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राज्य की शीर्ष न्यायपालिका : संविधान भाग-6 (अनुच्छेद 214 से 231)

राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) :
स्थापना, जोधपुर मुख्य पीठ, जयपुर बेंच, शक्तियाँ व मुख्य न्यायाधीश सूची

राजस्थान की न्यायपालिका का सर्वोच्च प्रामाणिक एवं विस्तृत अध्ययन — 29 अगस्त 1949 को स्थापना, राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय द्वारा उद्घाटन, बी.आर. पटेल समिति व पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिशें, जोधपुर मुख्य पीठ एवं 31 जनवरी 1977 को जयपुर खंडपीठ का पुनर्गठन, कुल 50 स्वीकृत न्यायाधीश (38 स्थायी + 12 अतिरिक्त), अनुच्छेद 214 से 231 की सूक्ष्म व्याख्या, रिट अधिकारिता (अनुच्छेद 226), अभिलेख न्यायालय (अनुच्छेद 215), प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा से लेकर वर्तमान तक सम्पूर्ण सूची एवं RPSC/RAS परीक्षाओं हेतु प्रामाणिक नोट्स।

स्थापना दिवस 29 अगस्त 1949
मुख्य पीठ व खंडपीठ जोधपुर / जयपुर (1977)
कुल स्वीकृत न्यायाधीश 50 (38 स्थायी + 12 अपर)
प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा
भारतीय संविधान, विधि आयोग रिपोर्ट एवं राजस्थान न्यायिक सेवा संदर्भ

राजस्थान उच्च न्यायालय : सम्पूर्ण संवैधानिक, न्यायिक एवं ऐतिहासिक अध्ययन

अनुच्छेद 214 से 231 की प्रामाणिक व्याख्या, 29 अगस्त 1949 स्थापना, जोधपुर मुख्य पीठ एवं जयपुर बेंच का गठन, 50 न्यायाधीशों का संवर्ग, रिट अधिकारिता (Art. 226), मुख्य न्यायाधीशों की सम्पूर्ण सूची व विगत 15 वर्षों के RPSC/RAS प्रश्न।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं स्थापना (29 अगस्त 1949)

स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान की विभिन्न रियासतों (जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा आदि) में अपनी-अपनी स्वतंत्र न्याय प्रणालियाँ एवं उच्च न्यायालय कार्यरत थे। राजस्थान के एकीकरण के पश्चात् सम्पूर्ण राज्य के लिए एक एकीकृत उच्च न्यायालय की स्थापना हेतु राज्य प्रमुख द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश, 1949 (Rajasthan High Court Ordinance, 1949) प्रख्यापित किया गया।

1
उद्घाटन (29 अगस्त 1949): राजस्थान उच्च न्यायालय का विधिवत उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जयपुर में तत्कालीन राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय द्वारा किया गया था।
2
प्रथम मुख्य न्यायाधीश एवं शपथ: उद्घाटन के दिन न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा (K.K. Verma) ने राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। उनके साथ 11 अन्य न्यायाधीशों ने पद की शपथ ग्रहण की थी।
3
आरंभिक अस्थायी पीठें: प्रारंभ में राजस्थान उच्च न्यायालय की 5 पीठें कार्य कर रही थीं—जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, उदयपुर और कोटा। 1950 में बीकानेर, कोटा और उदयपुर की अस्थायी पीठों को समाप्त कर दिया गया।

2. प्रमुख समितियाँ : जोधपुर मुख्य पीठ व जयपुर खंडपीठ (1977) का इतिहास

1. बी.आर. पटेल समिति (B.R. Patel Committee)

वृहत् राजस्थान के निर्माण के समय विभिन्न शहरों में प्रशासनिक कार्यालयों के बंटवारे हेतु पटेल समिति गठित हुई थी। इस समिति की सिफारिश पर राजधानी जयपुर को तथा उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जोधपुर को आवंटित की गई।

2. पी. सत्यनारायण राव समिति (1958)

