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राजस्थान भूगोल – कृषि, फसलें एवं कृषि-जलवायु खंड

राजस्थान की कृषि :
10 कृषि-जलवायु खंड, फसलें, रोग, मंडियां व आर्थिक समीक्षा

राजस्थान देश में बाजरा, सरसों, ग्वार एवं कुल तिलहन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि व संबद्ध क्षेत्र (GSVA) का योगदान लगभग 27% है, जिसमें पशुपालन (46.41%) का योगदान फसलों (46.00%) से भी अधिक है। यहाँ 10 कृषि-जलवायु खंड, प्रमुख फसलें, उन्नत किस्में, फसलों के रोग, विशिष्ट उपज मंडियां एवं 50 नवीन ज़िलों के आधार पर संकलित 100% प्रामाणिक नोट्स।

आर्थिक समीक्षा 2023-24 / 2024-25 प्रमाणित 10 Agro-Climatic Zones 50 नए जिले अद्यतन
कृषि सांख्यिकी सूचकांक आर्थिक समीक्षा
GSVA में कृषि क्षेत्र योगदान ~27% (प्रचलित मूल्य)
सर्वाधिक योगदान (GSVA) पशुधन (46.41%) > फसलें (46%)
शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल ~180.34 लाख हे. (52.34%)
कुल कृषि जलवायु खंड 10 खंड (IC सबसे बड़ा, IVB छोटा)
औसत जोत का आकार: 2.73 हेक्टेयर (कृषि गणना 2015-16)
गहन अध्ययन नोट्स

राजस्थान की कृषि: संपूर्ण भौगोलिक एवं आर्थिक विश्लेषण

भू-उपयोग, GSVA उप-क्षेत्र, 10 कृषि जलवायु खंड, उन्नत किस्में, फसलों के रोग, विशिष्ट उपज मंडियां व 50 नवीन ज़िलों अनुसार परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण।

1. राजस्थान कृषि के 4 आधारभूत भौगोलिक स्तंभ (Inter-linked Geography Pillars)

राजस्थान में कृषि केवल एक आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि राज्य के धरातल, वर्षा, सिंचाई और भू-गर्भीय खनिजों का सम्मिलित परिणाम है। कृषि भूगोल को संपूर्णता से समझने हेतु निम्नलिखित चारों बुनियादी भौगोलिक घटकों का गहरा अंतर्संबंध है:

थार मरुस्थल की शुष्क कृषि, पूर्वी मैदानों की सघन जलोढ़ खेती और हाड़ौती पठार की काली मिट्टी में कृषि भिन्नता को समझने हेतु राजस्थान के 4 भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण अवश्य पढ़ें।

10 कृषि जलवायु खंडों की वर्षा (200-1000 मिमी), तापमान व मावट के प्रभाव को जानने के लिए राजस्थान की जलवायु एवं कोपेन के 4 जलवायु प्रदेश (BWhw, BShw, Cwg, Aw) का अध्ययन अनिवार्य है।

गंगानगर-हनुमानगढ़ की सिंचित गेहूं-कपास व चम्बल कमांड की कृषि का आधार राजस्थान का अपवाह तंत्र, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) व झीलें हैं, जहाँ से राज्य की 70% से अधिक नहरी सिंचाई होती है।

कृषि में क्षारीय व लवणीय भूमि सुधार हेतु जिप्सम (हर्षौंठ) तथा रासायनिक उर्वरकों में रॉक फॉस्फेट (झामर कोटड़ा) के योगदान हेतु राजस्थान के खनिज संसाधन (धात्विक व अधात्विक) का अध्याय देखें।

2. भू-उपयोग सांख्यिकी एवं GSVA उप-क्षेत्रीय योगदान

राजस्थान का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 342.24 लाख हेक्टेयर है। नवीनतम आर्थिक समीक्षा के अनुसार राज्य के सकल राज्य मूल्यवर्धन (GSVA) में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान प्रचलित मूल्यों पर लगभग 27% आंका गया है।

कृषि क्षेत्र के GSVA में उप-क्षेत्रों का योगदान (प्रचलित मूल्यों पर)

1. पशुधन (Livestock) 46.41%

सर्वाधिक योगदान (फसल से अधिक)

