तेरहताली नृत्य:
बैठकर 13 मंजीरों का जादुई ताल-संयोजन, भक्ति व अक्रोबैटिक कला
तेरहताली नृत्य (Terah Tali Folk Dance) राजस्थान का एकमात्र ऐसा प्रसिद्ध लोक नृत्य है जिसे नृत्यांगनाएँ बैठकर (Sitting Posture) प्रस्तुत करती हैं। पादरला गाँव (पाली) से उद्गमित यह नृत्य कामड़ जाति की बहुओं (विवाहित महिलाओं) द्वारा लोक देवता बाबा रामदेव जी की आराधना में 13 मंजीरों की द्रुत खनक, तन्दूरा-चौतारा के भक्तिमय गायन एवं विस्मयकारी अक्रोबैटिक करतबों (मुँह में तलवार, सिर पर जलते दीपक) के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
मंजीरे संख्या
13 मंजीरे
प्रस्तुति मुद्रा
बैठकर
मुख्य वाद्य
तन्दूरा/चौतारा
9 मंजीरे दाएँ पैर | 2 कोहनी | 2 हाथ | मुँह में नंगी तलवार
राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य
पूरा कला एवं संस्कृति हब देखेंतेरहताली नृत्य: सम्पूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक, संगीतमय व तकनीकी विश्लेषण
पादरला (पाली) उद्गम, 13 मंजीरों का वैज्ञानिक वितरण, कामड़िया पंथ, तन्दूरा/चौतारा वादन, मांगी बाई एवं RPSC/RAS हेतु अति-महत्वपूर्ण प्रामाणिक सामग्री।
1. परिचय एवं स्वरूप (Introduction & Core Nature)
तेरहताली नृत्य (Terah Tali Dance) राजस्थान की लोक-संस्कृति का एक अत्यंत मनोहारी, भक्तिपरक एवं कौशल-प्रधान व्यावसायिक-धार्मिक लोक नृत्य है। इस नृत्य की सबसे अनुपम विशेषता यह है कि यह खड़े होकर नहीं बल्कि बैठकर (पालथी मारकर) किया जाने वाला राजस्थान का एकमात्र प्रमुख लोक नृत्य है। इसमें नृत्यांगना अपने शरीर पर कुल 13 मंजीरे बाँधकर हाथों के मंजीरों से विभिन्न तालों और द्रुत गतियों में टकराते हुए अद्भुत लय उत्पन्न करती है।
📌 मूल परिचय बिंदु
- सम्प्रदाय / जाति: कामड़ जाति (कामड़िया पंथ)
- प्रतिभागी: केवल कामड़ जाति की विवाहित महिलाएँ (बहुएँ)
- प्रकृति: धार्मिक सह-व्यावसायिक लोक नृत्य (Devotional & Professional)
- उद्गम स्थल: पादरला गाँव (पाली ज़िला)
- मुख्य केंद्र: रामदेवरा (पोकरण - जैसलमेर), डीडवाना, बीकानेर, पाली
🏷️ प्रमुख विशेषताएँ (Key Highlights)
- बैठकर नृत्य: राजस्थान का एकमात्र विशुद्ध बैठकर किया जाने वाला नृत्य
- 13 मंजीरों का प्रयोग: शरीर के विभिन्न अंगों पर 13 मंजीरे
- बाबा रामदेव जी का मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक
- युगल सहभागिता: महिलाएँ नृत्य करती हैं तथा पुरुष तन्दूरा/चौतारा बजाकर भजन गाते हैं
नामकरण का रहस्य: 'तेरहताली' नामकरण के पीछे दो मुख्य कारण माने जाते हैं— पहला, इसमें शरीर पर 13 मंजीरे बाँधकर बजाए जाते हैं; दूसरा, इसमें संगीत की 13 विभिन्न तालों/भाव-भंगिमाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
📌 RPSC परीक्षा दृष्टि: "राजस्थान का वह लोकनृत्य जो केवल बैठकर किया जाता है और जिसमें 13 मंजीरों का प्रयोग होता है?" उत्तर: तेरहताली नृत्य (कामड़ सम्प्रदाय)। (RPSC RAS, SI, 2nd Grade में बार-बार पूछा गया)।
