मेहरानगढ़ दुर्ग:
इतिहास, वास्तुकला एवं वीरगाथा
मेहरानगढ़ दुर्ग (Mehrangarh Fort) जोधपुर का सबसे प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। राव जोधा द्वारा 1459 ई. में निर्मित, यह दुर्ग 410 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। 7 प्रवेश द्वार, फूल महल, शीश महल, मोती महल, चामुण्डा माता मंदिर, जसवंत थड़ा एवं दौलत खाना — यह दुर्ग राजपूत वीरता, स्थापत्य कला एवं मारवाड़ की समृद्ध संस्कृति का अद्वितीय प्रतीक है।
ऊँचाई
410 फीट
द्वार
7
निर्माण
1459
भौचेरिया (चिड़ियाटूक) पहाड़ी | 9 किमी मंडोर से
राजस्थान के प्रमुख दुर्ग
पूरा कला एवं संस्कृति हब देखेंमेहरानगढ़ दुर्ग: सम्पूर्ण ऐतिहासिक व स्थापत्य विश्लेषण
इतिहास, वास्तुकला, 7 प्रवेश द्वार, महल, मंदिर, छतरियाँ, संग्रहालय एवं परीक्षा-उपयोगी तथ्यों का प्रामाणिक संग्रह।
1. परिचय एवं उपनाम (Introduction & Nicknames)
मेहरानगढ़ दुर्ग (Mehrangarh Fort) राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित है। इसे राव जोधा ने 12 मई 1459 को विक्रम संवत् 1515 में बनवाया था। यह दुर्ग भौचेरिया (चिड़ियाटूक) पहाड़ी पर 410 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। मेहरानगढ़ दुर्ग भारत के सबसे बड़े दुर्गों में से एक है तथा अपनी भव्यता, वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
📌 प्रमुख तथ्य
- स्थान: जोधपुर, राजस्थान
- निर्माण: 12 मई 1459 (विक्रम संवत् 1515)
- निर्माता: राव जोधा (राठौड़ वंश)
- स्थिति: भौचेरिया (चिड़ियाटूक) पहाड़ी
- ऊँचाई: 410 फीट (125 मीटर)
- दीवारें: 36 मीटर ऊँची, 21 मीटर चौड़ी
- प्रवेश द्वार: 7
- नाम: मेहरान (सूर्य) + गढ़ (दुर्ग) = सूर्य दुर्ग
🏷️ उपनाम (Nicknames)
- सूर्य दुर्ग — मेहरान का अर्थ सूर्य
- मयूरध्वजगढ़ — मोर के आकार का दुर्ग
- चिंतामणि दुर्ग — बीकानेर के शासकों द्वारा
- राठौड़ों का गौरव — राठौड़ वंश का प्रतीक
- जोधपुर का मुकुट — शहर की पहचान
प्रसिद्ध उक्ति: "मेहरानगढ़ दुर्ग को देखकर ऐसा लगता है मानो यह देवताओं और परियों ने बनाया हो।" — रडयार्ड किपलिंग (Rudyard Kipling)
📌 RPSC परीक्षा हेतु: मेहरानगढ़ दुर्ग गिरी दुर्ग (पहाड़ी दुर्ग) की श्रेणी में आता है। यह कागमुखी दुर्ग का उत्कृष्ट उदाहरण है — जिसमें पहाड़ी आगे की ओर संकरी और पीछे चौड़ी होती है।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (History & Timeline)
⏳ कालक्रम
- 1459 ई.: राव जोधा द्वारा जोधपुर की स्थापना एवं दुर्ग की नींव (12 मई)
- 1460 ई.: दुर्ग का निर्माण पूर्ण (लगभग 9 लाख रुपये खर्च)
- 1531–1562: मालदेव का शासन — दुर्ग में संरचनाएँ निर्मित
- 1678–1707: मुगलों द्वारा दुर्ग पर अधिकार
- 1707 ई.: महाराजा अजीत सिंह ने मुगलों से दुर्ग पुनः प्राप्त किया
- 1808 ई.: महाराजा मान सिंह ने जयपुर-बीकानेर विजय के उपलक्ष्य में जय पोल का निर्माण करवाया
- 1843–1872: महाराजा तखत सिंह — अंतिम शासक जो दुर्ग में रहे
- 1947–1952: महाराजा हनवंत सिंह — अंतिम शासक
- 1972: मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट की स्थापना