2. फसलें (Crops) 46.00%

द्वितीय स्थान

3. वानिकी (Forestry) 7.20%

तृतीय स्थान

4. मत्स्य (Fisheries) 0.39%

न्यूनतम योगदान

*नोट: RAS Pre परीक्षा में पूछा गया क्रम: पशुधन (46.41%) > फसलें (46.00%) > वानिकी (7.20%) > मत्स्य (0.39%)

शुद्ध बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area) 52.34%

• कुल क्षेत्रफल: ~180.34 लाख हेक्टेयर
• सर्वाधिक शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल बाड़मेर जिले में तथा न्यूनतम राजसमंद में।

बंजर व अयोग्य भूमि ~10.84%

• कृषि हेतु अनुपयुक्त पथरीली व रेतीली भूमि।
• सर्वाधिक बंजर भूमि जैसलमेर जिले में स्थित है।

पड़त भूमि (Fallow Land) ~10.90%

• चालू पड़त व अन्य पड़त भूमि (उर्वरता बहाली हेतु खाली रखी गई)।
• सर्वाधिक पड़त भूमि जोधपुर ग्रामीण में पाई जाती है।

कृषि गणना 2015-16 अति-महत्वपूर्ण आंकड़े: कुल प्रचलित भू-जोतों की संख्या 76.55 लाख (जिसमें महिला जोत 7.75 लाख यानी 10.12% हैं)। औसत जोत का आकार 2.73 हेक्टेयर है (2010-11 में यह 3.07 हेक्टेयर था - 11.07% की गिरावट दर्ज हुई)।

3. राजस्थान की कृषि ऋतुएँ (Crop Seasons)

1. खरीफ (सावणू / स्यालू) वर्षा आधारित

बुवाई: जून-जुलाई (मानसून आगमन पर)।
कटाई: सितम्बर-अक्टूबर।
प्रमुख फसलें: बाजरा, मक्का, ज्वार, मूंग, मोठ, उड़द, चौंला, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, कपास, ग्वार।
स्थानीय नाम: सावणू या स्यालू।

2. रबी (उनाळू) सिंचाई आधारित

बुवाई: अक्टूबर-नवंबर (शरद ऋतु में)।
कटाई: मार्च-अप्रैल (ग्रीष्म पूर्व)।
प्रमुख फसलें: गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, अलसी, ईसबगोल, जीरा, धनिया, मेथी, लहसुन।
स्थानीय नाम: उनाळू (मावट वर्षा इसके लिए 'गोल्डन ड्रॉप्स' है)।

3. जायद (Zaid) ग्रीष्मकालीन

बुवाई: मार्च-अप्रैल।
कटाई: मई-जून।
प्रमुख फसलें: तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, मौसमी सब्जियाँ एवं हरा चारा।

4. प्रमुख फसलें, उन्नत किस्में एवं अग्रणी ज़िले

1. बाजरा (Pearl Millet) भारत में 1st Rank

देश में स्थान: क्षेत्रफल एवं उत्पादन दोनों में देश में प्रथम स्थान (~45% देश का बाजरा)।
अग्रणी ज़िले: बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर ग्रामीण (क्षेत्रफल में); जयपुर ग्रामीण, अलवर (उत्पादन में)।
उन्नत किस्में: राज-171, RHB-30, HHB-67, पूसा-मोती, WCC-75।

2. सरसों एवं राई (Mustard) भारत में 1st Rank

देश में स्थान: भारत के कुल सरसों उत्पादन का लगभग 45% राजस्थान में।
अग्रणी ज़िले: भरतपुर, खैरथल-तिजारा, अलवर, श्रीगंगानगर, टोंक।
उन्नत किस्में: वरुणा (T-59), पूसा बोल्ड, रोहिणी, माया, एनआरसीएचबी-101।
अनुसंधान: राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR) सेवर, भरतपुर (1993)।

3. गेहूं (Wheat) रबी का मुख्य खाद्यान्न

अग्रणी ज़िले: श्रीगंगानगर ('अन्न का कटोरा'), अनूपगढ़, हनुमानगढ़, कोटा, अलवर।
उन्नत किस्में: राज-3077, राज-3765, राज-4037, सोनालिका, कल्याण सोना, शरबती, कोहिनूर।