2. उद्गम स्थल, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं कामड़ सम्प्रदाय (Origin & History)
तेरहताली नृत्य का प्रत्यक्ष ऐतिहासिक एवं धार्मिक संबंध राजस्थान के परम पूज्य लोक देवता बाबा रामदेव जी (रामसा पीर) द्वारा 14वीं शताब्दी में स्थापित कामड़िया पंथ (Kamadiya Panth) से है। बाबा रामदेव जी ने सामाजिक समरसता, अस्पृश्यता निवारण तथा ईश्वर-भक्ति हेतु इस पंथ की नींव रखी थी।
📍 पादरला गाँव का ऐतिहासिक महत्व
- उद्गम स्थल: पाली ज़िले का पादरला गाँव तेरहताली नृत्य का जन्मस्थान माना जाता है।
- पारंपरिक केंद्र: पादरला गाँव के कामड़ परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस नृत्य को अपनी कुल-परंपरा के रूप में जीवित रखे हुए हैं।
- कुलदेवी हिंगलाज माता: कामड़ जाति की कुलदेवी 'हिंगलाज माता' तथा बाबा रामदेव जी की स्तुति में यह नृत्य रातभर चलने वाले 'जम्मा जागरण' में किया जाता है।
👰 विवाहित महिलाओं (बहुओं) की परंपरा
- केवल बहुएँ: कामड़ जाति की परंपरा के अनुसार इस नृत्य को घर की कुँवारी बेटियाँ नहीं करतीं, बल्कि ससुराल आई विवाहित महिलाएँ (बहू) ही करती हैं।
- जम्मा जागरण (Jamma Jagran): रामदेवरा मेले एवं ग्रामीण रात्रियों में आयोजित होने वाले भक्ति जागरणों में यह नृत्य मुख्य आकर्षण होता है।
🔥 RPSC महत्वपूर्ण तथ्य: कामड़िया पंथ की स्थापना किसने की थी? उत्तर: लोक देवता बाबा रामदेव जी ने। इस पंथ के रात्रि जागरण को क्या कहते हैं? उत्तर: 'जम्मा जागरण'।
3. 13 मंजीरों का शारीरिक वितरण एवं ताल विधान (Distribution of 13 Manjiras)
तेरहताली नृत्य में नर्तकी के शरीर पर कुल 13 मंजीरे (कांस्य धातु के बने) एक अत्यंत सटीक और वैज्ञानिक क्रम में बाँधे जाते हैं। यह वितरण RPSC परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछा जाने वाला तकनीकी प्रश्न है:
दाएँ पैर पर
9 मंजीरे (Nine Manjiras)
दाएँ पैर की पिंडली (Calf) से लेकर घुटने तक एक सीधी पंक्ति में कसकर बाँधे जाते हैं।
दोनों कोहनियों पर
2 मंजीरे (One on each elbow)
एक मंजीरा दाहिनी कोहनी पर तथा एक मंजीरा बाईं कोहनी के जोड़ पर बाँधा जाता है।
दोनों हाथों में
2 मंजीरे (One in each hand)
दोनों हाथों की हथेलियों/अंगूठों में धागे से थामकर अन्य 11 मंजीरों पर तीव्र गति से आघात किया जाता है।
📐 मंजीरा वितरण सूत्र: 9 (दायाँ पैर) + 2 (दोनों कोहनियाँ) + 2 (दोनों हाथ) = 13 मंजीरे
नृत्यांगना पालथी मारकर बैठती है तथा बायाँ पैर मोड़कर दाएँ पैर को आगे रखती है ताकि दाएँ पैर के 9 मंजीरों पर हाथ के मंजीरों से विभिन्न तालों में चोट की जा सके।
4. नृत्य तकनीक, बैठकर शारीरिक मुद्राएँ व अक्रोबैटिक कलाएँ (Technique & Acrobatics)
🧘 बैठकर शारीरिक लोच (Sitting Posture Fluidity)
- बैठने की स्थिति: नृत्यांगना जमीन पर पालथी मारकर (Cross-legged) बैठती है। पूरे नृत्य के दौरान उसका आसन नहीं बदलता।
