राष्ट्रकूट राजवंश:
इतिहास, दंतिदुर्ग, अमोघवर्ष, त्रिपक्षीय संघर्ष, प्रशासन व कन्नड़ साहित्य के त्रिरत्न
राष्ट्रकूट राजवंश (Rashtrakuta rajvansh) मध्यकालीन भारत के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यवादी राजवंशों में से एक था। दंतिदुर्ग (753 ई.) द्वारा नींव रखने से लेकर कृष्ण प्रथम (एलोरा का एकाश्मक कैलाश मंदिर - गुफा 16), ध्रुव व गोविंद तृतीय (त्रिपक्षीय संघर्ष), अमोघवर्ष प्रथम ('कविराजमार्ग'), प्रशासनिक व्यवस्था (राष्ट्र-विषय-भुक्ति-ग्राम) तथा कन्नड़ के त्रिरत्न (पंप, पोन्न, रन्न) व प्रथम चंपू काव्य 'नलचंपू' – RAS/RPSC/UPSC परीक्षा-केंद्रित संपूर्ण अध्ययन।
स्थापना वर्ष
753 ई.
संस्थापक
दंतिदुर्ग
राजधानी: मान्यखेट (मालखेड़) | भाषा: कन्नड़ व संस्कृत
राष्ट्रकूट राजवंश के प्रमुख ऐतिहासिक विषय
भारतीय इतिहास देखेंराष्ट्रकूट राजवंश: साम्राज्य, संस्कृति, प्रशासन व साहित्य
दंतिदुर्ग से कर्क द्वितीय तक का इतिहास, त्रिपक्षीय संघर्ष, एलोरा-एलिफेंटा स्थापत्य, प्रशासनिक ढाँचा तथा कन्नड़ व संस्कृत साहित्य का स्वर्णिम काल।
1. उत्पत्ति, भाषा, राजधानी व राजचिह्न (Origin & Overview)
'राष्ट्रकूट' शब्द प्रशासनिक अधिकारियों के पदसूचक शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'किसी विषय या राष्ट्र (प्रांत) का प्रमुख' होता है। प्रारंभ में राष्ट्रकूट बादामी के चालुक्यों के अधीन सामंत अधिकारी थे।
राजधानी व विस्तार
प्रारंभिक राजधानी मयूरखिंडी (महाराष्ट्र) थी। अमोघवर्ष प्रथम ने मान्यखेट / मालखेड़ (गुलबर्गा, कर्नाटक) को राष्ट्रकूटों की स्थायी राजधानी बनाया।
भाषा व राजचिह्न
राजभाषा: कन्नड़ एवं संस्कृत।
राजचिह्न: 'गरुड़' (गरुड़ ध्वज)।
धर्म: हिन्दू (शैव व वैष्णव) एवं जैन धर्म के उदार संरक्षक।
विदेशी यात्रियों का कथन
अरब यात्री सुलेमान एवं अल-मसूदी ने राष्ट्रकूट राजाओं को 'बलहारा' (वल्लभराज) कहा तथा इन्हें विश्व के 4 महान सम्राटों (चीन, बगदाद, रोम व बलहारा) में गिनाया।
2. दंतिदुर्ग (753 – 756 ई.) – राष्ट्रकूट वंश का संस्थापक
दंतिदुर्ग (दंतिवर्मन द्वितीय) राष्ट्रकूट वंश के स्वतंत्र साम्राज्य के संस्थापक थे। इन्होंने 753 ई. में बादामी के अंतिम चालुक्य राजा कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित कर दक्कन में स्वतंत्र राष्ट्रकूट राज्य की स्थापना की।
🔥 उज्जैन में 'हिरण्यगर्भ यज्ञ'
दंतिदुर्ग ने मालवा (उज्जैन) पर अधिकार कर वहाँ प्रसिद्ध 'हिरण्यगर्भ यज्ञ' (महादान यज्ञ) करवाया। इस यज्ञ में गुर्जर-प्रतिहार राजा ने 'द्वारपाल' (प्रतिहार) की भूमिका निभाई थी।
🎖️ उपाधियाँ व निर्माण
उपाधियाँ: 'पृथ्वीवल्लभ', 'खड्गावलोक', 'महाराजाधिराज', 'परमेश्वर'।
इन्होंने एलोरा में दशावतार गुफा (गुफा सं. 15) में एक मण्डप का निर्माण करवाया था।
3. कृष्ण प्रथम (756 – 774 ई.) – एलोरा के कैलाश मंदिर का निर्माण