4. मक्का (Maize) मेवाड़ का मुख्य भोजन

अग्रणी ज़िले: भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, सलूंबर, बांसवाड़ा।
उन्नत किस्में: माही कंचन, माही धवल (कृषि अनुसंधान केंद्र, बोरवट बांसवाड़ा द्वारा विकसित), नवजोत, दक्कन-103।

5. चना (Gram) व ग्वार (Guar) दलहन में शीर्ष

चना: बीकानेर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं। किस्में: सम्राट, वरदान, गणगौर, C-235।
ग्वार: भारत का 70%+ उत्पादन राजस्थान में (बीकानेर, बाड़मेर, चूरू, फलौदी)।

6. कपास (बणिया) व सोयाबीन नकदी फसलें

कपास (नरमा): श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़। उन्नत किस्में: बीकानेरी नरमा, RST-9, वराहलक्ष्मी।
सोयाबीन: झालावाड़, कोटा, बाराँ, बूंदी (काली मिट्टी में प्रचुर)। किस्में: प्रताप सोया-1, NRC-37।

5. राजस्थान की फसलों के प्रमुख रोग एवं हानिकारक कीट

RPSC और RSSB परीक्षाओं में फसलों के प्रमुख रोग, कवक एवं कीटों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं:

🌾 1. बाजरा के रोग एवं कीट

अरगट (गोंदिया/चेपा): क्लैविसेप्स माइक्रोसेफेला कवक द्वारा। सिट्टों से चिपचिपा गोंद निकलता है।
हरित बाली रोग (Green Ear / जोगिया): स्क्लेरोस्पोरा ग्रेमिनीकोला कवक से। सिट्टे पत्तीनुमा झाड़ू बन जाते हैं।
सफेद लट (White Grub): होलोट्रिकिया कोन्सांगुइनिया कीट, जो जड़ों को काटकर फसल नष्ट करता है।

🌼 2. सरसों के रोग एवं कीट

सफेद रोली (White Rust): एल्बुगो कैंडिडा कवक से पत्तियों के नीचे सफेद फफोले बनते हैं।
चेपा / मोयला (Mustard Aphid): लिपॉफिस एरीसिमी कीट, जो पौधों का रस चूसकर उपज समाप्त कर देता है।
अल्टरनेरिया ब्लाइट (झुलसा रोग): पत्तियों पर भूरे छल्लेदार धब्बे।

🥜 3. मूंगफली व चना के रोग

मूंगफली का टिक्का रोग (Tikka): सर्कोस्पोरा कवक द्वारा। पत्तियों पर गोलाकार गहरे धब्बे।
चने का उकठा रोग (Wilt): फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम कवक से पौधा अचानक सूख जाता है।
चने की फली छेदक (Pod Borer): हेलिकोवर्पा आर्मिगेरा सुंडी।

🌱 4. कपास व गेहूं के रोग

कपास की गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm): पेक्टिनोफोरा गॉसिपिएला (कपास टिंडे नष्ट करती है)।
कपास का तिरका रोग: फल-फूल समय से पहले गिरना (असामयिक सूखापन)।
गेहूं का रोली / किट्ट रोग (Rust): पीली, भूरी व काली रोली (पक्सीनिया कवक द्वारा)।

6. राजस्थान के 10 कृषि-जलवायु खंड (Agro-Climatic Zones)

ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के योजना आयोग ने भारत को 15 कृषि जलवायु प्रदेशों में वर्गीकृत किया है, जिसमें राजस्थान मुख्य रूप से Zone 14 (पश्चिमी शुष्क क्षेत्र) के अंतर्गत आता है। राज्य स्तरीय कृषि नियोजन हेतु राजस्थान को 10 कृषि-जलवायु खंडों में विभाजित किया गया है (नवीन 50 जिलों के अनुसार):

खंड I-A : शुष्क पश्चिमी मैदानी खंड (Arid Western Plain) वर्षा: 200-370 मिमी

सम्मिलित ज़िले: बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर ग्रामीण, जोधपुर शहर।
मुख्य फसलें: बाजरा, मूंग, मोठ, तिल, ग्वार, ईसबगोल। अनुसंधान केंद्र: मंडोर (जोधपुर)।

खंड I-B : उत्तर-पश्चिमी सिंचित मैदानी खंड (Irrigated North-Western Plain) सिंचित नहरी क्षेत्र

