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लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की जन्मभूमि : 2 अक्टूबर 1959 से 73वाँ संशोधन

राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था (Panchayati Raj System) :
2 अक्टूबर 1959 नागौर, 73वाँ संशोधन, 29 विषय, त्रिस्तरीय ढाँचा व 50% महिला आरक्षण

ग्रामीण स्थानीय स्वशासन का सबसे प्रामाणिक एवं विस्तृत अध्ययन — नागौर के बगदरी गाँव से देश में पंचायती राज का श्रीगणेश (1959), बलवंत राय मेहता व अशोक मेहता समितियाँ, 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992, संविधान का भाग-9 (अनुच्छेद 243 से 243O), 11वीं अनुसूची के 29 कार्यकारी विषय, राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, त्रिस्तरीय संरचना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद), वार्ड सभा व ग्राम सभा, राज्य निर्वाचन आयोग (243K), वित्त आयोग (243I) तथा महिलाओं हेतु 50% आरक्षण

ऐतिहासिक शुभारंभ 2 अक्टूबर 1959 (नागौर)
संवैधानिक संशोधन 73वाँ संशोधन (1992)
11वीं अनुसूची विषय कुल 29 विषय
महिला आरक्षण (राज.) 50% आरक्षण (2008 से)
भारतीय संविधान भाग-9, 11वीं अनुसूची एवं राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994

राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था : ऐतिहासिक शुभारंभ से 73वें संशोधन का सफर

2 अक्टूबर 1959 नागौर, बलवंत राय मेहता व सादिक अली समितियाँ, अनुच्छेद 243 से 243O की धारावाहिक व्याख्या, 29 विषय, त्रिस्तरीय प्रशासनिक ढाँचा, ग्राम सभा की बैठकें, 50% महिला आरक्षण व विगत 15 वर्षों के RPSC प्रश्न।

1. पंचायती राज का ऐतिहासिक उद्भव : राजस्थान बना देश का पहला राज्य (1959)

महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज' के सपने तथा संविधान के अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन - DPSP) को धरातल पर उतारने की दिशा में राजस्थान पूरे भारत में पथ-प्रदर्शक बना:

1
ऐतिहासिक शुभारंभ (2 अक्टूबर 1959): गांधी जयंती के पावन अवसर पर राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी (Bagdari) गाँव में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का विधिवत उद्घाटन किया गया।
2
उस समय के संवैधानिक पदाधिकारी: राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया तथा राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह थे। नागौर जिला परिषद के प्रथम जिला प्रमुख लिखमीचंद चौधरी बने।
3
देश का दूसरा राज्य: राजस्थान के बाद 11 अक्टूबर 1959 को आंध्र प्रदेश देश का दूसरा राज्य बना जहाँ पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई।

2. पंचायती राज से संबंधित राष्ट्रीय एवं राजस्थान की प्रमुख समितियाँ

A. राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख समितियाँ

  • बलवंत राय मेहता समिति (1957): 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' की जनक; त्रिस्तरीय पंचायती राज (ग्राम, ब्लॉक, जिला) की मूल सिफारिश।
  • अशोक मेहता समिति (1977): जनता पार्टी सरकार द्वारा गठित; द्वि-स्तरीय ढाँचे (मंडल पंचायत व जिला परिषद) तथा राजनीतिक दलों की खुली भागीदारी की सिफारिश।
  • जी.वी.के. राव समिति (1985): 'बिना जड़ की घास' (Grass without roots) कहकर नौकरशाही के अत्यधिक नियंत्रण की आलोचना; नियमित चुनावों की सिफारिश।
  • एल.एम. सिंघवी समिति (1986 - जोधपुर निवासी): पंचायती राज को संवैधानिक मान्यता (Constitutional Status) देने की सर्वप्रथम प्रबल व निर्णायक संस्तुति।
  • पी.के. थुंगन समिति (1988): संवैधानिक दर्जा, 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल व राज्य वित्त आयोग की सिफारिश।

