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जनजातीय स्वशासन का अधिकार : संविधान की 5वीं अनुसूची एवं पेसा (PESA)

पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act in Rajasthan) :
भूरिया समिति, टीएसपी क्षेत्र, ग्राम सभा के संप्रभु अधिकार व राजस्थान नियम 1999

राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों (TSP Area) में पारंपरिक जनजातीय लोकतंत्र का संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन — दिलीप सिंह भूरिया समिति (1995) की सिफारिशें, 24 दिसंबर 1996 को पेसा कानून का लागू होना, संविधान का अनुच्छेद 243M, राजस्थान अनुसूचित क्षेत्र नियम 1999 व 2011, ग्राम सभा को संप्रभु अधिकार (लघु वनोपज MFP पर स्वामित्व, गौण खनिजों के पट्टे, भूमि अधिग्रहण निषेध, शराबबंदी नियंत्रण, साहूकारी नियमन), राजस्थान के 8 टीएसपी जिलों में 100% अध्यक्ष आरक्षण एवं RPSC/RAS परीक्षाओं हेतु प्रामाणिक नोट्स।

सिफारिश समिति दिलीप सिंह भूरिया (1995)
लागू होने की तिथि 24 दिसंबर 1996
राजस्थान नियम 1999 एवं 2011
अध्यक्ष पदों पर आरक्षण 100% ST आरक्षित
भारतीय संविधान 5वीं अनुसूची, अनुच्छेद 243M एवं जनजातीय स्वशासन संदर्भ

पेसा अधिनियम, 1996 : राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र (TSP), भूरिया समिति व ग्राम सभा अधिकार

दिलीप सिंह भूरिया समिति 1995, अनुच्छेद 243M का अपवाद, राजस्थान अनुसूचित क्षेत्र नियम 1999, ग्राम सभा के संप्रभु अधिकार (लघु वनोपज, गौण खनिज पट्टे, भूमि नियंत्रण), 8 टीएसपी जिलों में 100% अध्यक्ष आरक्षण व विगत RPSC प्रश्न।

1. पेसा अधिनियम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं दिलीप सिंह भूरिया समिति (1995)

जब वर्ष 1992 में संसद द्वारा 73वाँ संविधान संशोधन पारित किया गया, तो संविधान के अनुच्छेद 243M(1) के तहत यह प्रावधान किया गया कि पंचायती राज से संबंधित भाग-9 के प्रावधान संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) पर स्वतः लागू नहीं होंगे। इसका कारण यह था कि जनजातीय समुदायों की अपनी पारंपरिक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक शासन प्रणालियाँ (Customary Laws) थीं।

दिलीप सिंह भूरिया समिति (Bhuria Committee - 1995): अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज के विस्तार हेतु केंद्र सरकार ने वरिष्ठ सांसद दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में 22-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की। इस समिति ने वर्ष 1995 में अपनी ऐतिहासिक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सिफारिश की गई कि जनजातियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और प्राकृतिक संसाधनों (जल, जंगल, जमीन) पर उनके सामुदायिक नियंत्रण को कानूनी मान्यता दी जानी चाहिए।
पेसा कानून का पारित होना (24 दिसंबर 1996): भूरिया समिति की सिफारिशों के आधार पर संसद द्वारा 'पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996' (The Provisions of the Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 - PESA) पारित किया गया, जिसे 24 दिसंबर 1996 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।

2. संवैधानिक आधार : अनुच्छेद 243M एवं 5वीं अनुसूची का अंतर्संबंध

संविधान के अनुच्छेद 243M(4)(b) में संसद को यह विशिष्ट शक्ति प्रदान की गई थी कि संसद विधि बनाकर भाग-9 के प्रावधानों को 5वीं अनुसूची के क्षेत्रों में ऐसे अपवादों एवं उपांतरणों (Exceptions and Modifications) के साथ विस्तारित कर सकती है, जो वह उचित समझे। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने पेसा कानून बनाया।

संविधान की 5वीं अनुसूची (5th Schedule): भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) के तहत 5वीं अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा व मिजोरम को छोड़कर 10 राज्यों (जिसमें राजस्थान सम्मिलित है) के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन व नियंत्रण के विशेष प्रावधान हैं। यहाँ राज्यपाल को असाधारण विधायी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।