सम्मिलित ज़िले: श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़।
मुख्य फसलें: गेहूं, कपास (नरमा), सरसों, किन्नू, चना। राजस्थान में उच्चतम कृषि उत्पादकता वाला खंड।

खंड I-C : अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी खंड (Hyper Arid Partially Irrigated) क्षेत्रफल में सबसे बड़ा खंड

सम्मिलित ज़िले: बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, फलौदी।
मुख्य फसलें: बाजरा, मोठ, चना, मूंगफली (लूणकरणसर), खजूर, ग्वार। केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (CIAH) बीछवाल, बीकानेर।

खंड II-A : अंतः स्थलीय जलोत्सारण का संक्रांति मैदान (Inland Drainage Zone) शेखावाटी क्षेत्र

सम्मिलित ज़िले: सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, डीडवाना-कुचामन, चूरू (आंशिक)।
मुख्य फसलें: बाजरा, मूंग, मोठ, चना, जौ, मेथी। कृषि अनुसंधान केंद्र: फतेहपुर (सीकर)।

खंड II-B : लूनी बेसिन का संक्रांति मैदान (Transitional Plain of Luni Basin) गोडवाड़ प्रदेश

सम्मिलित ज़िले: जालौर, सांचौर, पाली, सिरोही (आबू रोड छोड़कर)।
मुख्य फसलें: ईसबगोल, जीरा, अरंडी, तिल, गेहूं, सरसों।

खंड III-A : अर्ध-शुष्क पूर्वी मैदानी खंड (Semi-Arid Eastern Plain) ढूंढाड़ व मध्य क्षेत्र

सम्मिलित ज़िले: जयपुर, जयपुर ग्रामीण, दूदू, दौसा, टोंक, अजमेर, ब्यावर, केकड़ी।
मुख्य फसलें: गेहूं, बाजरा, सरसों, चना, ज्वार (अजमेर), टमाटर। RARI दुर्गापुरा (जयपुर)।

खंड III-B : बाढ़ संभाव्य पूर्वी मैदानी खंड (Flood Prone Eastern Plain) सरसों का कटोरा

सम्मिलित ज़िले: अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी।
मुख्य फसलें: सरसों, गेहूं, बाजरा, अरहर, तंबाकू।

खंड IV-A : उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान एवं अरावली पहाड़ियाँ (Sub-Humid Southern Plain) मेवाड़ अंचल

सम्मिलित ज़िले: भीलवाड़ा, शाहपुरा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद।
मुख्य फसलें: मक्का, उड़द, कपास, गेहूं, चना, अफीम (चित्तौड़गढ़)।

खंड IV-B : आर्द्र दक्षिणी मैदानी खंड (Humid Southern Plain) क्षेत्रफल में सबसे छोटा खंड

सम्मिलित ज़िले: डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़।
मुख्य फसलें: मक्का, चावल (माही सुगंधा), सोयाबीन, उड़द। कृषि अनुसंधान केंद्र: बोरवट (बांसवाड़ा)।

खंड V : आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदानी खंड (Humid South-Eastern Plain) हाड़ौती (सर्वाधिक वर्षा)

सम्मिलित ज़िले: कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़।
मुख्य फसलें: सोयाबीन (काली मिट्टी), संतरा, धनिया, लहसुन, बासमती चावल (बूंदी)। कृषि अनुसंधान केंद्र: उम्मेदगंज (कोटा)।

7. राजस्थान के कृषि उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence)

🍊 सिट्रस (संतरा/नींबू) उत्कृष्टता केंद्र

स्थान: नांता (कोटा) — इंडो-इजराइल कृषि कार्ययोजना अंतर्गत।

🍎 अनार उत्कृष्टता केंद्र

स्थान: डिंडोल (बस्सी, जयपुर) — उन्नत किस्म 'भगवा' व सिंदूरी अनार।

🍈 अमरूद उत्कृष्टता केंद्र

स्थान: देवड़ावास (टोंक) — सवाई माधोपुर व टोंक अमरूद बेल्ट हेतु।

🌴 खजूर उत्कृष्टता केंद्र

स्थान: सागरा-भोजका (जैसलमेर) — टिशू कल्चर से खजूर पौधे तैयार।

🫒 जैतून (Olive) केंद्र व रिफाइनरी

• उत्कृष्टता केंद्र: बस्सी (जयपुर)
• भारत की प्रथम ऑलिव रिफाइनरी: लूणकरणसर (बीकानेर) - ब्रांड 'राज ऑलिव'।

