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राज्य प्रशासनिक तंत्र का सर्वोच्च पद सोपान : किंगपिन (Kingpin)

राजस्थान के मुख्य सचिव (Chief Secretary of Rajasthan) :
स्थिति, शक्तियाँ, कार्य, ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य व सम्पूर्ण कालक्रम सूची

राजस्थान के शीर्ष प्रशासनिक मुखिया का संपूर्ण प्रामाणिक अध्ययन — 1799 में लॉर्ड वेलेस्ली द्वारा पद का उद्भव, 13 अप्रैल 1949 को राजस्थान में स्थापना, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार, कैबिनेट सचिव, अवशिष्ट कार्यपालक (Residual Legatee), संकटकालीन प्रबंधक, चयन प्रक्रिया व मानदंड, प्रथम मुख्य सचिव श्री के. राधाकृष्णन, सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल वाले श्री भगवत सिंह मेहता, महिला मुख्य सचिव (श्रीमती कुशल सिंह व श्रीमती उषा शर्मा), वर्तमान मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत एवं RPSC/RAS परीक्षाओं हेतु प्रामाणिक नोट्स।

प्रथम मुख्य सचिव के. राधाकृष्णन (1949)
सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल भगवत सिंह मेहता (7 वर्ष)
प्रथम महिला मुख्य सचिव श्रीमती कुशल सिंह (2009)
वर्तमान मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत (2024 से)
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), राजस्थान सचिवालय संवर्ग एवं प्रामाणिक संदर्भ

राजस्थान के मुख्य सचिव : स्थिति, शक्तियाँ, कार्यप्रणाली व सम्पूर्ण कालक्रम

राज्य प्रशासन का किंगपिन, मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार, कैबिनेट सचिव की भूमिका, अवशिष्ट कार्यपालक, प्रथम मुख्य सचिव (के. राधाकृष्णन) से वर्तमान तक की प्रामाणिक सूची व विगत 15 वर्षों के RPSC/RAS प्रश्न।

1. मुख्य सचिव पद का ऐतिहासिक उद्भव (1799) एवं राजस्थान में स्थापना

भारत में मुख्य सचिव (Chief Secretary) के पद का सृजन ब्रिटिश काल में वर्ष 1799 में भारत के तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेस्ली (Lord Wellesley) द्वारा किया गया था। भारत में प्रथम मुख्य सचिव जी.एच. बारलो (G.H. Barlow) बने थे।

1
राजस्थान में स्थापना (13 अप्रैल 1949): वृहत् राजस्थान के निर्माण के पश्चात् 13 अप्रैल 1949 को राजस्थान राज्य सचिवालय (State Secretariat) की स्थापना के साथ ही मुख्य सचिव का पद अस्तित्व में आया।
2
प्रथम मुख्य सचिव (श्री के. राधाकृष्णन): भारतीय नागरिक सेवा (ICS) के वरिष्ठ अधिकारी श्री के. राधाकृष्णन राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव बने (13-04-1949 से 02-05-1950)।

2. मुख्य सचिव की संवैधानिक एवं विधिक स्थिति

भारतीय संविधान में 'मुख्य सचिव' पद का अलग से कोई स्वतंत्र अनुच्छेद उल्लिखित नहीं है। यह एक कार्यपालक पद (Executive Office) है जो राजस्थान कार्य संचालन नियमों (Rules of Business - Art. 166) तथा अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के अंतर्गत स्थापित है:

पद सोपान में सर्वोच्चता (Kingpin of Administration)

  • मुख्य सचिव राज्य के संपूर्ण प्रशासनिक ढांचे का "किंगपिन" (धुरी) होता है।
  • यह राज्य के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) संवर्ग का वरिष्ठतम पद है।
  • अग्रता अधिपत्र (Warrant of Precedence) में मुख्य सचिव को राज्य में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समकक्ष सर्वोच्च सम्मानजनक स्थान प्राप्त होता है।

केंद्र के कैबिनेट सचिव से तुलना

  • केंद्र सरकार में जो भूमिका 'कैबिनेट सचिव' (Cabinet Secretary) की होती है, राज्य में वही भूमिका 'मुख्य सचिव' निभाता है।
  • विशिष्ट अंतर: मुख्य सचिव केंद्र के कैबिनेट सचिव की तुलना में राज्य स्तर पर अधिक शक्तिशाली होता है, क्योंकि राज्य का कार्मिक विभाग (DOP) और सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) सीधे मुख्य सचिव के अधीन होते हैं।

