राजस्थान विधानसभा (Rajasthan Legislative Assembly) :
संरचना, कार्यप्रणाली, 200 सीटें, 16वीं विधानसभा व सम्पूर्ण कालक्रम नोट्स
राजस्थान की एकसदनीय लोकतांत्रिक विधायिका का सबसे प्रामाणिक एवं विस्तृत अध्ययन — 1952 में 160 सीटों से वर्तमान 200 सीटों का क्रमिक विकास, अनुसूचित जाति (34) व जनजाति (25) आरक्षण, 106वाँ संविधान संशोधन (नारी शक्ति वंदन), प्रोटेम स्पीकर, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, कोरम (गणपूर्ति), प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण व अविश्वास प्रस्ताव (नियम 133), 1ली से 16वीं विधानसभा का तुलनात्मक कालक्रम सारणी, तथा 16वीं विधानसभा (2023-28) के नवीनतम अद्यतन तथ्य।
राजस्थान राज्य प्रशासनिक व संवैधानिक व्यवस्था हब
सम्पूर्ण राजव्यवस्था इंडेक्स देखेंराजस्थान विधानसभा : सम्पूर्ण संवैधानिक, संरचनात्मक एवं कार्यप्रणाली विश्लेषण
अनुच्छेद 168 से 212 की विश्लेषणात्मक व्याख्या, 1952 से वर्तमान 16वीं विधानसभा तक सीटों का इतिहास, प्रोटेम स्पीकर, अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रश्नकाल व शून्यकाल, विधायी प्रक्रिया एवं विगत 15 वर्षों के RPSC/RSMSSB प्रश्न।
1. राज्य विधानमंडल का संवैधानिक ढाँचा (Constitutional Framework: Art. 168 to 212)
भारतीय संविधान के भाग-6 के अध्याय-3 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल (State Legislature) की संरचना, पदाधिकारियों, कार्यप्रणाली एवं शक्तियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। अनुच्छेद 168 के अनुसार प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल होगा, जो राज्यपाल तथा सदन/सदनों से मिलकर बनेगा। राजस्थान में विधायिका एकसदनीय (Unicameral) है, अर्थात यहाँ केवल विधानसभा (Legislative Assembly) अस्तित्व में है; विधान परिषद् (Legislative Council) नहीं है।
| अनुच्छेद | संवैधानिक विषय (Constitutional Matter) | RPSC / RAS परीक्षा उपयोगी व्याख्या |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 168 | राज्यों के विधानमंडलों का गठन: राज्यपाल तथा विधानसभा (और जहाँ विधान परिषद हो वहाँ दोनों)। | राजस्थान में विधानमंडल = राज्यपाल + राजस्थान विधानसभा। |
| अनुच्छेद 169 | विधान परिषदों का सृजन या उत्सादन: संसद द्वारा विधि बनाकर समाप्ति या गठन। | विधानसभा द्वारा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना अनिवार्य है। राजस्थान विधानसभा 2012 में ऐसा संकल्प पारित कर केंद्र को भेज चुकी है। |
| अनुच्छेद 170 | विधानसभाओं की संरचना: किसी भी राज्य विधानसभा में अधिकतम 500 तथा न्यूनतम 60 सदस्य हो सकते हैं। | राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं, जो वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुने जाते हैं। |
| अनुच्छेद 172 | विधानसभा की अवधि: प्रथम बैठक से 5 वर्ष। आपातकाल की उद्घोषणा के समय संसद विधि द्वारा इसे एक बार में 1 वर्ष बढ़ा सकती है। | 5वीं विधानसभा (1972-1977) का कार्यकाल राष्ट्रीय आपातकाल के कारण 5 वर्ष से अधिक (5 वर्ष 1 माह 15 दिन) रहा था। |