B. राजस्थान सरकार द्वारा गठित समितियाँ

  • सादिक अली समिति (1964): राजस्थान में प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव में जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों के व्यापक निर्वाचक मंडल की सिफारिश।
  • गिरधारी लाल व्यास समिति (1973): ग्राम पंचायत स्तर पर 'ग्राम सेवक' (वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी - VDO) का पूर्णकालिक पद सृजित करने तथा पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय संसाधन सौंपने की सिफारिश।
  • हरलाल सिंह खर्रा समिति (1990): पंचायती राज संस्थाओं को प्रशासनिक अधिकार व विकास विभागों के कार्यों का हस्तांतरण।
  • गुलाबचंद कटारिया समिति: 29 विषयों के व्यावहारिक विकेंद्रीकरण व विभागों के अंतरण हेतु मंत्रिमंडलीय समिति।

3. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 : संवैधानिक रूपांतरण

प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में संसद द्वारा 73वाँ संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया। 20 अप्रैल 1993 को राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के हस्ताक्षर के बाद यह 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में लागू हुआ (इसी कारण प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' मनाया जाता है)।

नया भाग-9: संविधान में भाग-9 पुनः अंतःस्थापित किया गया, जिसका शीर्षक "पंचायतें" (The Panchayats) रखा गया। इसमें कुल 16 नए अनुच्छेद (Art. 243 से 243O) जोड़े गए।
11वीं अनुसूची: संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसके अंतर्गत पंचायतों को कार्य करने हेतु कुल 29 कार्यात्मक विषय प्रदान किए गए।
अनिवार्य व स्वैच्छिक उपबंध: संशोधन ने ग्राम सभा, 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल, 3 स्तरीय ढाँचा, SC/ST व महिला आरक्षण को प्रत्येक राज्य हेतु 'बाध्यकारी' (Compulsory) बना दिया।

4. अनुच्छेद 243 से 243O : संपूर्ण धारावाहिक विश्लेषण (Bare Act Master Table)

RPSC RAS, कॉलेज व्याख्याता व अन्य परीक्षाओं में अनुच्छेद 243 के उपखंडों (Sub-clauses) से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। संपूर्ण अनुच्छेदों की प्रामाणिक व्याख्या नीचे प्रस्तुत है:

अनुच्छेद संवैधानिक विषय (Constitutional Subject) RPSC / RAS परीक्षा उपयोगी व्याख्या
अनुच्छेद 243 परिभाषाएँ (Definitions): जिला, ग्राम सभा, मध्यवर्ती स्तर, पंचायत, पंचायत क्षेत्र आदि। ग्राम सभा की परिभाषा 243(b) में है: ग्राम स्तर पर मतदाता सूची में पंजीकृत व्यक्तियों का निकाय।
अनुच्छेद 243A ग्राम सभा (Gram Sabha): ग्राम सभा ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगी जो राज्य विधानमंडल विधि द्वारा उपबंधित करे। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) का मूर्त रूप है। राजस्थान में वर्ष में कम से कम 4 बैठकें अनिवार्य हैं।
अनुच्छेद 243B पंचायतों का गठन (Constitution of Panchayats): त्रिस्तरीय ढाँचा—ग्राम, मध्यवर्ती (ब्लॉक) और जिला स्तर। अपवाद: 20 लाख से कम आबादी वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर (ब्लॉक) का गठन अनिवार्य नहीं है।
अनुच्छेद 243C पंचायतों की संरचना (Composition): सभी स्तरों के सभी प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष (Direct Election) होगा। अध्यक्ष (सरपंच) का चुनाव राज्य विधानमंडल के कानून अनुसार; राजस्थान में सरपंच प्रत्यक्ष तथा प्रधान व जिला प्रमुख अप्रत्यक्ष (Indirect) चुने जाते हैं।
अनुच्छेद 243D स्थानों का आरक्षण (Reservation of Seats): जनसंख्या के अनुपात में SC/ST को आरक्षण। महिलाओं हेतु न्यूनतम 1/3 (33%) आरक्षण। राजस्थान ने 2008 में संशोधन कर महिलाओं हेतु आरक्षण 33% से बढ़ाकर 50% कर दिया है।
अनुच्छेद 243E पंचायतों की अवधि (Duration): प्रथम बैठक से 5 वर्ष। समय से पूर्व विघटन की स्थिति में 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य। यदि विघटित पंचायत की शेष अवधि 6 माह से कम बची हो, तो चुनाव कराना आवश्यक नहीं होता। नई चुनी गई पंचायत केवल शेष अवधि (Remainder period) के लिए ही कार्य करती है।
अनुच्छेद 243F सदस्यता के लिए निरर्हताएँ (Disqualifications): चुनाव लड़ने हेतु न्यूनतम आयु 21 वर्ष विधानसभा सदस्य हेतु न्यूनतम आयु 25 वर्ष है, किंतु पंचायत चुनाव हेतु न्यूनतम आयु 21 वर्ष रखी गई है।
अनुच्छेद 243G पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व: 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ तैयार करना व लागू करना। यह पंचायतों का मूल कार्यक्षेत्र है।
अनुच्छेद 243H पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्तियाँ और उनकी निधियाँ: चुंगी, मेले, वाहन, हाट-बाजार पर स्थानीय कर लगाने का अधिकार। राज्य विधानमंडल कानून बनाकर पंचायतों को कर अधिरोपित करने का अधिकार देता है।
अनुच्छेद 243I राज्य वित्त आयोग का गठन (State Finance Commission): पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा हेतु प्रत्येक 5 वर्ष में राज्यपाल द्वारा गठन। राजस्थान में वर्तमान में छठा राज्य वित्त आयोग (प्रद्युम्न सिंह की अध्यक्षता में) कार्यरत है।
अनुच्छेद 243J पंचायतों के लेखाओं की संपरीक्षा (Audit of Accounts): खातों का संधारण और ऑडिट। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग राजस्थान द्वारा ऑडिट की जाती है।
अनुच्छेद 243K पंचायतों के लिए निर्वाचन (Elections to Panchayats): एक स्वतंत्र राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) का गठन। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है तथा इसे हाईकोर्ट जज के समान महाभियोग प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।
अनुच्छेद 243L संघ राज्यक्षेत्रों को लागू होना: केंद्रशासित प्रदेशों में राष्ट्रपति के निर्देशानुसार लागू। अपवादों व संशोधनों सहित लागू होता है।
अनुच्छेद 243M इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना: नागालैंड, मेघालय, मिजोरम तथा 5वीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्र। इन 5वीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों हेतु राजस्थान में पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act in Rajasthan) लागू किया गया है।
अनुच्छेद 243N विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना: संशोधन लागू होने के 1 वर्ष के भीतर पुराने कानूनों को इसके अनुरूप बनाना। इसी आधार पर राजस्थान में 1994 में नया पंचायती राज अधिनियम बनाया गया।
अनुच्छेद 243O निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्जन (Bar to interference by Courts): परिसीमन और निर्वाचन क्षेत्र आवंटन को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। चुनाव को केवल 'चुनाव याचिका' (Election Petition) द्वारा ही चुनौती दी जा सकती है।

5. 11वीं अनुसूची (11th Schedule) के 29 विषय : प्रमुख कार्यकारी कार्यक्षेत्र

संविधान के अनुच्छेद 243G के तहत 11वीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे गए कुल 29 विषयों को 4 प्रमुख श्रेणियों में समझा जा सकता है:

A. कृषि एवं ग्रामीण आजीविका: कृषि विस्तार, भूमि सुधार व मृदा संरक्षण, लघु सिंचाई व जल प्रबंधन, पशुपालन, डेयरी उद्योग व कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन, सामाजिक वानिकी एवं कृषि वानिकी, लघु वनोपज, खादी व ग्रामोद्योग।
B. ग्रामीण आधारभूत संरचना: पेयजल (Drinking water), सड़कें, पुल, पुलिया, नौका घाट व जलमार्ग, ग्रामीण विद्युतीकरण, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत, ग्रामीण आवास (Housing)।
C. शिक्षा एवं सामाजिक सेवाएँ: प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयी शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण व व्यावसायिक शिक्षा, प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा, पुस्तकालय, सांस्कृतिक क्रियाकलाप, मेले और बाजार।
D. सामाजिक सुरक्षा व कल्याण: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (अस्पताल, PHC/CHC), परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण (दिव्यांग व मानसिक कमजोर कल्याण), SC/ST वर्ग का कल्याण, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS / राशन), सामुदायिक आस्तियों का अनुरक्षण।

6. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 एवं नियम 1996

प्रभावी होने की तिथि: 73वें संविधान संशोधन के क्रियान्वयन हेतु राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित अधिनियम 23 अप्रैल 1994 से लागू हुआ।
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996: अधिनियम के प्रशासनिक प्रावधानों को विस्तार देने हेतु राज्य सरकार द्वारा 30 दिसंबर 1996 को विस्तृत नियम अधिसूचित किए गए।
शैक्षणिक योग्यता का इतिहास: वर्ष 2015 में राजस्थान सरकार ने सरपंच हेतु 8वीं पास तथा जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य हेतु 10वीं पास की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता लागू की थी, जिसे वर्ष 2019 में पुनः समाप्त कर दिया गया।
⚖️ धारा 38 : जनप्रतिनिधियों (सरपंच/प्रधान/प्रमुख) का निलंबन व पद से हटाना:

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 38 के तहत यदि कोई सरपंच, उपसरपंच, प्रधान या जिला प्रमुख अपने कर्तव्य पालन से इनकार करता है, कदाचार का दोषी पाया जाता है या उस पर आपराधिक आरोप तय होते हैं, तो राज्य सरकार (संभागीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट पर) उसे पद से निलंबित (Suspend) या निष्कासित (Remove) कर सकती है। निष्कासित व्यक्ति आगामी 5 वर्ष तक पुनः चुनाव लड़ने हेतु अयोग्य हो जाता है।

📅 ग्राम पंचायत बजट निर्माण एवं अनुमोदन की समय-सीमा:

पंचायती राज नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत को आगामी वित्तीय वर्ष का बजट प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी से पूर्व तैयार कर ग्राम सभा व पंचायत की बैठक में पारित कराना अनिवार्य होता है। इसके पश्चात इसे समीक्षा हेतु पंचायत समिति को भेजा जाता है, जिसे 15 मार्च से पूर्व अनुमोदित करना आवश्यक है।

7. राजस्थान का त्रिस्तरीय पंचायती राज ढाँचा : संपूर्ण तुलनात्मक सारणी

राजस्थान त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थागत मॉडल
1. जिला परिषद (शीर्ष स्तर) 2. पंचायत समिति (मध्यवर्ती / ब्लॉक) 3. ग्राम पंचायत (मूल जमीनी आधार)
मापदंड ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) पंचायत समिति (Panchayat Samiti) जिला परिषद (Zila Parishad)
प्रशासनिक स्तर गाँव / ग्राम समूह स्तर (निम्नतम) विकास खंड (ब्लॉक स्तर / मध्यवर्ती) जिला स्तर (शीर्ष स्तर)
राजनीतिक प्रमुख सरपंच (प्रत्यक्ष जनता द्वारा निर्वाचित) प्रधान (निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष) जिला प्रमुख (निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष)
उप-प्रमुख उप-सरपंच (वार्ड पंचों द्वारा अप्रत्यक्ष) उप-प्रधान (सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष) उप-जिला प्रमुख (सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष)
प्रशासनिक अधिकारी (नौकरशाह) ग्राम विकास अधिकारी (VDO) / सचिव खंड विकास अधिकारी (BDO) — RAS मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) — IAS / RAS
शपथ ग्रहण अधिकारी पीठासीन अधिकारी (निर्वाचन अधिकारी) उपखंड अधिकारी (SDM) जिला कलेक्टर
त्यागपत्र (Resignation) सरपंच व वार्ड पंच BDO (विकास अधिकारी) को देते हैं प्रधान अपना त्यागपत्र जिला प्रमुख को सौंपता है जिला प्रमुख अपना त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को सौंपता है
न्यूनतम सदस्य संख्या 3,000 की आबादी पर 1 सरपंच + 9 पंच 1 लाख की आबादी पर 15 सदस्य 4 लाख की आबादी पर 17 सदस्य

