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क्षेत्रीय शासन की धुरी : 50 जिले, कलेक्टर की भूमिका एवं प्रशासनिक पदानुक्रम

जिला प्रशासन एवं जिला कलेक्टर (District Administration) :
50 नवीन जिले, रामलुभाया समिति, DM व DC की बहुआयामी भूमिका व शक्तियाँ

राजस्थान के मैदानी प्रशासनिक तंत्र का संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन — 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा पद का उद्भव, रामलुभाया उच्च स्तरीय समिति व 50 नवीन जिलों का पुनर्गठन, जिला कलेक्टर की पंचमुखी भूमिका (जिला मजिस्ट्रेट DM, जिला कलेक्टर DC, जिला विकास आयुक्त DDO, जिला निर्वाचन अधिकारी DEO व आपदा प्रबंधक DDMA), कानून-व्यवस्था, राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956, सचिवालय-संभागीय आयुक्त-कलेक्टर त्रिकोणीय सेतु एवं RPSC/RAS परीक्षाओं हेतु प्रामाणिक नोट्स।

पद का उद्भव 1772 (वॉरेन हेस्टिंग्स)
जिले पुनर्गठन समिति रामलुभाया समिति (2023)
वर्तमान जिले 50 जिले (10 संभाग)
कानून व्यवस्था कोड BNSS 2023 / धारा 163
रामलुभाया उच्च स्तरीय समिति 2023 एवं जिला प्रशासन कार्यप्रणाली संदर्भ

राजस्थान में जिला प्रशासन एवं जिला कलेक्टर : 50 नवीन जिले, शक्तियाँ व पदानुक्रम

1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा पद का उद्भव, रामलुभाया समिति द्वारा 50 जिलों का पुनर्गठन, जिला मजिस्ट्रेट व कलेक्टर की पंचमुखी शक्तियाँ, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, DPC व विगत 15 वर्षों के RPSC प्रश्न।

1. जिला कलेक्टर पद का ऐतिहासिक उद्भव (1772) एवं क्रमिक विकास

भारत में 'जिला' (District) प्राचीन काल से ही शासन की आधारभूत प्रशासनिक इकाई रहा है। मौर्य काल में जिले को 'विषय' या 'आहार' तथा इसके प्रमुख को 'स्थानिक' कहा जाता था। मुगल काल में जिले को 'सरकार' कहा जाता था और इसका प्रमुख 'अमलगुजार' होता था। आधुनिक काल में जिला कलेक्टर के पद का विधिवत संस्थागत उद्भव ब्रिटिश शासनकाल की देन है:

1
1772 — वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा पद का सृजन: भारत में 'जिला कलेक्टर' (District Collector) पद का सृजन वर्ष 1772 में बंगाल के गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा किया गया था। इसका मूल उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी हेतु भू-राजस्व (Land Revenue) का कठोरता से एकत्रीकरण (Collection) करना था।
2
1787 — न्यायिक व मजिस्ट्रेट शक्तियाँ: लॉर्ड कॉर्नवालिस के समय कलेक्टर को राजस्व के साथ-साथ जिले में कानून-व्यवस्था व दीवानी न्याय की शक्तियाँ भी सौंपी गईं।
3
1949 — राजस्थान में स्थापना: 30 मार्च 1949 को वृहत् राजस्थान के निर्माण के पश्चात् राज्य को 25 जिलों में विभाजित किया गया तथा प्रत्येक जिले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) स्तर के अधिकारी को जिला कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।

2. जिला प्रशासन की संवैधानिक एवं वैधानिक स्थिति

भारतीय संविधान में 'जिला कलेक्टर' पद का अलग से कोई स्वतंत्र अनुच्छेद नहीं है, परंतु संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में 'जिले' तथा जिला स्तरीय संवैधानिक संस्थाओं का उल्लेख इस प्रकार मिलता है:

संवैधानिक संदर्भ (Constitutional References)

  • अनुच्छेद 233: राज्यपाल द्वारा जिला न्यायाधीशों (District Judges) की नियुक्ति का उल्लेख।
  • अनुच्छेद 243P(c): 74वें संविधान संशोधन में 'जिले' (District) को राज्य के भीतर एक जिले के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 243ZD: प्रत्येक जिले में पंचायती राज एवं नगरीय निकायों की योजनाओं के समेकन हेतु जिला योजना समिति (District Planning Committee - DPC) के गठन का अनिवार्य संवैधानिक उपबंध।

वैधानिक आधार (Statutory Enactments)

  • राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956: जिला कलेक्टर की राजस्व शक्तियों का मूल विधिक स्रोत।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS / पूर्व CrPC): जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में कार्यपालक मजिस्ट्रेट व कानून-व्यवस्था शक्तियाँ।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्षीय अधिकार।

