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रंगीलो राजस्थान: सात वार नौ त्यौहार

राजस्थान के उत्सव, त्यौहार एवं मेले :
सम्पूर्ण कैलेंडर, तिथियाँ व परीक्षा नोट्स

"तीज त्यौहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर" — राजस्थान के 12 महीनों के सभी प्रमुख त्यौहार (छोटी तीज, कजली तीज, गणगौर, आखा तीज), विश्वप्रसिद्ध लोक मेले (पुष्कर, बेणेश्वर, रामदेवरा, कैला देवी), 10 राज्य स्तरीय पशु मेले तथा पर्यटन उत्सव — RAS, RPSC एवं RSSB परीक्षाओं हेतु मानक अध्ययन संकलन।

100% प्रामाणिक तथ्य RAS/RPSC विशेष पशु मेले & होली के प्रकार
Core Subject हर परीक्षा में 3-4 प्रश्न
🗓️ 12 माह के त्यौहार: श्रावण से आषाढ़ तक शुक्ल/कृष्ण
🎪 प्रमुख लोक मेले: पुष्कर, बेणेश्वर, रामदेवरा स्थान व तिथि
🐂 पशु मेले & होली: लठमार, कोड़ामार, 10 मेले नस्लें
राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी प्रामाणिक अध्ययन

उत्सव, त्यौहार एवं मेले: सम्पूर्ण सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विश्लेषण

माह-वार त्यौहार, कृष्ण व शुक्ल पक्ष की तिथियाँ, प्रसिद्ध लोक मेले, राज्य स्तरीय 10 पशु मेले एवं पर्यटन उत्सवों का प्रामाणिक संकलन।

1. हिन्दू पंचांग एवं त्यौहारों का वार्षिक चक्र

राजस्थान में त्यौहारों का चक्र भारतीय राष्ट्रीय पंचांग एवं विक्रम संवत (चैत्र से फाल्गुन) के अनुसार संचालित होता है। प्रत्येक माह में दो पक्ष होते हैं— (1) कृष्ण पक्ष (बदी) - प्रथम पखवाड़ा जो अमावस्या पर समाप्त होता है, एवं (2) शुक्ल पक्ष (सुदी) - दूसरा पखवाड़ा जो पूर्णिमा पर समाप्त होता है।

💡 प्रसिद्ध लोकोक्ति: "तीज त्यौहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर"
अर्थात त्यौहारों का आगमन श्रावण शुक्ल तृतीया (छोटी तीज) से होता है तथा समापन चैत्र शुक्ल तृतीया (गणगौर) को होता है।
1. चैत्र (मार्च-अप्रैल)
वर्ष का प्रथम माह
2. वैशाख (अप्रैल-मई)
अबूझ सावा (आखातीज)
3. ज्येष्ठ (मई-जून)
निर्जला एकादशी
4. आषाढ़ (जून-जुलाई)
देवशयनी एकादशी
5. श्रावण (जुलाई-अगस्त)
त्यौहारों का आगमन (तीज)
6. भाद्रपद (अगस्त-सितंबर)
सर्वाधिक त्यौहारों का माह
7. आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)
नवरात्र व दशहरा
8. कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर)
दीपावली व पुष्कर मेला
9. मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर)
मानगढ़ धाम मेला
10. पौष (दिसंबर-जनवरी)
मकर संक्रांति
11. माघ (जनवरी-फरवरी)
बेणेश्वर मेला व वसंत पंचमी
12. फाल्गुन (फरवरी-मार्च)
महाशिवरात्रि व होली

2. श्रावण एवं भाद्रपद माह के प्रमुख त्यौहार

🌧️ (A) श्रावण माह के त्यौहार

कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha):

• श्रावण कृष्ण पंचमी: नाग पंचमी (नाग देवता की पूजा, कच्चा दूध अर्पित करना)।

• श्रावण कृष्ण नवमी: निडरी नवमी (नेवलों की पूजा, सर्पदंश से रक्षा हेतु)।

• श्रावण अमावस्या: हरियाली अमावस्या (मांगलियावास, अजमेर में कल्पवृक्ष मेला)।

शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha):

• श्रावण शुक्ल तृतीया: छोटी तीज / हरियाली तीज (जयपुर की तीज माता की सवारी प्रसिद्ध, नवविवाहिताओं को पीहर से 'सिंजारा' भेजा जाता है, लहरिया परिधान)।

• श्रावण पूर्णिमा: रक्षाबंधन / नारियल पूर्णिमा (सत्यनारायण व्रत व श्रवण कुमार का पूजन)।