👑 प्रमुख शासक
- राव जोधा — संस्थापक (1459)
- मालदेव (1531–1562) — दुर्ग विस्तार
- महाराजा अजीत सिंह (1707–1724) — मुगलों से पुनः प्राप्त
- महाराजा मान सिंह (1803–1843) — जय पोल निर्माण
- महाराजा तखत सिंह (1843–1872) — अंतिम दुर्ग-निवासी
- महाराजा हनवंत सिंह (1947–1952) — अंतिम शासक
📌 महत्वपूर्ण: राव जोधा ने मंडोर से राजधानी जोधपुर स्थानांतरित की क्योंकि मंडोर दुर्ग सुरक्षित नहीं था। दुर्ग का निर्माण 9 किमी दूर भौचेरिया पहाड़ी पर करवाया गया।
3. निर्माण से जुड़ी किंवदंती (Legend & Blue City)
🧘 चीड़िया नाथ जी का श्राप
- दुर्ग निर्माण के लिए राव जोधा ने चीड़िया नाथ जी नामक साधु को पहाड़ी से विस्थापित किया
- साधु ने श्राप दिया — "जोधा! तुम्हारे गढ़ में पानी की कमी होगी"
- राव जोधा ने साधु को प्रसन्न करने के लिए मंदिर और आवास बनवाया
- साधु ने कहा कि श्राप को वापस नहीं लिया जा सकता, लेकिन एक व्यक्ति को जीवित दफनाने से श्राप समाप्त होगा
- राव जोधा ने राजा राम मेघवाल को नींव में जीवित दफना दिया
- राजा राम मेघवाल के वंशज आज भी राजा राम मेघवाल गार्डन में निवास करते हैं
🔵 नीला रंग (Blue Color)
- जोधपुर को "ब्लू सिटी" कहा जाता है
- नीला रंग गर्मी और मच्छरों को दूर रखता है (मान्यता)
- दुर्ग के कई भाग भी नीले रंग में रंगे गए हैं
- प्राचीन काल में जोधपुर "ब्रह्मपुरी" कहलाता था — केवल ब्राह्मण ही रहते थे और नीला रंग करते थे
- पर्यटक दुर्ग से नीली जोधपुर नगरी का अद्भुत दृश्य देख सकते हैं
📌 विशेष: राजा राम मेघवाल को दफनाने के स्थान पर आज दौलत खाना (शस्त्रागार) स्थित है। यह कहानी राजपूतों की बलिदान परंपरा को दर्शाती है।
4. वास्तुकला एवं विशेषताएँ (Architecture & Features)
🏗️ निर्माण सामग्री एवं शैली
- सामग्री: घाटू (लाल बलुआ पत्थर) — राजस्थानी वास्तुकला की विशेषता
- विशेषता: पत्थर समय के साथ कठोर होता जाता है, शताब्दियों तक टिका रहता है
- जालियाँ: महलों को गर्मी, धूप, लू और रेत से बचाती हैं
- तापमान नियंत्रण: जालियों से टकराकर गर्म हवा ठंडी होकर महल में प्रवेश करती है
- दीवारें: 36 मीटर ऊँची, 21 मीटर चौड़ी
- श्रेणी: गिरी दुर्ग (पहाड़ी दुर्ग) — कागमुखी दुर्ग
📐 दुर्ग के आयाम
- स्थिति: भौचेरिया (चिड़ियाटूक) पहाड़ी
- ऊँचाई: 410 फीट (125 मीटर)
- दीवार की ऊँचाई: 36 मीटर (118 फीट)
- दीवार की चौड़ाई: 21 मीटर (69 फीट)
- निर्माण लागत: लगभग 9 लाख रुपये (तत्कालीन)
- दुर्ग श्रेणी: कागमुखी दुर्ग — आगे संकरा, पीछे चौड़ा
💧 जल व्यवस्था: दुर्ग में रानीसर तालाब (राव जोधा की हाड़ी रानी जसमादे द्वारा 1539 ई.) और पद्मसर तालाब (राव गंगा की देवड़ी रानी पद्मावती द्वारा) बनवाए गए।
✅ विशेष तथ्य: मेहरानगढ़ दुर्ग मोर (Peacock) के आकार में बना है, इसलिए इसे "मयूरध्वजगढ़" भी कहा जाता है।
5. सात प्रवेश द्वार (Seven Gates – Pols)
मेहरानगढ़ दुर्ग में 7 प्रमुख प्रवेश द्वार हैं। इनमें से कुछ द्वार विजय के प्रतीक हैं तो कुछ ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी हैं:
जय पोल