1 नवम्बर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा विलय के बाद गठित राव समिति ने सिफारिश की कि उच्च न्यायालय केवल जोधपुर में ही केंद्रित होना चाहिए। इस सिफारिश के आधार पर 1958 में जयपुर पीठ को समाप्त कर दिया गया

जयपुर खंडपीठ (Jaipur Bench) की पुनर्स्थापना (31 जनवरी 1977)

पूर्वी राजस्थान के वादकारियों की सुविधा हेतु लंबे आंदोलन के बाद 8 दिसम्बर 1976 को राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश/आदेश जारी कर जयपुर में स्थाई खंडपीठ की स्थापना की गई। इस खंडपीठ ने 31 जनवरी 1977 से विधिवत कार्य करना प्रारंभ किया।

राजस्थान उच्च न्यायालय : प्रशासनिक क्षेत्राधिकार विभाजन
राजस्थान उच्च न्यायालय (50 पद) मुख्य पीठ : जोधपुर (Principal Seat) पश्चिमी व दक्षिणी जिले (मारवाड़, मेवाड़, बीकानेर) खंडपीठ : जयपुर (Bench - 1977) पूर्वी व मध्यवर्ती जिले (ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती, शेखावाटी)

3. संवैधानिक प्रावधान : अनुच्छेद 214 से 231 की संपूर्ण धारावाहिक व्याख्या

भारतीय संविधान के भाग-6 के अध्याय-5 में अनुच्छेद 214 से 231 तक राज्यों के उच्च न्यायालयों के संगठन, क्षेत्राधिकार, शक्तियों एवं स्वतंत्रता से संबंधित उपबंध दिए गए हैं:

अनुच्छेद संवैधानिक विषय (Constitutional Subject) RPSC / RAS परीक्षा उपयोगी व्याख्या
अनुच्छेद 214 राज्यों के लिए उच्च न्यायालय: प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा। 7वें संशोधन 1956 द्वारा संसद को दो या अधिक राज्यों हेतु साझा हाईकोर्ट बनाने की शक्ति भी दी गई (Art 231)।
अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना (Court of Record): इसके सभी निर्णयों का साक्ष्यीय मूल्य होता है तथा इसे अपनी अवमानना (Contempt of Court) हेतु दंड देने की शक्ति प्राप्त है।
अनुच्छेद 216 उच्च न्यायालय का गठन: प्रत्येक उच्च न्यायालय एक मुख्य न्यायाधीश और ऐसे अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करे। उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या निश्चित करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति के पास है (संसद के पास नहीं)। राजस्थान में कुल स्वीकृत पद 50 हैं।
अनुच्छेद 217 न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं पद की शर्तें: राष्ट्रपति द्वारा CJI, संबंधित राज्य के राज्यपाल व HC के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से नियुक्ति। सेवानिवृत्ति आयु: 62 वर्ष (15वें संविधान संशोधन 1963 द्वारा 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष की गई)। त्यागपत्र राष्ट्रपति को संबोधित होता है।
अनुच्छेद 219 न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान: संविधान की तीसरी अनुसूची के प्रारूप अनुसार। शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल (Governor) अथवा उसके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है।
अनुच्छेद 220 स्थायी न्यायाधीश रहने के पश्चात विधि-व्यवसाय पर प्रतिबंध: उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय तथा अन्य उच्च न्यायालयों (जहाँ वह स्थायी जज न रहा हो) के अतिरिक्त किसी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकता।
अनुच्छेद 221 न्यायाधीशों के वेतन और भत्ते: संसद द्वारा विधि बनाकर निर्धारित। वेतन व भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं, जबकि सेवानिवृत्ति पेंशन भारत की संचित निधि पर भारित होती है।
अनुच्छेद 222 न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे में स्थानांतरण: राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श उपरांत स्थानांतरण किया जाता है।
अनुच्छेद 223 कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति: जब मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो या वह अनुपस्थित हो। राष्ट्रपति द्वारा उच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों में से किसी एक को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है।
अनुच्छेद 226 कुछ रिट निकालने की उच्च न्यायालय की शक्ति (Writ Jurisdiction): बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार पृच्छा। उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'अन्य विधिक अधिकारों' के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है।
अनुच्छेद 227 सभी न्यायालयों के अधीक्षण की उच्च न्यायालय की शक्ति (Superintendence): राज्य के समस्त अधीनस्थ न्यायालयों एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा अधिकरणों पर प्रशासनिक एवं न्यायिक दोनों प्रकार का अधीक्षण।
अनुच्छेद 231 दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना: संसद द्वारा विधि बनाकर। 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा समाविष्ट। (उदा. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय)।