3. मुख्य सचिव का चयन एवं नियुक्ति प्रक्रिया

नियुक्ति प्राधिकारी: मुख्य सचिव की नियुक्ति औपचारिक रूप से राज्यपाल के आदेश से की जाती है, परंतु इसका वास्तविक चयन राज्य के मुख्यमंत्री (Chief Minister) द्वारा किया जाता है।
चयन के प्रमुख मापदंड:
  • वरिष्ठता (Seniority): राज्य संवर्ग के वरिष्ठतम IAS अधिकारियों में से चयन। यद्यपि मुख्यमंत्री वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारी को भी मुख्य सचिव चुन सकते हैं।
  • योग्यता एवं सेवा अभिलेख (Merit): प्रशासनिक दक्षता, निष्ठा एवं बेदाग करियर रिकॉर्ड।
  • मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत विश्वास: चूंकि मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री का सबसे नजदीकी सलाहकार बनना होता है, अतः आपसी सामंजस्य व विश्वास सर्वाधिक निर्णायक कारक होता है।

4. मुख्य सचिव की बहुआयामी भूमिकाएँ, शक्तियाँ एवं कार्य

मुख्य सचिव केवल एक अधिकारी नहीं है, बल्कि वह राज्य के संपूर्ण प्रशासन का केंद्र-बिंदु है। उसकी प्रमुख भूमिकाओं का वर्गीकरण इस प्रकार है:

मुख्य सचिव : बहुआयामी प्रशासनिक केंद्र (Hub Model)
मुख्य सचिव (धुरी / Kingpin) मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार मंत्रिमंडल का सचिव (एजेंडा) राज्य सिविल सेवा का मुखिया अवशिष्ट कार्यपालक व आपदा प्रमुख
1. मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के रूप में: राज्य के सभी प्रशासनिक, विधिक एवं नीतिगत मामलों में मुख्यमंत्री को निष्पक्ष व तटस्थ सलाह प्रदान करना। मुख्यमंत्री को प्रशासनिक कठिनाइयों व वित्तीय सीमाओं से अवगत कराना।
2. मंत्रिमंडल के सचिव (Secretary to the Cabinet) के रूप में: कैबिनेट बैठकों का एजेंडा (कार्यसूची) तैयार करना, बैठकों में उपस्थित रहना, निर्णयों का कार्यवृत्त (Minutes) दर्ज करना तथा उन निर्णयों के क्रियान्वयन की निगरानी करना।
3. राज्य लोक सेवा के प्रमुख (Head of Civil Services): राज्य के समस्त IAS, IPS, IFS एवं राज्य सेवा (RAS आदि) के अधिकारियों के स्थानांतरण, पदोन्नति, अनुशासन एवं मनोबल का संरक्षक।
4. मुख्य समन्वयक (Chief Coordinator): सचिवालय के विभिन्न विभागों, शासन सचिवों, संभागीय आयुक्तों एवं जिला कलेक्टरों के मध्य समन्वय स्थापित करना।अंतर-विभागीय विवादों का अंतिम प्रशासनिक समाधान करना।
5. संकटकालीन प्रबंधक (Crisis Manager-in-Chief): बाढ़, सूखा, महामारी, दंगे आदि प्राकृतिक या मानव-जनित आपदाओं के समय संपूर्ण राहत एवं पुनर्वास अभियानों की व्यक्तिगत कमान संभालना। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की कार्यकारी समिति का अध्यक्ष होना।

5. 'अवशिष्ट कार्यपालक' (Residual Legatee) की प्रशासनिक अवधारणा

अवशिष्ट कार्यपालक का क्या तात्पर्य है?

प्रशासन में मुख्य सचिव को 'अवशिष्ट कार्यपालक' (Residual Legatee) कहा जाता है। इसका अर्थ यह है कि राजस्थान कार्य संचालन नियमावली के अंतर्गत जो प्रशासनिक कार्य, विषय या दायित्व स्पष्ट रूप से किसी अन्य सचिव या विभाग को आवंटित नहीं किए गए हैं, वे सभी शेष कार्य स्वतः मुख्य सचिव के सीधे कार्यक्षेत्र के अधीन माने जाते हैं

6. प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) की मुख्य सचिव पद हेतु सिफारिशें

1. कार्यकाल की स्थिरता (Security of Tenure): प्रथम एवं द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) ने सिफारिश की कि प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए मुख्य सचिव का न्यूनतम कार्यकाल 3 से 4 वर्ष निर्धारित होना चाहिए, ताकि वह नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सके।
2. दैनिक कार्यों से मुक्ति: मुख्य सचिव को नियमित व छोटे-मोटे पत्राचार से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि वह अपना संपूर्ण ध्यान नीतिगत समन्वय, दूरगामी योजनाओं एवं संकट प्रबंधन पर केंद्रित कर सके।