3. राजस्थान में 50 नवीन जिलों का पुनर्गठन : रामलुभाया समिति (2023)

राजस्थान देश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य (3,42,239 वर्ग किमी) है। सुदूर अंचलों में कलेक्ट्रेट से गांवों की 150-200 किमी की अत्यधिक दूरी के कारण प्रशासनिक दक्षता प्रभावित हो रही थी। इसके समाधान हेतु राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईएएस रामलुभाया की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति (Ram Lubhaya Committee) गठित की:

अधिसूचना एवं स्थापना (7 अगस्त 2023): समिति की संस्तुति पर राज्य सरकार ने 19 नए जिलों के गठन की अधिसूचना जारी की (जयपुर व जोधपुर के विभाजन सहित)। इसके साथ ही राजस्थान में जिलों की संख्या 33 से बढ़कर 50 हो गई तथा संभागों की संख्या 7 से बढ़कर 10 संभाग हो गई।
प्रमुख नवगठित जिले एवं विशेषताएँ:
  • दूदू: सीधा ग्राम पंचायत से जिला बनने वाला राजस्थान का सबसे छोटा जिला।
  • फलौदी: जोधपुर से पृथक, शुष्क मरुस्थलीय व ऊर्जा हब।
  • कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, नीम का थाना: औद्योगिक व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) सीमावर्ती जिले।
  • सांचौर, सलूंबर, अनूपगढ़, डीग, गंगापुर सिटी: सीमावर्ती व जनजातीय/कृषि बाहुल्य नवीन प्रशासनिक केंद्र।

4. जिला कलेक्टर की पंचमुखी भूमिका (Five-Fold Roles of District Collector)

जिला कलेक्टर जिले का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। प्रख्यात विद्वान रजनी कोठारी के अनुसार, "जिला कलेक्टर जिले की धुरी (Pivot) है जिसके इर्द-गिर्द संपूर्ण जिला प्रशासन घूमता है।" कलेक्टर एक ही व्यक्ति होता है, जो 5 भिन्न-भिन्न रूपों में अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है:

जिला कलेक्टर : पंचमुखी प्रशासनिक भूमिका मॉडल
जिला कलेक्टर (जिले की धुरी) 1. जिला कलेक्टर (राजस्व प्रमुख) 2. जिला मजिस्ट्रेट (कानून व्यवस्था) 3. जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) 4. आपदा प्रबंधक व विकास प्रमुख
1. जिला कलेक्टर के रूप में (As District Collector - Revenue Head): जिले का सर्वोच्च राजस्व अधिकारी। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 के तहत मालगुजारी की वसूली, तकावी ऋण वितरण, भू-अभिलेखों का संधारण, तथा मैदानी स्तर पर उपखंड अधिकारी (SDM) एवं तहसीलदार के राजस्व न्यायालयों का प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण।
2. जिला मजिस्ट्रेट के रूप में (As District Magistrate - DM): जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना। पुलिस प्रशासन का पर्यवेक्षण, शस्त्र लाइसेंस (Arms License) जारी करना, जेलों का निरीक्षण, तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 (पूर्व CrPC 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू करना।
3. जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में (As District Election Officer - DEO): लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत जिले में लोकसभा व विधानसभा चुनाव तथा राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के अधीन पंचायती राज व नगरपालिकाओं के स्थानीय चुनावों का निष्पक्ष संचालन, मतदाता सूची पुनरीक्षण व मतगणना निगरानी।
4. जिला आपदा प्रबंधन प्रमुख (Chairman, DDMA): बाढ़, सूखा, टिड्डी दल हमला, महामारी या अग्निकांड के समय राहत व पुनर्वास कार्यों का सर्वोच्च कमांडर। सेना व NDRF/SDRF से सीधा संपर्क।
5. जिला विकास अधिकारी एवं मुख्य समन्वयक: केंद्र व राज्य सरकार की फ्लैगशिप जनकल्याणकारी योजनाओं (जैसे मनरेगा, पीएम आवास, चिकित्सा योजनाएँ) का जिले में क्रियान्वयन एवं विभिन्न तकनीकी विभागों (पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी, कृषि) के मध्य अंतर-विभागीय समन्वय।

5. जिला कलेक्टर (DC) बनाम जिला मजिस्ट्रेट (DM) : तुलनात्मक अंतर

तुलना का आधार जिला कलेक्टर (District Collector) जिला मजिस्ट्रेट (District Magistrate - DM)
मूल कार्यक्षेत्र भू-राजस्व, भूमि सुधार, मालगुजारी एवं कृषि सांख्यिकी। शांति व्यवस्था, कानून एवं न्याय व्यवस्था, अपराध नियंत्रण।
विधिक अधिकार स्रोत राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 व काश्तकारी अधिनियम 1955। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS 2023) / पुलिस अधिनियम 1861।
अधीनस्थ अमला अतिरिक्त कलेक्टर (ADMs), उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी। जिला पुलिस अधीक्षक (SP), उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM), कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
अपीलीय न्यायालय राजस्व निर्णयों की अपील संभागीय आयुक्त व राजस्व मंडल (अजमेर) में होती है। दांडिक आदेशों की निगरानी सत्र न्यायालय (Sessions Court) व हाईकोर्ट में होती है।