| अनुच्छेद 173 | सदस्यता हेतु अर्हताएँ: 1. भारत का नागरिक हो, 2. न्यूनतम 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो, 3. संसद द्वारा विहित अन्य योग्यताएँ रखता हो। | लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA 1951) के तहत वह राज्य के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता होना चाहिए। |
| अनुच्छेद 174 | सत्र, सत्रावसान एवं विघटन: राज्यपाल द्वारा समय-समय पर सत्र आहूत करना। | विधानसभा के दो सत्रों की अंतिम बैठक और आगामी बैठक के मध्य अधिकतम 6 माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। |
| अनुच्छेद 178 | विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष: विधानसभा अपने ही सदस्यों में से एक को अध्यक्ष तथा एक को उपाध्यक्ष चुनेगी। | अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव विधानसभा सदस्यों द्वारा साधारण बहुमत से किया जाता है। |
| अनुच्छेद 179 | अध्यक्ष/उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना व त्यागपत्र: अध्यक्ष अपना त्यागपत्र उपाध्यक्ष को तथा उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को सौंपता है। | इन्हें हटाने हेतु कम से कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना देना अनिवार्य होता है। |
| अनुच्छेद 188 | सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान: राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति (प्रोटेम स्पीकर) के समक्ष शपथ। | शपथ संविधान की तीसरी अनुसूची के प्रारूप अनुसार ली जाती है। बिना शपथ लिए बैठने या मतदान करने पर प्रतिदिन ₹500 का जुर्माना (Art. 193) है। |
| अनुच्छेद 189 | सदन में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी कार्य करने की शक्ति व गणपूर्ति (Quorum): | अध्यक्ष प्रथम दृष्टया मत नहीं देता, वह केवल मत बराबर होने पर निर्णायक मत (Casting Vote - Art 189(1)) देता है। गणपूर्ति कुल सदस्य संख्या का 1/10 (अर्थात राजस्थान में 20 सदस्य) है। |
| अनुच्छेद 191 & 192 | सदस्यों की निरर्हताएँ (Disqualifications): लाभ का पद, विकृतचित्त, दिवालिया, नागरिकता त्याग आदि। | सामान्य निरर्हता का निर्णय राज्यपाल चुनाव आयोग की राय अनुसार करता है, परंतु दल-बदल (10वीं अनुसूची) के आधार पर अयोग्यता का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष करता है। |
| अनुच्छेद 194 | विधानसभा व उसके सदस्यों के विशेषाधिकार (Privileges): सदन में वाक्-स्वतंत्रता, सदन की कार्यवाही के प्रकाशन पर संरक्षण आदि। | सत्र के दौरान तथा सत्र से 40 दिन पूर्व व 40 दिन बाद तक दीवानी मामलों में गिरफ्तारी से छूट (फौजदारी मामलों में छूट नहीं)। |
| अनुच्छेद 208 | प्रक्रिया के नियम (Rules of Procedure): विधानसभा अपनी प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने हेतु नियम बनाती है। | राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम इसी अनुच्छेद के तहत निर्मित हैं। |
| अनुच्छेद 212 | न्यायालयों द्वारा विधानमंडल की कार्यवाहियों की जाँच न किया जाना: प्रक्रियात्मक अनियमितता के आधार पर चुनौती नहीं। | सदन की आंतरिक कार्यवाही न्यायालय के क्षेत्राधिकार से सुरक्षित रहती है। |