4. न्यायाधीशों की योग्यताएँ, कॉलेजियम प्रणाली, वेतन व पदमुक्ति प्रक्रिया

अर्हताएँ (Qualifications - Art. 217(2))

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • भारत के राज्यक्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद (Judicial Office) धारण कर चुका हो, अथवा
  • किसी उच्च न्यायालय में लगातार कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता (Advocate) रहा हो।
  • ध्यान रहे: सर्वोच्च न्यायालय के समान 'राष्ट्रपति की राय में पारंगत विधिवेत्ता' की योग्यता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हेतु संविधान में उल्लिखित नहीं है!

वर्तमान वेतन संरचना (मासिक)

  • मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice): ₹2,50,000 प्रति माह।
  • अन्य न्यायाधीश (Other Judges): ₹2,25,000 प्रति माह।
  • वेतन, भत्ते एवं आवास राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं। वित्तीय आपातकाल (Art 360) के अतिरिक्त कार्यकाल में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं हो सकता।

पदमुक्ति / हटाने की प्रक्रिया (Removal Procedure - Art. 217(1)(b) & 124(4))

उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से केवल सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour) अथवा असमर्थता (Incapacity) के आधार पर ही हटाया जा सकता है। हटाने की प्रक्रिया वही है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए विहित है—न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 के तहत संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 बहुमत) से पारित समावेदन पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही पदमुक्त किया जा सकता है।

5. उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार एवं शक्तियाँ (Jurisdiction & Powers)

राजस्थान उच्च न्यायालय राज्य का शीर्ष अपीलीय एवं संवैधानिक न्यायालय है। इसके क्षेत्राधिकार को निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:

1. प्रारंभिक / मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): विवाह, वसीयत, कंपनी विधि, न्यायालय की अवमानना तथा संसद व राज्य विधानमंडल सदस्यों के चुनाव विवाद संबंधी मामलों की सीधी सुनवाई।

न्यायालय में राज्य सरकार का पक्ष रखने हेतु राज्य के सर्वोच्च विधि अधिकारी राजस्थान के महाधिवक्ता (Advocate General) उपस्थित होते हैं।

2. रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction - Art. 226): मौलिक अधिकारों तथा किसी भी अन्य कानूनी अधिकार के प्रवर्तन हेतु 5 प्रकार की रिट्स जारी करने की असाधारण शक्ति:
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): अवैध रूप से बंदी बनाए गए व्यक्ति को सशरीर प्रस्तुत करने का आदेश।
  • परमादेश (Mandamus): सार्वजनिक अधिकारी को उसके विधिक कर्तव्य पालन का आदेश।
  • प्रतिषेध (Prohibition): अधीनस्थ न्यायालय को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाने से रोकना।
  • उत्प्रेषण (Certiorari): अधीनस्थ न्यायालय से किसी लंबित मामले को उच्च न्यायालय में मंगाना अथवा त्रुटिपूर्ण आदेश को रद्द करना।
  • अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto): किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक पद के अनाधिकृत उपयोग की वैधता की जांच करना।
3. अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction): जिला एवं सत्र न्यायालयों तथा अधीनस्थ अधिकरणों के दीवानी (Civil) एवं दांडिक (Criminal) निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार। मृत्युदंड (Capital Punishment) की पुष्टि अनिवार्य रूप से उच्च न्यायालय द्वारा की जानी आवश्यक है।