⚡ (B) भाद्रपद माह के त्यौहार (सर्वाधिक त्यौहारों वाला माह)

कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha):

• भाद्रपद कृष्ण तृतीया: कजली तीज / बड़ी तीज / सातुड़ी तीज / बूढ़ी तीज (बूंदी की कजली तीज की भव्य सवारी विश्वप्रसिद्ध है)।

• भाद्रपद कृष्ण षष्ठी: ऊब छठ / चंदन षष्ठी (अविवाहित कन्याएं खड़े रहकर व्रत रखती हैं) व हलषष्ठी (बलराम जयंती)।

• भाद्रपद कृष्ण अष्टमी: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (नाथद्वारा में विशेष उत्सव)।

• भाद्रपद कृष्ण नवमी: गोगा नवमी (गोगामेड़ी, नोहर में विशाल मेला)।

• भाद्रपद कृष्ण द्वादशी: बछ बारस (पुत्रवती स्त्रियाँ गाय व बछड़े की पूजा करती हैं, चाकू से कटी वस्तु व गेहूं-ज्वार का त्याग)।

• भाद्रपद अमावस्या: सती अमावस्या (झुंझुनू में रानी सती का मेला)।

शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha):

• भाद्रपद शुक्ल द्वितीया: बाबे री बीज (बाबा रामदेव जयंती, रामदेवरा मेला प्रारंभ)।

• भाद्रपद शुक्ल तृतीया: हरतालिका तीज (गौरी-शंकर की पूजा, रोट तीज)।

• भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी: गणेश चतुर्थी / चतरा चौथ (रणथंभोर के त्रिनेत्र गणेश जी का लक्खी मेला)।

• भाद्रपद शुक्ल पंचमी: ऋषि पंचमी (सप्तऋषि पूजन, माहेश्वरी समाज का रक्षाबंधन, गंगा स्नान)।

• भाद्रपद शुक्ल अष्टमी: राधाष्टमी (सलेमाबाद, अजमेर में निम्बार्क पीठ पर मेला)।

• भाद्रपद शुक्ल दशमी: तेजा दशमी (परबतसर पशु मेला) एवं खेजड़ली शहीद दिवस (जोधपुर - विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला)।

• भाद्रपद शुक्ल एकादशी: जलझूलनी / देवझूलनी एकादशी (देवताओं को बेवाण में बिठाकर जलाशय में स्नान कराना, चारभुजा जी मेला)।

• भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी: अनंत चतुर्दशी (अनंत सूत्र बांधना व गणेश विसर्जन)।

3. आश्विन एवं कार्तिक माह के प्रमुख त्यौहार

🍁 (A) आश्विन माह के त्यौहार

• आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या: श्राद्ध पक्ष (16 दिन) - पितरों का तर्पण, कन्याओं द्वारा सांझी पूजन।

• आश्विन शुक्ल एकम से नवमी: शारदीय नवरात्र (दुर्गाष्टमी, महानवमी)।

• आश्विन शुक्ल दशमी: विजयादशमी / दशहरा (कोटा का दशहरा मेला प्रसिद्ध, खेजड़ी/शमी वृक्ष का पूजन, लीलटांस पक्षी का दिखना शुभ)।

• आश्विन पूर्णिमा: शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा (चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण, रात में खीर का भोग)।

🪔 (B) कार्तिक माह के त्यौहार (दीपोत्सव व पवित्र स्नान)

कृष्ण पक्ष:

• कार्तिक कृष्ण चतुर्थी: करवा चौथ (सुहागिनों द्वारा पति की दीर्घायु हेतु निर्जल व्रत)।

• कार्तिक कृष्ण अष्टमी: अहोई अष्टमी (संतान सुख व दीर्घायु हेतु स्याऊ माता पूजन)।

• कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी: धनतेरस (धन्वंतरि जयंती, यम दीपदान, बर्तन खरीदना)।

• कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी: रूप चतुर्दशी / छोटी दीवाली।

• कार्तिक अमावस्या: दीपावली (लक्ष्मी पूजन), स्वामी महावीर व स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण दिवस।

शुक्ल पक्ष:

• कार्तिक शुक्ल एकम: गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव (नाथद्वारा में 'अन्नकूट लूट' की परंपरा)।