8. प्रत्यक्ष लोकतंत्र की संस्थाएँ : वार्ड सभा एवं ग्राम सभा

1. वार्ड सभा (Ward Sabha) : 2000 में प्रावधान

  • राजस्थान में वर्ष 2000 में पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर वार्ड सभा की व्यवस्था की गई।
  • वार्ड की मतदाता सूची में दर्ज सभी व्यक्ति सदस्य होते हैं; अध्यक्षता संबंधित वार्ड पंच करता है।
  • कोरम: कुल सदस्यों का कम से कम 1/10 भाग। वर्ष में कम से कम 2 बैठकें अनिवार्य।

2. ग्राम सभा (Gram Sabha - Art. 243A)

  • ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी पंजीकृत वयस्क मतदाताओं की वैधानिक संस्था। अध्यक्षता सरपंच करता है।
  • कोरम: कुल सदस्यों का कम से कम 1/10 भाग
  • राजस्थान में 4 अनिवार्य बैठकें: 26 जनवरी, 1 मई (मजदूर दिवस), 15 अगस्त एवं 2 अक्टूबर (गांधी जयंती)।
  • कार्य: बजट अनुमोदन, मनरेगा कार्यों का चयन व सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)।

9. स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएँ : राज्य निर्वाचन आयोग (243K) व वित्त आयोग (243I)

राज्य निर्वाचन आयोग (Art. 243K)

पंचायतों की निर्वाचक नामावली तैयार करने व चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन व नियंत्रण करने हेतु जुलाई 1994 में राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग गठित हुआ। यह एक सदस्यीय आयोग है। राजस्थान के प्रथम राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ थे।

राज्य वित्त आयोग (Art. 243I)

पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा हेतु प्रत्येक 5 वर्ष में राज्यपाल द्वारा राजस्थान राज्य वित्त आयोग (Article 243-I) का गठन किया जाता है। छठे वित्त आयोग (अध्यक्ष: प्रद्युम्न सिंह) द्वारा शुद्ध कर राजस्व का 75.10% हिस्सा पंचायती राज को आवंटित किया जा रहा है।

10. राजस्थान में 50% महिला आरक्षण एवं प्रमुख प्रशासनिक सुधार

50% महिला आरक्षण (2008 का क्रांतिकारी कदम): मूल 73वें संशोधन (अनुच्छेद 243D) में महिलाओं हेतु न्यूनतम 33% (1/3) आरक्षण का प्रावधान था। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2008 में कानून में संशोधन कर महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 50% कर दिया। वर्तमान में सरपंच, प्रधान व जिला प्रमुख सहित सभी स्तरों पर 50% पद महिलाओं हेतु आरक्षित हैं।
अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) नियम: सरपंच, प्रधान या जिला प्रमुख के विरुद्ध पदभार ग्रहण करने के प्रारंभिक 2 वर्ष तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। साथ ही कार्यकाल के अंतिम 1 वर्ष में भी इसे नहीं लाया जा सकता। प्रस्ताव पारित होने हेतु 3/4 विशेष बहुमत आवश्यक होता है।

11. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ ऐतिहासिक व संशोधन तथ्य

  • शुभारंभ: 2 अक्टूबर 1959 (नागौर, बगदरी गाँव).
  • प्रथम जिला प्रमुख: लिखमीचंद चौधरी.
  • 73वाँ संशोधन लागू (भारत): 24 अप्रैल 1993.
  • राजस्थान अधिनियम लागू: 23 अप्रैल 1994.
  • संविधान में भाग: भाग-9 (अनुच्छेद 243 से 243O).
  • 11वीं अनुसूची: कुल 29 विषय.