2. राजस्थान विधानसभा सीटों का क्रमिक विकास (160 से 200 सीटों का सफर)
1952 में जब राजस्थान में प्रथम आम चुनाव संपन्न हुए, तब राजस्थान की स्थिति वर्तमान से भिन्न थी। उस समय अजमेर-मेरवाड़ा एक पृथक 'सी' (Part C) श्रेणी का राज्य था, जिसकी अपनी 30 सदस्यीय विधानसभा थी, जिसे 'धारासभा' (Dharasabha) कहा जाता था तथा जिसके एकमात्र मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे। 1 नवम्बर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा के राजस्थान में विलय के बाद विधानसभा सीटों की संख्या में वृद्धि हुई।
3. सीटों का सामाजिक वर्गीकरण, SC/ST आरक्षण एवं महिला आरक्षण (106वां संशोधन)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 332 के तहत राज्य विधानसभाओं में जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जातियों (SC) तथा अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए स्थान आरक्षित किए गए हैं। राजस्थान में वर्तमान 200 सीटों का आरक्षण ढाँचा इस प्रकार है:
4. राजस्थान विधानसभा भवन : ऐतिहासिक 'टाउन हॉल' से आधुनिक 'ज्योति नगर'
पुराना विधानसभा भवन (सवाई मानसिंह टाउन हॉल)
- प्रथम विधानसभा की पहली बैठक 29 मार्च 1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में आयोजित हुई थी।
- 1952 से लेकर वर्ष 2000 तक (11वीं विधानसभा के प्रारंभिक दौर तक) विधानसभा की सभी कार्यवाहियाँ इसी ऐतिहासिक भवन में संचालित हुईं।
- वर्तमान में इस भवन को संग्रहालय व धरोहर केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
नया विधानसभा भवन (ज्योति नगर, लालकोठी, जयपुर)
- लोकार्पण: 6 नवम्बर 2001 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन द्वारा।
- वास्तुकला: राजस्थानी स्थापत्य कला (जोधपुर व बंशी पहाड़पुर के बलुआ पत्थर, छतरियां, झरोखे, गुंबद)।
- सदन की क्षमता: वर्तमान में 250 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था (भविष्य के परिसीमन को ध्यान में रखते हुए)।
- भवन में 8 तल हैं तथा केंद्रीय गुंबद का व्यास 32 मीटर है।
5. विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारी (Speaker, Deputy Speaker & Pro-tem Speaker)
A प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष / Pro-tem Speaker)
आम चुनाव के पश्चात् नवगठित विधानसभा के सबसे वरिष्ठतम सदस्यों में से किसी एक को राज्यपाल द्वारा अनुच्छेद 180(1) के तहत सामयिक अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर) नियुक्त किया जाता है। राज्यपाल इन्हें शपथ दिलाता है। प्रोटेम स्पीकर का मुख्य कार्य नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ (अनु. 188) दिलाना तथा विधानसभा के नए स्थाई अध्यक्ष का चुनाव संपन्न कराना होता है। स्थाई अध्यक्ष के चयन के साथ ही इनका पद स्वतः समाप्त हो जाता है।
B विधानसभा अध्यक्ष (Speaker - अनुच्छेद 178)
विधानसभा अध्यक्ष सदन की मर्यादा, अनुशासन एवं नियमों का सर्वोच्च संरक्षक होता है। अध्यक्ष के रूप में वह कोई अलग शपथ नहीं लेता, बल्कि एक सामान्य विधायक के रूप में ही शपथ लेता है।
- सदन की बैठकों की अध्यक्षता करना तथा व्यवस्था बनाए रखना।