• कार्तिक शुक्ल द्वितीया: भाई दूज (यम द्वितीया)।

• कार्तिक शुक्ल नवमी: आंवला नवमी / अक्षय नवमी (आंवले के वृक्ष की पूजा)।

• कार्तिक शुक्ल एकादशी: देवउठनी / प्रबोधिनी एकादशी (तुलसी विवाह, चातुर्मास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, पुष्कर मेला प्रारंभ)।

• कार्तिक पूर्णिमा (त्रिपुर पूर्णिमा): पुष्कर मेला, कोलायत मेला (कपिल मुनि), चंद्रभागा मेला (झालरापाटन) में पवित्र स्नान व दीपदान।

4. माघ एवं फाल्गुन माह के प्रमुख त्यौहार

🪁 (A) माघ माह के त्यौहार

• 14 जनवरी (सौर मास): मकर संक्रांति (सूर्य का मकर राशि में प्रवेश, पतंग महोत्सव, 13 वस्तुओं का दान, रूठी सास को मनाने की परंपरा)।

• माघ कृष्ण चतुर्थी: तिल चौथ / संकट चौथ (चौथ का बरवाड़ा, सवाई माधोपुर में लक्खी मेला)।

• माघ अमावस्या: मौनी अमावस्या (मौन व्रत धारण करना, कुंभ स्नान)।

• माघ शुक्ल पंचमी: वसंत पंचमी (विद्या की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्योत्सव, पीले वस्त्र धारण करना, गार्गी पुरस्कार वितरण)।

• माघ पूर्णिमा: बेणेश्वर धाम मेला (डूंगरपुर) - आदिवासियों का महाकुंभ।

🎨 (B) फाल्गुन माह के त्यौहार

• फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी: महाशिवरात्रि (भगवान शिव की बारात, शिवाड़, सवाई माधोपुर में घुश्मेश्वर महादेव मेला)।

• फाल्गुन शुक्ल एकादशी: आमलकी एकादशी / रंगभरी ग्यारस व खाटू श्याम जी का लक्खी मेला (सीकर)।

• फाल्गुन पूर्णिमा: होली (होलिका दहन) - भक्त प्रह्लाद की रक्षा व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक।

5. चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ एवं आषाढ़ माह के प्रमुख त्यौहार

🌸 (A) चैत्र माह के त्यौहार

• चैत्र कृष्ण एकम: धुलंडी (रंगों का त्यौहार)।

• चैत्र कृष्ण अष्टमी: शीतलाष्टमी / बास्योड़ा (चाकसू, जयपुर ग्रामीण में शीतला माता मेला, ठंडा बासी भोजन ग्रहण करना) एवं घुड़ला त्यौहार (जोधपुर)।

• चैत्र शुक्ल एकम: नवसंवत्सर (हिन्दू नववर्ष प्रारंभ) व वासंतिक नवरात्र प्रारंभ।

• चैत्र शुक्ल तृतीया: गणगौर (शिव-पार्वती / ईसर-गौरी पूजन, 18 दिवसीय पर्व समापन, जयपुर की गणगौर सवारी प्रसिद्ध)।

• चैत्र शुक्ल नवमी: रामनवमी (मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जन्मोत्सव)।

• चैत्र पूर्णिमा: हनुमान जयंती (सालासर, चूरू व मेहंदीपुर बालाजी मेला)।

☀️ (B) वैशाख, ज्येष्ठ व आषाढ़ माह

• वैशाख शुक्ल तृतीया: अक्षय तृतीया / आखा तीज (अबूझ सावा, सर्वाधिक बाल विवाह, बीकानेर स्थापना दिवस, सात अन्नों व बाजरे के खींच की पूजा)।

• वैशाख पूर्णिमा: पीपल पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा (बाणगंगा मेला - विराटनगर, मातृकुंडिया मेला - चित्तौड़गढ़)।

• ज्येष्ठ अमावस्या: बड़मावस / वट सावित्री व्रत व सीताबाड़ी मेला (केलवाड़ा, बारां)।

• ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी: निर्जला एकादशी (बिना जल पिए कठोर व्रत)।

• आषाढ़ शुक्ल एकादशी: देवशयनी एकादशी (भगवान विष्णु 4 माह हेतु क्षीरसागर में शयन करते हैं, चातुर्मास प्रारंभ)।

• आषाढ़ पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा / व्यास पूर्णिमा।

6. जैन, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई धर्म के प्रमुख त्यौहार