दंतिदुर्ग के चाचा कृष्ण प्रथम (उपाधि: 'शुभतुंग' व 'अकालवर्ष') ने बादामी के चालुक्य साम्राज्य का पूर्ण रूप से अंत कर दिया तथा वेंगी के चालुक्यों व गंग वंश को पराजित किया।
🏛️ एलोरा का एकाश्मक कैलाश मंदिर (गुफा संख्या 16) – स्थापत्य का महान आश्चर्य
- स्थान: एलोरा (औरंगाबाद / छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र)।
- एकाश्मक शैलकृत स्थापत्य (Monolithic Architecture): यह मंदिर किसी ईंट या पत्थर को जोड़कर नहीं, बल्कि एक पूरी पहाड़ी को ऊपर से नीचे की ओर (Top to Bottom) काटकर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्मक मंदिर है।
- शैली: द्रविड़ शैली में निर्मित शिव मंदिर।
- विशेषता: मंदिर के मण्डप, नंदी मण्डप, गोपुरम तथा रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाने का प्रसिद्ध मूर्तिकला दृश्य अद्भुत है।
4. कन्नौज हेतु त्रिपक्षीय संघर्ष: ध्रुव धारावर्ष एवं गोविंद तृतीय
8वीं से 10वीं शताब्दी के मध्य उत्तर भारत के व्यापारिक व रणनीतिक केंद्र कन्नौज पर अधिकार हेतु 3 शक्तियों — गुर्जर-प्रतिहार (पश्चिम), पाल (पूर्व) तथा राष्ट्रकूट (दक्षिण) के मध्य 200 वर्षों तक 'त्रिपक्षीय संघर्ष' (Tripartite Struggle) चला।
👑 ध्रुव धारावर्ष (780 – 793 ई.) – प्रथम राष्ट्रकूट शासक जिसने उत्तर भारत पर आक्रमण किया
- ध्रुव (उपाधि: 'धारावर्ष' व 'निरुपम') उत्तर भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करने वाला दक्षिण भारत का प्रथम शासक था।
- इन्होंने त्रिपक्षीय संघर्ष के प्रथम चरण में गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज तथा पाल शासक धर्मपाल दोनों को पराजित किया।
- गंगा व यमुना नदियों के प्रतीक चिह्नों को राष्ट्रकूट राजचिह्न (ध्वज) में शामिल किया।
👑 गोविंद तृतीय (793 – 814 ई.) – 'जगतुंग' व साम्राज्य का चरम विस्तार
- गोविंद तृतीय (उपाधि: 'जगतुंग', 'प्रभूतवर्ष', 'श्रीवल्लभ') ने त्रिपक्षीय संघर्ष के दूसरे चरण में गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय तथा पाल शासक धर्मपाल (व चक्रायुध) को बुरी तरह पराजित किया।
- संजन ताम्रपत्र के अनुसार गोविंद तृतीय के घोड़ों ने हिमालय के बर्फीले पानी को पिया तथा उनके हाथियों ने गंगा के पवित्र जल का पान किया। (साम्राज्य उत्तर में हिमालय से दक्षिण में रामेश्वरम् तक फैला)।
5. अमोघवर्ष प्रथम (814 – 878 ई.) – 'दक्षिण का अशोक' व साहित्य संरक्षक
अमोघवर्ष प्रथम (पिता: गोविंद तृतीय) ने 64 वर्षों तक दीर्घकालिक शासन किया। ये युद्धप्रिय होने के स्थान पर शांति, धर्म, कला व साहित्य के महान प्रेमी थे, इसलिए इन्हें 'दक्षिण भारत का अशोक' कहा जाता है।
🏛️ मान्यखेट की स्थापना व धर्म
- मान्यखेट राजधानी: इन्होंने मयूरखिंडी के स्थान पर मान्यखेट (मालखेड़) नगर बसाया और इसे राष्ट्रकूटों की स्थायी राजधानी बनाया।
- जैन धर्मानुयायी: ये प्रसिद्ध जैन आचार्य जिन्नसेन के शिष्य थे तथा जैन धर्म स्वीकार किया।
- त्याग: संजन पत्र के अनुसार राज्य में अकाल पड़ने पर महालक्ष्मी देवी को अपनी एक उंगली काट कर बलि चढ़ाई थी।