3. पेसा अधिनियम, 1996 के मुख्य उद्देश्य एवं प्रमुख विधिक विशेषताएँ

  • पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा: जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाजों, धार्मिक प्रथाओं एवं पारंपरिक सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन की सुरक्षा करना।
  • ग्राम सभा को केंद्रीय स्थिति: सामान्य पंचायती राज में जहाँ निर्वाचित प्रतिनिधियों (सरपंच/प्रधान) की प्रधानता होती है, वहीं पेसा में 'ग्राम सभा' (Gram Sabha) को सर्वोच्च संप्रभु अधिकार दिए गए हैं।
  • उच्च स्तरों द्वारा शक्तियों का गैर-अपहरण: अधिनियम की धारा 4(o) स्पष्ट करती है कि जिला परिषद या पंचायत समिति जैसे उच्च स्तर ग्राम सभा की शक्तियों और अधिकारों का अतिक्रमण या हनन नहीं कर सकते।
  • जल, जंगल और जमीन पर नियंत्रण: जनजातियों को उनकी भूमि से बेदखल होने से बचाना तथा प्राकृतिक संसाधनों पर सामुदायिक मालिकाना हक देना।

4. पेसा कानून के तहत ग्राम सभा के संप्रभु एवं विशेषाधिकार (धारा 4)

पेसा अधिनियम, 1996 की धारा 4(m) के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभा को निम्नलिखित क्षेत्रों में असाधारण और बाध्यकारी शक्तियाँ प्रदान की गई हैं:

पेसा अधिनियम : ग्राम सभा के संप्रभु अधिकारों का मॉडल
पेसा ग्राम सभा (संप्रभु अधिकार) 1. लघु वनोपज (MFP) स्वामित्व 2. गौण खनिज पट्टे पूर्व सहमति 3. भूमि बेदखली पर पूर्ण रोक 4. शराब व साहूकारी पर नियंत्रण
1. लघु वनोपज का स्वामित्व (Ownership of Minor Forest Produce - MFP): तेंदूपत्ता, महुआ, गोंद, लाख, शहद, बांस तथा औषधीय जड़ी-बूटियों जैसी लघु वनोपजों के संग्रहण, उपयोग तथा विपणन (बिक्री) का पूर्ण मालिकाना हक ग्राम सभा में निहित है।
2. गौण खनिजों हेतु पूर्व अनिवार्य परामर्श (Minor Minerals): पेसा क्षेत्र में बजरी, कंकड़, पत्थर, संगमरमर जैसे गौण खनिजों के पूर्वेक्षण लाइसेंस (Prospecting Licence) या खनन पट्टे (Mining Lease) देने अथवा नीलामी से पूर्व ग्राम सभा की अनुशंसा या सहमति अनिवार्य है।
3. जनजातीय भूमि हस्तांतरण पर निषेध व वापसी (Alienation of Land): अनुसूचित क्षेत्र में किसी आदिवासी की भूमि किसी गैर-आदिवासी को बेची या हस्तांतरित नहीं की जा सकती। यदि पूर्व में किसी अवैध तरीके से भूमि छीनी गई है, तो ग्राम सभा को उस भूमि को पुनः मूल आदिवासी खातेदार को वापस दिलाने का विधिक अधिकार प्राप्त है।
4. नशीले पदार्थों एवं शराब पर नियंत्रण: ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में देशी-विदेशी शराब की दुकानों के संचालन, बिक्री अथवा शराब के सेवन को विनियमित या पूर्णतः प्रतिबंधित करने का अधिकार है।
5. साहूकारी एवं स्थानीय बाजारों का प्रबंधन: जनजातियों को कर्ज के जाल से बचाने हेतु गैर-संस्थागत साहूकारों पर नियंत्रण तथा स्थानीय हाट-बाजारों व मेलों का प्रबंधन ग्राम सभा द्वारा किया जाता है।
🌿 राजस्थान सरकार की नवीन पेसा अधिसूचना (अगस्त 2022 - सशक्तिकरण):

राजस्थान सरकार द्वारा अगस्त 2022 में जारी विशेष अधिसूचना के तहत पेसा ग्राम सभाओं को 3 नए निर्णायक अधिकार दिए गए हैं:
1. सामुदायिक वन संसाधनों का प्रबंधन: ग्राम सभा अपनी सीमा में स्थित वनों के संरक्षण व लघु वनोपज की न्यूनतम समर्थन दर (MSP) तय करने हेतु अधिकृत है।
2. पुलिस थाने की जवाबदेही: पेसा क्षेत्र में किसी भी ग्रामीण की गिरफ्तारी पर संबंधित पुलिस थाने द्वारा स्थानीय ग्राम सभा को सूचना देना अनिवार्य किया गया है।
3. सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): गांव में संचालित समस्त सरकारी योजनाओं के मस्टररोल व बिलों के सत्यापन का अंतिम अधिकार ग्राम सभा के पास सुरक्षित है।

5. राजस्थान में पेसा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अनुसूचित क्षेत्र (TSP Districts)

राष्ट्रपति द्वारा 5वीं अनुसूची के तहत घोषित राजस्थान के जनजातीय उप-योजना (Tribal Sub-Plan - TSP) क्षेत्र पेसा अधिनियम के दायरे में आते हैं। वर्ष 2018 की राष्ट्रपति अधिसूचना तथा 2023 के नवीन जिला पुनर्गठन के अनुसार राजस्थान के कुल 8 जिले पेसा के अंतर्गत आते हैं:

A. पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र वाले जिले (3 जिले)

  • बांसवाड़ा (Banswara): संपूर्ण जिला (संभाग मुख्यालय)।
  • डूंगरपुर (Dungarpur): संपूर्ण जिला।
  • प्रतापगढ़ (Pratapgarh): संपूर्ण जिला।

ये तीनों जिले मिलकर राजस्थान का नवगठित बांसवाड़ा संभाग बनाते हैं, जो पूर्णतः पेसा संभाग है।

B. आंशिक अनुसूचित क्षेत्र वाले जिले (5 जिले)

  • उदयपुर: कोटड़ा, झाड़ोल, लसाड़िया, गोगुंदा, खेरवाड़ा आदि तहसीलें।
  • सलूंबर (Salumbar - नया जिला): सलूंबर, सेमारी, सराड़ा क्षेत्र।
  • राजसमंद: कुंभलगढ़ व नाथद्वारा की आंशिक पंचायतें।
  • चित्तौड़गढ़: बड़ी सादड़ी व डूंगला की आंशिक पंचायतें।
  • सिरोही: आबूरोड एवं पिंडवाड़ा की जनजातीय पंचायतें।

6. राजस्थान पेसा नियम 1999 एवं 2011 : राज्य स्तरीय वैधानिक ढाँचा

राजस्थान पेसा नियम, 1999: केंद्र सरकार द्वारा 1996 में पेसा अधिनियम पारित करने के बाद राजस्थान सरकार ने राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने के संबंध में उपांतरण) नियम, 1999 अधिसूचित किए। इसके तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के कई प्रावधानों को अनुसूचित क्षेत्रों हेतु संशोधित किया गया।
अध्यक्षीय पदों पर 100% आरक्षण (धारा 4(g)): पेसा कानून का सबसे विशिष्ट प्रावधान यह है कि अनुसूचित क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच, सभी पंचायत समितियों के प्रधान तथा जिला परिषदों के जिला प्रमुख के 100% पद केवल अनुसूचित जनजाति (ST) के अभ्यर्थियों हेतु आरक्षित होंगे।
सदस्य पदों पर आरक्षण: वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद सदस्यों के कम से कम 50% पद ST वर्ग हेतु आरक्षित होते हैं, जबकि शेष पदों पर सामान्य या अन्य वर्गों का प्रतिनिधित्व हो सकता है।
संबंधित अध्ययन: पेसा अधिनियम मूल रूप से राजस्थान पंचायती राज व्यवस्था (73वाँ संशोधन) का ही आदिवासी क्षेत्रों में विस्तार है। इन क्षेत्रों में पंचायतों के वित्तीय आवंटन की समीक्षा राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I) द्वारा की जाती है।

7. सामान्य पंचायत राज (73वाँ संशोधन) बनाम पेसा पंचायत (PESA Act 1996) तुलना

तुलना का आधार सामान्य पंचायती राज (73वाँ संशोधन - गैर-टीएसपी) पेसा क्षेत्र पंचायती राज (PESA Act 1996 - टीएसपी)
सर्वोच्च संस्था ग्राम पंचायत स्तर पर निर्वाचित पंचायत/सरपंच प्रभावशाली। ग्राम सभा संप्रभु एवं सर्वोच्च है; निर्वाचित पंचायत इसकी कार्यकारी शाखा मात्र है।
लघु वनोपज (MFP) अधिकार राज्य वन विभाग के नियंत्रण में। ग्राम सभा का पूर्ण मालिकाना हक (तेंदूपत्ता, महुआ, बांस आदि पर)।
गौण खनिज खनन पट्टा राज्य खान विभाग द्वारा सीधे नीलामी। ग्राम सभा से पूर्व अनुमति व अनुशंसा अनिवार्य
भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत राज्य सरकार सीधे अधिग्रहित करती है। भूमि अधिग्रहण या पुनर्वास से पूर्व ग्राम सभा से परामर्श अनिवार्य
अध्यक्षीय आरक्षण (सरपंच/प्रधान) चक्रानुक्रम (Rotation) से सामान्य, SC, ST, OBC को आवंटित। 100% पद केवल अनुसूचित जनजाति (ST) हेतु आरक्षित।

8. पेसा के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ एवं प्रशासनिक सुधार

1. अन्य कानूनों के साथ टकराव (Conflict of Laws): भारतीय वन अधिनियम 1927, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 तथा खान एवं खनिज (विनियमन व विकास) अधिनियम के कतिपय प्रावधानों के साथ पेसा की ग्राम सभा शक्तियों का टकराव होता है।
2. जनजातियों में जागरूकता का अभाव: सुदूर वागड़ व अरावली अंचलों में ग्रामीणों व पारंपरिक मुखियाओं को अपने वैधानिक अधिकारों (विशेषतः लघु वनोपज व खनन परामर्श) की पर्याप्त जानकारी न होना।

9. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ कानून व समिति तथ्य

  • पेसा समिति: दिलीप सिंह भूरिया समिति (1995).
  • अधिनियम पारित: 24 दिसंबर 1996.
  • संबंधित अनुसूची: संविधान की 5वीं अनुसूची.
  • संवैधानिक अनुच्छेद: अनुच्छेद 243M.
  • राजस्थान पेसा नियम: वर्ष 1999.