🕉️ जैन धर्म के त्यौहार

• पर्युषण पर्व: भाद्रपद माह (आत्मशुद्धि का पर्व)।
• संवत्सरी: भाद्रपद शुक्ल पंचमी (क्षमावाणी दिवस - 'मिच्छामी दुक्कड़म')।
• महावीर जयंती: चैत्र शुक्ल त्रयोदशी।
• रोट तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया।

☪️ मुस्लिम धर्म के त्यौहार

• मोहर्रम: मोहर्रम माह की 10 तारीख (हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर ताजिया निकालना)।
• ईद-उल-फितर (मीठी ईद): शव्वाल माह की पहली तारीख (रमजान समाप्ति पर)।
• ईद-उल-जुहा (बकरीद): जिल्हिज माह की 10 तारीख (कुर्बानी का पर्व)।
• शब-ए-बारात: शाबान माह की 14 तारीख।

☬ सिख धर्म के त्यौहार

• गुरु नानक जयंती: कार्तिक पूर्णिमा (गुरुद्वारों में लंगर व प्रभात फेरी)।
• गुरु गोविंद सिंह जयंती: पौष शुक्ल सप्तमी।
• बैसाखी: 13 अप्रैल (1699 में खालसा पंथ की स्थापना)।
• लोहड़ी: 13 जनवरी (मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व)।

✝️ ईसाई धर्म के त्यौहार

• क्रिसमस डे: 25 दिसंबर (ईसा मसीह का जन्मोत्सव)।
• गुड फ्राइडे: ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाने का दिन।
• ईस्टर: गुड फ्राइडे के बाद आने वाले रविवार को (पुनर्जीवित होने का पर्व)।
• नववर्ष दिवस: 1 जनवरी।

7. राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक एवं धार्मिक लोक मेले

मेले का नाम स्थान (जिला) आयोजन तिथि प्रमुख विशेषता एवं परीक्षा तथ्य
पुष्कर मेला पुष्कर (अजमेर) कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा राजस्थान का सबसे रंग-बिरंगा मेला, 'तीर्थराज', 52 घाटों पर महास्नान व दीपदान।
बेणेश्वर धाम मेला नवाटापरा (डूंगरपुर) माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा 'आदिवासियों का कुंभ', सोम-माही-जाखम संगम, खंडित शिवलिंग की पूजा।
रामदेवरा मेला रुणेचा (जैसलमेर) भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा मेला, कामड़ जाति द्वारा तेरहताली नृत्य।
करणी माता मेला देशनोक (बीकानेर) चैत्र व आश्विन नवरात्र 'चूहों वाली देवी' का मेला, सफेद चूहों (काबा) के दर्शन शुभ।
कैला देवी लक्खी मेला त्रिकूट पर्वत (करौली) चैत्र शुक्ल अष्टमी लांगुरिया गीत व घुटकन नृत्य, कालीसिल नदी में स्नान।
सीताबाड़ी मेला केलवाड़ा (बारां) ज्येष्ठ अमावस्या 'सहरिया जनजाति का कुंभ' और हाड़ौती का सबसे बड़ा मेला।
खाटू श्याम जी मेला खाटू (सीकर) फाल्गुन शुक्ल एकादशी व द्वादशी 'बर्बरीक / शीश के दानी' का विशाल लक्खी मेला।
भरथरी मेला अलवर भाद्रपद शुक्ल अष्टमी मत्स्य प्रदेश का सबसे बड़ा लक्खी मेला, कनफटे नाथों का तीर्थ।
मातृकुंडिया मेला राशमी (चित्तौड़गढ़) वैशाख पूर्णिमा 'राजस्थान का हरिद्वार' (लक्ष्मण झूले व चंद्रभागा नदी तट)।

8. राजस्थान के 10 राज्य स्तरीय पशु मेले (पशुपालन विभाग)

राजस्थान पशुपालन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 10 राज्य स्तरीय पशु मेलों का आयोजन किया जाता है, जहाँ नस्ल सुधार एवं पशु क्रय-विक्रय होता है:

पशु मेले का नाम स्थान (जिला) आयोजन तिथि प्रमुख पशु नस्ल एवं तथ्य
1. वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर (डीडवाना-कुचामन) श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या नागोरी बैल व ऊंटों की बिक्री। आय की दृष्टि से सबसे बड़ा मेला।
2. श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा (बालोतरा/बाड़मेर) चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी थारपारकर व कांकरेज नस्ल के गोवंश, सबसे प्राचीन पशु मेला।
3. श्री बलदेव पशु मेला मेड़ता सिटी (नागौर) चैत्र शुक्ल एकम से पूर्णिमा नागोरी गाय-बैल (बलदेव राम मिर्धा की स्मृति में)।
4. गोगामेड़ी पशु मेला नोहर (हनुमानगढ़) श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा हरियाणवी नस्ल। राजस्थान का सबसे लंबी अवधि (1 माह) तक चलने वाला मेला।
5. जसवंत प्रदर्शनी पशु मेला भरतपुर आश्विन शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी हरियाणवी नस्ल के गोवंश का क्रय-विक्रय।
6. कार्तिक पशु मेला पुष्कर (अजमेर) कार्तिक शुक्ल अष्टमी से मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया गिर गाय एवं ऊंटों का विशाल मेला (विदेशी पर्यटकों का आकर्षण)।
7. चंद्रभागा पशु मेला झालरापाटन (झालावाड़) कार्तिक शुक्ल एकादशी से मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी मालवी नस्ल के गोवंश व बैल।
8. गोमती सागर पशु मेला झालरापाटन (झालावाड़) वैशाख शुक्ल त्रयोदशी से ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी मालवी नस्ल का दूसरा प्रमुख पशु मेला।
9. महाशिवरात्रि पशु मेला करौली फाल्गुन कृष्ण सप्तमी से फाल्गुन शुक्ल दूज हरियाणवी नस्ल का क्रय-विक्रय।
10. श्री रामदेव पशु मेला मानासर (नागौर) माघ शुक्ल एकम से माघ पूर्णिमा नागोरी नस्ल के बैल (उमेदसिंह द्वारा प्रवर्तित)।

9. प्रमुख पर्यटन उत्सव एवं राजस्थान में होली के विविध रूप

🎨 राजस्थान में होली के प्रसिद्ध विविध प्रकार (RPSC Favorite)

• लठमार होली: श्री महावीर जी (करौली)
• कोड़ामार होली: भिनाय (केकड़ी/अजमेर)
• पत्थरमार होली: बाड़मेर (इलोजी बारात)
• देवर-भाभी होली: ब्यावर (बादशाह सवारी)
• कंडों की होली: गलियाकोट (डूंगरपुर)
• डोलची / बाल्टी मार: बीकानेर

🎪 राजस्थान पर्यटन विभाग (RTDC) द्वारा आयोजित प्रमुख उत्सव

• ऊंट महोत्सव: बीकानेर (जनवरी)
• मरू महोत्सव: जैसलमेर (जनवरी-फरवरी)
• थार महोत्सव: बाड़मेर (मार्च)
• हाथी महोत्सव: जयपुर (मार्च/होली)
• ग्रीष्म महोत्सव: माउंट आबू व जयपुर
• शरद महोत्सव: माउंट आबू (दिसंबर)

10. त्यौहार एवं तिथियाँ याद रखने की आसान ट्रिक्स

🎯 ट्रिक 1: भाद्रपद कृष्ण पक्ष के त्यौहार (क्रमवार)

"बड़ी कजली ऊब कर कृष्ण के गोगा संग बछड़े को ले गई"

बड़ी कजली (तृतीया - कजली तीज) + ऊब (छठ - ऊब छठ) + कृष्ण (अष्टमी - जन्माष्टमी) + गोगा (नवमी - गोगा नवमी) + बछड़े (द्वादशी - बछ बारस)।

🎯 ट्रिक 2: कार्तिक पूर्णिमा के दिन भरने वाले 4 बड़े मेले

"पुष्कर में कपिल ने चंद्रभागा के साथ गुरु नानक को दीपदान किया"

1. पुष्कर मेला (अजमेर), 2. कपिल मुनि मेला (कोलायत, बीकानेर), 3. चंद्रभागा मेला (झालरापाटन), 4. गुरु नानक जयंती (सिख धर्म) — सभी में दीपदान होता है।

⚠️ कन्फ्यूजन बस्टर: छोटी तीज बनाम बड़ी तीज

• छोटी तीज (हरियाली तीज): श्रावण शुक्ल तृतीया (सवारी: जयपुर)
• बड़ी तीज (कजली / सातुड़ी / बूढ़ी तीज): भाद्रपद कृष्ण तृतीया (सवारी: बूंदी)
• हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया (गौरी-शंकर पूजन)
• आखा तीज: वैशाख शुक्ल तृतीया (अबूझ सावा)

11. विगत परीक्षाओं में पूछे गए अति-महत्वपूर्ण तथ्य (One-Liners)

