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स्थानीय निकायों का वित्तीय प्रहरी : अनुच्छेद 243-I एवं 243-Y

राजस्थान राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) :
संवैधानिक स्थिति, 1st से 6th आयोग अध्यक्ष, कर वितरण एवं संपूर्ण सिफारिशें

स्थानीय स्वशासन की राजकोषीय स्वायत्तता का सर्वोच्च संवैधानिक अध्ययन — अनुच्छेद 243-I (पंचायती राज) एवं अनुच्छेद 243-Y (नगरीय निकाय), आयोग का गठन, संरचना व अर्हताएँ, राज्य के शुद्ध कर राजस्व का 6.75% कर वितरण फॉर्मूला, पंचायतों (75.10%) एवं नगरपालिकाओं (24.90%) का आवंटन अनुपात, प्रथम वित्त आयोग (के.के. गोयल - 1995) से छठे वित्त आयोग (प्रद्युम्न सिंह - 2020-25) तक की प्रामाणिक सूची, केंद्रीय वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) से संबंध व विगत RPSC/RAS परीक्षाओं का गहन विश्लेषण।

संवैधानिक प्रावधान Art. 243-I व 243-Y
प्रथम अध्यक्ष (1995) श्री के.के. गोयल
छठे आयोग अध्यक्ष श्री प्रद्युम्न सिंह
कर अंतरण अनुपात 6.75% शुद्ध कर
भारतीय संविधान भाग-9 व 9A, राज्य राजकोषीय स्वायत्तता एवं 6th वित्त आयोग संदर्भ

राजस्थान राज्य वित्त आयोग : अनुच्छेद 243-I व 243-Y, कर अंतरण व सम्पूर्ण कालक्रम

73वें व 74वें संशोधन के तहत संवैधानिक व्यवस्था, राज्यपाल द्वारा 5 वर्षीय गठन, 1 अध्यक्ष + अधिकतम 4 सदस्य, शुद्ध कर राजस्व का 6.75% अंतरण, 1st से 6th आयोग अध्यक्ष सूची व विगत RPSC प्रश्न।

1. राज्य वित्त आयोग का संवैधानिक ढाँचा (Articles 243-I & 243-Y)

73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा स्थानीय स्वशासन (पंचायतों एवं नगरपालिकाओं) को न केवल प्रशासनिक शक्तियाँ दी गईं, बल्कि उनकी वित्तीय आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने हेतु एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission - SFC) का गठन अनिवार्य किया गया:

अनुच्छेद 243-I (पंचायती राज हेतु)

73वें संशोधन के तहत राज्य का राज्यपाल 73वें संशोधन के लागू होने के 1 वर्ष के भीतर तथा उसके पश्चात् प्रत्येक 5 वर्ष की समाप्ति पर पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद) की वित्तीय स्थिति की समीक्षा हेतु वित्त आयोग का गठन करेगा।

अनुच्छेद 243-Y (नगरीय निकायों हेतु)

74वें संशोधन के तहत यह उपबंध किया गया कि अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत गठित वित्त आयोग ही नगरीय स्थानीय निकायों (नगर निगम, नगर परिषद व बोर्ड) की वित्तीय स्थिति का पुनरावलोकन करेगा तथा राज्यपाल को संस्तुतियाँ प्रस्तुत करेगा।

2. राजस्थान राज्य वित्त आयोग की संरचना एवं सेवा शर्तें

आयोग की संरचना (Composition): राजस्थान राज्य वित्त आयोग में 1 अध्यक्ष तथा अधिकतम 4 अन्य सदस्य हो सकते हैं (राजस्थान में सामान्यतः 1 अध्यक्ष + 2 सदस्य + 1 सदस्य सचिव नियुक्त किए जाते हैं)।
नियुक्ति एवं कार्यकाल: आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। आयोग का कार्यकाल राज्यपाल के आदेश द्वारा निर्धारित अवधि (सामान्यतः संस्तुति रिपोर्ट सौंपने तक) के लिए होता है।
संवैधानिक अर्हताएँ: अध्यक्ष सार्वजनिक मामलों का अनुभवी राजनीतिज्ञ या प्रशासक होता है। सदस्यों में अर्थशास्त्र, लोक वित्त, प्रशासन तथा स्थानीय स्वशासन की वित्तीय प्रणाली का विशिष्ट ज्ञान रखने वाले विशेषज्ञ शामिल होते हैं।