- धड़ व बाहों का संचालन: कमर के ऊपर का हिस्सा अत्यंत लचीला होता है। आगे, पीछे और अगल-बगल झुकते हुए बिजली की गति से मंजीरों पर थाप दी जाती है।
- 13 भाव-भंगिमाएँ (13 Gestures): नृत्य के दौरान नर्तकी घरेलू कामकाज जैसे— आटा पीसना (घट्टी चलाना), बिलौना बिलोना (छाछ बनाना), सूत कातना, गेहूँ फटकना आदि की भाव-भंगिमाएँ प्रदर्शित करती है।
🎪 हैरतअंगेज अक्रोबैटिक करतब (Acrobatic Feats)
- मुँह में नंगी तलवार दबाना: दाँतों के बीच खुली तलवार दबाकर सिर पर दीपक रखकर मंजीरे बजाना।
- सिर पर 7-8 बर्तन / जलते दीपक: सिर पर पीतल की चरी या काँच के गिलासों पर जलता हुआ दीपक रखकर संतुलन साधना।
- पलकों से सुई/सिक्का उठाना: पीछे की ओर झुककर (Backbend) जमीन पर पड़ा सिक्का या सुई अपनी पलकों या होठों से उठाना।
- मुँह से धागा काटना: बिना हाथ लगाए दाँतों से धागा काटना या नोट उठाना।
कलात्मक संयोजन: यह नृत्य केवल संगीत और ताल का ही संगम नहीं है, बल्कि एकाग्रता, संतुलन और देह-साधना का उत्कृष्ट भारतीय उदाहरण है।
5. वाद्य यंत्र एवं संगीत संयोजन (Musical Accompaniment & Rhythm)
तेरहताली नृत्य में नृत्यांगनाओं के पीछे कामड़ जाति के पुरुष गायक बैठकर पारंपरिक वाद्य बजाते हुए बाबा रामदेव जी के भजन गाते हैं:
🎸 प्रमुख वाद्य यंत्र (Key Instruments)
- तन्दूरा / चौतारा (Tandura / Chautara): तत वाद्य। इसे 'वेणो' या 'निशान' भी कहा जाता है। इसमें 4 तार होते हैं। यह तेरहताली का मुख्य संगत वाद्य है। (RPSC में पूछा गया प्रश्न)
- मंजीरा (Manjira): घन वाद्य। कांस्य एवं पीतल धातु का बना, जो नृत्य का मुख्य वाद्य है।
- ढोलक (Dholak): अवनद्ध वाद्य। ताल में तीव्रता और गति प्रदान करने हेतु।
- खड़ताल / झाँझ (Khartal / Jhanj): घन वाद्य, जो संगत को लयबद्ध रखता है।
🎶 गायन एवं भक्ति पद (Vocal Style & Hymns)
- भजन विषय: बाबा रामदेव जी के ब्यावले (परचे), हिंगलाज माता के छंद, तथा कबीर, गोरखनाथ व मीराबाई के निर्गुण पद।
- पुरुषों की भूमिका: कामड़ पुरुष तन्दूरा व ढोलक बजाते हुए मुख्य गायक के रूप में टेर (कोरस) लगाते हैं।
6. पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण (Costumes & Ornaments)
👗 पारंपरिक राजस्थानी परिधान
- घाघरा व कुर्ती-कांचली: लाल, पीले या गहरे केसरिया रंग का कशीदाकारी युक्त घाघरा।
- ओढ़नी (घूँघट): गोटा-किनारी वाली लंबी ओढ़नी। नृत्यांगना पूरा घूँघट (Lajja/Veil) निकालकर अपनी मर्यादा में नृत्य करती है।
💍 आभूषण एवं श्रृंगार
- सिर व माथा: बोरला, शीशफूल और रखड़ी।
- गले व हाथ: हँसली, तिमणिया, चूँड़ियाँ, गजरा एवं बाजूबंद।
- मंजीरों का चमकीला धागा: मंजीरों को बाँधने के लिए लाल व सुनहरे रंग की मजबूत डोरी प्रयुक्त होती है।
7. मांगी बाई एवं प्रमुख कलाकार (Famous Personalities & Awards)
🏆 मांगी बाई (Mangi Bai - पादरला, पाली)