📌 त्यौहार संबंधी परीक्षा तथ्य

  • बिना ईसर की गवर: जैसलमेर में चैत्र शुक्ल चतुर्थी को पूजी जाती है।
  • गुलाबी / चूनड़ी गणगौर: नाथद्वारा (राजसमंद) में चैत्र शुक्ल पंचमी को।
  • धींगा गवर बेंतमार मेला: जोधपुर में वैशाख कृष्ण तृतीया को।
  • अन्नकूट लूट महोत्सव: नाथद्वारा में कार्तिक शुक्ल एकम (गोवर्धन पूजा) को।
  • खेजड़ली शहीद मेला: भाद्रपद शुक्ल दशमी (जोधपुर) - विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला।
  • सील की डूंगरी (चाकसू): शीतला माता का मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को।
  • अबूझ सावा: आखा तीज (वैशाख शुक्ल तृतीया) - सर्वाधिक बाल विवाह।

📌 मेले एवं पशु मेले तथ्य

  • आय की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला: वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर)।
  • सबसे प्राचीन पशु मेला: श्री मल्लीनाथ पशु मेला (तिलवाड़ा, बाड़मेर)।
  • सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पशु मेला: गोगामेड़ी पशु मेला (1 माह)।
  • आदिवासियों का कुंभ: बेणेश्वर धाम मेला (डूंगरपुर, माघ पूर्णिमा)।
  • सहरिया जनजाति का कुंभ: सीताबाड़ी मेला (केलवाड़ा, बारां)।
  • राजस्थान का हरिद्वार: मातृकुंडिया मेला (राशमी, चित्तौड़गढ़)।
  • लठमार होली: श्री महावीर जी (करौली) | कोड़ामार: भिनाय (केकड़ी)।
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परीक्षा में महत्व

त्यौहार एवं मेले क्यों अति-महत्वपूर्ण हैं?

RPSC, RAS, पटवार, CET एवं शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में कला एवं संस्कृति खंड से 25-30% प्रश्न सीधे त्यौहारों की तिथियों, कृष्ण व शुक्ल पक्ष, प्रमुख लोक मेलों और पशु मेलों से पूछे जाते हैं।

  • 1 तिथियों का मिलान: कजली तीज (भाद्रपद कृ. 3), आखातीज (वैशाख शु. 3), देवउठनी ग्यारस।
  • 2 विशिष्ट मेले: बेणेश्वर (आदिवासी कुंभ), पुष्कर (कार्तिक पूर्णिमा), सीताबाड़ी (सहरिया कुंभ)।
  • 3 10 पशु मेले: परबतसर (तेजाजी), तिलवाड़ा (मल्लीनाथ), गोगामेड़ी पशु मेला।
  • 4 होली के प्रकार: लठमार (महावीर जी), कोड़ामार (भिनाय), पत्थरमार (बाड़मेर)।

12 माह के त्यौहार

श्रावण से चैत्र तक

प्रमुख लोक मेले

पुष्कर, बेणेश्वर, रामदेवरा

10 पशु मेले

नागोरी, थारपारकर, मालवी

होली के प्रकार

लठमार, कोड़ामार, पत्थरमार

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Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

राजस्थान के त्यौहारों एवं मेलों से जुड़े प्रमुख संशय निवारण।

राजस्थान में प्रसिद्ध लोकोक्ति है: 'तीज त्यौहार बावड़ी, ले डूबी गणगौर'। इसका अर्थ है कि त्यौहारों का आगमन श्रावणी तीज / छोटी तीज (श्रावण शुक्ल तृतीया) से होता है और समापन गणगौर (चैत्र शुक्ल तृतीया) पर होता है।
कजली तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है। राजस्थान में बूंदी की कजली तीज की भव्य सवारी व मेला राज्यभर में विख्यात है।
बेणेश्वर धाम मेला (नवाटापरा, डूंगरपुर) को 'आदिवासियों का कुंभ' कहा जाता है। यह मेला माघ पूर्णिमा को सोम, माही और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर भरता है।
जैसलमेर में चैत्र शुक्ल चतुर्थी को बिना ईसर की केवल 'गवर' की सवारी निकाली जाती है। ऐतिहासिक रूप से बीकानेर के शासक ईसर की प्रतिमा को छीन ले गए थे, जिसके बाद से यहाँ केवल गवर की पूजा की जाती है।
• लठमार होली: श्री महावीर जी (करौली)
• कोड़ामार होली: भिनाय (केकड़ी/अजमेर)
• पत्थरमार होली: बाड़मेर
• देवर-भाभी होली: ब्यावर

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