3. राज्य वित्त आयोग के कार्य एवं विचारार्थ विषय (Mandate & Duties)

संविधान के अनुच्छेद 243-I के अनुसार राज्य वित्त आयोग निम्नलिखित विषयों पर राज्यपाल को सिफारिशें प्रस्तुत करता है:

1. करों के शुद्ध आगमों का विभाजन (Devolution of Net Tax Proceeds): राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, पथकरों (Tolls) और फीसों के शुद्ध आगमों का राज्य तथा पंचायतों व नगरपालिकाओं के मध्य वितरण का अनुपात तय करना।
2. करों का समनुदेशन (Assignment of Taxes): ऐसे कर, शुल्क या पथकर निर्धारित करना जो पंचायतों और नगरपालिकाओं को सीधे वसूलने हेतु सौंपे जा सकते हैं।
3. सहायता अनुदान (Grants-in-Aid): राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) में से पंचायतों एवं नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले सहायता अनुदान के सिद्धांत तय करना।
4. राज्यपाल के समक्ष प्रतिवेदन एवं सदन में प्रस्तुति: आयोग अपनी सिफारिशें राज्यपाल को सौंपता है। राज्यपाल इन सिफारिशों को स्पष्टीकारक ज्ञापन (Action Taken Report - ATR) सहित राजस्थान विधानसभा के पटल पर रखवाता है।

4. राजस्थान के 1st से 6th राज्य वित्त आयोगों की ऐतिहासिक सारणी

वित्त आयोग अध्यक्ष का नाम सिफारिश अवधि (कार्यकाल) सदस्य / विशिष्ट परीक्षा तथ्य
1st वित्त आयोग श्री कृष्ण कुमार गोयल (के.के. गोयल) 1995 से 2000 (गठन: 1994) राजस्थान के प्रथम राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष। इन्होंने राज्य के शुद्ध कर राजस्व का 2.18% स्थानीय निकायों को देने की सिफारिश की थी।
2nd वित्त आयोग श्री हीरालाल देवपुरा 2000 से 2005 (गठन: 1999) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री रहे थे। इन्होंने 2.25% कर अंतरण की सिफारिश की थी।
3rd वित्त आयोग श्री माणिक चंद सुराणा 2005 से 2010 (गठन: 2005) वरिष्ठ विधायक एवं अर्थशास्त्री। इन्होंने सिफारिश को बढ़ाकर 3.5% करने का सुझाव दिया था।
4th वित्त आयोग डॉ. बी.डी. कल्ला (बुलाकी दास कल्ला) 2010 से 2015 (गठन: 2011) पूर्व मंत्री। इन्होंने राज्य के शुद्ध कर राजस्व का 5% हिस्सा स्थानीय निकायों को देने की क्रांतिकारी सिफारिश की।
5th वित्त आयोग डॉ. ज्योति किरण शुक्ला 2015 से 2020 (गठन: 2015) राजस्थान राज्य वित्त आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष। सदस्य: श्री एस.सी. देराश्री। कर अंतरण अनुपात 7.182% अनुशंसित।
6th वित्त आयोग (वर्तमान) श्री प्रद्युम्न सिंह 2020 से 2025 (गठन: 12 अप्रै. 2021) वर्तमान आयोग। पूर्व वित्त मंत्री। सदस्य: श्री अशोक लाहोटी व डॉ. लक्ष्मण सिंह रावत। 6.75% कर अंतरण की सिफारिश

5. छठा राज्य वित्त आयोग (6th SFC) : गठन, संरचना एवं प्रमुख सिफारिशें

राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा 12 अप्रैल 2021 को छठे राज्य वित्त आयोग के गठन की अधिसूचना जारी की गई। इसका कार्यकाल वर्ष 2020-21 से 2024-25 (5 वर्ष) की अवधि हेतु निर्धारित किया गया:

आयोग की पूर्ण संरचना (Members)