📚 अमोघवर्ष के ग्रंथ व दरबारी विद्वान
- 'कविराजमार्ग' (कन्नड़): अमोघवर्ष प्रथम द्वारा रचित कन्नड़ भाषा का प्रथम काव्यशास्त्र ग्रंथ।
- 'प्रश्नोत्तर रत्नमाला' (संस्कृत): अमोघवर्ष द्वारा रचित धर्म व दर्शन ग्रंथ।
- जिन्नसेन: 'आदिपुराण' एवं 'पार्श्वभ्युदय' ग्रंथ।
- महावीराचार्य: 'गणितसार संग्रह' (प्रसिद्ध गणितीय ग्रंथ)।
- शाकटायन: 'अमोघवृत्ति' (व्याकरण ग्रंथ)।
सुलेमान का कथन (851 ई.): अरब व्यापारी सुलेमान ने अमोघवर्ष प्रथम के शासनकाल में भारत की यात्रा की तथा अमोघवर्ष (बलहारा) की गणना विश्व के 4 सबसे शक्तिशाली राजाओं (चीन, बगदाद, रोम व राष्ट्रकूट) में की।
6. उत्तरवर्ती राष्ट्रकूट शासक (इंद्र III व कृष्ण III)
6.1 इंद्र तृतीय (914 – 929 ई.) – अल-मसूदी का आगमन
- इंद्र तृतीय ने गुर्जर-प्रतिहार शासक महिपाल प्रथम को हराकर कन्नौज को बुरी तरह लूटा व नष्ट किया।
- इन्हीं के समय बगदाद के प्रसिद्ध अरब यात्री अल-मसूदी (915–916 ई.) ने भारत यात्रा की। उसने लिखा कि "भारत में अल-बलहारा (राष्ट्रकूट राजा) से बड़ा कोई राजा नहीं है।"
6.2 कृष्ण तृतीय (939 – 967 ई.) – तक्कोलम् का युद्ध व अंतिम महान शासक
कृष्ण तृतीय राष्ट्रकूट वंश के अंतिम महान व प्रतापी शासक थे।
- तक्कोलम् का युद्ध (949 ई.): कृष्ण तृतीय ने चोल राजा परान्तक प्रथम को तक्कोलम् के प्रसिद्ध युद्ध में बुरी तरह पराजित किया और उसके युवराज राजादित्य को मार डाला।
- कांची व तंजौर पर अधिकार: इन्होंने 'कांचियुम् तंजैयुम् कोण्ड' (कांची व तंजौर को जीतने वाला) की उपाधि धारण की।
- रामेश्वरम् में विजय स्तम्भ: इन्होंने दक्षिण में रामेश्वरम् तक विजय अभियान चलाकर वहाँ विजय स्तम्भ तथा गंडमार्तण्ड मंदिर का निर्माण करवाया।
- कन्नड़ कवि पोन्न: कृष्ण तृतीय के दरबारी कवि पोन्न (कन्नड़ साहित्य का रत्न) ने 'शांतिपुराण' ग्रंथ लिखा। कृष्ण तृतीय ने इन्हें 'उभय कवी चक्रवर्ती' उपाधि दी।
6.3 राष्ट्रकूट साम्राज्य का पतन (973 ई.)
राष्ट्रकूट वंश के अंतिम शासक कर्क द्वितीय (कक्कल) थे। 973 ई. में कल्याणी के चालुक्य तैलप द्वितीय (तैलप II) ने कर्क द्वितीय को पराजित कर राष्ट्रकूट साम्राज्य का अंत किया तथा 'कल्याणी के चालुक्य वंश' की स्थापना की।
7. राष्ट्रकूट प्रशासनिक व्यवस्था एवं सामाजिक स्थिति (Rashtrakuta Administration)
राष्ट्रकूटों ने एक सुदृढ़ तथा केंद्रीकृत प्रशासनिक ढाँचा तैयार किया था। राजा साम्राज्य का सर्वोच्च अधिपति होता था। प्रशासनिक सुविधा हेतु साम्राज्य को निम्नलिखित इकाइयों में विभाजित किया गया था:
राष्ट्र (प्रांत)
अधिकारी: राष्ट्रपति
विषय (जिला)
अधिकारी: विषयपति
भुक्ति (तहसील)
अधिकारी: भोगपति (50-70 गाँव)
ग्राम (मौजा)
अधिकारी: ग्रामकूट / ग्रामपति
महिलाओं की प्रशासनिक भागीदारी (Key RAS/UPSC Point)
राष्ट्रकूट काल की सबसे अनूठी विशेषता उच्च प्रशासनिक पदों पर महिलाओं की नियुक्ति थी।
• उदा. 1: अमोघवर्ष प्रथम की पुत्री 'रेवकनिम्नडी' ने एडातोरे (Edatore) जिले के राज्यपाल/शासक के रूप में कुशलतापूर्वक शासन चलाया था।