- परिचय: तेरहताली नृत्य को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाने वाली मूर्धन्य नृत्यांगना। इनका जन्म चित्तौड़गढ़ के बानियाना गाँव में हुआ, परंतु विवाह पादरला (पाली) के भेरूदास कामड़ के साथ हुआ।
- गुरु: इनके जेठ गोरमदास कामड़ इनके गुरु थे।
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 1990 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित।
- नेहरू जी के समक्ष प्रस्तुति: 1954 में चित्तौड़गढ़ में आयोजित 'गाड़ोलिया लुहार सम्मेलन' में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के समक्ष प्रस्तुति दी, जिससे यह नृत्य वैश्विक चर्चा में आया।
💃 अन्य विख्यात कलाकार (Other Artists)
- मोहिनी देवी (Mohini Devi): तेरहताली की विख्यात अंतरराष्ट्रीय कलाकार।
- नारायणी देवी (Naraini Devi): पादरला घराने की प्रमुख कलाकार।
- कमली बाई (Kamli Bai): पारंपरिक प्रस्तुति विशेषज्ञ।
- लक्ष्मण दास कामड़ (Laxman Das Kamad): प्रसिद्ध तन्दूरा वादक एवं गायक, जिन्होंने मांगी बाई के साथ देश-विदेश में प्रस्तुतियाँ दीं।
RPSC प्रश्न: मांगी बाई तथा मोहिनी देवी किस लोक नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगनाएँ हैं? उत्तर: तेरहताली नृत्य (Terah Tali Dance)।
8. धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व (Socio-Cultural Significance)
- साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक: बाबा रामदेव जी के मेले में हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी वर्गों के श्रद्धालु एकत्र होते हैं, जहाँ तेरहताली नृत्य सामाजिक समरसता और बंधुत्व का संदेश देता है।
- अस्पृश्यता निवारण का माध्यम: कामड़िया पंथ द्वारा जाति-पाँति के भेदभाव को मिटाने के संकल्प को यह नृत्य अपनी भक्तिमय तानों में अभिव्यक्त करता है।
- पारंपरिक मर्यादा व नारी कौशल: घूँघट की मर्यादा में रहकर भी महिलाओं द्वारा असाधारण शारीरिक संतुलन व संगीत ज्ञान का उत्कृष्ट प्रदर्शन नारी सशक्तिकरण की लोक-मिसाल है।
9. राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्यों का तुलनात्मक चार्ट
| नृत्य का नाम | मुख्य क्षेत्र / केंद्र | सम्बद्ध वर्ग / सम्प्रदाय | मुख्य वाद्ययंत्र | मुख्य विशेषता / तकनीक |
|---|---|---|---|---|
| तेरहताली (Terah Tali) | पादरला (पाली) / रामदेवरा | कामड़ जाति (विवाहित स्त्रियाँ) | 13 मंजीरे, तन्दूरा (चौतारा) | बैठकर नृत्य, मुँह में तलवार, रामदेव जी भक्ति |
| कालबेलिया (Kalbelia) | मारवाड़ / अजमेर / पाली | कालबेलिया (सपेरा) स्त्रियाँ | पूँगी (बीण), खंजरी, डफ | UNESCO 2010 धरोहर, गुलाबो सपेरा, सर्पिलाकार लोच |
| घूमर नृत्य (Ghoomar) | समस्त राजस्थान (रजवाड़ी) | केवल स्त्रियाँ (महिला-प्रधान) | ढोल, नगाड़ा, शहनाई | 80 कली का घाघरा, 'सवाई' (अष्टताल), गणगौर पर्व |
| अग्नि नृत्य (Agni) | कतरियासर (बीकानेर) | जसनाथी सम्प्रदाय (सिद्ध पुरुष) | नगाड़ा, मंजीरा, थाली | जलते अंगारे, "फतेह-फतेह" घोष, मतीरा फोड़ना |