6. जिला प्रशासनिक पदानुक्रम : जिले से पटवार हलके तक (Top to Bottom)

राजस्थान में राजस्व एवं सामान्य प्रशासन का पदानुक्रम शीर्ष स्तर से ग्रामीण आधार तक कड़ियों में जुड़ा हुआ है:

1. जिला स्तर : जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट 2. उपखंड स्तर : उपखंड अधिकारी (SDM / SDO - RAS संवर्ग) 3. तहसील स्तर : तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार 4. भू-अभिलेख वृत्त : राजस्व निरीक्षक (गिरदावर / ILR) 5. पटवार हलका : पटवारी (जमीनी राजस्व आधार)

7. जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक (SP) संबंध व पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली

पारंपरिक जिला प्रशासन में कानून-व्यवस्था के दोहरे नियंत्रण की व्यवस्था लागू है। पुलिस अधिनियम 1861 की धारा 4 के अनुसार जिला पुलिस बल का आंतरिक प्रशासन पुलिस अधीक्षक (SP) के अधीन होता है, परंतु वह जिला मजिस्ट्रेट (DM) के सामान्य नियंत्रण एवं निर्देशन में कार्य करता है।

पारंपरिक प्रणाली (कलेक्टर का दबदबा)

राजस्थान के 48 जिलों में पारंपरिक व्यवस्था है। यहाँ लाठीचार्ज, आंसू गैस, गोली चलाने की अनुमति, धरना-प्रदर्शन की अनुमति तथा धारा 163 BNSS (पूर्व 144) लागू करने का अधिकार केवल जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास होता है। एसपी कानून व्यवस्था में डीएम को रिपोर्ट करता है।

पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली (जयपुर व जोधपुर)

1 जनवरी 2011 से जयपुर एवं जोधपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई। यहाँ कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ जिला कलेक्टर से लेकर पुलिस कमिश्नर (ADG स्तर) एवं पुलिस उपायुक्तों (DCPs) को सौंप दी गई हैं। अतः कमिश्नरेट क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था में कलेक्टर का सीधा हस्तक्षेप समाप्त हो गया है।

8. जिला कलेक्टर एवं पंचायती राज संस्थाएँ (DPC एवं जिला परिषद समन्वय)

जिला योजना समिति (DPC - अनुच्छेद 243ZD): संविधान के अनुच्छेद 243ZD के अनुसार जिले की समस्त ग्राम पंचायतों व नगरपालिकाओं की विकास योजनाओं को समेकित करने हेतु DPC गठित होती है। इसमें कुल 25 सदस्य होते हैं (20 निर्वाचित + 5 मनोनीत/पदेन)। जिला प्रमुख इसके अध्यक्ष होते हैं तथा जिला कलेक्टर इसके मुख्य समन्वयक/सदस्य के रूप में कार्य करते हैं।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO, Zila Parishad): 73वें संविधान संशोधन के बाद राजस्थान में जिला परिषद का प्रशासनिक मुखिया आईएएस/आरएएस अधिकारी (CEO) होता है। कलेक्टर जिला परिषद के प्रशासनिक कार्यों के पर्यवेक्षक तथा केंद्र-प्रायोजित योजनाओं (यथा मनरेगा) के जिला कार्यक्रम समन्वयक (DPC - MGNREGA) के रूप में कार्य करते हैं।

9. 21वीं सदी में जिला कलेक्टर की बदलती भूमिका : ई-गवर्नेंस व जनसुनवाई

राजस्व वसूलीकर्ता से 'कल्याणकारी समन्वयक': स्वतंत्रता पूर्व कलेक्टर का मुख्य कार्य 'कर वसूलना' था, परंतु आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में कलेक्टर की मुख्य पहचान 'विकास का संवाहक' (Agent of Development) तथा 'नागरिक मित्र' के रूप में है।
ई-गवर्नेंस एवं संपर्क पोर्टल: राजस्थान संपर्क पोर्टल, जन सूचना पोर्टल तथा ई-मित्र सेवाओं के माध्यम से कलेक्ट्रेट का डिजिटलीकरण हुआ है। प्रत्येक माह के प्रथम गुरुवार को ग्राम पंचायत स्तर पर तथा तीसरे गुरुवार को जिला स्तर पर कलेक्टर की जनसुनवाई अनिवार्य की गई है।

10. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ पद व इतिहास तथ्य

  • पद का जनक: वॉरेन हेस्टिंग्स (1772).
  • संवैधानिक उल्लेख: अनुच्छेद 233 (जिला जज) व 243ZD (DPC).
  • जिले पुनर्गठन समिति: रामलुभाया समिति (2023).
  • वर्तमान जिले संख्या: 50 जिले (10 संभाग).
  • राजस्थान का सबसे छोटा जिला: दूदू.