• उदा. 2: ध्रुव धारावर्ष की पत्नी 'शीलामहादेवी' (Chalukya Princess) राज्य में राजा के समान स्वतंत्र रूप से दान व ताम्रपत्र जारी करती थीं।
राजस्व व्यवस्था व सेना
• भू-राजस्व (भाग): उपज का 1/4 से 1/6 भाग कर के रूप में लिया जाता था, जिसे 'उद्रंग' या 'भोग' कहा जाता था।
• सैन्य व्यवस्था: एक विशाल स्थाई पैदल व घुड़सवार सेना तथा विशेष हस्ती (हाथी) दल रखा जाता था। अरब व्यापारी सुलेमान ने इनकी सेना की श्रेष्ठता का उल्लेख किया है।
8. राष्ट्रकूट कालीन स्थापत्य कला: एलोरा व एलिफेंटा गुफाएँ
🏔️ एलोरा गुफाएँ (Ellora Caves – औरंगाबाद)
एलोरा में कुल 34 शैलकृत गुफाएँ हैं, जो 3 धर्मों से संबंधित हैं:
1. बौद्ध गुफाएँ: गुफा सं. 1 से 12 तक।
2. हिंदू (ब्राह्मण) गुफाएँ: गुफा सं. 13 से 29 तक। (गुफा सं. 15 = दशावतार मंदिर, गुफा सं. 16 = कैलाश मंदिर)।
3. जैन गुफाएँ: गुफा सं. 30 से 34 तक। (इंद्रसभा व जगन्नाथ सभा)।
🏝️ एलिफेंटा गुफाएँ (Elephanta Caves – धारापुरी, मुंबई)
गेटवे ऑफ इंडिया के पास समुद्र में धारापुरी द्वीप पर स्थित। पुर्तगालियों ने पाषाण हाथी की मूर्ति के कारण इसका नाम 'एलिफेंटा' रखा।
त्रिमूर्ति महेश प्रतिमा: यहाँ स्थित भगवान शिव की 23 फीट ऊँची 'त्रिमूर्ति' (सृजन, पालन व संहारक - अघोर, तत्पुरुष, वामदेव) प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है।
9. भाषा व साहित्य: कन्नड़ साहित्य के 'त्रिरत्न' एवं संस्कृत का विकास
राष्ट्रकूट काल कन्नड़ भाषा एवं साहित्य का 'स्वर्ण युग' (Golden Age) माना जाता है। राष्ट्रकूट राजाओं ने कन्नड़ तथा संस्कृत भाषा दोनों को अभूतपूर्व संरक्षण दिया।
🌟 कन्नड़ साहित्य के 'त्रिरत्न' (Three Jewels of Kannada Literature)
1. महाकवि पंप (Pampa)
कन्नड़ के पितामह
• 'विक्रमार्जुन विजय' (पंप भारत): महाभारत की कन्नड़ में प्रसिद्ध रचना।
• 'आदिपुराण': प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभदेव के जीवन पर आधारित महाकाव्य।
*(ये वेमुलावाड़ा चालुक्य राजा अरिकेसरी द्वितीय के आश्रित थे)*।
2. महाकवि पोन्न (Ponna)
उभय कवि चक्रवर्ती
• 'शांतिपुराण': 16वें जैन तीर्थंकर शांतिनाथ के जीवन पर रचित ग्रंथ।
• 'भुवनैक रामाभ्युदय': रामकथा पर आधारित काव्य।
*(इन्हें राष्ट्रकूट सम्राट कृष्ण तृतीय का संरक्षण प्राप्त था)*।
3. महाकवि रन्न (Ranna)
कवि चक्रवर्ती
• 'गदा युद्ध' (साहस भीम विजय): भीम और दुर्योधन के गदा युद्ध पर आधारित अद्भुत महाकाव्य।
• 'अजितपुराण': द्वितीय जैन तीर्थंकर अजितनाथ पर ग्रंथ।
*(राष्ट्रकूट काल के अंत व कल्याणी चालुक्य तैलप II का संरक्षण)*।
📜 संस्कृत साहित्य का विकास एवं प्रथम 'चंपू काव्य'
• त्रिविक्रम भट्ट (Trivikrama Bhatta): राष्ट्रकूट शासक इंद्र तृतीय के दरबारी कवि। इन्होंने संस्कृत साहित्य का सबसे पहला चंपू काव्य (गद्य एवं पद्य मिश्रित शैली) 'नलचंपू' (Nalachampu) तथा 'मदालसा चंपू' रचा।