6. अभिलेख न्यायालय (Art. 215) एवं अधीक्षण की शक्ति (Art. 227)

अभिलेख न्यायालय (Court of Record - Art. 215)

  • उच्च न्यायालय के सभी निर्णय, कार्यवाहियाँ एवं आदेश स्थायी स्मृति व साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।
  • अधीनस्थ न्यायालयों में इन्हें पूर्व-उदाहरण (Precedents) के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और इनकी प्रामाणिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
  • इसे अपनी अवमानना (Contempt) हेतु दंडित करने की अंतर्निहित शक्ति प्राप्त है।

अधीक्षण की शक्ति (Superintendence - Art. 227)

  • राज्य क्षेत्र के सभी अधीनस्थ न्यायालयों, अधिकरणों (Tribunals) पर प्रशासनिक व न्यायिक पर्यवेक्षण।
  • अधीनस्थ अदालतों से विवरण मंगाना, उनकी कार्यप्रणाली के नियम बनाना तथा प्रपत्र विहित करना।
  • अपवाद: सशस्त्र बलों (Armed Forces) से संबंधित सैन्य न्यायालयों (Court Martial) पर यह अधीक्षण शक्ति लागू नहीं होती।

7. राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों की ऐतिहासिक सूची (1949 से वर्तमान)

प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा से लेकर वर्तमान मुख्य न्यायाधीश तक के प्रमुख कार्यकाल व ऐतिहासिक तथ्य:

क्र.सं. मुख्य न्यायाधीश का नाम कार्यकाल (अवधि) विशिष्ट ऐतिहासिक एवं परीक्षा तथ्य
1 न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा (K.K. Verma) 29-08-1949 से 24-01-1950 राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश थे।
2 न्यायमूर्ति कैलाश नाथ वांचू (K.N. Wanchoo) 02-01-1951 से 10-08-1958 राजस्थान में सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल (लगभग 7 वर्ष 7 माह) वाले मुख्य न्यायाधीश। बाद में भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बने। ICS अधिकारी रहे थे।
3 न्यायमूर्ति सरजू प्रसाद 13-08-1959 से 10-10-1961 असम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश।
4 न्यायमूर्ति जे.एस. राणावत (जवान सिंह राणावत) 11-10-1961 से 31-05-1963 उदयपुर निवासी; राजस्थान के मूल निवासी प्रथम मुख्य न्यायाधीश।
5 न्यायमूर्ति डी.एस. दवे (दुर्गाशंकर दवे) 01-06-1963 से 17-12-1968 दीर्घ कार्यकाल तक मुख्य न्यायाधीश रहे।
6 न्यायमूर्ति दौलतमल भंडारी 18-12-1968 से 15-12-1969 जयपुर निवासी, लोकसभा सांसद भी रहे थे।
7 न्यायमूर्ति जगत नारायण 16-12-1969 से 13-02-1973 1970 में राजस्थान के प्रथम कार्यवाहक राज्यपाल बने।
- न्यायमूर्ति वेदपाल त्यागी 1975 से 1977 1977 में द्वितीय राष्ट्रपति शासन के समय कार्यवाहक राज्यपाल रहे।
- न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा (जगदीश शरण वर्मा) 1986 से 1989 कार्यवाहक राज्यपाल रहे; बाद में भारत के 27वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बने।
- न्यायमूर्ति मिलाप चंद जैन 1990 जोधपुर निवासी; राजस्थान के लोकायुक्त व कार्यवाहक राज्यपाल रहे।
- न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा (आर.सी. लोढ़ा) राजस्थान HC में न्यायाधीश जोधपुर निवासी; बाद में भारत के 41वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बने (लोढ़ा समिति के अध्यक्ष)।
- न्यायमूर्ति पंकज मित्तल 14-10-2022 से 05-02-2023 सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत।
- न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह 30-05-2023 से 08-11-2023 41वें मुख्य न्यायाधीश; सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत।
42वें (वर्तमान) न्यायमूर्ति मणीन्द्र मोहन श्रीवास्तव (M.M. Shrivastava) 06-02-2024 से वर्तमान राजस्थान उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश। पूर्व में राजस्थान हाईकोर्ट में ही वरिष्ठतम न्यायाधीश एवं तीन बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे।