- कोई विधेयक 'धन विधेयक' (Money Bill - Art. 199) है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय केवल अध्यक्ष करता है।
- गणपूर्ति (कोरम) न होने पर सदन को स्थगित करना।
- निर्णायक मत (Casting Vote - Art. 189(1)): पक्ष व विपक्ष में बराबर मत होने पर निर्णायक मत देना।
- 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून): दल-बदल के आधार पर विधायकों की अयोग्यता पर न्यायाधिकरण (Tribunal) के रूप में निर्णय देना (किहोतो होलोहन वाद 1992 के तहत यह निर्णय न्यायिक समीक्षा योग्य है)।
- विधानसभा की सभी समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति करना।
- विधानसभा भंग होने पर भी अध्यक्ष अपना पद तुरंत नहीं छोड़ता, वह नई विधानसभा की प्रथम बैठक के ठीक पहले तक पद पर बना रहता है।
- त्यागपत्र उपाध्यक्ष को संबोधित स्वहस्ताक्षरित पत्र द्वारा।
- सदन के तत्कालीन समस्त सदस्यों के प्रभावी बहुमत (Effective Majority) से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है (कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना आवश्यक)।
- जब अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब वह सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता, यद्यपि वह सदन में बोल सकता है और प्रथम चरण में मतदान कर सकता है (किन्तु निर्णायक मत नहीं दे सकता - Art. 181)।
C विधानसभा उपाध्यक्ष (Deputy Speaker - अनुच्छेद 178)
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही का संचालन उपाध्यक्ष द्वारा किया जाता है। वह अध्यक्ष का अधीनस्थ नहीं होता बल्कि सदन का स्वतंत्र पदाधिकारी होता है। राजस्थान विधानसभा के प्रथम उपाध्यक्ष श्री लाल सिंह शक्तावत थे।
6. नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition), मुख्य सचेतक एवं विधानसभा सचिवालय
नेता प्रतिपक्ष (LoP)
सदन में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को, जिसकी सदस्य संख्या कम से कम कुल सीटों का 1/10 (अर्थात 20 सदस्य) हो, अध्यक्ष द्वारा नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी जाती है। राजस्थान विधानसभा (नेता प्रतिपक्ष वेतन और भत्ता) अधिनियम, 1977 के तहत इसे कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा, वेतन एवं सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। राजस्थान के प्रथम नेता प्रतिपक्ष कुंवर जसवंत सिंह (बीकानेर) थे। 16वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली हैं।
सरकारी मुख्य सचेतक (Chief Whip)
सचेतक का पद संविधान में लिखित नहीं है बल्कि यह एक संसदीय परिपाटी (Parliamentary Convention) पर आधारित पद है। यह सदन में अपनी पार्टी के विधायकों में अनुशासन बनाए रखने, मतदान के समय पार्टी लाइन (व्हिप) का पालन सुनिश्चित करने का दायित्व निभाता है। राजस्थान में सरकारी मुख्य सचेतक को भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
विधानसभा सचिवालय (Art. 187)