• सोमदेव सूरी (Somadeva Suri): इन्होंने प्रसिद्ध जैन ग्रंथ 'यशस्तिलक चंपू' तथा राजनीति का महत्वपूर्ण ग्रंथ 'नीतिवाक्यामृत' रचा।
• महावीराचार्य: जैन गणितज्ञ जिन्होंने प्रसिद्ध गणित पुस्तक 'गणितसार संग्रह' (850 ई.) लिखी।
• हल युद्ध: इन्होंने संस्कृत व्याकरण धातुपाठ पर 'कवि रहस्य' ग्रंथ की रचना की।
10. राष्ट्रकूट प्रमुख रचनाएँ, रचयिता व विषय सारणी (Summary Table)
| ग्रंथ का नाम | रचयिता | संरक्षक राजा / विवरण |
|---|---|---|
| कविराजमार्ग | अमोघवर्ष प्रथम | कन्नड़ भाषा का प्रथम प्रामाणिक काव्यशास्त्र ग्रंथ |
| विक्रमार्जुन विजय व आदिपुराण | पंप (Pampa) | कन्नड़ त्रिरत्न (कन्नड़ महाभारत व प्रथम तीर्थंकर पुराण) |
| शांतिपुराण | पोन्न (Ponna) | कृष्ण तृतीय द्वारा 'उभय कवि चक्रवर्ती' उपाधि |
| गदा युद्ध (साहस भीम विजय) | रन्न (Ranna) | कन्नड़ त्रिरत्न (भीम-दुर्योधन युद्ध वर्णन) |
| नलचंपू (प्रथम चंपू काव्य) | त्रिविक्रम भट्ट | इंद्र तृतीय के दरबारी कवि (संस्कृत गद्य-पद्य) |
| यशस्तिलक चंपू व नीतिवाक्यामृत | सोमदेव सूरी | जैन चंपू काव्य व राजनीति शास्त्र ग्रंथ |
| प्रश्नोत्तर रत्नमाला | अमोघवर्ष प्रथम | संस्कृत दर्शन ग्रंथ |
| आदिपुराण व पार्श्वभ्युदय | जिन्नसेन (गुरु) | अमोघवर्ष प्रथम के जैन आध्यात्मिक गुरु |
| गणितसार संग्रह | महावीराचार्य | प्रसिद्ध जैन गणित ग्रंथ |
11. परीक्षा-उपयोगी रामबाण तथ्य (High-Yield Facts for RPSC/UPSC)
📌 अति-महत्वपूर्ण राजनीतिक व प्रशासनिक तथ्य
- राष्ट्रकूट वंश संस्थापक: दंतिदुर्ग (753 ई.)। स्थायी राजधानी: मान्यखेट (अमोघवर्ष प्रथम)।
- एलोरा का कैलाश मंदिर (गुफा 16): कृष्ण प्रथम द्वारा एकाश्मक (Monolithic) शैली में निर्मित।
- प्रशासनिक विभाजन: राष्ट्र $\rightarrow$ विषय $\rightarrow$ भुक्ति $\rightarrow$ ग्राम।
- प्रशासन में महिलाएँ: रेवकनिम्नडी (अमोघवर्ष प्रथम की पुत्री) ने एडातोरे जिले का प्रशासन संभाला था।
- त्रिपक्षीय संघर्ष प्रथम शासक: ध्रुव धारावर्ष (वत्सराज व धर्मपाल को हराया)।
- हिरण्यगर्भ यज्ञ: दंतिदुर्ग द्वारा उज्जैन में आयोजित (गुर्जर प्रतिहार राजा द्वारपाल बने)।
📝 साहित्य व विदेशी यात्री प्रश्न
- कन्नड़ साहित्य के 'त्रिरत्न': पंप (विक्रमार्जुन विजय), पोन्न (शांतिपुराण) तथा रन्न (गदा युद्ध)।
- संस्कृत का प्रथम चंपू काव्य: 'नलचंपू' (त्रिविक्रम भट्ट - इंद्र तृतीय के दरबारी)।
- कन्नड़ का प्रथम काव्यशास्त्र: 'कविराजमार्ग' (अमोघवर्ष प्रथम)।
- बलहारा (वल्लभराज): अरब यात्रियों (सुलेमान व अल-मसूदी) द्वारा प्रयुक्त शब्द।
- तक्कोलम् का युद्ध (949 ई.): कृष्ण तृतीय ने चोल राजा परान्तक प्रथम को हराया।
- साम्राज्य अंत (973 ई.): तैलप द्वितीय (कल्याणी के चालुक्य) ने कर्क द्वितीय को हराकर अंत किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
राष्ट्रकूट राजवंश से संबंधित महत्वपूर्ण परीक्षा प्रश्नोत्तर
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