8. राजस्थान उच्च न्यायालय में महिला न्यायाधीश (Women in Judiciary)

प्रथम महिला न्यायाधीश : न्यायमूर्ति कांता भटनागर

न्यायमूर्ति कांता भटनागर राजस्थान उच्च न्यायालय की प्रथम महिला न्यायाधीश (1978) बनीं। बाद में वे मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनने वाली प्रथम महिला तथा राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) की प्रथम अध्यक्ष बनीं।

अन्य प्रमुख महिला न्यायाधीश

न्यायमूर्ति मोहिनी कपूर, न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा (जो बाद में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनीं), न्यायमूर्ति मीना वी. गोमाber तथा हाल ही में नियुक्त महिला न्यायाधीशों ने राज्य न्यायपालिका में अपनी गरिमामयी भूमिका निभाई है।

9. राजस्थान उच्च न्यायालय का नया भवन (झालामंड, जोधपुर)

उद्घाटन: जोधपुर के झालामंड में निर्मित राजस्थान उच्च न्यायालय के भव्य नए भवन का उद्घाटन 7 दिसम्बर 2019 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद तथा तत्कालीन CJI शरद अरविंद बोबडे द्वारा किया गया।
वास्तुकला: इस भवन का विशाल गुंबद 35 मीटर ऊंचा है तथा इसमें 22 कोर्ट रूम (Court Rooms) हैं। यह पर्यावरण-अनुकूल और अत्याधुनिक डिजिटल ई-कोर्ट सुविधाओं से सुसज्जित है।

राजस्थान उच्च न्यायालय में डिजिटल नवाचार एवं ई-न्यायालय पहल

1. पेपरलेस कोर्ट एवं ई-फाइलिंग 3.0: राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्य पीठ तथा जयपुर खंडपीठ में सभी अपीलों व याचिकाओं हेतु 24x7 ऑनलाइन ई-फाइलिंग अनिवार्य की गई है।
2. वर्चुअल कोर्ट (Virtual Traffic Courts): ट्रैफिक चालानों के त्वरित निस्तारण हेतु जयपुर में राज्य की प्रथम स्वचालित वर्चुअल अदालत शुरू की गई।
3. अदालती कार्यवाहियों का सीधा प्रसारण (Live Streaming): पारदर्शिता बढ़ाने हेतु उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ एवं प्रमुख खंडपीठों की सुनवाई का यूट्यूब पर आधिकारिक लाइव प्रसारण शुरू किया गया।

10. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ स्थापना व पीठ तथ्य

  • स्थापना तिथि: 29 अगस्त 1949 (जयपुर में उद्घाटन)।
  • जोधपुर मुख्य पीठ: बी.आर. पटेल समिति की सिफारिश पर।
  • जयपुर पीठ समाप्ति: 1958 (पी. सत्यनारायण राव समिति)।
  • जयपुर पीठ पुनर्स्थापना: 31 जनवरी 1977।
  • कुल स्वीकृत न्यायाधीश: 50 (38 स्थायी + 12 अतिरिक्त)।

⚡ मुख्य न्यायाधीश तथ्य

  • प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा (1949)।
  • सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल: न्यायमूर्ति के.एन. वांचू (1951-58)।
  • प्रथम महिला जज: न्यायमूर्ति कांता भटनागर (1978)।
  • सेवानिवृत्ति आयु: 62 वर्ष (15वां संशोधन 1963)।
  • शपथ: राज्यपाल द्वारा (अनुच्छेद 219)।

11. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: 29 अगस्त 1949 को राजस्थान उच्च न्यायालय के उद्घाटन के समय मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त कितने अन्य न्यायाधीशों ने शपथ ली थी? [RAS Pre 2023]

उत्तर: 11 न्यायाधीशों ने। (मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा के साथ 11 अन्य न्यायाधीशों ने शपथ ग्रहण की थी)।

प्रश्न 2: राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ को किस वर्ष पुनः स्थापित किया गया? [2nd Grade 2022]

उत्तर: वर्ष 1977 में। (31 जनवरी 1977 से विधिवत कार्य प्रारंभ हुआ)।

प्रश्न 3: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की पेंशन किस पर भारित होती है? [RAS Pre 2018]

उत्तर: भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर। (जबकि वेतन राज्य की संचित निधि पर भारित होता है)।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

उच्च न्यायपालिका

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): "उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (अनुच्छेद 226) सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (अनुच्छेद 32) से अधिक व्यापक है।" टिप्पणी कीजिए।

उत्तर संकेत: अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट केवल मौलिक अधिकारों (भाग-3) के उल्लंघन पर रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट मौलिक अधिकारों के साथ-साथ 'अन्य किसी कानूनी अधिकार' (Any Other Legal Right) के प्रवर्तन हेतु भी बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश आदि पाँचों रिट्स जारी कर सकता है।

प्रश्न 2 (20 शब्द | 2 अंक): उच्च न्यायालय के 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record - Art. 215) होने का क्या अर्थ है?

उत्तर संकेत: इसके सभी फैसलों का साक्ष्यीय मूल्य होता है तथा किसी अदालत में इनकी प्रामाणिकता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता; साथ ही इसे अपनी अवमानना (Contempt) हेतु दंड देने की शक्ति प्राप्त है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय (High Court) सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स PDF

अनुच्छेद 214-231, जोधपुर पीठ व जयपुर बेंच का क्षेत्राधिकार, रिट अधिकारिता (226), मुख्य न्यायाधीशों की सम्पूर्ण कालक्रम सूची व विगत वर्षों के प्रश्न एक ही ई-बुक में।

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थान उच्च न्यायालय, पीठों, रिट अधिकारिता व न्यायाधीशों से जुड़े परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर।

राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना 29 अगस्त 1949 को 'राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश, 1949' के तहत हुई थी। इसका विधिवत उद्घाटन जयपुर में तत्कालीन राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय द्वारा किया गया था। प्रथम मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति कमलकांत वर्मा ने 11 अन्य न्यायाधीशों के साथ शपथ ली थी।
श्री बी.आर. पटेल समिति (B.R. Patel Committee) की सिफारिश के आधार पर उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ जोधपुर में स्थापित की गई थी। बाद में 1958 में पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर केवल जोधपुर को मुख्य पीठ बनाए रखा गया तथा जयपुर पीठ समाप्त कर दी गई थी।
जयपुर खंडपीठ को 8 दिसम्बर 1976 को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा पुनः सृजित किया गया तथा इसने 31 जनवरी 1977 से विधिवत कार्य करना प्रारंभ किया।
राजस्थान उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल स्वीकृत पद 50 हैं, जिनमें 38 स्थायी न्यायाधीश (Permanent Judges) तथा 12 अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judges) शामिल हैं।
संविधान के 15वें संशोधन (1963) के अनुसार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। संविधान के अनुच्छेद 219 के तहत मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों को शपथ संबंधित राज्य के राज्यपाल (अथवा उनके द्वारा नामित व्यक्ति) द्वारा दिलाई जाती है।
राजस्थान उच्च न्यायालय में सर्वाधिक लंबे समय तक मुख्य न्यायाधीश रहने का कीर्तिमान न्यायमूर्ति कैलाश नाथ वांचू (K.N. Wanchoo) के नाम है, जो 1951 से 1958 (लगभग 7 वर्ष 7 माह) तक मुख्य न्यायाधीश रहे। बाद में वे भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी बने।

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