राज्य सिविल सेवा बोर्ड (CSB) एवं वर्तमान सुशासन पहल

सिविल सेवा बोर्ड (Civil Services Board): सर्वोच्च न्यायालय के टी.एस.आर. सुब्रमण्यम वाद (2013) के अनुपालन में राजस्थान में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 3-सदस्यीय 'राज्य सिविल सेवा बोर्ड' गठित है। इसका मुख्य कार्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण, पदस्थापना एवं न्यूनतम कार्यकाल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वर्तमान मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत की 'सक्रिय प्रशासन' कार्यशैली: जनवरी 2024 से पदभार ग्रहण करने के बाद सचिवालय के विभिन्न विभागों, जेडीए, नगर निगमों एवं संभागीय कार्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति (Biometric Attendance), औचक निरीक्षण तथा 'फाइल ट्रैकिंग सिस्टम' को मिशन मोड पर लागू किया गया।

7. राजस्थान में महिला मुख्य सचिव (Women Chief Secretaries)

राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में अब तक केवल 2 महिलाओं ने मुख्य सचिव का शीर्ष पद संभाला है:

प्रथम महिला मुख्य सचिव

श्रीमती कुशल सिंह (Kushal Singh)

कार्यकाल: फरवरी 2009 से अक्टूबर 2009

1974 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी। अशोक गहलोत सरकार के समय राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिव बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

द्वितीय महिला मुख्य सचिव

श्रीमती उषा शर्मा (Usha Sharma)

कार्यकाल: 31 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2023

1985 बैच की IAS अधिकारी। केंद्र में प्रतिनियुक्ति से लौटने के पश्चात् राजस्थान की दूसरी महिला मुख्य सचिव बनीं।

8. राजस्थान के मुख्य सचिवों की ऐतिहासिक सूची (1949 से वर्तमान)

क्र.सं. मुख्य सचिव का नाम कार्यकाल (अवधि) विशिष्ट ऐतिहासिक एवं परीक्षा तथ्य
1 के. राधाकृष्णन (K. Radhakrishnan) 13-04-1949 से 02-05-1950 राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव (ICS अधिकारी)।
2 वी. नारायणन (V. Narayanan) 02-05-1950 से 01-09-1950 अल्पकालिक कार्यकाल।
6 भगवत सिंह मेहता (B.S. Mehta) 09-05-1958 से 26-09-1964 राजस्थान के मूल निवासी प्रथम मुख्य सचिव। राजस्थान में सर्वाधिक दीर्घ कार्यकाल (लगभग 7 वर्ष) का रिकॉर्ड। पंचायती राज के क्रियान्वयन में अहम भूमिका।
- के.पी.यू. मेनन 1966 से 1968 प्रथम राष्ट्रपति शासन (1967) के समय मुख्य सचिव।
- मोहन मुखर्जी 1975 से 1977 द्वितीय राष्ट्रपति शासन (1977) के समय मुख्य सचिव।
- गोपाल कृष्ण भनोत 1977 से 1980 तृतीय राष्ट्रपति शासन (1980) के समय मुख्य सचिव।
- एम.एल. मेहता (महेंद्र लाल मेहता) 1994 से 1997 प्रशासनिक नवाचारों व 'काम के बदले अनाज' योजना के सूत्रधार।
- श्रीमती कुशल सिंह 27-02-2009 से 31-10-2009 राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिव।
- सी.के. मैथ्यू 2011 से 2013 प्रशासनिक दक्षता व सुशासन हेतु उल्लेखनीय।
- एन.सी. गोयल (निहाल चंद गोयल) 30-12-2017 से 30-04-2018 सबसे कम कार्यकाल (मात्र 4 माह) वाले मुख्य सचिवों में शामिल। बाद में रेरा (RERA) के प्रथम अध्यक्ष बने।
- निरंजन आर्य 01-11-2020 से 31-01-2022 राजस्थान के प्रथम दलित मुख्य सचिव
- श्रीमती उषा शर्मा 31-01-2022 से 31-12-2023 राजस्थान की दूसरी महिला मुख्य सचिव।
वर्तमान श्री सुधांश पंत (Sudhansh Pant) 01-01-2024 से वर्तमान राजस्थान के वर्तमान मुख्य सचिव। 1991 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी; केंद्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव रहे।

9. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Quick Revision Points)

⚡ पद व स्थापना तथ्य

  • भारत में पद का जनक: लॉर्ड वेलेस्ली (1799).
  • राजस्थान के प्रथम CS: के. राधाकृष्णन (1949).
  • मूल निवासी प्रथम CS: भगवत सिंह मेहता.
  • सर्वाधिक लंबा कार्यकाल: भगवत सिंह मेहता (1958-1964).
  • प्रथम महिला CS: श्रीमती कुशल सिंह (2009).
  • द्वितीय महिला CS: श्रीमती उषा शर्मा (2022-23).