⚡ शक्तियाँ व पदानुक्रम

  • आपदा प्रबंधन प्रमुख: DDMA का अध्यक्ष (2005 Act).
  • निषेधाज्ञा शक्ति: BNSS 2023 धारा 163 (पूर्व CrPC 144).
  • पुलिस कमिश्नरेट जिले: जयपुर व जोधपुर (2011 से).
  • जमीनी राजस्व आधार: पटवारी (पटवार हलका).
  • DPC में कुल सदस्य: 25 सदस्य (Art. 243ZD).

11. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: भारत में जिला कलेक्टर का पद किस वर्ष और किसके द्वारा सृजित किया गया था? [RAS Pre 2013 / 2nd Grade 2018]

उत्तर: वर्ष 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा।

प्रश्न 2: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में जिला योजना समिति (District Planning Committee) का गठन अनिवार्य किया गया है? [RAS Pre 2016 / 2021]

उत्तर: अनुच्छेद 243ZD। (74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा)।

प्रश्न 3: राजस्थान में नए जिलों के गठन हेतु बनाई गई उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष कौन थे? [Current / RSSB CET 2023]

उत्तर: रामलुभाया (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी)।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

जिला प्रशासन

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): 'जिला कलेक्टर' (DC) एवं 'जिला मजिस्ट्रेट' (DM) के रूप में एक ही अधिकारी की भूमिकाओं में क्या बुनियादी अंतर है?

उत्तर संकेत: कलेक्टर के रूप में: भू-राजस्व अधिनियम 1956 के तहत मालगुजारी वसूली, भू-अभिलेख व तकावी ऋण का कार्य। जिला मजिस्ट्रेट (DM) के रूप में: BNSS 2023/CrPC के तहत कानून-व्यवस्था, धारा 163 (निषेधाज्ञा), पुलिस पर्यवेक्षण व शस्त्र लाइसेंस का कार्य।

प्रश्न 2 (100 शब्द | 10 अंक): राजस्थान में 50 नवीन जिलों के पुनर्गठन से नागरिकों को मिलने वाले प्रशासनिक लाभों एवं वित्तीय व ढांचागत चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर प्रारूप रूपरेखा: लाभ: कलेक्ट्रेट की दूरी कम होना, त्वरित जनसुनवाई, पुलिस व कानून-व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण, क्षेत्रीय विकास। चुनौतियाँ: नए भवनों/कलेक्ट्रेट का भारी वित्तीय भार, कैडर व कर्मचारियों की कमी, वित्तीय घाटा, प्रशासनिक ओवरलैपिंग। निष्कर्ष: सुशासन की दिशा में सकारात्मक कदम यदि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जिला प्रशासन, 50 नए जिलों, जिला कलेक्टर की शक्तियों एवं पदानुक्रम से जुड़े प्रश्नोत्तर।

भारत में जिला कलेक्टर पद का सृजन सर्वप्रथम वर्ष 1772 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings) द्वारा बंगाल में भू-राजस्व संग्रहण और नागरिक प्रशासन को सुदृढ़ करने हेतु किया गया था।
भारतीय संविधान में 'जिला कलेक्टर' शब्द का अलग से कोई स्वतंत्र अनुच्छेद नहीं है, परंतु संविधान के अनुच्छेद 233 में 'जिला न्यायाधीश' की नियुक्ति तथा अनुच्छेद 243P व 243ZD में 'जिला' एवं 'जिला योजना समिति' (DPC) का स्पष्ट संवैधानिक उल्लेख मिलता है।
जब यह अधिकारी राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम 1956 व काश्तकारी अधिनियम 1955 के तहत मालगुजारी, भू-अभिलेख और राजस्व वसूली का कार्य करता है तो उसे 'जिला कलेक्टर' कहा जाता है। जब वह नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS / CrPC) के तहत जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, धारा 163 लागू करने व पुलिस का समन्वय करता है, तो उसे 'जिला मजिस्ट्रेट' (DM) कहा जाता है।
राजस्थान में 50 नए जिलों तथा 10 संभागों का पुनर्गठन सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में गठित 'उच्च स्तरीय समिति' (Ram Lubhaya Committee) की सिफारिशों के आधार पर अगस्त 2023 में किया गया।
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) की धारा 25 के तहत गठित 'जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (DDMA) का पदेन अध्यक्ष जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट होता है।

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