🥦 सब्जी, फूल एवं अंजीर केंद्र

• सब्जी: बूंदी | फूल: सवाई माधोपुर | अंजीर: सिरोही | बाजरा: बाड़मेर/जोधपुर

8. राजस्थान की प्रमुख विशिष्ट कृषि उपज मंडियाँ

जीरा मंडी

मेड़ता सिटी (डीडवाना-कुचामन) एवं जोधपुर

ईसबगोल मंडी

भीनमाल (जालौर)

धनिया मंडी

रामगंजमंडी (कोटा) - एशिया की बड़ी मंडी

संतरा व अश्वगंधा मंडी

भवानीमंडी / झालरापाटन (झालावाड़)

मेहंदी मंडी

सोजत (पाली) — GI Tag प्रमाणित

लहसुन मंडी

छीपाबड़ौद (बाराँ)

अमरूद व अमचूर मंडी

सवाई माधोपुर

किन्नू व माल्टा मंडी

श्रीगंगानगर

प्याज मंडी

अलवर (राजस्थान की सबसे बड़ी प्याज मंडी)

9. कृषि नीतियां, पृथक कृषि बजट एवं प्रमुख योजनाएं

📜 राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति (2019):

17 दिसंबर 2019 को लागू। उद्देश्य: किसानों को फसलों के प्रसंस्करण हेतु 50% या अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत अनुदान देकर कृषि निर्यात को बढ़ावा देना।

☀️ पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM) एवं राजस्थान:

देश का प्रथम सौर संयंत्र: घटक-ए (Component-A) के तहत देश का पहला 1 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र भालोजी गाँव (कोटपूतली-बहरोड़ / जयपुर) में स्थापित हुआ।
• इसके अंतर्गत किसानों को बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाने व सोलर पंप स्थापित करने हेतु अनुदान मिलता है।

📊 राजस्थान का प्रथम पृथक कृषि बजट (2022-23):

राजस्थान अलग से कृषि बजट पेश करने वाला देश का दूसरा राज्य बना। थीम: "समृद्ध किसान, खुशहाल राजस्थान"। इसके तहत 11 मिशन (राजस्थान मिलेट्स प्रोत्साहन मिशन, जैविक खेती मिशन, सूक्ष्म सिंचाई मिशन आदि) शुरू किए गए।

🌿 जैविक खेती एवं प्रमुख योजनाएं:

पहला जैविक जिला: डूंगरपुर | पहला जैविक गांव: दादिया (जयपुर)।
तारबंदी योजना: आवारा पशुओं व नीलगाय से फसल सुरक्षा हेतु 400 मीटर तारबंदी पर 50% से 60% अनुदान।
फार्म पौण्ड योजना: वर्षा जल संचयन हेतु डिग्गी/फार्म पौण्ड पर अनुदान।