  • अध्यक्ष: श्री प्रद्युम्न सिंह (वरिष्ठ राजनेता व पूर्व वित्त मंत्री)।
  • सदस्य 1: श्री अशोक लाहोटी (पूर्व सांगानेर विधायक व पूर्व जयपुर महापौर)।
  • सदस्य 2: डॉ. लक्ष्मण सिंह रावत (पूर्व भीम विधायक)।
  • सलाहकार / सचिव: श्री एस.सी. देराश्री।

प्रमुख राजकोषीय सिफारिश (Key Formula)

  • राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व (Net Own Tax Revenue) का 6.75% हिस्सा स्थानीय निकायों में बांटा जाए।
  • जिलों एवं निकायों में क्षैतिज वितरण का सूत्र (Horizontal Devolution Formula):
    छठे राज्य वित्त आयोग (प्रद्युम्न सिंह) ने स्थानीय निकायों के बीच बजट का निष्पक्ष वितरण करने हेतु निम्नलिखित 3 मापदंडों का भारांक (Weightage) निर्धारित किया है:
    1. वर्ष 2011 की जनगणना (Population): 75% भार (सर्वाधिक)
    2. जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल (Area): 15% भार
    3. बुनियादी ढांचा व प्रति व्यक्ति आय दूरी (Distance/Infra): 10% भार

6. स्थानीय निकायों में वित्तीय अंतरण का गणित (Devolution Ratio Flowchart)

छठे राज्य वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित 6.75% राशि का ग्रामीण एवं शहरी संस्थाओं के मध्य विभाजन अनुपात इस प्रकार है:

छठे वित्त आयोग का 6.75% कर वितरण फॉर्मूला
राज्य का शुद्ध कर राजस्व : 6.75% पंचायती राज संस्थाएँ : 75.10% ग्राम पंचायत (75%) पंचायत समिति (20%) जिला परिषद (5%) नगरीय स्थानीय निकाय : 24.90% नगर निगम, नगर परिषद व बोर्ड
A. ग्रामीण vs शहरी अनुपात (कर अंतरण): 2011 की जनगणना के आधार पर राज्य के शुद्ध कर राजस्व का 75.10% हिस्सा पंचायती राज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, समिति, जिला परिषद) को तथा 24.90% हिस्सा नगरीय निकायों (नगर निगम, परिषद, बोर्ड) को हस्तांतरित किया जाता है।
B. पंचायती राज में त्रिस्तरीय विभाजन: पंचायतों को मिलने वाली कुल राशि में से सर्वाधिक 75% राशि ग्राम पंचायतों को, 20% राशि पंचायत समितियों को तथा 5% राशि जिला परिषदों को आवंटित होती है।

7. केंद्रीय वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) बनाम राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I)

तुलना का आधार केंद्रीय वित्त आयोग (Central Finance Commission) राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission)
संवैधानिक अनुच्छेद अनुच्छेद 280 (भाग-12) अनुच्छेद 243-I एवं 243-Y (भाग-9 व 9A)
गठनकर्ता भारत का राष्ट्रपति (प्रत्येक 5 वर्ष में) संबंधित राज्य का राज्यपाल (प्रत्येक 5 वर्ष में)
संरचना 1 अध्यक्ष + 4 अन्य सदस्य (कुल 5) 1 अध्यक्ष + अधिकतम 4 सदस्य (राजस्थान में 1+2)
मुख्य कार्य केंद्र और राज्यों के मध्य करों का विभाजन राज्य और स्थानीय स्वशासी निकायों में करों का विभाजन
प्रतिवेदन प्रस्तुति राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों में रखवाते हैं राज्यपाल राज्य विधानसभा के पटल पर रखवाते हैं
संवैधानिक कड़ी (Article 280(3)(bb) & (c)): 73वें व 74वें संशोधन द्वारा केंद्रीय वित्त आयोग का भी यह कर्तव्य बनाया गया कि वह राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य में पंचायतों व नगरपालिकाओं के संसाधनों की पूर्ति हेतु राज्य की संचित निधि के संवर्धन के उपाय सुझाए।

8. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ संवैधानिक व गठन तथ्य

  • पंचायती राज हेतु अनुच्छेद: Art. 243-I.
  • नगरीय निकाय हेतु अनुच्छेद: Art. 243-Y.
  • गठन प्राधिकारी: राज्यपाल (प्रत्येक 5 वर्ष में).
  • प्रथम आयोग गठन: 23 अप्रैल 1994 (के.के. गोयल).
  • प्रथम महिला अध्यक्ष: डॉ. ज्योति किरण (5वां आयोग).
  • पूर्व मुख्यमंत्री अध्यक्ष: हीरालाल देवपुरा (2रा आयोग).