1808 ई. में महाराजा मान सिंह द्वारा जयपुर-बीकानेर विजय पर निर्मित मुख्य प्रवेश द्वार।
फतेह पोल
1707 ई. में महाराजा अजीत सिंह द्वारा मुगलों से दुर्ग पुनः प्राप्त करने की स्मृति में निर्मित।
लोहा पोल
अंतिम आंतरिक द्वार, जिस पर 15 सती रानियों की हथेलियों के निशान उत्कीर्ण हैं।
इमरती पोल
राव मालदेव द्वारा निर्मित, मूल द्वार की ओर जाने वाला ऐतिहासिक मार्ग।
लखना पोल
इसे 'देढ़ कंगरा पोल' भी कहते हैं, जिस पर 1807 ई. के तोपों के गोलों के निशान हैं।
सूरज पोल व फलसा
सूरज पोल सबसे पुराना द्वार है तथा राव जोधा का फलसा प्राचीनतम प्रवेश स्थल है।
6. दुर्ग के प्रमुख महल (Palaces)
🌺 फूल महल (Phool Mahal)
महाराजा अभय सिंह द्वारा निर्मित दीवान-ए-खास। गुजरात से लाई गई सोने की जाली और रागमाला भित्ति चित्रों से सुसज्जित।
💎 मोती महल (Moti Mahal)
महाराजा सूर सिंह द्वारा निर्मित। इसमें अलबास्टर का बना राज्याभिषेक सिंहासन (सांगा चोकी) स्थित है।
🪞 शीश महल (Sheesh Mahal)
धार्मिक देवी-देवताओं के चित्रों के साथ बड़े आकार के नियमित दर्पणों से सजा निजी पूजा व ध्यान कक्ष।
🏛️ तखत विलास (Takhat Vilas)
महाराजा तखत सिंह द्वारा निर्मित। गीली प्लास्टर पर कृष्णलीला व ढोला-मारू के पारंपरिक चित्र अंकित हैं।
7. प्रमुख मंदिर व 2008 आयोग (Temples & Inquiry Commission)
🛕 चामुण्डा माता मंदिर
- राव जोधा की इष्ट देवी। 1857 में क्षतिग्रस्त होने पर तखत सिंह ने पुनर्स्थापित करवाया।
- 30 सितंबर 2008 भगदड़: नवरात्र के पहले दिन हुई भगदड़ की जाँच हेतु जसराज चोपड़ा आयोग गठित हुआ।
🕉️ नागणेची माता व जसवंत थड़ा
- नागणेची माता: राठौड़ों की कुल देवी (राव धूहड़ द्वारा कर्नाटक से नगाना, फिर जोधा द्वारा दुर्ग में स्थापित)।
- जसवंत थड़ा: 1899 में सरदार सिंह द्वारा निर्मित (जोधपुर का ताजमहल)।
8. दुर्ग की प्रमुख छतरियाँ (Chhatris / Cenotaphs)
मामा-भांजा की छतरी
लोहा पोल के पास स्थित 10 खंभों की छतरी (धन्ना और भींगा की वीरता का स्मारक)।
कीरत सिंह सोढ़ा की छतरी
जय पोल के पास स्थित वीर योद्धा कीरत सिंह सोढ़ा का बलिदान स्मारक।
ताराचंद की छतरी
दुर्ग परिसर में स्थित 8 खंभों वाली ऐतिहासिक छतरी।
9. प्रसिद्ध तोपें व अन्य संरचनाएँ (Cannons & Armoury)
दुर्ग की प्रसिद्ध तोपें: किलकिला, शम्भुबाण, गजनवाजा, कड़क बिजली, गुब्बार, नुसरत, नागपली, बिच्छुबाण, गजक एवं मीरबंज।
दौलत खाना व सिलेह खाना: औरंगज़ेब का लाल रेशमी शाही तम्बू, राव जोधा की खांडा, अकबर एवं तैमूर की ऐतिहासिक तलवारें यहाँ सुरक्षित हैं।
10. परीक्षा-उपयोगी त्वरित तथ्य (High-Yield Facts)
⚡ स्मरण रखने योग्य तथ्य (Part 1)
- निर्माता: राव जोधा (12 मई 1459, चिड़ियाटूक पहाड़ी)।
- दुर्ग प्रकार: गिरी दुर्ग, कागमुखी शैली।
- उपनाम: मयूरध्वजगढ़, चिंतामणि, सूर्य दुर्ग।
- नींव बलिदान: राजा राम मेघवाल।
⚡ स्मरण रखने योग्य तथ्य (Part 2)
- जय पोल: महाराजा मान सिंह (1808 ई.)।
- फतेह पोल: महाराजा अजीत सिंह (1707 ई.)।
- चोपड़ा आयोग: 2008 चामुण्डा मंदिर भगदड़ जाँच।
- जसवंत थड़ा: सरदार सिंह द्वारा 1899 में निर्मित।
थ्योरी पढ़ ली?