अनुच्छेद 187 के तहत राज्य विधानसभा का एक स्वतंत्र और पृथक सचिवालय होता है, जो कार्यपालिका के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त होता है। इसका प्रशासनिक प्रमुख विधानसभा के प्रमुख सचिव / सचिव (Secretary) होते हैं, जो अध्यक्ष के सीधे पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं।
7. विधानसभा की कार्यप्रणाली, दैनिक संसदीय कार्य एवं विधायी प्रक्रिया
राजस्थान विधानसभा के कार्य संचालन का विनियमन राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों (Rules of Procedure and Conduct of Business) के तहत होता है। सदन की सामान्य बैठक प्रातः 11:00 बजे से प्रारंभ होती है।
- तारांकित प्रश्न (Starred): मौखिक उत्तर दिया जाता है तथा पूरक प्रश्न (Supplementary Questions) पूछे जा सकते हैं।
- अतारांकित प्रश्न (Unstarred): लिखित उत्तर दिया जाता है, कोई पूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।
- अल्प सूचना प्रश्न (Short Notice): 10 दिन से कम की सूचना पर लोक महत्व के अविलंबनीय विषय पर पूछा जाता है।
8. राजस्थान विधानसभा के प्रमुख संसदीय प्रस्ताव (Parliamentary Motions)
- नीतिगत कटौती (Policy Cut): मांग की राशि घटाकर ₹1 कर दी जाए (नीति से असहमति)।
- मितव्ययिता कटौती (Economy Cut): मांग की राशि में एक निश्चित रकम की कटौती की जाए।
- सांकेतिक कटौती (Token Cut): मांग की राशि में ₹100 की सांकेतिक कमी की जाए (विशिष्ट शिकायत व्यक्त करने हेतु)।
9. राजस्थान की 1ली से 16वीं विधानसभा का ऐतिहासिक कालक्रम (1952 से वर्तमान)
राजस्थान विधानसभा के 1952 से लेकर वर्तमान तक के सभी कार्यकालों, अध्यक्षों, तत्कालीन मुख्यमंत्रियों एवं परीक्षा-उपयोगी ऐतिहासिक घटनाओं की सम्पूर्ण प्रामाणिक सारणी:
| विधानसभा | अवधि (कार्यकाल) | सीटें | विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) | तत्कालीन मुख्यमंत्री (CM) | विशिष्ट ऐतिहासिक एवं परीक्षा तथ्य |
|---|---|---|---|---|---|
| 1ली विधानसभा | 29-03-1952 से 31-03-1957 | 160 | पं. नरोत्तम लाल जोशी | टीकाराम पालीवाल / जय नारायण व्यास / मोहनलाल सुखाड़िया | प्रथम आम चुनाव। 3 मुख्यमंत्री बदले। 17 उपचुनाव हुए। प्रथम नेता प्रतिपक्ष कुंवर जसवंत सिंह रहे। प्रथम महिला विधायक यशोदा देवी (1953 उपचुनाव) बनीं। |
| 2री विधानसभा | 02-04-1957 से 01-03-1962 | 176 | रामनिवास मिर्धा | मोहनलाल सुखाड़िया | अजमेर विलय उपरांत सीटें 176 हुईं। रामनिवास मिर्धा सबसे युवा अध्यक्ष (33 वर्ष) बने। |
| 3री विधानसभा | 03-03-1962 से 28-02-1967 | 176 | रामनिवास मिर्धा | मोहनलाल सुखाड़िया | मिर्धा जी लगातार दो कार्यकालों तक अध्यक्ष रहने वाले प्रथम व्यक्ति बने। |
| 4थी विधानसभा | 03-05-1967 से 15-03-1972 | 184 | निरंजन नाथ आचार्य | मोहनलाल सुखाड़िया / बरकतुल्लाह खान | सीटें 184 हुईं। चुनाव बाद प्रथम बार राष्ट्रपति शासन (1967) लगा। राजस्थान के एकमात्र अल्पसंख्यक CM बरकतुल्लाह खान बने। |
| 5वीं विधानसभा | 15-03-1972 से 30-04-1977 | 184 | रामकिशोर व्यास | बरकतुल्लाह खान / हरिदेव जोशी | राष्ट्रीय आपातकाल के कारण सर्वाधिक लंबा कार्यकाल (5 वर्ष 1 माह 15 दिन)। अंत में द्वितीय राष्ट्रपति शासन (1977)। |