10. राजस्थान के 10 कृषि जलवायु खंडों की मास्टर तुलना सारणी

कोड कृषि जलवायु खंड का नाम सम्मिलित ज़िले (50 नवीन अनुसार) प्रमुख फसलें मुख्य विशेषता / अनुसंधान
I-A शुष्क पश्चिमी मैदानी खंड बाड़मेर, बालोतरा, जोधपुर (ग्रामीण व शहर) बाजरा, मूंग, मोठ, तिल, ग्वार मंडोर अनुसंधान केंद्र (जोधपुर)
I-B सिंचित उत्तर-पश्चिमी मैदान श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़ गेहूं, कपास, सरसों, किन्नू सर्वाधिक सिंचित व उच्च उत्पादकता
I-C अति शुष्क आंशिक सिंचित मैदान बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, फलौदी बाजरा, मोठ, मूंगफली, खजूर क्षेत्रफल में सबसे बड़ा खंड
II-A अंतः प्रवाह शुष्क खंड सीकर, झुंझुनूं, नीम का थाना, डीडवाना-कुचामन बाजरा, मूंग, चना, मेथी शेखावाटी क्षेत्र, फतेहपुर केंद्र
II-B लूनी बेसिन संक्रांति मैदान जालौर, सांचौर, पाली, सिरोही ईसबगोल, जीरा, अरंडी, सरसों गोडवाड़ क्षेत्र, ईसबगोल का गढ़
III-A अर्ध-शुष्क पूर्वी मैदानी खंड जयपुर, जयपुर ग्रा., दूदू, दौसा, टोंक, अजमेर गेहूं, सरसों, बाजरा, चना दुर्गापुरा (RARI) जयपुर
III-B बाढ़ संभाव्य पूर्वी मैदान अलवर, खैरथल, भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली सरसों, गेहूं, बाजरा, अरहर सरसों का कटोरा (DRMR सेवर)
IV-A उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान भीलवाड़ा, शाहपुरा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद मक्का, उड़द, गेहूं, अफीम मेवाड़ क्षेत्र, मक्का प्रधान
IV-B आर्द्र दक्षिणी मैदानी खंड डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ मक्का, चावल, सोयाबीन, उड़द क्षेत्रफल में सबसे छोटा खंड
V आर्द्र दक्षिण-पूर्वी मैदान कोटा, बूंदी, बाराँ, झालावाड़ सोयाबीन, संतरा, धनिया, लहसुन हाड़ौती, सर्वाधिक वार्षिक वर्षा

11. परीक्षा-उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick One-Liners)

  • GSVA में कृषि उप-क्षेत्रों का सही क्रम: पशुधन (46.41%) > फसलें (46.00%) > वानिकी (7.20%) > मत्स्य (0.39%) है।
  • 'माही कंचन' व 'माही धवल' मक्का की तथा 'माही सुगंधा' चावल (धान) की उन्नत किस्में हैं।
  • बाजरे का 'अरगट' और 'हरित बाली' रोग कवक जनित है तथा 'सफेद लट' कीट इसकी जड़ों को नष्ट करता है।
  • सरसों का प्रमुख हानिकारक कीट चेपा (मोयला) है और मुख्य कवक रोग सफेद रोली है।
  • 'राजस्थान का राजकोट' लूणकरणसर (बीकानेर) को मूंगफली उत्पादन के कारण कहा जाता है।
  • एशिया का सबसे बड़ा यांत्रिक कृषि फार्म सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) में 1956 में रूस की सहायता से लगा; दूसरा जैतसर (अनूपगढ़) में कनाडा के सहयोग से स्थापित हुआ।
  • पीएम-कुसुम योजना का देश का पहला सौर संयंत्र भालोजी (कोटपूतली-बहरोड़ / जयपुर) में शुरू हुआ।
  • सर्वाधिक ईसबगोल व जीरा उत्पादक क्षेत्र नवीन ज़िलों में सांचौर, जालौर एवं फलौदी हैं।
  • राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि जलवायु खंड खंड I-C (अति शुष्क) व सबसे छोटा खंड IV-B (आर्द्र दक्षिणी) है।
  • राजस्थान देश में बाजरा, सरसों, ग्वार व कुल तिलहन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।
50 Districts Updated Geography

परीक्षार्थियों द्वारा सर्वाधिक पढ़े जा रहे राजस्थान भूगोल के अन्य प्रमुख अध्याय

High-Scoring Notes
धरातल & कृषि क्षेत्र
1. राजस्थान के भौतिक प्रदेश एवं कृषि वितरण

थार मरुस्थल की बारानी खेती (बाजरा-मोठ), अरावली की मक्का पेटी, पूर्वी मैदानों की गहन सरसों-गेहूं और हाड़ौती पठार की सोयाबीन कृषि का तुलनात्मक धरातलीय विश्लेषण।

भौतिक प्रदेश नोट्स पढ़ें
मानसून, मावट & कृषि जलवायु
2. जलवायु वर्गीकरण, कोपेन एवं वर्षा प्रवृत्तियाँ

कोपेन के BWhw से Aw वर्गीकरण, 20 से 100 सेमी समवर्षा रेखाओं का कृषि खंडों पर प्रभाव तथा रबी की फसलों (चना, गेहूं, सरसों) हेतु 'मावट' (Golden Drops) का वैज्ञानिक अध्ययन।

जलवायु & कोपेन नोट्स पढ़ें
नहरी कमान & सिंचित फसलें
3. अपवाह तंत्र, नदियाँ एवं नहरी सिंचाई नेटवर्क