अब दें राजस्थान कला-संस्कृति टॉपिक-वाइज़ टेस्ट
प्रमुख दुर्ग, लोक नृत्य, संत-देवता, मेले-त्यौहार, वेशभूषा व चित्रकला के अध्यायवार ऑनलाइन टेस्ट हल करें। Instant Scorecard व विस्तृत व्याख्या पाएं।
मेहरानगढ़ दुर्ग : टेस्ट देवें
आरपीएससी व कर्मचारी चयन बोर्ड परीक्षा स्तर के नवीनतम वस्तुनिष्ठ प्रश्न।
Rajasthan Test Series
राजस्थान की सभी परीक्षाएं, Instant रैंक, सटीक व्याख्या व पिछले 10 वर्षों के RPSC पेपर्स का निचोड़।
⚡ 2 मिनट में एक्टिवेशन | अनलिमिटेड री-अटेम्प्ट
राजस्थान कला एवं संस्कृति
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग (3 साके) दुर्ग
- कुंभलगढ़ दुर्ग (कटारगढ़) दुर्ग
- मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर) वर्तमान
- जैसलमेर दुर्ग (सोनार किला) दुर्ग
- घूमर नृत्य (राज्य नृत्य) नृत्य
- कालबेलिया नृत्य (UNESCO) नृत्य
- अग्नि नृत्य (कतरियासर) नृत्य
- प्रमुख संत एवं लोक देवता संत
राजस्थान का इतिहास
Historyराजस्थान का भूगोल
50 ज़िलेRajasthan Exams की तैयारी अब और भी आसान — सीधे आपके मोबाइल पर!
RAJShiksha के आधिकारिक ग्रुप्स से आज ही जुड़ें जहाँ प्रतिदिन हजारों अभ्यर्थी परीक्षा की सटीक तैयारी कर रहे हैं। यहाँ आपको सभी जरूरी अपडेट्स और फ्री स्टडी मैटेरियल बिना किसी देरी के मिलेगा।
जुड़ें अपने पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर
RAJShiksha Community
⚡ एक क्लिक में तुरंत ज्वाइन करें
मेहरानगढ़ दुर्ग क्यों महत्वपूर्ण है?
मेहरानगढ़ दुर्ग राजस्थान के इतिहास, राजपूत वास्तुकला, मारवाड़ की वीरता और राठौड़ वंश की गाथा का केंद्रबिंदु है। RAS, RPSC, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इस दुर्ग से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
- 1 गिरी दुर्ग: पहाड़ी दुर्ग का उत्कृष्ट उदाहरण — कागमुखी दुर्ग श्रेणी।
- 2 7 प्रवेश द्वार: जय पोल, फतेह पोल, लोहा पोल — प्रत्येक का अपना ऐतिहासिक महत्व।
- 3 फूल महल, शीश महल, मोती महल: राजपूत एवं मुगल वास्तुकला का अद्भुत संगम।
- 4 चामुण्डा माता मंदिर: राठौड़ों की कुल देवी — 2008 भगदड़ एवं जसराज चोपड़ा आयोग।
गिरी दुर्ग
410 फीट ऊँचा
7 द्वार
जय, फतेह, लोहा
प्रमुख महल
फूल, शीश, मोती
चामुण्डा माता
2008 भगदड़
राजस्थान की सभी परीक्षाओं की टेस्ट सीरीज़ — केवल ₹29 में
CET, SI, RAS Pre, 1st/2nd Grade और राजस्थान पुलिस परीक्षा हेतु 500+ मॉक टेस्ट, लीडरबोर्ड रैंक और विस्तृत समाधान।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
मेहरानगढ़ दुर्ग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर।
अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जाएँ
राजस्थान के इतिहास, भूगोल एवं कला-संस्कृति की प्रामाणिक अध्ययन सामग्री