| 6ठी विधानसभा | 22-06-1977 से 17-02-1980 | 200 | लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर) / गोपाल सिंह | भैरोंसिंह शेखावत | प्रथम बार 200 सीटें। प्रथम गैर-कांग्रेसी जनता पार्टी सरकार। मध्यकाल में भंग (समय से पूर्व विघटित) व तृतीय राष्ट्रपति शासन (1980)। |
| 7वीं विधानसभा | 06-06-1980 से 09-03-1985 | 200 | पूनमचंद विश्नोई | जगन्नाथ पहाड़िया / शिवचरण माथुर / हीरालाल देवपुरा | पहाड़िया जी प्रथम दलित CM बने। हीरालाल देवपुरा सबसे कम अवधि (मात्र 16 दिन) के मुख्यमंत्री रहे। |
| 8वीं विधानसभा | 09-03-1985 से 01-03-1990 | 200 | हीरालाल देवपुरा / गिरिराज प्रसाद तिवारी | हरिदेव जोशी / शिवचरण माथुर / हरिदेव जोशी | देवपुरा जी अध्यक्ष बनने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रहे। |
| 9वीं विधानसभा | 02-03-1990 से 15-12-1992 | 200 | हरिशंकर भाभड़ा | भैरोंसिंह शेखावत | भाजपा-जनता दल गठबंधन सरकार। बाबरी विध्वंस बाद बर्खास्त होकर चतुर्थ राष्ट्रपति शासन (1992) लगा। |
| 10वीं विधानसभा | 04-12-1993 से 30-11-1998 | 200 | हरिशंकर भाभड़ा / शांतिलाल चपलोत / समरथलाल मीणा | भैरोंसिंह शेखावत | भाभड़ा जी राजस्थान के प्रथम उप-मुख्यमंत्री बने। |
| 11वीं विधानसभा | 01-12-1998 से 04-12-2003 | 200 | परसराम मदेरणा | अशोक गहलोत | कांग्रेस को 153 सीटों का प्रचंड बहुमत। अशोक गहलोत पहली बार CM बने। 2001 में नए विधानसभा भवन (ज्योति नगर) में स्थानांतरण। |
| 12वीं विधानसभा | 05-12-2003 से 10-12-2008 | 200 | श्रीमती सुमित्रा सिंह | श्रीमती वसुंधरा राजे | राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री (वसुंधरा राजे) तथा प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष (सुमित्रा सिंह) एक साथ बनीं। तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल थीं (तीनों शीर्ष पदों पर महिलाएँ)। |
| 13वीं विधानसभा | 11-12-2008 से 12-12-2013 | 200 | दीपेंद्र सिंह शेखावत | अशोक गहलोत | त्रिशंकु जनादेश; बसपा विधायकों के विलय से सरकार बनी। |
| 14वीं विधानसभा | 13-12-2013 से 11-12-2018 | 200 | कैलाश चंद्र मेघवाल | श्रीमती वसुंधरा राजे | भाजपा का ऐतिहासिक रिकॉर्ड (163 सीटें)। मेघवाल जी प्रथम दलित विधानसभा अध्यक्ष बने। |
| 15वीं विधानसभा | 12-12-2018 से 03-12-2023 | 200 | डॉ. सी.पी. जोशी | अशोक गहलोत | नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया (बाद में असम के राज्यपाल बने, तब राजेंद्र राठौड़ बने)। बाल सत्र (Children's Session) का आयोजन। |
| 16वीं विधानसभा (वर्तमान) | 03-12-2023 से वर्तमान | 200 | वासुदेव देवनानी | भजन लाल शर्मा | वर्तमान सक्रिय विधानसभा। प्रोटेम स्पीकर: कालीचरण सराफ। नेता प्रतिपक्ष: टीकाराम जूली। कुल 20 महिला विधायक निर्वाचित। |
10. 16वीं राजस्थान विधानसभा (2023-2028) : सम्पूर्ण परीक्षा-उपयोगी अद्यतन
16वीं राजस्थान विधानसभा के चुनाव 25 नवम्बर 2023 को 199 सीटों पर संपन्न हुए (श्रीकरणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के कारण चुनाव स्थगित हुआ था, जहाँ जनवरी 2024 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रुपिंदर सिंह कुन्नर विजयी रहे)। चुनाव परिणाम 3 दिसंबर 2023 को घोषित हुए।