⚡ प्रशासनिक भूमिका तथ्य

  • अवशिष्ट कार्यपालक (Residual Legatee): अवंटित न किए गए सभी कार्यों का मुखिया.
  • नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा (मुख्यमंत्री की पसंद पर).
  • कैबिनेट बैठकों का सचिव: मुख्य सचिव स्वयं होता है.
  • प्रथम दलित मुख्य सचिव: निरंजन आर्य (2020-22).
  • वर्तमान मुख्य सचिव: श्री सुधांश पंत (2024 से).

10. विगत RPSC परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Past Year Questions)

प्रश्न 1: राज्य प्रशासन में 'अवशिष्ट कार्यपालक' (Residual Legatee) किसे कहा जाता है? [RAS Pre 2016 / 2018]

उत्तर: मुख्य सचिव (Chief Secretary) को।

प्रश्न 2: राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिव कौन थीं? [College Lecturer 2019 / 2nd Grade 2022]

उत्तर: श्रीमती कुशल सिंह (वर्ष 2009)।

प्रश्न 3: मुख्य सचिव के कार्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: [RAS Pre 2021]

1. वह मुख्यमंत्री का प्रमुख सलाहकार होता है।
2. वह राज्य लोक सेवा का प्रमुख होता है।
3. वह मंत्रिमंडल का सचिव होता है।
सत्यापन: उपर्युक्त सभी कथन पूर्णतः सही हैं।

RAS मुख्य परीक्षा (Mains Paper-3) मॉडल अभ्यास प्रश्नोत्तर

प्रशासनिक मुखिया

प्रश्न 1 (50 शब्द | 5 अंक): राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव को 'अवशिष्ट कार्यपालक' (Residual Legatee) एवं 'संकटकालीन प्रबंधक' क्यों कहा जाता है?

उत्तर संकेत: अवशिष्ट कार्यपालक इसलिए क्योंकि कार्य संचालन नियमों में जो विषय किसी विशिष्ट विभाग को आवंटित नहीं होते, वे स्वतः मुख्य सचिव के अधीन आते हैं। संकटकालीन प्रबंधक इसलिए क्योंकि सूखा, बाढ़, दंगे या महामारी के समय राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष के रूप में वह संपूर्ण राहत कार्यों का सर्वोच्च कमांडर होता है।

प्रश्न 2 (20 शब्द | 2 अंक): राजस्थान में सर्वाधिक लंबे समय तक मुख्य सचिव रहने का रिकॉर्ड किस अधिकारी के नाम है?

उत्तर संकेत: श्री भगवत सिंह मेहता (B.S. Mehta); वे 1958 से 1964 तक लगभग 7 वर्ष तक राजस्थान के मुख्य सचिव रहे।
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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थान के मुख्य सचिव, शक्तियों, नियुक्ति व इतिहास से जुड़े परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर।

राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव श्री के. राधाकृष्णन (K. Radhakrishnan - ICS) थे। उनका कार्यकाल 13 अप्रैल 1949 से 2 मई 1950 तक रहा।
मुख्य सचिव की नियुक्ति औपचारिक रूप से राज्यपाल के नाम से की जाती है, परंतु इसका वास्तविक चयन पूर्णतः संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री (Chief Minister) की पसंद और विश्वास पर निर्भर करता है। चयन में वरिष्ठता (Seniority), उत्कृष्ट सेवा अभिलेख (Merit) तथा मुख्यमंत्री के साथ सामंजस्य व विश्वास को प्राथमिकता दी जाती है।
राजस्थान में सर्वाधिक दीर्घ अवधि तक मुख्य सचिव रहने का रिकॉर्ड श्री भगवत सिंह मेहता (B.S. Mehta) के नाम है। वे 1958 से 1964 तक लगभग 7 वर्ष तक मुख्य सचिव रहे। वे राजस्थान के मूल निवासी प्रथम मुख्य सचिव भी थे।
राजस्थान की प्रथम महिला मुख्य सचिव श्रीमती कुशल सिंह (वर्ष 2009 में अशोक गहलोत सरकार के समय) बनी थीं। राजस्थान की दूसरी महिला मुख्य सचिव श्रीमती उषा शर्मा (वर्ष 2022 से 2023) बनीं।
राज्य प्रशासन में मुख्य सचिव को 'अवशिष्ट कार्यपालक' (Residual Legatee) कहा जाता है, क्योंकि जो प्रशासनिक विषय, कार्य या दायित्व स्पष्ट रूप से किसी अन्य विशिष्ट विभाग या सचिव को आवंटित नहीं होते, वे सभी कार्य स्वतः मुख्य सचिव के सीधे क्षेत्राधिकार में आ जाते हैं।
राजस्थान के वर्तमान मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत (Sudhansh Pant - 1991 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी) हैं, जिन्होंने 1 जनवरी 2024 को पदभार ग्रहण किया।

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