| 6 | जस्टिस वी.एस. दवे (Virendra Singh Dave) | 2000 से 2005 | राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रसिद्ध न्यायाधीश। |
| 7 | जस्टिस जी.एल. गुप्ता | 2005 से 2010 | 5 वर्ष का पूर्ण कार्यकाल पूर्ण किया। |
| 8 | जस्टिस एस.एस. कोठारी (सज्जन सिंह कोठारी) | 25-03-2013 से 07-03-2019 | सर्वाधिक चर्चित कार्यकाल। 2018 में 8 वर्ष बढ़ाया गया, 2019 में पुनः घटाकर 5 वर्ष करने से पदमुक्त हुए (लगभग 6 वर्ष रहे)। |
| 9 | जस्टिस प्रताप कृष्ण लोहरा (P.K. Lohra) | 09-03-2021 से 08-03-2026 | वर्तमान लोकायुक्त। राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश। राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा शपथ दिलाई गई। |
9. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)
⚡ अधिनियम व नियुक्ति तथ्य
- अधिनियम प्रभाव: 3 फरवरी 1973.
- राष्ट्रपति स्वीकृति: 26 मार्च 1973.
- नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा (HC के CJ व LoP के परामर्श से).
- कार्यकाल (वर्तमान): 5 वर्ष या 65 वर्ष आयु.
- प्रथम लोकायुक्त: जस्टिस आई.डी. दुआ (28 अगस्त 1973).
- एकमात्र उप-लोकायुक्त: के.पी.यू. मेनन (5 जून 1973).
⚡ क्षेत्राधिकार व विधिक तथ्य
- जांच में शामिल: मंत्री, सचिव, जिला प्रमुख, प्रधान.
- जांच से बाहर: CM, विधायक (MLA), सरपंच, पंच, RPSC.
- शिकायत की मियाद: अधिकतम 5 वर्ष पुराना मामला.
- अदालती शक्तियाँ: सिविल कोर्ट (CPC 1908).
- प्रतिवेदन प्रस्तुत: प्रतिवर्ष राज्यपाल को (धारा 12).
- प्रकृति: केवल सलाहकारी व सिफारिशी निकाय.
10. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Solved Questions)
प्रश्न 1: राजस्थान लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार में निम्नलिखित में से कौन-कौन सम्मिलित हैं?
(i) मंत्री (ii) मुख्यमंत्री (iii) राजस्थान राज्य के अधिनियमों द्वारा स्थापित निगमों के सेवक (iv) जिला प्रमुख एवं प्रधान [RAS Pre 2013 / 2016 / 2021]
उत्तर: (i), (iii) एवं (iv) सही हैं। (मुख्यमंत्री लोकायुक्त के जांच क्षेत्राधिकार से बाहर हैं)।
प्रश्न 2: राजस्थान में लोकायुक्त की नियुक्ति के संबंध में राज्यपाल निम्न में से किससे परामर्श करता है? [College Lecturer 2016 / EO-RO 2023]
उत्तर: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता (LoP) से।
प्रश्न 3: राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे? [Patwar 2021 / Police SI 2021]
उत्तर: जस्टिस आई.डी. दुआ (इन्दर देव दुआ - 1973)।
प्रश्न 4: राजस्थान लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा लोकायुक्त का कार्यकाल 8 वर्ष से घटाकर कितना किया गया? [RAS Pre 2021 / 2nd Grade 2022]
उत्तर: 5 वर्ष (पदभार ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु तक)।
RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) अभ्यास प्रश्नोत्तर
उत्तर लेखन अभ्यासप्रश्न 1 (20 शब्द | 2 अंक): राजस्थान लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर रखे गए किन्हीं चार पदाधिकारियों के नाम लिखिए।
प्रश्न 2 (50 शब्द | 5 अंक): राजस्थान में लोकायुक्त संस्था को अधिक प्रभावी बनाने हेतु प्रमुख विधिक चुनौतियों व सुझावों की विवेचना कीजिए।
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अधिनियम 1973, जांच क्षेत्राधिकार (शामिल व बाहर), 2019 संशोधन, सिविल कोर्ट शक्तियाँ, प्रथम लोकायुक्त आई.डी. दुआ से वर्तमान तक की सम्पूर्ण सूची व हल प्रश्न पत्र।
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राजस्थान राजव्यवस्था
- RPSC (लोक सेवा आयोग) Art. 315-323
- राज्य निर्वाचन आयोग Art. 243K
- राज्य मानवाधिकार आयोग SHRC
- लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त सक्रिय
- राज्य मुख्य सूचना आयोग RTI 2005
- लोक सेवा गारंटी व जन पोर्टल नागरिक अधिकार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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