📊 दलगत स्थिति (Party-wise Strength)
- भारतीय जनता पार्टी (BJP): 115 सीटें
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 69 सीटें
- भारत आदिवासी पार्टी (BAP): 03 सीटें
- बहुजन समाज पार्टी (BSP): 02 सीटें
- राष्ट्रीय लोकदल (RLD): 01 सीट
- राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP): 01 सीट
- निर्दलीय (Independents): 08 सीटें
🏛️ 16वीं विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारी
- विधानसभा अध्यक्ष: श्री वासुदेव देवनानी (अजमेर उत्तर)
- प्रोटेम स्पीकर: श्री कालीचरण सराफ (मालवीय नगर, जयपुर)
- सदन के नेता (मुख्यमंत्री): श्री भजन लाल शर्मा (सांगानेर)
- उप-मुख्यमंत्री: श्रीमती दीया कुमारी एवं श्री प्रेमचंद बैरवा
- नेता प्रतिपक्ष (LoP): श्री टीकाराम जूली (अलवर ग्रामीण)
- कुल निर्वाचित महिला विधायक: 20 महिलाएँ (BJP: 9, INC: 9, निर्दलीय: 2)
- सबसे युवा विधायक: रवींद्र सिंह भाटी (शिव - 26 वर्ष) एवं अंशुमान सिंह भाटी (कोलायत)
- सबसे वरिष्ठ विधायक: दीपचंद खैरिया (किशनगढ़ बास - 83 वर्ष) व हरिसिंह रावत
11. राजस्थान विधानसभा अध्यक्षों (Speakers) की प्रामाणिक सूची
| क्र.सं. | अध्यक्ष का नाम | कार्यकाल | संबद्ध विधानसभा |
|---|---|---|---|
| 1 | पंडित नरोत्तम लाल जोशी | 31-03-1952 से 25-04-1957 | प्रथम (झुंझुनू) |
| 2 | रामनिवास मिर्धा | 25-04-1957 से 01-03-1962 | द्वितीय (लाडनूं) |
| (2) | रामनिवास मिर्धा (द्वितीय बार) | 03-03-1962 से 03-05-1967 | तृतीय (लाडनूं) |
| 3 | निरंजन नाथ आचार्य | 03-05-1967 से 20-03-1972 | चौथी (राजसमंद) |
| 4 | रामकिशोर व्यास | 20-03-1972 से 18-07-1977 | पाँचवीं (हवामहल) |
| 5 | महारावल लक्ष्मण सिंह | 18-07-1977 से 20-06-1979 | छठी (डूंगरपुर) |
| 6 | गोपाल सिंह | 25-09-1979 से 07-07-1980 | छठी |
| 7 | पूनमचंद विश्नोई | 07-07-1980 से 20-03-1985 | सातवीं (ओसियां) |
| 8 | हीरालाल देवपुरा | 20-03-1985 से 16-10-1985 | आठवीं (कुंभलगढ़) |
| 9 | गिरिराज प्रसाद तिवारी | 31-01-1986 से 11-03-1990 | आठवीं (बयाना) |
| 10 | हरिशंकर भाभड़ा | 16-03-1990 से 05-10-1994 | नौवीं व दसवीं (रतनगढ़) |
| 11 | शांतिलाल चपलोत | 07-04-1995 से 18-03-1998 | दसवीं (मावली) |
| 12 | समरथलाल मीणा | 24-07-1998 से 04-01-1999 | दसवीं (राजगढ़) |
| 13 | परसराम मदेरणा | 06-01-1999 से 15-01-2004 | ग्यारहवीं (भोपालगढ़) |
| 14 | श्रीमती सुमित्रा सिंह (प्रथम महिला अध्यक्ष) | 16-01-2004 से 01-01-2009 | बारहवीं (झुंझुनू) |
| 15 | दीपेंद्र सिंह शेखावत | 02-01-2009 से 21-01-2014 | तेरहवीं (श्रीमाधोपुर) |
| 16 | कैलाश चंद्र मेघवाल | 22-01-2014 से 15-01-2019 | चौदहवीं (शाहपुरा) |
| 17 | डॉ. सी.पी. जोशी | 16-01-2019 से 20-12-2023 | पंद्रहवीं (नाथद्वारा) |
| 18 | वासुदेव देवनानी (वर्तमान अध्यक्ष) | 21-12-2023 से वर्तमान | सोलहवीं (अजमेर उत्तर) |
12. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य एवं विगत RPSC प्रश्नोत्तरी
⚡ महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य
- सर्वाधिक दीर्घकाल तक अध्यक्ष: रामनिवास मिर्धा (लगभग 10 वर्ष, 1957 से 1967)।