इंदिरा गांधी नहर (IGNP), गंगनहर व चम्बल कमान द्वारा मरुस्थलीय जिलों (श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़) में कपास-किन्नू क्रांति तथा राज्य में कुओं, नलकूपों व नहरों का सिंचाई प्रतिशत।

अपवाह & नहरी तंत्र पढ़ें
मृदा सुधारक & उर्वरक खनिज
4. खनिज संसाधन: जिप्सम, रॉक फॉस्फेट व कृषि उपयोग

नहरी क्षेत्रों में 'सेम' व क्षारीय भूमि सुधार हेतु जिप्सम (खड़िया/हर्षौंठ), डीएपी रासायनिक खाद हेतु झामर-कोटड़ा का रॉक फॉस्फेट एवं कृषि में प्रयुक्त अधात्विक खनिजों का योगदान।

खनिज संसाधन नोट्स पढ़ें
50 नवीन ज़िले कृषि अपडेटेड नवीनतम RPSC / RSMSSB पैटर्न

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परीक्षा में महत्व

राजस्थान की कृषि क्यों अति-महत्वपूर्ण है?

RPSC RAS Pre व Mains, SI, संगणक, कृषि पर्यवेक्षक, पटवार और RSSB CET परीक्षाओं में कृषि, 10 जलवायु खंडों एवं फसलों के रोगों से हर वर्ष 4 से 6 प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • 1 10 कृषि जलवायु खंड: IC (सबसे बड़ा) व IVB (सबसे छोटा) खंड तथा 50 नवीन जिलों का सटीक पुनर्गठन।
  • 2 GSVA उप-क्षेत्रीय क्रम: पशुधन (46.41%) > फसलें (46.00%) > वानिकी (7.20%) > मत्स्य (0.39%)।
  • 3 फसलों के रोग व कीट: अरगट, जोगिया (बाजरा), सफेद रोली व चेपा (सरसों), टिक्का (मूंगफली), गुलाबी सुंडी (कपास)।
  • 4 विशिष्ट मंडियाँ व योजनाएं: रामगंजमंडी (धनिया), भीनमाल (ईसबगोल), भालोजी (PM-KUSUM देश का पहला सोलर प्लांट)।

बाजरा व सरसों

देश में 1st रैंक

10 जलवायु खंड

IC सबसे बड़ा, IVB छोटा

भालोजी गाँव

देश का 1st PM कुसुम प्लांट

46.41% पशुधन

GSVA में शीर्ष योगदान

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थान की कृषि, फसलों, रोगों व जलवायु खंडों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर।

राजस्थान को कुल 10 कृषि जलवायु खंडों में विभाजित किया गया है। इनमें क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा खंड 'IC - अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी खंड' (बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, फलौदी) तथा सबसे छोटा खंड 'IVB - आर्द्र दक्षिणी मैदानी खंड' (डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़) है।
राजस्थान के सकल राज्य मूल्यवर्धन (GSVA) में कृषि क्षेत्र के अंतर्गत सर्वाधिक योगदान पशुपालन (Livestock - लगभग 46.41%) का है। इसके बाद फसल क्षेत्र (Crops - 46.00%), वानिकी (Forestry - 7.20%) तथा मत्स्य (Fisheries - 0.39%) का स्थान आता है।
बाजरे में अरगट (गोंदिया) व हरित बाली (जोगिया) रोग; सरसों में सफेद रोली (White Rust) व चेपा (मोयला) कीट; तथा मूंगफली में टिक्का (Tikka) रोग प्रमुखता से पाया जाता है।
पीएम-कुसुम (PM-KUSUM) योजना के कंपोनेंट-ए के तहत देश का पहला 1 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र राजस्थान के भालोजी गाँव (कोटपूतली-बहरोड़) में स्थापित किया गया।
प्रमुख मंडियाँ: ईसबगोल मंडी - भीनमाल (जालौर), जीरा मंडी - मेड़ता सिटी व जोधपुर, धनिया मंडी - रामगंजमंडी (कोटा), संतरा व अश्वगंधा मंडी - झालावाड़, लहसुन मंडी - छीपाबड़ौद (बाराँ) तथा मेहंदी मंडी - सोजत (पाली)

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