⚡ अधिकार व आरक्षण तथ्य

  • सर्वोच्च शक्ति: ग्राम सभा (Gram Sabha).
  • अध्यक्ष पदों पर आरक्षण: 100% ST वर्ग हेतु.
  • सदस्य पदों पर आरक्षण: न्यूनतम 50% ST हेतु.
  • लघु वनोपज स्वामित्व: पूर्णतः ग्राम सभा के अधीन.
  • पूर्ण टीएसपी संभाग: बांसवाड़ा संभाग (3 जिले).

10. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) किस समिति की सिफारिशों पर आधारित था? [RAS Pre 2021]

उत्तर: दिलीप सिंह भूरिया समिति (Bhuria Committee, 1995)।

प्रश्न 2: पेसा अधिनियम के अंतर्गत ग्राम सभा को निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार प्राप्त नहीं है? [College Lecturer 2021]

(A) लघु वनोपज का स्वामित्व
(B) शराब की बिक्री पर विनियमन
(C) बड़े बांधों के निर्माण की अंतिम वित्तीय स्वीकृति
(D) साहूकारी पर नियंत्रण
उत्तर: (C) — बड़े बांधों की तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति राज्य सरकार के अधीन होती है, ग्राम सभा के पास केवल पुनर्वास व भूमि अधिग्रहण पर परामर्श का अधिकार है।

प्रश्न 3: राजस्थान के किन जिलों के सभी पंचायत क्षेत्र पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र (TSP) में आते हैं? [School Lecturer 2020]

उत्तर: बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

Tribal Self Rule

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों (TSP) में पेसा अधिनियम 1996 के तहत ग्राम सभा को प्राप्त किन्हीं पाँच संप्रभु अधिकारों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर संकेत: 1. लघु वनोपज (MFP) पर पूर्ण सामुदायिक स्वामित्व, 2. गौण खनिज खनन पट्टे जारी करने से पूर्व अनिवार्य परामर्श, 3. गैर-आदिवासियों को भूमि हस्तांतरण रोकने व बेदखली का अधिकार, 4. मदिरा (शराब) बिक्री व सेवन पर नियंत्रण, 5. साहूकारी व स्थानीय बाजारों का नियमन।
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पेसा अधिनियम 1996, भूरिया समिति, टीएसपी क्षेत्र व ग्राम सभा अधिकारों से जुड़े प्रश्नोत्तर।

पेसा अधिनियम सांसद दिलीप सिंह भूरिया की अध्यक्षता में गठित समिति (Bhuria Committee, 1995) की सिफारिशों के आधार पर संसद द्वारा पारित किया गया और 24 दिसंबर 1996 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात लागू हुआ।
संविधान के अनुच्छेद 243M(1) के अनुसार 73वें संशोधन का भाग-9 संविधान की 5वीं अनुसूची के अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होता था। पेसा अधिनियम का मुख्य उद्देश्य संविधान के भाग-9 के प्रावधानों को आवश्यक संशोधनों के साथ 5वीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों में विस्तारित करना तथा जनजातियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं स्वशासन को कानूनी मान्यता देना है।
राजस्थान सरकार द्वारा पेसा अधिनियम 1996 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु 'राजस्थान पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने के संबंध में उपांतरण) नियम, 1999' अधिसूचित किए गए।
पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को असाधारण शक्तियाँ प्राप्त हैं: 1. लघु वनोपज (MFP) का पूर्ण स्वामित्व, 2. गौण खनिजों के खनन पट्टे जारी करने से पूर्व अनिवार्य परामर्श, 3. जनजातीय भूमि के अवैध हस्तांतरण को रोकना व कब्जा मुक्त कराना, 4. नशीले पदार्थों/शराब पर नियंत्रण, तथा 5. साहूकारी पर नियंत्रण।
राजस्थान के 8 जिले पेसा के दायरे में आते हैं: पूर्णतः टीएसपी जिले—बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं प्रतापगढ़; तथा आंशिक टीएसपी क्षेत्र—उदयपुर, सलूंबर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ एवं सिरोही (आबूरोड)।

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