⚡ 6ठे वित्त आयोग तथ्य

  • छठे आयोग अध्यक्ष: प्रद्युम्न सिंह.
  • छठे आयोग सदस्य: अशोक लाहोटी व लक्ष्मण सिंह रावत.
  • कुल शुद्ध कर अंतरण: 6.75% हिस्सा.
  • पंचायती राज हिस्सा: 75.10%.
  • नगरीय निकाय हिस्सा: 24.90%.
  • ग्राम पंचायत आवंटन: 75% (पंचायती हिस्से में से).

9. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: राजस्थान के छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन हैं? [RAS Pre 2021 / EO-RO 2023]

उत्तर: श्री प्रद्युम्न सिंह। (सदस्य: श्री अशोक लाहोटी एवं डॉ. लक्ष्मण सिंह रावत)।

प्रश्न 2: राजस्थान में प्रथम राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन थे? [School Lecturer 2020 / Patwar 2021]

उत्तर: श्री कृष्ण कुमार गोयल (के.के. गोयल)। (कार्यकाल: 1995-2000)।

प्रश्न 3: संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति के पुनरावलोकन हेतु राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है? [College Lecturer 2016]

उत्तर: अनुच्छेद 243-Y। (तथा पंचायती राज संस्थाओं हेतु अनुच्छेद 243-I में प्रावधान है)।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

राजकोषीय स्वायत्तता

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): राजस्थान के छठे राज्य वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित कर अंतरण फॉर्मूला (Devolution Formula) को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर संकेत: राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व का 6.75% स्थानीय निकायों को आवंटन। इसमें से 75.10% पंचायती राज को (ग्राम पंचायत 75%, समिति 20%, जिला परिषद 5%) तथा 24.90% नगरीय निकायों को। क्षैतिज वितरण में 2011 जनसंख्या को 75% भार दिया गया।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राज्य वित्त आयोग, अनुच्छेदों, 1st से 6th आयोग अध्यक्षों व कर अंतरण फॉर्मूला से जुड़े प्रश्नोत्तर।

राजस्थान राज्य वित्त आयोग का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-I (पंचायती राज संस्थाओं हेतु) तथा अनुच्छेद 243-Y (नगरीय निकायों हेतु) के अंतर्गत प्रत्येक 5 वर्ष में संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
राजस्थान के प्रथम राज्य वित्त आयोग का गठन 23 अप्रैल 1994 को किया गया था तथा इसने वर्ष 1995 से 2000 तक की अवधि हेतु सिफारिशें दीं। प्रथम राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार गोयल (के.के. गोयल) थे।
वर्तमान में राजस्थान में छठा राज्य वित्त आयोग (6th State Finance Commission, 2020-2025) कार्यरत है। इसके अध्यक्ष पूर्व वित्त मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह हैं। इसके सदस्य श्री अशोक लाहोटी एवं डॉ. लक्ष्मण सिंह रावत हैं।
छठे राज्य वित्त आयोग ने राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व (Net Own Tax Revenue) का 6.75% हिस्सा स्थानीय निकायों को हस्तांतरित करने की सिफारिश की है। इस राशि में से 75.10% हिस्सा पंचायती राज को तथा 24.90% हिस्सा नगरीय निकायों को आवंटित किया जाता है।
पंचायती राज संस्थाओं को आवंटित 75.10% हिस्से का त्रिस्तरीय संस्थागत वितरण इस प्रकार है: ग्राम पंचायत = 75%, पंचायत समिति = 20%, तथा जिला परिषद = 5%

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