- प्रथम महिला विधायक: श्रीमती यशोदा देवी (बांसवाड़ा उपचुनाव 1953, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी)।
- प्रथम महिला मंत्री: कमला बेनीवाल (1954)।
- प्रथम महिला अध्यक्ष: श्रीमती सुमित्रा सिंह (12वीं विधानसभा)।
- प्रथम महिला उपाध्यक्ष: तारा भंडारी (1998)।
- विधानसभा अध्यक्ष व CM दोनों रहे: हीरालाल देवपुरा।
⚡ अनूठे राजनीतिक रिकॉर्ड
- लगातार 10 बार विधायक रहने वाले: हरिदेव जोशी (1952 से 1995 तक अजेय रहे)।
- सर्वाधिक बार विधायक: भैरोंसिंह शेखावत एवं परसराम मदेरणा।
- प्रथम विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल: राम राज्य परिषद् (24 सीटें)।
- विधानसभा की कुल बैठकें: वर्ष में कम से कम 60 दिन बैठकें आयोजित करने की संस्तुति है।
- सदन में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम': बैठक के प्रारंभ में तथा राष्ट्रगान 'जन गण मन' बैठक के सत्रावसान पर बजाया जाता है।
विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रामाणिक प्रश्न
प्र. 1: राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के अनुसार विधानसभा में वित्तीय वर्ष में किस दिन बजट प्रस्तुत किया जाता है? [RAS Pre 2021]
उत्तर: राज्यपाल जिस दिन नियत करे (राज्यपाल द्वारा निर्धारित तिथि पर वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है)।
प्र. 2: राजस्थान की प्रथम महिला विधायक कौन थीं और वे किस राजनीतिक दल से निर्वाचित हुई थीं? [College Lecturer 2016 / Patwar 2021]
उत्तर: श्रीमती यशोदा देवी; वे बांसवाड़ा सीट पर 1953 के उपचुनाव में 'प्रजा सोशलिस्ट पार्टी' (PSP) के टिकट पर चुनी गई थीं।
प्र. 3: 16वीं राजस्थान विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर के रूप में किसे नियुक्त किया गया था? [Current / RSSB 2024]
उत्तर: श्री कालीचरण सराफ (वरिष्ठ भाजपा विधायक, मालवीय नगर)।
RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर
विधायिकाप्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की अर्ध-न्यायिक शक्तियों (Quasi-Judicial Powers) का मूल्यांकन कीजिए।
प्रश्न 2 (20 शब्द | 2 अंक): राजस्थान विधानसभा में 'प्रोटेम स्पीकर' (Pro-tem Speaker) के दो मुख्य संवैधानिक कार्य क्या हैं?
राजस्थान विधानसभा (संरचना व कार्यप्रणाली) सम्पूर्ण नोट्स PDF
अनुच्छेद 168-212, 200 सीटों का परिसीमन, 16वीं विधानसभा (2023-28) के सभी 200 विधायकों की सूची, अध्यक्ष, प्रोटेम स्पीकर व विगत 15 वर्षों के हल प्रश्न पत्र एक ही ई-बुक में।
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राजस्थान राजव्यवस्था
- राजस्थान के राज्यपाल अनु. 153
- राजस्थान के मुख्यमंत्री अनु. 164
- राजस्थान मंत्रिपरिषद अनु. 163
- राजस्थान का महाधिवक्ता अनु. 165
- राजस्थान विधानसभा सक्रिय
- विधानसभा की समितियाँ समितियाँ
- राजस्थान उच्च न्यायालय न्यायपालिका
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
राजस्थान विधानसभा की संरचना, सीटों एवं कार्यप्रणाली से संबंधित परीक्षोपयोगी प्रश्न एवं प्रामाणिक उत्तर।
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