⚡ चुनाव व प्रशासनिक तथ्य

  • चुनाव लड़ने हेतु आयु: न्यूनतम 21 वर्ष (अनु. 243F).
  • महिला आरक्षण: 50% (राजस्थान में 2008 से).
  • ग्राम सभा की अनिवार्य बैठकें: 4 बैठकें प्रतिवर्ष.
  • प्रथम राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष: के.के. गोयल (1995).
  • वर्तमान वित्त आयोग: छठा (अध्यक्ष: प्रद्युम्न सिंह).
  • ग्राम सेवक का नाम परिवर्तन: ग्राम विकास अधिकारी (VDO).

12. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत पंचायतों को वित्तीय अधिकार प्रदान करने हेतु राज्य वित्त आयोग के गठन का प्रावधान है? [RAS Pre 2021]

उत्तर: अनुच्छेद 243I (तथा नगरीय निकायों हेतु 243Y)।

प्रश्न 2: 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर में पंचायती राज का उद्घाटन करते समय राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कौन थे? [School Lecturer 2020]

उत्तर: सरदार गुरुमुख निहाल सिंह। (तथा मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया थे)।

प्रश्न 3: राजस्थान में उप-सरपंच का चुनाव किस पद्धति द्वारा किया जाता है? [2nd Grade GK 2018]

उत्तर: ग्राम पंचायत के निर्वाचित वार्ड पंचों द्वारा अपने में से अप्रत्यक्ष रूप से।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्न

पंचायती राज

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): राजस्थान में 50% महिला आरक्षण ने ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को किस प्रकार प्रभावित किया है? 'सरपंच-पति' सिंड्रोम के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर संकेत: सकारात्मक: बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में वृद्धि, आत्मविश्वास। नकारात्मक चुनौती: 'सरपंच पति' (Proxy Representation) द्वारा वास्तविक निर्णय लेना। समाधान: डिजिटल साक्षरता व स्वतंत्र प्रशासनिक प्रशिक्षण।

प्रश्न 2 (100 शब्द | 10 अंक): "ग्राम सभा प्रत्यक्ष लोकतंत्र का मूर्तरूप है।" 73वें संविधान संशोधन के तहत ग्राम सभा के अधिकारों व सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) की भूमिका का परीक्षण कीजिए।

उत्तर प्रारूप फ्रेमवर्क: 1. अनुच्छेद 243A संवैधानिक स्थिति, 2. मतदाता सूची के सभी नागरिकों की सदस्यता, 3. मुख्य अधिकार: विकास योजनाओं की स्वीकृति, लाभार्थी चयन, मनरेगा सोशल ऑडिट, 4. चुनौतियाँ: कोरम (1/10) की औपचारिकता, 5. निष्कर्ष: जवाबदेह स्थानीय स्वशासन का आधार।
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पंचायती राज व्यवस्था (73वाँ संशोधन) सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स PDF

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पंचायती राज व्यवस्था, 73वें संशोधन, अनुच्छेदों व त्रिस्तरीय संरचना से जुड़े प्रश्नोत्तर।

भारत में पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी (Bagdari) गाँव में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया था। उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया तथा राज्यपाल सरदार गुरुमुख निहाल सिंह थे।
73वें संशोधन द्वारा संविधान में 'भाग-9' (अनुच्छेद 243 से 243O) पुनः जोड़ा गया तथा '11वीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को सौंपे गए कुल 29 कार्यकारी विषय शामिल हैं।
राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित 'राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994' को 23 अप्रैल 1994 से पूरे राजस्थान में लागू किया गया।
राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2008 में कानून में संशोधन कर महिलाओं का आरक्षण 33% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया। वर्तमान में सभी स्तरों पर 50% सीटें महिलाओं हेतु आरक्षित हैं।
ग्राम सभा का उल्लेख अनुच्छेद 243(b) एवं 243A में है। ग्राम पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी वयस्क नागरिक ग्राम सभा के सदस्य होते हैं।

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