| कच्ची घोड़ी (Kacchi Ghodi) | शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूं) | सरगरा, नायक, ढोली जाति (पुरुष) | बाँकिया, झाँझ, ढोल | काठ की घोड़ी, कमल के फूल का खिलना-मुरझाना |
10. परीक्षा-उपयोगी त्वरित तथ्य (High-Yield Facts for Quick Revision)
⚡ स्मरण रखने योग्य तथ्य (भाग 1)
- उद्गम स्थल: पादरला गाँव (ज़िला पाली)।
- सम्प्रदाय: कामड़ पंथ (संस्थापक: बाबा रामदेव जी)।
- प्रतिभागी: केवल विवाहित महिलाएँ (घर की बहुएँ)।
- मुद्रा: राजस्थान का एकमात्र बैठकर किया जाने वाला नृत्य।
⚡ स्मरण रखने योग्य तथ्य (भाग 2)
- मंजीरा संख्या: कुल 13 (9 दाएँ पैर + 2 कोहनियाँ + 2 हाथ)।
- संगत वाद्य: तन्दूरा (चौतारा/वेणो/निशान) व ढोलक।
- प्रसिद्ध नृत्यांगना: मांगी बाई (1990 संगीत नाटक अकादमी)।
- अन्य कलाकार: मोहिनी देवी, नारायणी देवी, लक्ष्मण दास कामड़।
11. विगत परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Model & RPSC Past PYQs)
प्रश्न 1: 'तेरहताली नृत्य' किस लोक देवता की भक्ति में किया जाता है? [RPSC RAS & SI]
उत्तर: बाबा रामदेव जी (रामदेवरा मेला) की भक्ति में।
प्रश्न 2: तेरहताली नृत्य का उद्गम स्थल किस गाँव को माना जाता है? [RPSC 2nd Grade Teacher]
उत्तर: पादरला गाँव (पाली ज़िला) को।
प्रश्न 3: तेरहताली नृत्य में दाएँ पैर पर कुल कितने मंजीरे बाँधे जाते हैं? [RSSB Patwar & VDO]
उत्तर: 9 मंजीरे (कुल 13 मंजीरों में से 9 दाएँ पैर पर, 2 कोहनियों पर तथा 2 हाथों में)।
प्रश्न 4: 1990 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित 'मांगी बाई' का संबंध किस नृत्य से है? [RPSC College Lecturer]
उत्तर: तेरहताली नृत्य (Terah Tali Dance) से।
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राजस्थान कला एवं संस्कृति
- घूमर नृत्य (राज्य नृत्य) नृत्य
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राजस्थान का इतिहास
Historyराजस्थान का भूगोल
50 ज़िलेतेरहताली नृत्य क्यों महत्वपूर्ण है?
तेरहताली नृत्य राजस्थान कला एवं संस्कृति विषय का सर्वाधिक पूछे जाने वाले अध्यायों में से एक है। RPSC (RAS, SI, Teacher Grade I/II/III, Reet, Patwari, VDO) परीक्षाओं में इससे जुड़े प्रश्न लगभग प्रत्येक वर्ष पूछे जाते हैं।
- 1 बैठकर नृत्य: राज्य का एकमात्र ऐसा नृत्य जो विशुद्ध रूप से बैठकर किया जाता है।
- 2 13 मंजीरों का वितरण (9+2+2): RPSC का सबसे पसंदीदा विश्लेषणात्मक प्रश्न।
- 3 मांगी बाई (1990 पुरस्कार): नृत्यांगना व पुरस्कार संबंधी बारंबार प्रश्न।
- 4 तन्दूरा/चौतारा वाद्य: वाद्य यंत्रों के प्रकारों पर आधारित तत-वाद्य प्रश्न।
पादरला (पाली)
उद्गम व जन्मस्थली
13 मंजीरे
9 दायाँ पैर, 2 कोहनी, 2 हाथ
कामड़िया पंथ
रामदेवरा मेला आकर्षण
मांगी बाई
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